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बड़ी खबर: लखनऊ के गुडंबा में विद्युत मरम्मत के दौरान करंट से  संविदा कर्मी की मौत, विभागीय लापरवाही पर उठे सवाल

लखनऊ। राजधानी के गुडंबा क्षेत्र में विद्युत विभाग की कथित लापरवाही एक संविदा कर्मी की जान पर भारी पड़ गई। देर रात विद्युत पोल पर मरम्मत कार्य के दौरान करंट लगने से 45 वर्षीय कर्मी की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया है, वहीं विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा मानकों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।

रात 1:30 बजे हुआ हादसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 27/28 फरवरी 2026 की रात लगभग 1:30 बजे जगरानी अस्पताल मुख्य मार्ग पर विद्युत पोल पर मरम्मत कार्य चल रहा था। इसी दौरान करंट की चपेट में आने से 45 वर्षीय परशुराम की मौके पर ही मृत्यु हो गई। मृतक कल्याणपुर-गुडंबा क्षेत्र में विद्युत विभाग में संविदा कर्मी के रूप में कार्यरत थे और लंबे समय से लाइन मरम्मत व रखरखाव का कार्य कर रहे थे।

सूचना पर पहुंची पुलिस, पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया शव

घटना की जानकारी सुबह लगभग 5 बजे मृतक के भाई मोहन द्वारा थाना सैरपुर में लिखित रूप से दी गई। सूचना मिलते ही गुडंबा पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक पंचायतनामा की कार्रवाई पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस के अनुसार, मामले में विधिक कार्यवाही प्रचलित है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। फिलहाल क्षेत्र में शांति व्यवस्था सामान्य बताई गई है।

सुरक्षा मानकों पर उठे गंभीर सवाल

हादसे के बाद सबसे बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि क्या मरम्मत कार्य से पूर्व संबंधित विद्युत लाइन को पूरी तरह से बंद कराया गया था? क्या मृतक को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण—जैसे इंसुलेटेड दस्ताने, सेफ्टी बेल्ट, हेलमेट और अन्य सुरक्षा संसाधन—उपलब्ध कराए गए थे?

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि संविदा कर्मियों से अक्सर रात के समय जोखिम भरे कार्य कराए जाते हैं, जबकि सुरक्षा संसाधनों और निगरानी में कमी की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। यदि जांच में लापरवाही की पुष्टि होती है तो यह विभागीय जवाबदेही का गंभीर मामला होगा।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

मृतक परशुराम चार भाइयों में एक थे। उनके परिवार में तीन बेटियां और एक बेटा है। घर के कमाऊ सदस्य की अचानक मृत्यु से परिवार आर्थिक संकट में आ गया है। परिजनों ने विभाग से उचित मुआवजे, आश्रित को नौकरी और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।

परिवार का कहना है कि यदि सुरक्षा मानकों का सही पालन किया जाता, तो यह हादसा टाला जा सकता था।

जिम्मेदारी कौन लेगा?

यह हादसा एक बार फिर संविदा कर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। क्या संविदा कर्मियों की जान की कीमत इतनी सस्ती है? क्या बिजली विभाग इस मौत की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी स्वीकार करेगा?

अब देखना यह होगा कि प्रशासन पीड़ित परिवार को कितनी शीघ्र राहत देता है और विभागीय स्तर पर जांच के बाद क्या ठोस कार्रवाई की जाती है। राजधानी में हुई यह घटना न केवल एक परिवार के लिए त्रासदी है, बल्कि कार्यस्थल सुरक्षा के मुद्दे पर एक बड़ा चेतावनी संकेत भी है।

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