Divyenndu Sharma, जिन्हें Mirzapur में ‘मुन्ना भैया’ के किरदार से खास पहचान मिली, इन दिनों मीम कल्चर को लेकर अपने विचारों की वजह से चर्चा में हैं। उन्होंने मीम क्रिएटर्स की जमकर तारीफ की और उन्हें बेहद क्रिएटिव बताया।
दिव्येंदु का मानना है कि मीम बनाने वाले लोग कहानी को नए और दिलचस्प तरीके से पेश करने में माहिर होते हैं। उन्होंने कहा कि जब दर्शक किसी किरदार को इतना पसंद करते हैं कि उसे मीम्स के जरिए अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना लेते हैं, तो यह किसी कलाकार के लिए खास अनुभव होता है।
उन्होंने यह भी कहा कि मीम्स भले ही मजाकिया अंदाज में बनाए जाते हों, लेकिन उनमें रचनात्मकता साफ झलकती है। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी भी किरदार या कहानी को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना ठीक नहीं, क्योंकि इससे उसके मूल अर्थ पर असर पड़ सकता है।
दिव्येंदु का मानना है कि मीम क्रिएटर्स की सोच काफी अलग और प्रभावशाली होती है। उनके अनुसार, ऐसे लोगों को फिल्म इंडस्ट्री में अवसर मिलना चाहिए, खासकर लेखन जैसे क्षेत्रों में, क्योंकि वे अलग-अलग चीजों को जोड़कर दिलचस्प कहानी बना सकते हैं।
काम की बात करें तो दिव्येंदु हाल ही में Glory में नजर आए हैं, जो Netflix पर रिलीज हुई है। इस प्रोजेक्ट को लेकर उन्होंने ‘ग्लोरी’ यानी सफलता की अपनी परिभाषा भी साझा की।
उनका कहना है कि उनके लिए असली सफलता बाहरी तारीफ से नहीं, बल्कि अपने काम से मिलने वाली संतुष्टि में है। अगर वे अपने काम से खुश हैं और खुद को स्क्रीन पर देखकर संतोष महसूस करते हैं, तो वही उनके लिए सच्ची ‘ग्लोरी’ है।


































