
- डॉ. राजेश्वर सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अखिलेश यादव पर साधा निशाना।
- सपा के “रामायण सीजन” और बढ़ती धार्मिक सक्रियता पर कसा तंज।
- कहा- “राम आस्था हैं, चुनावी रीचार्ज पैक नहीं।”
- “भक्तिभाव कैमरे के सामने नहीं, चरित्र में दिखना चाहिए।”
- सपा की ओर से खबर लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की हालिया धार्मिक गतिविधियों और भगवान श्रीराम से जुड़े बयानों को लेकर सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी की बदलती राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाए और इसे चुनावी राजनीति से जोड़कर देखा।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने पोस्ट में लिखा कि समाजवादी पार्टी का नया “रामायण सीजन” देखकर ऐसा लगता है कि चुनावी कैलेंडर के साथ अब भक्ति का कैलेंडर भी अपडेट हो गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव ने शायद अपने पूरे राजनीतिक जीवन में जितनी बार प्रभु श्रीराम का नाम नहीं लिया होगा, उससे अधिक बार पिछले एक महीने में उनका उल्लेख किया है।
उन्होंने आगे लिखा कि लगता है किसी ने अखिलेश यादव को समझा दिया है कि उत्तर प्रदेश में बिना “जय श्रीराम” बोले राजनीति की गाड़ी आगे नहीं बढ़ती। डॉ. राजेश्वर सिंह ने आरोप लगाया कि जो लोग पहले राम मंदिर पर चुप्पी साधते थे, रामभक्तों पर टिप्पणी करते थे और अयोध्या के विकास पर सवाल उठाते थे, आज उनके हर दूसरे बयान में राम, हर तीसरे भाषण में अयोध्या और हर चौथे ट्वीट में आस्था दिखाई दे रही है।
अपने पोस्ट में उन्होंने प्रभु श्रीराम की महिमा का उल्लेख करते हुए लिखा कि श्रीराम की कृपा ऐसी है कि वह वनवासियों को ही नहीं, बल्कि “राजनीतिक वनवास” में पड़े लोगों को भी रास्ता दिखा देती है।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने अखिलेश यादव से अपील करते हुए कहा कि राम-नाम को चुनावी “रीचार्ज पैक” न बनाया जाए। उन्होंने लिखा कि “राम आस्था हैं, ट्रेंडिंग टॉपिक नहीं। राम मर्यादा हैं, राजनीतिक मजबूरी नहीं।”
पोस्ट के अंत में उन्होंने लिखा, “देर आए, दुरुस्त आए… पर भक्तिभाव कैमरे के सामने नहीं, चरित्र में दिखना चाहिए।”
हालांकि, समाजवादी पार्टी की ओर से डॉ. राजेश्वर सिंह के इस बयान पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक जानकार इसे आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा और सपा के बीच तेज होती बयानबाजी का हिस्सा मान रहे हैं।


































