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हरकोर्ट बटलर प्राविधिक विश्वविद्यालय, कानपुर का छठवां दीक्षांत समारोह संपन्न: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने छात्रों को प्रेरित किया

लखनऊ, 27 सितंबर, 2024: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में आज हरकोर्ट बटलर प्राविधिक विश्वविद्यालय, कानपुर का छठवां दीक्षांत समारोह धूमधाम से संपन्न हुआ। समारोह में राज्यपाल ने विभिन्न पाठ्यक्रमों के स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को 899 उपाधियाँ प्रदान कीं। इसके साथ ही राज्यपाल ने मेधावी विद्यार्थियों को 48 मेडल भी दिए, जिनमें 21 छात्राओं और 27 छात्रों को उपकुलपति मेडल और चांसलर मेडल प्रदान किए गए।

इस विशेष समारोह का आयोजन विश्वविद्यालय के मुख्य सभागार में किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल ने अपने संबोधन में प्राविधिक शिक्षा के महत्व पर जोर दिया और कहा कि विद्यार्थियों को अनुशासित रहकर अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में लगातार प्रयास करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि केवल ज्ञान अर्जित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे प्रौद्योगिकी के साथ जोड़कर समाज के विकास में योगदान देना आवश्यक है।

प्राविधिक शिक्षा में छात्राओं की भूमिका पर विशेष जोर

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष ध्यान दिलाया कि छात्राओं का प्रदर्शन छात्रों की तुलना में अपेक्षाकृत कम है। उन्होंने छात्राओं से आग्रह किया कि वे प्राविधिक शिक्षा के क्षेत्र में और अधिक मेहनत करें और अपने प्रदर्शन में सुधार लाएं। राज्यपाल ने कहा, “शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए छात्राओं को अपनी जिम्मेदारियों को समझना होगा और उत्कृष्ट प्रदर्शन करना होगा।”

अनुशासन का महत्व: सफलता की कुंजी, ज्ञान व प्रौद्योगिकी का युग

राज्यपाल ने अपने भाषण में अनुशासन के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में अनुशासन बनाए रखना सफलता प्राप्त करने का महत्वपूर्ण कारक है। उन्होंने कहा, “अनुशासित व्यक्ति ही अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है। अनुशासन से न केवल व्यक्तित्व निखरता है, बल्कि समाज में एक अलग पहचान भी बनती है।” राज्यपाल ने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे अनुशासन और कड़ी मेहनत के साथ अपने लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में आगे बढ़ें।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि वर्तमान युग केवल ज्ञान का नहीं है बल्कि ज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का है। उन्होंने कहा, “आज दुनिया में वही देश प्रगति कर रहे हैं, जो नवाचार और नई टेक्नोलॉजी को प्राथमिकता दे रहे हैं। पिछले 10 वर्षों में भारत ने विज्ञान एवं तकनीकी के क्षेत्र में अपनी क्षमता का विश्व स्तर पर परिचय दिया है।” उन्होंने यह भी कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। देश में तीव्र गति से हो रहे विकास के कारण वैश्विक स्तर पर भारत के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित करने में कई देशों की रुचि बढ़ी है।

पुस्तक और आंगनबाड़ी किटों का वितरण

समारोह में राज्यपाल ने राजभवन की ओर से स्कूलों की लाइब्रेरी के लिए पुस्तकें भी प्रदान कीं, जो छोटे बच्चों के बौद्धिक विकास में सहायक होंगी। इसके साथ ही उन्होंने 200 आंगनबाड़ी किटों का वितरण भी किया, जिससे आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की बेहतर देखभाल और स्वास्थ्य का ध्यान रखा जा सकेगा। राज्यपाल ने कहा, “इन किटों से आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की देखभाल का स्तर बेहतर होगा और उनके स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जा सकेगा।”

कौशल विकास और स्टार्टअप्स के लिए अवसर, शोध और नवाचार की बढ़ती प्रवृत्ति

राज्यपाल ने बजट में कौशल विकास, रोजगार, नवाचार और स्टार्टअप्स के लिए किए गए प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रावधान आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री जी के विजन के तहत विद्यार्थियों के कौशल विकास के लिए 125 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो अब तक का सबसे बड़ा बजट है। इसके तहत अगले 5 वर्षों में एक करोड़ विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थानों में पेड इंटर्नशिप का अवसर प्रदान किया जाएगा।”

राज्यपाल ने देश में शोध और नवाचार की दिशा में हो रहे कार्यों पर संतोष व्यक्त किया और कहा कि युवा अब रोजगार ढूंढने के बजाय स्टार्टअप्स के माध्यम से रोजगार सृजन कर रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा नवाचार और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए दी जाने वाली आर्थिक सहायता की भी उन्होंने सराहना की।

सफलता के लिए कड़ी मेहनत जरूरी

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता है। उन्होंने कहा, “सफलता प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम करना जरूरी है। विद्यार्थियों को ऑनलाइन गेम्स और अन्य धोखाधड़ी से बचना चाहिए और अपने भविष्य के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए पूरी निष्ठा और ईमानदारी से काम करना चाहिए।”

समाज के विकास में विश्वविद्यालय की भूमिका

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय को अपने गोद लिए गांवों में जाकर वहां की समस्याओं को जानने और उनके समाधान के लिए काम करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा, “विश्वविद्यालय का यह कर्तव्य है कि वह समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाए और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं का समाधान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाए।”

नवीन भवनों और डिजिटल सेवाओं का शुभारंभ

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के दो नए भवनों, इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग एवं केमिकल इंजीनियरिंग भवनों का लोकार्पण किया और ‘समर्थ पोर्टल’ का शुभारंभ भी किया। इसके साथ ही सभी उपाधियाँ, अंक पत्र और प्रमाण पत्र डिजीलॉकर में ऑनलाइन अपलोड किए गए, जिससे विद्यार्थियों को इन दस्तावेजों की पहुंच सुगम होगी।

सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ताओं और संकाय सदस्यों का सम्मान

समारोह में राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ताओं और स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल विश्वविद्यालय के 06 संकाय सदस्यों को भी प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया। इसके अलावा, राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के गोद लिए गए पांच गांवों के विद्यालयों में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया और प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को सम्मानित किया।

मुख्य अतिथि का संबोधन

समारोह के मुख्य अतिथि, पद्मश्री प्रोफेसर मणीन्द्र अग्रवाल ने सभी उपाधि प्राप्तकर्ताओं को बधाई दी और उन्हें अपने करियर में सफल पेशेवर बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में सक्रिय योगदान देने के लिए भी प्रेरित किया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर समशेर सिंह, कार्यपरिषद और विद्यापरिषद के सदस्य, शिक्षकगण, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, विद्यार्थी और विभिन्न विद्यालयों के बच्चे उपस्थित रहे।

उत्तरप्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो: तीसरे दिन मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने किया कौशल विकास मिशन के निरीक्षण में युवाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए किया प्रेरित

लखनऊ: ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो के तीसरे दिन प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कौशल विकास मिशन की विभिन्न गतिविधियों और लाइव कौशल प्रदर्शनों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश के युवाओं को मिल रहे प्रशिक्षण और अवसरों की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इस इंटरनेशनल ट्रेड शो का आयोजन प्रदेश के युवाओं को सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ उन्हें अपने भविष्य को सँवारने का एक बेहतर मंच प्रदान कर रहा है।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के माध्यम से युवाओं को आधुनिक तकनीकों में दक्षता हासिल करने का अवसर मिल रहा है, जिससे वे बेहतर रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकते हैं। शो के दौरान उन्होंने युवाओं से मुलाकात की और उन्हें प्रदेश सरकार की योजनाओं से जुड़कर अपने कौशल को निखारने और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

ट्रेड शो के कौशल विकास पवेलियन में प्रदेश के हुनरमंद युवाओं ने विभिन्न विशिष्ट कौशलों का लाइव प्रदर्शन किया, जिनमें तकनीकी और पारंपरिक हस्तशिल्प के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों का समावेश था। इन प्रदर्शनों ने आगंतुकों को उत्तर प्रदेश के उभरते हुए कौशल और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की।

इसके बाद कपिल देव अग्रवाल ने ट्रेड शो में लगे अन्य पवेलियनों का भी दौरा किया और वहां लगे विभिन्न स्टॉलों पर जाकर विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने उत्पादकों और उद्यमियों से बातचीत करते हुए उनके अनुभवों को जाना और उनकी सराहना की। मंत्री ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम न सिर्फ प्रदेश के युवाओं और उद्यमियों को आगे बढ़ने का अवसर दे रहे हैं, बल्कि उत्तर प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरने का भी मंच प्रदान कर रहे हैं। इस अवसर पर प्रमुख सचिव आलोक कुमार, अपर मिशन निदेशक प्रिया सिंह सहित अन्य गणमान्य अधिकारी भी उपस्थित रहे ।

LUCKNOW: महात्मा बुद्ध कृषि विश्वविद्यालय कुशीनगर के लिए रुपए 45 करोड़ जारी

लखनऊ: कुशीनगर में बनाए जा रहे महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की स्थापना एवं वृहद निर्माण कार्यों के लिए शासन द्वारा 45 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृति जारी की गई है। इस संबंध में प्रदेश के कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि यह विश्वविद्यालय शिक्षा और अनुसंधान से उत्तर प्रदेश के कृषकों की आय को दुगनी करने तथा कृषि को धारणीय बनाने में दूरगामी सफलता प्रदान करेगा।

इसके साथ ही मृदा एवं जल संरक्षण अनुसूचित जातियों के लिए विशेष घटक योजना नेशनल मिशन फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर के अंतर्गत नमामि गंगे योजना तथा अन्य के लिए रुपए 3.51 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति भी जारी कर दी गई है।

लखनऊ का ‘Meri Zindagi’ रॉक बैंड: देश का पहला ऑल-वीमेन बैंड जो किचन के बर्तनों से भी बनाता है संगीत

लखनऊ: जब हम म्यूजिक बैंड की बात करते हैं, तो आमतौर पर हमारे सामने पुरुषों का चेहरा आता है, लेकिन लखनऊ का ‘Meri Zindagi’ रॉक बैंड इस धारणा को बदलने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह बैंड न केवल भारत का पहला ऑल-वीमेन रॉक बैंड है, बल्कि ये बैंड पारंपरिक म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स की जगह किचन के बर्तनों का इस्तेमाल कर संगीत बनाता है। सामाजिक बदलाव की आवाज बनने का यह अनोखा प्रयास महिला सशक्तिकरण और सामाजिक मुद्दों को उजागर करने के उद्देश्य से किया गया है।

‘Meri Zindagi’ बैंड की स्थापना और इसका सफर

इस बैंड की स्थापना लखनऊ की डॉ.जया तिवारी ने वर्ष 2010 में की थी। TRUE NEWS UP के मुख्य सम्पादक से बातचीत में उन्होंने बताया कि यह एक मिशन-चालित रॉक बैंड है जिसका मुख्य उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना है, खासकर महिलाओं और लड़कियों से जुड़े मुद्दों पर। बैंड ने अब तक 50 से अधिक शहरों में 550 से अधिक कंसर्ट किए हैं, जिनमें विभिन्न सामाजिक, सरकारी और निजी संगठनों द्वारा आयोजित कार्यक्रम भी शामिल हैं।

जया तिवारी का कहना है कि बैंड का मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने बैंड की शुरुआत की, तब उनकी टीम में सिर्फ दो-तीन महिलाएं थीं। धीरे-धीरे इससे और महिलाएं जुड़ती गईं। इस बैंड का खास उद्देश्य संगीत के माध्यम से महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों, शिक्षा और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर आवाज उठाना है।

कैसे आया ‘Meri Zindagi’ बैंड का आइडिया?

जया तिवारी ने TRUE NEWS UP के मुख्य सम्पादक शिवसागर सिंह चौहान को दिये एक इंटरव्यू में बताया कि जब उन्होंने देखा कि समाज में महिलाओं और लड़कियों के साथ भेदभाव हो रहा है, तो उन्होंने सोचा कि संगीत के माध्यम से इन मुद्दों को सामने लाना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमारा पहला टारगेट Female Foeticide (कन्या भ्रूण हत्या) था। इसके बाद हमने बच्चियों की सुरक्षा, शिक्षा और अन्य सामाजिक समस्याओं को उजागर करने के लिए गाने लिखे।”

बैंड के शुरुआती दिनों में संसाधनों की कमी के चलते उन्होंने पारंपरिक म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स की जगह किचन के बर्तनों का इस्तेमाल किया। घर का काम करते हुए ये महिलाएं गानों के बोल और धुन तैयार करती थीं। यही साधारण बर्तन उनकी संगीत यात्रा के साधन बन गए।

बैंड की सामाजिक जिम्मेदारी और उद्देश्य

‘Meri Zindagi’ बैंड के सभी गाने सामाजिक मुद्दों पर आधारित होते हैं। उनके गाने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, महिलाओं की शिक्षा, और महिला सशक्तिकरण जैसे मिशन के संदेशों को समाज में फैलाते हैं। बैंड ने कई लड़कियों की शिक्षा का जिम्मा भी उठाया है, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया जा रहा है।

जया तिवारी कहती हैं, हम केवल वही गाने गाते हैं जो हम लिखते और कंपोज करते हैं। हमारा उद्देश्य समाज में बदलाव लाना है, पैसा नहीं। हम कभी भी ऐसे गाने नहीं गाएंगे जिनमें महिलाओं का अपमान या कामुकता हो। बॉलीवुड गानों का प्रदर्शन करने से इनकार करते हुए, बैंड के सभी सदस्य अपने-अपने पेशे में काम करते हैं और संगीत के प्रति अपने जुनून को भी बनाए रखते हैं। बैंड के लिए संगीत सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी है।

बैंड के प्रमुख गाने और उनकी लोकप्रियता

‘Meri Zindagi’ बैंड के गाने अपनी अनूठी धुन और सामाजिक संदेशों के लिए प्रसिद्ध हैं। उनके कुछ प्रसिद्ध गाने ‘ढूंढों खुद को खुद से’ और ‘टैंपो रिक्शा’ वायरल हो चुके हैं। इन गानों ने न केवल आम जनता का ध्यान आकर्षित किया है, बल्कि कई एनजीओ और सामाजिक संगठनों ने भी उनके प्रोजेक्ट्स के लिए बैंड को आमंत्रित किया है। जया ने स्मार्ट स्टडीज, वाटर सेविंग, और नो स्मोकिंग जैसे मुद्दों पर भी गाने लिखे हैं।

बैंड के गाने भारतीय और पश्चिमी संगीत का मिश्रण होते हैं। जया कहती हैं, “हमने समाज के मुद्दों को उजागर करने के लिए रैप संगीत का भी इस्तेमाल किया है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के लोक संगीत से भी हम प्रेरणा लेते हैं।” बैंड का हर गाना महिलाओं के मुद्दों पर आधारित नहीं होता, बल्कि जल संकट, प्रदूषण, और तंबाकू के उपयोग जैसे विषयों पर भी गाने बनाए जाते हैं।

बिना पारंपरिक म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स के संगीत

‘Meri Zindagi’ बैंड का सबसे खास पहलू यह है कि ये महिलाएं पारंपरिक म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स की जगह किचन के बर्तनों का उपयोग करती हैं। बैंड के शुरुआती दिनों में, संसाधनों की कमी के कारण उन्होंने किचन के बर्तनों को ही म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट्स के रूप में इस्तेमाल किया। इससे उनके संगीत में एक अनूठी ध्वनि और शैली आई, जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती है।

बैंड की इस खासियत ने उन्हें संगीत की दुनिया में अलग पहचान दिलाई है। जया कहती हैं, “हमारा बैंड मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के लिए काम करता है। हम पारंपरिक इंस्ट्रूमेंट्स की जगह किचन के बर्तनों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे हमारा संगीत श्रोताओं के लिए और भी खास हो जाता है।”

सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाने का प्रयास, बैंड की अंतरराष्ट्रीय पहचान

बैंड के सदस्य विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के लिए गाने लिखते हैं। उनका पहला टारगेट कन्या भ्रूण हत्या (Female Foeticide) था। इसके बाद उन्होंने बच्चियों की सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, और लड़कियों की शिक्षा जैसे मुद्दों पर गाने बनाए। उनके गीतों में सामाजिक बुराइयों को उजागर किया जाता है और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश की जाती है। बैंड को महिला सम्मान सेल, महिला बाल कल्याण विभाग, और 1090 वूमेन पावर हेल्पलाइन के लिए गाने बनाने का श्रेय भी दिया जाता है। उनके गाने स्वयं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा लॉन्च किए गए थे।

लखनऊ से शुरू होकर, ‘Meri Zindagi’ बैंड ने अब अंतरराष्ट्रीय पहचान भी बना ली है। बीबीसी लंदन, ऑस्ट्रेलिया न्यूज, और चीन के मॉर्निंग पोस्ट जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों ने भी उनके काम को कवर किया है। हाल ही में, बैंड ने कश्मीर में भारतीय सेना के लिए भी परफॉर्म किया था।

महिलाओं के लिए प्रेरणादायक संदेश

‘Meri Zindagi’ बैंड का संदेश सभी महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है। जया कहती हैं, “हमारा बैंड महिलाओं के मुद्दों को उठाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम पुरुष विरोधी हैं। हम सिर्फ यह चाहते हैं कि समाज में महिलाओं को समानता और सम्मान मिले।”

उन्होंने कहा कि, “महिलाओं को अपने आपको अपडेट रखना चाहिए और समाज में एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए। हम महिलाओं के मुद्दों पर गाने बनाते हैं, लेकिन हमारे गानों का उद्देश्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है।”

लखनऊ का ‘Meri Zindagi’ बैंड न केवल भारत का पहला ऑल-वीमेन रॉक बैंड है, बल्कि इसका संगीत और उद्देश्य भी इसे खास बनाता है। किचन के बर्तनों से संगीत बनाते हुए और सामाजिक मुद्दों पर गाने लिखते हुए, यह बैंड समाज में बदलाव की आवाज बन गया है। उनके गाने महिलाओं और लड़कियों को उनकी शक्ति का एहसास दिलाते हैं और उन्हें अपने अधिकारों के लिए खड़े होने के लिए प्रेरित करते हैं।

स्वास्थ्य विभाग: एक बेड पर 3 रोगी, डिप्टी सीएम ने जताई नाराजगी

लोहिया के मातृ एवं शिशु रेफरल हॉस्पिटल की व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश, निदेशक हर 15 दिन में करें निरीक्षण

लखनऊ: लोहिया संस्थान के शहीद पथ स्थित मातृ शिशु एवं रेफरल हॉस्पिटल में बदइंतजामी पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने नाराजगी जाहिर की है। एक बेड पर तीन रोगियों को लिटाने का मामला सामने आया है। तीमारदार की शिकायत का संज्ञान लेते हुए डिप्टी सीएम ने बदइंतजामी को दूर करने के निर्देश दिए हैं।
शहीद पथ स्थित मातृ शिशु एवं रेफरल हॉस्पिटल में महिलाओं और बच्चों को इलाज उपलब्ध कराया जाता है। एक तीमारदार ने हॉस्पिटल में एक बेड पर 3 रोगियों के लिटाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में तीमारदार ने फोटो भी संलग्न किये हैं।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए निदेशक को व्यवस्था सुधारने की हिदायत दी है।

उन्होंने कहा कि रोगियों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाये। इस तरह की घटनाओं से सरकार की छवि धूमिल हो रही है। रोगियों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने में किसी भी तरह की लापरवाही ठीक नहीं है। पूरे प्रकरण की एक सप्ताह में जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रेषित करें। उन्होंने कहा कि निदेशक कम से कम 15 दिन में एक बार हॉस्पिटल का औचक निरीक्षण करें। जो भी कमियां मिलें। उन्हें दूर करें।