मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करने के लिए सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और तुर्की ने मिलकर एक नया रणनीतिक रास्ता तैयार करने की दिशा में काम तेज कर दिया है। इसका मकसद ऊर्जा और व्यापारिक सप्लाई को सुरक्षित रखना और ईरान पर निर्भरता घटाना है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये देश मिलकर रेल नेटवर्क, समुद्री कॉरिडोर और पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स विकसित कर रहे हैं, ताकि तेल और गैस की सप्लाई के लिए वैकल्पिक रास्ते तैयार किए जा सकें। यह पहल खास तौर पर उस स्थिति के बाद तेज हुई, जब अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई के बाद ईरान ने हॉर्मुज क्षेत्र में नाकेबंदी जैसी स्थिति पैदा कर दी थी, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम खाड़ी क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के स्तर पर बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। नई योजना के तहत माल और ऊर्जा आपूर्ति को फारस की खाड़ी के बाहर स्थित बंदरगाहों—जैसे यूएई और ओमान—से आगे बढ़ाया जाएगा। इसके बाद यह सऊदी अरब होते हुए जॉर्डन पहुंचेगा और वहां से स्वेज नहर या सीरियाई बंदरगाहों के जरिए भूमध्य सागर तक भेजा जाएगा।
कुछ प्रोजेक्ट्स पर पहले ही काम शुरू हो चुका है। यूएई और सऊदी अरब के बीच समुद्री और जमीनी कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं, वहीं जॉर्डन में रेल नेटवर्क को भी मजबूत किया जा रहा है। सऊदी अरब ने अपने महत्वाकांक्षी नियोम प्रोजेक्ट के तहत नए बंदरगाह से माल ढुलाई सेवाएं शुरू की हैं, जो क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा दे रही हैं।
इसके अलावा, ऐतिहासिक हिजाज रेलवे को फिर से शुरू करने की योजना भी बनाई जा रही है, जिससे जेद्दा, अम्मान, दमिश्क और इस्तांबुल के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
हाल ही में जेद्दा में हुए GCC शिखर सम्मेलन में भी क्षेत्रीय रेलवे नेटवर्क को तेजी से विकसित करने पर सहमति बनी है। इस नेटवर्क के जरिए सऊदी अरब को यूएई, कतर, ओमान, कुवैत और बहरीन से जोड़ने की योजना है। साथ ही तेल-गैस पाइपलाइन, बिजली और जल आपूर्ति के लिए बहु-देशीय नेटवर्क पर भी काम किया जा रहा है।
कुल मिलाकर, यह रणनीति न केवल हॉर्मुज पर निर्भरता कम करने की कोशिश है, बल्कि मध्य पूर्व में व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के नए रास्ते खोलने की दिशा में एक बड़ा कदम भी मानी जा रही है।


































