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NFHS-6 के आंकड़ों ने खोली दिल्ली की स्वास्थ्य चुनौतियां, मोटापा घटा पर कई बीमारियां बढ़ीं।

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) 2023-24 की रिपोर्ट ने दिल्ली की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर मिश्रित तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार जहां एक ओर मोटापे के मामलों में गिरावट दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर डायबिटीज, कुपोषण और बच्चों के पोषण से जुड़ी समस्याओं में बढ़ोतरी देखने को मिली है।


दिल्ली में मोटापे में गिरावट

रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में पुरुषों में मोटापे की दर घटकर 34.8 प्रतिशत रह गई है, जो पहले NFHS-5 में 38 प्रतिशत थी। महिलाओं में भी कुछ हद तक सुधार देखा गया है और दिल्ली उन राज्यों में शामिल है जहां महिला मोटापा दर में कमी आई है।

पहली नजर में यह बदलाव सकारात्मक लग सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे सिर्फ बेहतर स्वास्थ्य नहीं, बल्कि अन्य कारण भी हो सकते हैं।


डायबिटीज के मामलों में तेज बढ़ोतरी

रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक पहलू डायबिटीज के मामलों में बढ़ोतरी है।

  • महिलाओं में डायबिटीज की दवा लेने वालों का प्रतिशत 12% से बढ़कर 19% हो गया है।
  • पुरुषों में यह आंकड़ा 14% से बढ़कर 22% तक पहुंच गया है।

यह संकेत देता है कि जीवनशैली संबंधी बीमारियों का खतरा राजधानी में बढ़ रहा है।


कुपोषण भी बढ़ा

दिल्ली में कुपोषण के मामलों में भी वृद्धि दर्ज की गई है।

  • महिलाओं में कुपोषण 10% से बढ़कर 12%
  • पुरुषों में यह 9% से बढ़कर लगभग 15% तक पहुंच गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति संतुलित आहार की कमी और बिगड़ती जीवनशैली का संकेत हो सकती है।


बच्चों के पोषण पर भी असर

रिपोर्ट में बच्चों के पोषण से जुड़े आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं।

  • जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराने की दर 51.2% से घटकर 45.1% रह गई।
  • छह महीने तक केवल स्तनपान कराने की दर 64.3% से घटकर 48.3% हो गई।
  • 6–23 महीने के बच्चों को पर्याप्त पूरक आहार देने की दर भी 16% से घटकर 11.2% रह गई।

विशेषज्ञों की राय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापा कम होना हमेशा अच्छी सेहत का संकेत नहीं होता। कई बार यह खराब पोषण, असंतुलित आहार और अन्य बीमारियों का भी परिणाम हो सकता है।


निष्कर्ष

NFHS-6 रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली में एक तरफ मोटापे की समस्या कुछ कम हुई है, लेकिन दूसरी तरफ डायबिटीज, कुपोषण और बच्चों के पोषण से जुड़ी चुनौतियां बढ़ रही हैं। यह संकेत है कि राजधानी को अब केवल वजन नहीं, बल्कि समग्र पोषण और जीवनशैली पर ध्यान देने की जरूरत है।

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