संयुक्त राष्ट्र से जुड़े एक स्वतंत्र जांच आयोग की नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गाजा में जारी सैन्य अभियानों के दौरान बच्चों पर पड़ने वाला प्रभाव बेहद गंभीर बना हुआ है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि सैन्य कार्रवाई के कारण बड़ी संख्या में फिलिस्तीनी नागरिक, खासकर बच्चे, प्रभावित हुए हैं और इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के संदर्भ में गंभीर चिंता का विषय बताया गया है।
रिपोर्ट में फिलिस्तीनी स्वास्थ्य अधिकारियों के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया कि पिछले कई महीनों के दौरान हुए हमलों में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जिनमें बच्चों की हिस्सेदारी भी उल्लेखनीय बताई गई है। आयोग का कहना है कि बच्चों पर पड़ रहे असर और नागरिक क्षेत्रों में हो रही क्षति की विस्तृत जांच की जरूरत है।
यह रिपोर्ट पहले प्रकाशित उन अंतरराष्ट्रीय निष्कर्षों के बाद सामने आई है जिनमें गाजा संघर्ष के दौरान संभावित अंतरराष्ट्रीय कानून उल्लंघन की जांच की मांग की गई थी। इसी संदर्भ में इजरायल के कुछ शीर्ष अधिकारियों, जिनमें प्रधानमंत्री भी शामिल हैं, के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी और राजनीतिक बहस जारी है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि संघर्ष विराम के बाद भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो सके और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल बने हुए हैं। आयोग के अनुसार, युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में नागरिकों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत प्राथमिकता होनी चाहिए।
हालांकि, इजरायल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। इजरायली पक्ष का कहना है कि उसकी सैन्य कार्रवाई सुरक्षा कारणों और हमास की गतिविधियों के जवाब में की जा रही है। साथ ही, उसने संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।
इजरायल का यह भी कहना है कि संघर्ष जारी रहने और सुरक्षा चिंताओं के कारण गाजा में कुछ प्रतिबंध लागू किए गए हैं। दूसरी ओर, मानवीय संगठनों का कहना है कि इन परिस्थितियों का असर आम नागरिकों के जीवन और पुनर्निर्माण प्रयासों पर पड़ रहा है।
गाजा की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है और आने वाले समय में जांच, कूटनीतिक प्रयासों और मानवीय सहायता को लेकर चर्चा तेज रहने की संभावना है।


































