मध्य पूर्व की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कई मुस्लिम देशों से इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करने और अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होने की अपील की है। इस बयान के बाद एक बार फिर यह समझौता वैश्विक बहस का केंद्र बन गया है।
ट्रंप ने सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र, जॉर्डन, यूएई और बहरीन जैसे देशों से कहा कि वे इजरायल के साथ संबंध मजबूत करें। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि क्षेत्रीय शांति और भविष्य की कूटनीतिक योजनाओं में वही देश अहम भूमिका निभाएंगे जो इस पहल का समर्थन करेंगे।
क्या है अब्राहम अकॉर्ड?
अब्राहम अकॉर्ड कोई एक समझौता नहीं, बल्कि कई कूटनीतिक समझौतों की श्रृंखला है। इसका उद्देश्य अरब और मुस्लिम देशों के इजरायल के साथ संबंध सामान्य करना और राजनीतिक, आर्थिक तथा सुरक्षा सहयोग बढ़ाना है।
इन समझौतों की शुरुआत 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता में हुई थी। इसका नाम हजरत इब्राहिम (अब्राहम) के नाम पर रखा गया, जिन्हें इस्लाम, ईसाई और यहूदी तीनों धर्मों में सम्मानित माना जाता है।
कैसे शुरू हुआ यह समझौता?
15 सितंबर 2020 को व्हाइट हाउस में इजरायल, यूएई और बहरीन के नेताओं ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद मोरक्को और सूडान भी इसमें शामिल हुए। बाद के वर्षों में कुछ अन्य देशों ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाए।
यह समझौता इसलिए भी ऐतिहासिक माना गया क्योंकि लंबे समय तक अधिकांश अरब देशों का रुख था कि फिलिस्तीन मुद्दे के समाधान से पहले वे इजरायल को मान्यता नहीं देंगे।
इजरायल को क्या फायदा हुआ?
अब्राहम अकॉर्ड के बाद इजरायल और खाड़ी देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और निवेश में तेजी आई।
- यूएई और इजरायल के बीच व्यापार में बड़े स्तर पर बढ़ोतरी दर्ज की गई।
- दुबई और तेल अवीव के बीच सीधी उड़ानें शुरू हुईं।
- तकनीक, सुरक्षा, कृषि और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा।
इजरायल के लिए यह समझौता कूटनीतिक अलगाव खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम माना गया।
सबसे बड़ा विवाद क्या है?
इस समझौते की सबसे बड़ी आलोचना यह है कि इसमें फिलिस्तीन मुद्दे को प्राथमिकता नहीं दी गई। कई फिलिस्तीनी संगठनों और अरब समाज के एक वर्ग ने इसे अपने हितों के खिलाफ बताया। उनका मानना है कि बिना स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य के समाधान के इजरायल के साथ संबंध सामान्य करना उचित नहीं है।
गाजा संघर्ष और क्षेत्रीय तनाव के बाद यह मुद्दा और संवेदनशील हो गया है।
ट्रंप अब क्या चाहते हैं?
ट्रंप चाहते हैं कि और अधिक मुस्लिम देश अब्राहम अकॉर्ड में शामिल हों, खासकर सऊदी अरब जैसे प्रभावशाली देश। उनका मानना है कि इससे मध्य पूर्व आर्थिक और रणनीतिक रूप से मजबूत हो सकता है।
हालांकि कई देशों ने इस पर सावधानी भरा रुख अपनाया है। पाकिस्तान ने साफ संकेत दिए हैं कि वह फिलिस्तीन मुद्दे के समाधान के बिना इजरायल को मान्यता देने के पक्ष में नहीं है। वहीं सऊदी अरब भी लंबे समय से यही कहता आया है कि फिलिस्तीन राज्य के लिए स्पष्ट रास्ता तय होने के बाद ही वह आगे बढ़ेगा।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि अब्राहम अकॉर्ड ने मध्य पूर्व की राजनीति में बड़ा बदलाव जरूर लाया है, लेकिन इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष अभी भी सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या और मुस्लिम देश इस समझौते का हिस्सा बनते हैं या क्षेत्रीय तनाव इसकी राह मुश्किल बना देता है।


































