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विरासत संग नवाचार: नैमिषारण्य में बनेगा आधुनिक पिलग्रिम इंटरप्रिटेशन सेंटर, 3.72 करोड़ की परियोजना को मंजूरी

  • ‘विकास भी, विरासत भी’ की मूल भावना को करेगा चरितार्थ, पुरानी धर्मशाला बनेगी आधुनिक इंटरप्रिटेशन सेंटर
  • नैमिषारण्य में बनेंगे एम्फीथिएटर, कैफेटेरिया और इंटरप्रिटेशन सेंटर, सुविधाओं का होगा विस्तार
  • थीम गैलरी, प्रवेश लॉबी और कोर्टयार्ड शो के साथ विकसित होगा आधुनिक सांस्कृतिक परिसर
  • पिलग्रिम इंटरप्रिटेशन सेंटर से निखरेगा नैमिषारण्य का तीर्थ अनुभव- जयवीर सिंह

लखनऊ/सीतापुर : 06 मई 2026 : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में सीतापुर स्थित पवित्र तीर्थ स्थल नैमिषारण्य को भव्यतम स्वरूप प्रदान किया जा रहा है। इसी क्रम में पौराणिकता और नवाचार को समाहित करते हुए नैमिष स्थित पुरानी धर्मशाला को आधुनिक ‘पिलग्रिम इंटरप्रिटेशन सेंटर’ के रूप में विकसित किया जाएगा। खास बात ये है कि विरासत भवन की मूल संरचना को सुरक्षित रखते हुए उसे आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। प्रदेश सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 3.72 करोड़ रुपए की मंजूरी देते हुए, पहली क़िस्त के रूप में 2.98 करोड़ रुपए जारी किए हैं। 

उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘नैमिषारण्य के इस इंटरप्रिटेशन सेंटर में श्रद्धालुओं को स्थानीय इतिहास, धार्मिक महत्व और सांस्कृतिक विरासत की विस्तृत जानकारी मिलेगी। इसके लिए भवन के भीतर अलग-अलग थीम पर आधारित गैलरियां बनाई जाएंगी, जिनमें कॉस्मिक ऑर्डर, जीवन का विकास, सभ्यता का उदय, महाकाव्य और ज्ञानोदय जैसे विषयों को रोचक प्रस्तुत होगी।’

पिलग्रिम इंटरप्रिटेशन सेंटर में क्या होगा?
परियोजना के तहत पूरे परिसर का समग्र विकास किया जाएगा, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। योजना अंतर्गत आधुनिक प्रवेश लॉबी, आकर्षक एम्फीथिएटर, सुव्यवस्थित कैफेटेरिया, मूर्तिकला मार्ग और स्वच्छ शौचालय ब्लॉक विकसित किए जाएंगे। इसके साथ ही मौजूदा भवन का नवीनीकरण और नई इमारत का निर्माण किया जाएगा, जिसे इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि पूरे क्षेत्र का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक वातावरण और अधिक सजीव व आकर्षक बन सके।

स्थानीय स्थापत्य की झलक
भवन के स्वरूप को पारंपरिकता और आधुनिकता के संतुलन के साथ विकसित किया जा रहा है। बाहरी हिस्से को खुली ईंटों की आकर्षक फिनिशिंग देकर इसे स्थानीय स्थापत्य की झलक प्रदान की जाएगी, वहीं अंदरूनी गलियारों को थीम आधारित पेंटिंग्स से सजाया जाएगा, जो धार्मिक और सांस्कृतिक कथाओं को सजीव रूप में प्रस्तुत करेंगी। इससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं/पर्यटकों को समृद्ध सांस्कृतिक अनुभव प्राप्त होगा। 

विकास भी, विरासत भी, के साथ बढ़ रहे  
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘इस पहल से नैमिषारण्य क्षेत्र में पर्यटन को नई गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित इंटरप्रिटेशन सेंटर तीर्थ यात्रियों को आधुनिक और समृद्ध अनुभव प्रदान करेगा, जिससे उनकी यात्रा सहज और ज्ञानवर्धक बनेगी। स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। मंत्री ने इसे ‘विकास भी, विरासत भी’ के मूल मंत्र के साथ प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को सशक्त करने और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल बताया।’

पर्यटकों को मिलेगी समग्र जानकारी
अपर मुख्य सचिव, पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि ‘नैमिषारण्य जैसे पवित्र तीर्थ स्थल का समग्र विकास प्रदेश सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि यहां श्रद्धालुओं को आधुनिक और सुगम सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ इसकी समृद्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रस्तावित इंटरप्रिटेशन सेंटर के जरिए श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक ही स्थान पर इस पावन स्थल के धार्मिक महत्व, परंपराओं और इतिहास की व्यापक जानकारी मिल सकेगी। इससे न केवल धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी, बल्कि क्षेत्र में सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्राप्त होगी।’

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