हर साल 13 अगस्त को विश्व अंगदान दिवस मनाया जाता है. इस दिन लोगों को ऑर्गन डोनेशन के महत्व के बारे में जानकारी देने और जरूरतमंद मरीजों के लिए अंगदान को प्रोत्साहित करने की कोशिश की जाती है.
भारत समेत दुनिया के कई देशों में ऐसे मरीजों की संख्या काफी ज्यादा है, जिन्हें किडनी, लिवर, हृदय या दूसरे अंगों के ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है. किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके उपयुक्त अंग और ऊतक दूसरे मरीजों के इलाज में इस्तेमाल किए जा सकते हैं. हालांकि, अंगदान के लिए मेडिकल जांच और निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी होता है.
कौन-कौन से अंग दान किए जा सकते हैं?
अंगदान में कई महत्वपूर्ण अंग शामिल हो सकते हैं. हालांकि, किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद वास्तव में कौन-सा अंग ट्रांसप्लांट के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, यह उसकी मेडिकल स्थिति और अंग की गुणवत्ता पर निर्भर करता है.
किडनी
किडनी सबसे ज्यादा ट्रांसप्लांट किए जाने वाले अंगों में शामिल है. मृत दाता की दोनों किडनी जरूरत के मुताबिक अलग-अलग मरीजों के लिए इस्तेमाल की जा सकती हैं.
जीवित व्यक्ति भी मेडिकल जांच और निर्धारित नियमों के तहत एक किडनी दान कर सकता है. ऐसा करने से पहले दाता की सेहत और भविष्य में उसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव का विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है.
लिवर
लिवर की खासियत यह है कि इसका कुछ हिस्सा जीवित दाता से लिया जा सकता है. लिवर का बचा हुआ हिस्सा समय के साथ बढ़ने की क्षमता रखता है.
मृत व्यक्ति से भी लिवर दान किया जा सकता है. किस मरीज के लिए अंग उपयुक्त होगा, यह मेडिकल जांच के बाद निर्धारित किया जाता है.
हृदय
मृत दाता का स्वस्थ हृदय गंभीर हृदय रोग से पीड़ित मरीज के ट्रांसप्लांट में इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके लिए दाता के हृदय की स्थिति और दूसरे मेडिकल मानकों की जांच की जाती है.
फेफड़े
मृत दाता से एक या दोनों फेफड़ों का इस्तेमाल प्रत्यारोपण के लिए किया जा सकता है. कुछ विशेष मेडिकल परिस्थितियों में जीवित दाता से फेफड़े के हिस्से का दान भी संभव हो सकता है.
अग्न्याशय
पैंक्रियाज यानी अग्न्याशय भी ट्रांसप्लांट के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अंगों में शामिल है. कुछ विशेष परिस्थितियों में जीवित दाता से इसके हिस्से का दान किया जा सकता है.
छोटी आंत
कुछ मरीजों में छोटी आंत के ट्रांसप्लांट की आवश्यकता पड़ सकती है. इसलिए उपयुक्त परिस्थितियों में आंत का दान भी ऑर्गन डोनेशन का हिस्सा हो सकता है.
सिर्फ अंग ही नहीं, इन टिश्यू का भी हो सकता है दान
अंगदान के अलावा कई प्रकार के टिश्यू भी जरूरतमंद मरीजों के इलाज में काम आ सकते हैं. इनमें शामिल हैं:
- कॉर्निया
- त्वचा
- हड्डियां
- हार्ट वाल्व
- रक्त वाहिकाएं
- टेंडन
- कुछ प्रकार की नसें
उदाहरण के लिए, कॉर्निया ट्रांसप्लांट से कुछ मरीजों की दृष्टि सुधारने में मदद मिल सकती है. वहीं, डोनेट की गई त्वचा का इस्तेमाल गंभीर जलने या बड़े घाव वाले मरीजों के उपचार में किया जा सकता है.
जीवित रहते कौन से अंग दान किए जा सकते हैं?
जीवित व्यक्ति सभी अंग दान नहीं कर सकता. कुछ अंग या उनके हिस्से ही निर्धारित मेडिकल परिस्थितियों में दान किए जा सकते हैं.
आमतौर पर जीवित दाता एक किडनी या लिवर का एक हिस्सा दान कर सकता है. कुछ विशेष मामलों में अग्न्याशय के हिस्से और कुछ अन्य अंगों के हिस्से का दान भी संभव हो सकता है.
हालांकि, जीवित अंगदान के लिए दाता की पूरी मेडिकल जांच के साथ-साथ लागू कानूनी और नैतिक नियमों का पालन किया जाता है.
क्या हर उम्र का व्यक्ति अंगदान कर सकता है?
अंगदान के लिए केवल उम्र ही निर्णायक कारक नहीं होती. किसी व्यक्ति के अंग दान के योग्य हैं या नहीं, यह उसकी स्वास्थ्य स्थिति, मृत्यु के कारण, अंगों की स्थिति और मेडिकल जांच जैसे कई पहलुओं पर निर्भर करता है.
मृत्यु के बाद डॉक्टर और संबंधित मेडिकल टीम यह तय करती है कि कौन-से अंग या टिश्यू ट्रांसप्लांट के लिए सुरक्षित और उपयुक्त हैं.
अंगदान की प्रक्रिया कैसे होती है?
अंगदान की प्रक्रिया सामान्य दान से अलग होती है और इसमें निर्धारित मेडिकल तथा कानूनी नियम लागू होते हैं. व्यक्ति द्वारा अंगदान की इच्छा व्यक्त करने के बाद भी मृत्यु के समय मेडिकल टीम अंगों की उपयुक्तता का मूल्यांकन करती है.
जीवित अंगदान में दाता की सहमति, स्वास्थ्य जांच और लागू कानूनी मंजूरी महत्वपूर्ण होती है. वहीं, मृतक से अंगदान के मामले में मृत्यु की कानूनी/चिकित्सकीय पुष्टि और निर्धारित प्रक्रिया के बाद ही अंगों को प्रत्यारोपण के लिए लिया जाता है.
ध्यान रखें: अंगदान से जुड़े नियम और पात्रता परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकती है. इसलिए अंगदान का निर्णय लेने से पहले अधिकृत ट्रांसप्लांट सेंटर या संबंधित सरकारी संस्था से आधिकारिक जानकारी लेना जरूरी है.


































