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डॉ.राजेश्वर सिंह का संकल्प: हर बच्चे को मिले सपने देखने और उन्हें साकार करने का अवसर ; सुदूर गांवों के विद्यालयों से लेकर डिजिटल कक्षाओं तक, बच्चों का भविष्य संवार रहे सरोजनीनगर विधायक

लखनऊ | 1 सितंबर 2026। सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के लिए शिक्षा केवल जनप्रतिनिधि के दायित्वों का हिस्सा नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य को सशक्त बनाने का एक दीर्घकालिक संकल्प है। उनका निरंतर प्रयास है कि गरीबी, संसाधनों की कमी या भौगोलिक दूरी किसी भी बच्चे की प्रतिभा और उसके सपनों के मार्ग में बाधा न बन सके।

कॉलेज के कार्यक्रम हों, ध्वजारोहण समारोह हो अथवा किसी शोकाकुल परिवार से मिलने के लिए सुदूर गांव की यात्रा—डॉ. राजेश्वर सिंह हर अवसर को शिक्षा और शिक्षण संस्थानों को सशक्त बनाने के माध्यम के रूप में देखते हैं। यही कारण है कि उनके प्रयास शहर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों से लेकर सरोजनीनगर के दूरस्थ गांवों में संचालित छोटे विद्यालयों तक दिखाई देते हैं।

अवध गर्ल्स डिग्री कॉलेज की कंप्यूटर लैब के लिए ₹10 लाख की घोषणा

31 अगस्त को अवध गर्ल्स डिग्री कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम के दौरान डॉ. राजेश्वर सिंह ने छात्राओं की डिजिटल शिक्षा को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कॉलेज की कंप्यूटर लैब के आधुनिकीकरण हेतु सीएसआर के माध्यम से ₹10 लाख की सहायता प्रदान करने की घोषणा की।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल कौशल और वित्तीय साक्षरता से सशक्त बनाना आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण की अनिवार्य शर्त है। आधुनिक समय में डिजिटल तकनीक शिक्षा और रोजगार दोनों का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है, ऐसे में छात्राओं को बेहतर तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराना भविष्य के लिए निवेश है।

प्रियंका सिंह की स्मृति में विद्यालय के लिए ₹10 लाख की सहायता

डॉ. राजेश्वर सिंह की शिक्षा के प्रति संवेदनशीलता लोगों के कठिन समय में भी दिखाई देती है। स्वर्गीय प्रियंका सिंह के असामयिक निधन की जानकारी मिलने पर उन्होंने उनके पति एवं पत्रकार प्रभात सिंह से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त की।

इस दौरान डॉ. सिंह को जानकारी मिली कि स्वर्गीय प्रियंका सिंह गांव के बच्चों को शिक्षित करने के उद्देश्य से कक्षा पांच तक एक विद्यालय संचालित करती थीं। शिक्षा के प्रति उनके समर्पण और सेवा भावना को आगे बढ़ाने के लिए डॉ. राजेश्वर सिंह ने उनकी स्मृति में विद्यालय में अतिरिक्त कक्षों के निर्माण हेतु तत्काल ₹10 लाख की सहायता देने की घोषणा की।

इस पहल से न केवल विद्यालय की आधारभूत सुविधाएं मजबूत होंगी, बल्कि शिक्षा के प्रति स्वर्गीय प्रियंका सिंह का संकल्प भी आने वाली पीढ़ियों तक जीवित रहेगा।

सुदूर गांव के छोटे विद्यालय को भी मिला नया संबल

इसी प्रकार सरोजनीनगर के एक अत्यंत सुदूर गांव में राम रईस रावत के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे डॉ. राजेश्वर सिंह की दृष्टि वहां संचालित एक छोटे विद्यालय पर पड़ी।

यह विद्यालय सीमित संसाधनों और झोपड़ियों से शुरू होकर धीरे-धीरे एक छोटे भवन तक पहुंचा था। डॉ. सिंह को जानकारी मिली कि श्री रावत के पुत्र श्रवण कुमार रावत पूरे समर्पण के साथ विद्यालय का संचालन कर रहे हैं और गांव के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।

विद्यालय की स्थिति और बच्चों के भविष्य को देखते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के लिए विधायक निधि से तत्काल ₹10 लाख देने की घोषणा की। यह पहल उन दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों के लिए नई संभावनाएं लेकर आएगी, जहां बेहतर शैक्षणिक संसाधनों तक पहुंच आज भी एक बड़ी चुनौती है।

मेधावी बच्चों को प्रोत्साहन देने पर विशेष जोर

डॉ. राजेश्वर सिंह का मानना है कि सही समय पर मिला प्रोत्साहन किसी बच्चे के पूरे जीवन की दिशा बदल सकता है। यही सोच उनके विभिन्न शैक्षिक और सामाजिक कार्यक्रमों में दिखाई देती है।

एक ध्वजारोहण कार्यक्रम के दौरान उन्होंने गांव के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित कराया और छह प्रतिभाशाली बच्चों को साइकिलें प्रदान कीं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को आगे की शिक्षा के लिए प्रेरित करना और उनकी उपलब्धियों को समाज के सामने सम्मान देना था।

वहीं, के.आर. मंगलम स्कूल के विद्यार्थियों के साथ संवाद के दौरान एक छात्रा ने डॉ. सिंह को बताया कि उसने 85 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं और वह भविष्य में नीट की तैयारी करना चाहती है। छात्रा के लक्ष्य और प्रतिभा को देखते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने उसी क्षण उसे लैपटॉप उपहार में प्रदान किया।

करीब 2,000 मेधावी विद्यार्थी हो चुके हैं सम्मानित

ये पहल केवल व्यक्तिगत स्तर की सहायता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में चल रहे व्यापक शैक्षिक अभियान का हिस्सा हैं।

अब तक करीब 2,000 मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप, कंप्यूटर और साइकिल प्रदान कर सम्मानित एवं प्रोत्साहित किया जा चुका है। इन प्रयासों का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनमें आगे बढ़ने और बड़े लक्ष्य निर्धारित करने का आत्मविश्वास पैदा करना है।

इसके अतिरिक्त, क्षेत्र के 70 से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित कर हजारों बच्चों को आधुनिक और तकनीक आधारित शिक्षा से जोड़ा गया है।

डिजिटल शिक्षा के विस्तार से विशेष रूप से उन विद्यार्थियों को लाभ मिल रहा है, जिनके लिए निजी संसाधनों के माध्यम से आधुनिक तकनीक तक पहुंच आसान नहीं थी।

विद्यालय पीढ़ियों का निर्माण करते हैं- डॉ. राजेश्वर सिंह

शिक्षा को अपनी प्राथमिकताओं में सर्वोच्च स्थान देने के पीछे की सोच स्पष्ट करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा,

“सड़कें कुछ वर्षों के लिए बनती हैं, लेकिन विद्यालय पीढ़ियों का निर्माण करते हैं और राष्ट्र की दिशा बदलते हैं। सड़कें स्थानों को जोड़ती हैं, जबकि शिक्षा बच्चों को अवसरों से और देश को उसके उज्ज्वल भविष्य से जोड़ती है। इसीलिए मेरी प्राथमिकताएं बिल्कुल स्पष्ट हैं- अधिकतम संभव संसाधन विद्यालयों, डिजिटल शिक्षा और बच्चों के भविष्य पर खर्च किए जाने चाहिए।”

उन्होंने कहा कि शिक्षा पर किया गया निवेश वास्तव में देश के भविष्य पर किया गया निवेश है।

“हमारे द्वारा निर्मित प्रत्येक कक्षा, उपलब्ध कराया गया प्रत्येक कंप्यूटर और प्रोत्साहित किया गया प्रत्येक मेधावी बच्चा भारत के भविष्य में किया गया निवेश है। मेरा संकल्प है कि संसाधनों के अभाव में किसी भी प्रतिभाशाली बच्चे का सपना अधूरा न रहे।”

हर बच्चे तक अवसर पहुंचाने का संकल्प

डॉ. राजेश्वर सिंह का ध्येय स्पष्ट है कि शहर के प्रतिष्ठित कॉलेज से लेकर सरोजनीनगर के सबसे सुदूर गांव में संचालित छोटे विद्यालय तक, प्रत्येक बच्चे को सीखने, आगे बढ़ने और अपने सपनों को साकार करने का समान अवसर मिलना चाहिए।

उनकी शैक्षिक पहलों का केंद्र केवल भवन निर्माण या संसाधनों का वितरण नहीं है, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जिसमें प्रतिभा को संसाधनों की कमी के कारण पीछे न रहना पड़े।

हर विद्यालय सशक्त बने, हर प्रतिभा को प्रोत्साहन मिले और हर बच्चे को अपने सपनों को साकार करने का अवसर प्राप्त हो- इसी संकल्प के साथ डॉ. राजेश्वर सिंह सरोजनीनगर में शिक्षा और डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं।

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