ऑपरेशन सिंदूर पर बनी नई डॉक्यूमेंट्री को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। डिस्कवरी की डॉक्यूसीरीज ‘Declassified: Operation Sindoor’ में भारतीय सैन्य अधिकारियों के इंटरव्यू और ऑपरेशन से जुड़ी घटनाओं को दिखाए जाने के बाद पाकिस्तान की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है।
पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ ने डॉक्यूमेंट्री की प्रस्तुति और उसमें बताए गए घटनाक्रम पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉक्यूमेंट्री में चुनिंदा इंटरव्यू, भावनात्मक घटनाओं और सिनेमाई प्रस्तुति के जरिए ऑपरेशन की एकतरफा तस्वीर पेश की गई है।
आधी रात को जारी किया गया बयान
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने मंगलवार देर रात सोशल मीडिया पर लंबा बयान जारी किया। रिपोर्टों के मुताबिक, यह बयान रात करीब 2 बजे सामने आया।
अहमद शरीफ ने डॉक्यूमेंट्री को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि इसमें गंभीर घटनाओं को मनोरंजक और भावनात्मक तरीके से पेश किया गया है। उनका कहना था कि किसी सैन्य अभियान का मूल्यांकन फिल्मी प्रस्तुति या चुनिंदा बातचीत के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।
क्या है ‘Declassified: Operation Sindoor’?
डिस्कवरी की डॉक्यूसीरीज ‘Declassified: Operation Sindoor’ का प्रीमियर 15 अगस्त को हुआ। इसमें ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े घटनाक्रम के साथ भारतीय सैन्य अधिकारियों के इंटरव्यू शामिल किए गए हैं।
डॉक्यूमेंट्री में ऑपरेशन की योजना, कार्रवाई और उससे जुड़े घटनाक्रम को समझाने की कोशिश की गई है। इसी प्रस्तुति को लेकर पाकिस्तान की ओर से सवाल उठाए गए हैं।
पहलगाम हमले के बाद शुरू हुआ था ऑपरेशन सिंदूर
ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत भारत ने 7 मई 2025 को की थी। इससे पहले 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के बैसरन क्षेत्र में आतंकवादी हमला हुआ था। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी।
हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाते हुए सैन्य कार्रवाई की थी।
भारत ने इसे आतंकवाद के खिलाफ जवाबी कार्रवाई के रूप में पेश किया था, जबकि पाकिस्तान ने भारत की सैन्य कार्रवाई पर अलग रुख अपनाया था।
पाकिस्तान ने फिर उठाया ‘मरका-ए-हक’ का मुद्दा
अहमद शरीफ ने अपने बयान में पाकिस्तान की ओर से इस्तेमाल किए गए नाम ‘मरका-ए-हक’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि ऑपरेशन के दौरान हुई घटनाओं और उसके परिणामों को भारतीय डॉक्यूमेंट्री में सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया है।
पाकिस्तानी पक्ष का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए सैन्य रिकॉर्ड, उस समय की घटनाओं और दोनों देशों के बीच हुई बातचीत को आधार बनाया जाना चाहिए।
भारत पर सैन्य कार्रवाई को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का आरोप
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि डॉक्यूमेंट्री में भारत की सैन्य कार्रवाई को बड़ी सफलता के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि सिनेमाई दृश्यों और भावनात्मक कहानी के जरिए किसी सैन्य अभियान के वास्तविक परिणामों को नहीं बदला जा सकता।
उन्होंने ऑपरेशन के दौरान मिसाइल, ड्रोन और हवाई गतिविधियों का जिक्र करते हुए दावा किया कि इन घटनाओं की अलग-अलग व्याख्या की जा सकती है। पाकिस्तान का कहना है कि इन्हें उसकी पूरी सैन्य हार के तौर पर पेश करना सही नहीं है।
इन दावों पर भारत की ओर से अलग-अलग आधिकारिक प्रतिक्रियाएं और ऑपरेशन से संबंधित अपने तथ्य पहले सामने रखे जा चुके हैं।
पाकिस्तान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
अपने बयान के अंत में अहमद शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान क्षेत्र में शांति और स्थिरता का समर्थन करता है। हालांकि, उन्होंने साथ ही चेतावनी दी कि यदि भविष्य में पाकिस्तान के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई की जाती है तो उसकी सेना जवाब देने के लिए तैयार है।
इस बयान के बाद ऑपरेशन सिंदूर को लेकर दोनों देशों के बीच पुरानी बयानबाजी एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
डॉक्यूमेंट्री के बाद क्यों बढ़ी हलचल?
ऑपरेशन सिंदूर भारत और पाकिस्तान के बीच हाल के वर्षों के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य घटनाक्रमों में से एक रहा है। ऐसे में इस पर बनी डॉक्यूमेंट्री में भारतीय सैन्य अधिकारियों के प्रत्यक्ष अनुभव और ऑपरेशन से जुड़े घटनाक्रम दिखाए जाने के बाद पाकिस्तान की प्रतिक्रिया सामने आना स्वाभाविक रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।
फिलहाल दोनों देशों की ओर से ऑपरेशन के परिणाम और उसके दौरान हुए घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग दावे किए जाते रहे हैं। ऐसे में डॉक्यूमेंट्री में दिखाई गई बातों और पाकिस्तान की आपत्तियों को उनके-अपने पक्ष के रूप में देखना जरूरी है। वास्तविक घटनाओं का स्वतंत्र आकलन उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड और विश्वसनीय स्वतंत्र स्रोतों के आधार पर ही किया जा सकता है।


































