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पत्रकारों की पेंशन और स्वास्थ्य सुरक्षा का मुद्दा फिर गरमाया, CM योगी से मिले पत्रकार संगठन : संपादकों व उपसंपादकों को भी पेंशन के दायरे में लाने की मांग, विधायक डॉ राजेश्वर सिंह ने भी पेंशन के साथ ही पत्रकारों के निधन के बाद जीवनसाथी को भी पेंशन की मांग को लिखा था पत्र

गोरखपुर/लखनऊ। प्रदेश के पत्रकारों की सामाजिक सुरक्षा, सम्मानजनक जीवन और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। इसी क्रम में विभिन्न पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर पत्रकारों की पेंशन, आयुष्मान योजना का लाभ और अन्य सुविधाओं से संबंधित मांग पत्र सौंपा। मुख्यमंत्री ने पत्रकारों एवं उनके परिवारों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के प्रति भरोसा दिलाया और अन्य मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया।

यूपी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन (लखनऊ), मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति, गोरखपुर और गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब की ओर से संयुक्त रूप से सौंपे गए मांग पत्र में प्रदेश के पत्रकारों के लिए पेंशन व्यवस्था को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाने का अनुरोध किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि राज्य सरकार ने इस दिशा में शुरुआती कदम उठाए हैं, जो सराहनीय हैं। अब आवश्यकता है कि पात्रता के दायरे का विस्तार करते हुए अधिक से अधिक पत्रकारों को इसका लाभ दिया जाए।

संपादकों और उपसंपादकों को भी मिले पेंशन का लाभ

पत्रकार संगठनों ने मांग की कि पेंशन योजना में संपादकों और उपसंपादकों को भी शामिल किया जाए। ऐसे पत्रकारों को भी योजना का लाभ देने पर विचार किया जाए, जिनका सेवाकाल में एक दिन भी भविष्य निधि (पीएफ) कटा हो।

इसके साथ ही पत्रकारों की मान्यता के लिए निर्धारित 15 वर्ष की अवधि को घटाकर 10 वर्ष करने की मांग की गई। संगठनों का कहना है कि मान्यता की अवधि लगातार 10 वर्ष होने की अनिवार्यता के स्थान पर कुल मान्यता अवधि को आधार बनाया जाना चाहिए, ताकि लंबे समय तक पत्रकारिता करने वाले अधिकाधिक पत्रकार योजना के पात्र बन सकें।

पत्रकार के निधन के बाद जीवनसाथी को भी मिले पेंशन

मांग पत्र में एक महत्वपूर्ण मांग यह भी उठाई गई कि पेंशन प्राप्त कर रहे पत्रकार के निधन के बाद उनके पति या पत्नी को भी पेंशन का लाभ दिया जाए। इसके लिए उत्तराखंड और राजस्थान जैसे राज्यों में लागू व्यवस्था का हवाला देते हुए उत्तर प्रदेश में भी पेंशन की 50 प्रतिशत राशि जीवनसाथी को दिए जाने का प्रावधान लागू करने का अनुरोध किया गया।

पत्रकार संगठनों ने विभिन्न राज्यों में पत्रकारों को दी जा रही पेंशन का उल्लेख करते हुए उत्तर प्रदेश में भी सम्मानजनक पेंशन राशि निर्धारित करने की मांग की। मांग पत्र के अनुसार, उत्तराखंड, बिहार, राजस्थान और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में पत्रकारों को न्यूनतम 8,000 रुपये से लेकर अधिकतम 15,000 रुपये प्रतिमाह तक पेंशन दिए जाने की व्यवस्था है।

पत्रकारों और उनके आश्रितों को आयुष्मान योजना से जोड़ने की मांग

पत्रकार संगठनों ने स्वास्थ्य सुरक्षा को भी प्रमुख मुद्दा बनाया। उन्होंने मांग की कि प्रदेश के सभी पात्र पत्रकारों और उनके आश्रितों को आयुष्मान योजना का लाभ दिया जाए, जिससे गंभीर बीमारियों और महंगे इलाज की स्थिति में पत्रकार परिवारों को आर्थिक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य सुरक्षा के संबंध में भरोसा दिया। साथ ही, पत्रकार संगठनों की अन्य मांगों पर भी सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया।

विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह भी उठा चुके हैं मुद्दा

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर वरिष्ठ पत्रकारों को पेंशन देने और पत्रकारों के निधन के बाद उनकी विधवाओं को भी पेंशन की सुविधा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। ऐसे में पत्रकार संगठनों की ओर से मुख्यमंत्री के समक्ष दोबारा इन मांगों को उठाए जाने से पत्रकारों की सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर प्रमुखता से सामने आया है।

प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल

मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में यूपी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन, लखनऊ के अध्यक्ष शिव शरण सिंह एवं उपाध्यक्ष आशीष कुमार सिंह, मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति, गोरखपुर के अध्यक्ष अरविन्द कुमार राय, गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब के अध्यक्ष ओंकार धर द्विवेदी तथा पूर्व उपाध्यक्ष अजीत यादव शामिल रहे।

पत्रकार संगठनों को उम्मीद है कि सरकार इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेकर प्रदेश के पत्रकारों और उनके परिवारों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाएगी।

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