
लखनऊ। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल पर संचालित रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा लगातार जनआस्था, सेवा और सनातन संस्कृति को सशक्त करने का माध्यम बनती जा रही है। इसी क्रम में सरोजनीनगर दक्षिण-3 मंडल के ग्राम बरौली से 60वीं रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा श्रद्धा, उत्साह और भक्तिभाव के साथ सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने अयोध्या धाम पहुंचकर प्रभु श्रीरामलला, हनुमानगढ़ी सहित अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन किए और आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त की।

“यतो धर्मस्ततो जय” अर्थात जहां धर्म है, वहीं विजय है—इसी भावना को आत्मसात करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा संचालित यह सेवा अभियान केवल तीर्थ यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं, बुजुर्ग सम्मान, सामाजिक समरसता और सेवा भाव को समाज में मजबूत करने का भी एक प्रभावी माध्यम बन चुका है।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने बताया कि 27 सितंबर 2022 को शुरू हुई इस जनसेवा पहल के माध्यम से अब तक 8,650 से अधिक श्रद्धालु निःशुल्क अयोध्या धाम जाकर प्रभु श्रीरामलला के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त कर चुके हैं। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, मातृशक्ति तथा आर्थिक रूप से कमजोर श्रद्धालुओं को इस यात्रा का लाभ दिलाने का उद्देश्य रखा गया है, ताकि कोई भी व्यक्ति आर्थिक कारणों से अपने आराध्य के दर्शन से वंचित न रहे।

यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने पवित्र सरयू नदी में स्नान, हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन तथा श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्रभु श्रीरामलला के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे यात्रा मार्ग में “जय श्रीराम” के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।

श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यात्रा के दौरान जलपान, भोजन, चिकित्सा सहायता तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी उपलब्ध कराई गईं। इसके अलावा श्रद्धालुओं को रामचरितमानस, श्रीमद्भगवद्गीता तथा प्रसाद भेंट स्वरूप प्रदान किया गया, जिससे यात्रा केवल धार्मिक दर्शन तक सीमित न रहकर सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जागरूकता का भी माध्यम बनी।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा का उद्देश्य केवल श्रद्धालुओं को अयोध्या ले जाकर दर्शन कराना नहीं है, बल्कि भगवान श्रीराम के आदर्शों—मर्यादा, त्याग, सेवा, कर्तव्य, राष्ट्रधर्म और लोककल्याण—को समाज तक पहुंचाना भी है। उन्होंने कहा कि यह अभियान नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने के साथ-साथ समाज में सेवा, सद्भाव और सामाजिक समरसता की भावना को भी निरंतर मजबूत कर रहा है।
उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के चेहरों पर दिखाई देने वाला संतोष, बुजुर्गों की प्रसन्नता और प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी अटूट आस्था ही इस अभियान की सबसे बड़ी सफलता है। उनका संकल्प है कि सरोजनीनगर में रामभक्ति, सेवा, संस्कार और सामाजिक समरसता की यह पावन यात्रा भविष्य में भी निरंतर जारी रहेगी, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु प्रभु श्रीरामलला के दर्शन कर सकें और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ सकें।


































