प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 25 फरवरी 2026 को इजरायल दौरे के दौरान वहां की संसद Knesset को संबोधित किया। उनके संसद में प्रवेश करते ही सांसदों ने खड़े होकर अभिवादन किया और सदन ‘मोदी-मोदी’ के नारों से गूंज उठा। इस मौके पर उन्हें “स्पीकर ऑफ कनेसट मेडल” से सम्मानित किया गया, जो कनेसट का सर्वोच्च सम्मान है।
आतंकवाद पर दो टूक
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में आतंकवाद और उसे पनाह देने वाले देशों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “इजरायल की तरह भारत भी आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करता। नागरिकों की हत्या और आतंकवाद को किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराया जा सकता।”
उन्होंने 2008 Mumbai attacks (26/11) का जिक्र करते हुए कहा कि भारत उस हमले को नहीं भूला है, जिसमें इजरायली नागरिकों की भी जान गई थी। साथ ही उन्होंने 7 अक्टूबर 2023 को Hamas द्वारा इजरायल पर किए गए हमले की निंदा करते हुए कहा, “न हम 26/11 भूलेंगे और न 7/10।”
गाजा पीस प्लान पर भारत का रुख
पीएम मोदी ने गाजा शांति पहल का समर्थन दोहराया और कहा कि इसे United Nations Security Council का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा कि भारत संवाद, शांति और स्थिरता के पक्ष में है तथा फिलिस्तीन मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता है।
व्यापार और तकनीकी सहयोग पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने बताया कि भारत और इजरायल के बीच द्विपक्षीय व्यापार में कई गुना वृद्धि हुई है, लेकिन अभी भी संभावनाएं शेष हैं।
उन्होंने एक महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर चल रही बातचीत का जिक्र किया और क्वांटम तकनीक, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात कही।
साझा सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने भारत में यहूदी समुदाय की शांतिपूर्ण उपस्थिति का जिक्र किया और कहा कि भारत में वे बिना भेदभाव के रहते आए हैं। उन्होंने हनुक्का और दिवाली, होली और पुरिम जैसे त्योहारों का उल्लेख कर दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित किया।
पीएम मोदी का यह संबोधन भारत–इजरायल संबंधों को और मजबूती देने वाला माना जा रहा है, जिसमें सुरक्षा, शांति और आर्थिक साझेदारी तीनों पर स्पष्ट संदेश दिया गया।

































