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सरोजनीनगर में आस्था का महासागर: ‘धर्म उत्सव’ में उमड़ा 15 हजार श्रद्धालुओं का जनसैलाब, भक्ति में डूबा पूरा क्षेत्र, भजन सम्राट कन्हैया मित्तल की गूंज से थर्राया नटुकुर मैदान, देर रात तक झूमते रहे राम भक्त

लखनऊ। राजधानी का सरोजनीनगर क्षेत्र 22 अप्रैल 2026 को उस समय भक्ति, ऊर्जा और जनआस्था के अद्भुत संगम का साक्षी बना, जब नटुकुर मैदान में आयोजित “धर्म उत्सव @ सरोजनीनगर” ने एक ऐतिहासिक जनसमूह को एकत्र कर दिया। विधायक की पहल पर आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में लगभग 15 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लेकर इसे एक विराट आध्यात्मिक जनपर्व का रूप दे दिया।

यह आयोजन केवल एक भजन संध्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और धार्मिक आस्था का सशक्त मंच बनकर उभरा, जहां हर वर्ग, हर आयु और हर क्षेत्र के लोग एक साथ भक्ति में लीन दिखाई दिए।

सुबह से ही उमड़ने लगा जनसैलाब, शाम तक बना जनमहासागर

कार्यक्रम को लेकर सुबह से ही क्षेत्र में उत्साह का माहौल था। आसपास के गांवों, कस्बों और वार्डों से श्रद्धालु समूहों में नटुकुर मैदान पहुंचने लगे। जैसे-जैसे समय बीतता गया, मैदान श्रद्धालुओं से भरता गया और शाम होते-होते यह संख्या हजारों में बदल गई।

परिवारों के साथ आए श्रद्धालु, युवा समूहों की टोली, महिलाओं की विशेष उपस्थिति और बुजुर्गों की आस्था-इन सभी ने मिलकर इस आयोजन को जन-जन का उत्सव बना दिया।

दीप प्रज्वलन से आरंभ, भक्ति के सुरों से सजी शुरुआत

कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसने पूरे वातावरण को पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया।

प्रारंभिक प्रस्तुति में किशोर चतुर्वेदी ने भक्ति गीतों के माध्यम से माहौल को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। उनके सुरों ने जैसे ही वातावरण को छुआ, पूरा मैदान “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा।

भव्य स्वागत के साथ मंच पर पहुंचे डॉ. राजेश्वर सिंह

कार्यक्रम स्थल पर विधायक के पहुंचते ही पूरा परिसर जयघोषों से गूंज उठा। पुष्प वर्षा, माल्यार्पण और तालियों की गड़गड़ाहट के बीच उनका स्वागत किया गया।

उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम को नई ऊर्जा प्रदान की और श्रद्धालुओं में उत्साह और बढ़ गया।

कन्हैया मित्तल के मंच पर आते ही चरम पर पहुंचा भक्ति का माहौल

कार्यक्रम का सबसे प्रतीक्षित क्षण तब आया जब भजन सम्राट मंच पर पहुंचे। उनके मंच पर आते ही पूरा नटुकुर मैदान “जय श्रीराम” और “श्याम बाबा की जय” के नारों से गूंज उठा।

उन्होंने अपने लोकप्रिय और ऊर्जावान भजनों-

  • “जो राम को लाए हैं, हम उनको लाएंगे”
  • “हारे के सहारे, खाटू श्याम हमारे”

के माध्यम से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। हजारों की भीड़ एक साथ झूमती, गाती और ताली बजाती नजर आई।

यह दृश्य किसी धार्मिक महाकुंभ से कम नहीं था, जहां हर व्यक्ति भक्ति में डूबा हुआ दिखाई दे रहा था।

भावनाओं से भरा संबोधन और बड़ा संदेश

अपने संबोधन में ने कहा कि सरोजनीनगर केवल भौतिक विकास का केंद्र नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जागरण का भी केंद्र बन रहा है।

उन्होंने कन्हैया मित्तल के संघर्षपूर्ण जीवन का उल्लेख करते हुए युवाओं को प्रेरित किया कि कठिन परिस्थितियों में भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

उन्होंने कहा-

  • “हमने सरोजनीनगर में अब तक 220 मंदिरों का सुंदरीकरण और जीर्णोद्धार कराया है।”
  • “रामरथ श्रवण यात्रा के माध्यम से हजारों लोगों को अयोध्या धाम के दर्शन कराए गए हैं।”
  • “हमारी प्राथमिकता विकास के साथ संस्कृति को भी आगे बढ़ाना है।”

उन्होंने यह भी कहा कि सरोजनीनगर की पहचान अब केवल विकास कार्यों से नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से भी होगी।

‘राम रथ’ से आगे बढ़ते हुए ‘श्याम रथ’ की पहल

कार्यक्रम के दौरान ने एक नई पहल का सुझाव दिया-
लखनऊ से खाटू श्याम जी के लिए श्याम रथ यात्रा और शहर में एक भव्य खाटू श्याम मंदिर का निर्माण।

इस प्रस्ताव पर ने तुरंत सहमति जताते हुए इसे जल्द शुरू करने की घोषणा की।

इस घोषणा के बाद पूरा मैदान तालियों और जयघोष से गूंज उठा, जिससे श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर पहुंच गया।

विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी ने बढ़ाई गरिमा

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने इस आयोजन को समाज के लिए प्रेरणादायक बताते हुए इसकी सराहना की।

इसके अलावा क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, पार्षद, भाजपा पदाधिकारी और अनेक गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बना दिया।

रामरथ श्रवण यात्रा के श्रद्धालुओं की विशेष भागीदारी

इस आयोजन में रामरथ श्रवण यात्रा के दर्शनार्थियों की उल्लेखनीय सहभागिता रही। इन श्रद्धालुओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह आयोजन उन्हें आध्यात्मिक रूप से और अधिक जोड़ता है।

व्यवस्थाओं ने जीता लोगों का दिल

इतने विशाल आयोजन के बावजूद व्यवस्थाएं पूरी तरह सुव्यवस्थित रहीं—

  • सुरक्षा के व्यापक इंतजाम
  • पार्किंग की समुचित व्यवस्था
  • पेयजल और बैठने की पर्याप्त सुविधा
  • प्रसाद वितरण की सुसंगठित व्यवस्था

इन व्यवस्थाओं ने यह सुनिश्चित किया कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरण का प्रतीक बना आयोजन

“धर्म उत्सव @ सरोजनीनगर” केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरण का सशक्त संदेश बनकर उभरा।

यह आयोजन इस बात का प्रमाण बना कि जब समाज एकजुट होकर अपनी परंपराओं और मूल्यों को अपनाता है, तो वह एक नई ऊर्जा और दिशा प्राप्त करता है।

आभार और भविष्य का संकल्प

कार्यक्रम के अंत में ने सभी श्रद्धालुओं, अतिथियों, कलाकारों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि-

“ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं।”

उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार के भव्य, जनहितकारी और सांस्कृतिक आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संकल्प दोहराया।

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