Israel और Iran के बीच जारी तनाव के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ गई है। संघर्ष शुरू होने के तुरंत बाद ईरान ने Strait of Hormuz को बंद करने की धमकी दी थी, जिससे तेल और गैस के निर्यात-आयात पर असर पड़ने की आशंका पैदा हो गई। इस बीच United States ने एक बड़ा कदम उठाते हुए जरूरत पड़ने पर तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए नौसैनिक बल तैनात करने की तैयारी जताई है।
टैंकरों की सुरक्षा के लिए अमेरिकी योजना
व्हाइट हाउस के अनुसार यदि स्थिति बिगड़ती है तो अमेरिकी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों को सुरक्षा प्रदान कर सकती है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा गलियारों में से एक है, जहां से रोजाना करीब 1.5 से 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल और गैस का निर्यात होता है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन के दौरान अमेरिका तेल बाजारों और समुद्री यातायात पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति Donald Trump ने खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने और जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पहले ही कई कदम उठाए हैं।
जहाजों को मिलेगा जोखिम बीमा
अमेरिका की वित्तीय संस्था U.S. International Development Finance Corporation खाड़ी क्षेत्र में संचालित तेल और मालवाहक जहाजों के लिए राजनीतिक जोखिम बीमा उपलब्ध कराएगी। यदि समुद्री सुरक्षा पर खतरा बढ़ता है तो अमेरिकी नौसेना सीधे हस्तक्षेप कर टैंकरों को एस्कॉर्ट भी कर सकती है।
वैश्विक तेल आपूर्ति में अहम भूमिका
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल का परिवहन इसी मार्ग से होता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों और आपूर्ति पर सीधा असर डाल सकता है।
तेल कीमतों को लेकर चिंता
संघर्ष शुरू होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे कई आयातक देशों में महंगाई और ईंधन की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि देश की अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है कि वह इस तरह के अस्थायी झटकों को सहन कर सकती है।
व्हाइट हाउस का मानना है कि हालिया कदमों से क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा मजबूत होगी और रणनीतिक समुद्री मार्गों से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान का प्रभाव कम हो सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि मध्य-पूर्व में जारी तनाव आगे किस दिशा में बढ़ता है।


































