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लखनऊ में डेंगू और मलेरिया के मामलों में बढ़ोतरी: स्वास्थ्य विभाग ने सघन मच्छर रोधी अभियान शुरू किया

लखनऊ, 28 सितंबर 2023: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में डेंगू और मलेरिया के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। आज, 28 सितंबर को, शहर में 39 नए डेंगू और 3 मलेरिया के पॉजिटिव मामले सामने आए। इसके साथ ही, वर्ष 2024 की शुरुआत से अब तक जिले में कुल 429 डेंगू और 408 मलेरिया के पॉजिटिव मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अलीगंज, चंदरनगर, सरोजनीनगर, एन.के. रोड और इंदिरानगर जैसे क्षेत्रों में डेंगू के मामलों में वृद्धि देखी गई है।

डेंगू और मलेरिया की रोकथाम के लिए सघन सर्वेक्षण अभियान

लखनऊ के स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की टीमों ने लगभग 1,160 घरों और उनके आस-पास मच्छरजनित स्थितियों का सर्वेक्षण किया। इस सर्वेक्षण के दौरान 6 घरों में मच्छरों की ब्रीडिंग की स्थितियां पाई गईं, जिनके खिलाफ नोटिस जारी किए गए हैं। नगर मलेरिया इकाई और जिला मलेरिया अधिकारी की टीमों द्वारा जनपद के विभिन्न स्थलों का निरीक्षण किया गया और लार्वा रोधी रसायन का छिड़काव किया गया।

डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने मच्छर रोधी अभियान को सघन रूप से शुरू किया है। इस अभियान के अंतर्गत शहर के विभिन्न क्षेत्रों जैसे सराय फाटक, दुर्विजय गंज, गणेशगंज, फैजुल्लागंज, मडियाव, अर्जुनगंज, हरिओम नगर, सोना विहार, सेक्टर-12 योगी पार्क और शारदा नगर के आस-पास मच्छर रोधी अभियान चलाया गया।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा मच्छरों की ब्रीडिंग रोकने के लिए आवश्यक कदम

स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की टीमें नागरिकों को मच्छरों की ब्रीडिंग रोकने के लिए कई आवश्यक कदम उठाने की सलाह दे रही हैं। विशेष रूप से डेंगू और मलेरिया जैसे मच्छर जनित रोगों को नियंत्रित करने के लिए लोगों को निम्नलिखित सुझाव दिए गए हैं:

  1. वाटर टैंक और कंटेनरों को ढक कर रखें: घर के अंदर और आस-पास पानी जमा न होने दें। खुले में रखे किसी भी कंटेनर में पानी जमा होने से मच्छरों की ब्रीडिंग होती है, जिससे डेंगू और मलेरिया फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
  2. कबाड़ और बेकार चीजों का निस्तारण करें: पुराने टायर, नारियल के खोल, टूटे हुए बर्तन और अनुपयोगी बोतलों में पानी जमा न होने दें। इन सभी वस्तुओं का उचित निस्तारण सुनिश्चित करें ताकि मच्छरों की ब्रीडिंग न हो सके।
  3. कूलर का पानी नियमित रूप से बदलें: हर सप्ताह कूलर का पानी बदलें और उसे सूखा और साफ रखें। कूलर में पानी जमा न होने दें, क्योंकि यह मच्छरों के लिए ब्रीडिंग ग्राउंड बन सकता है।
  4. लार्वीवोरस फिश का उपयोग करें: घरों और होटलों में पानी के टैंक में लार्वीवोरस मछलियों का उपयोग करें, जो मच्छरों के लार्वा को खाकर उन्हें नष्ट कर सकती हैं।
  5. बर्ड बाथ और फूलदान का पानी बदलें: बर्ड बाथ और फूलदान में रखे पानी को भी हर सप्ताह बदलें ताकि मच्छरों की ब्रीडिंग रोकी जा सके।

स्वयं को मच्छर जनित बीमारियों से बचाने के उपाय

स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को मच्छर जनित बीमारियों से बचाव के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:

  1. मच्छरदानी का प्रयोग करें: रात में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें, ताकि मच्छरों के काटने से बचा जा सके।
  2. पूरी बांह के कपड़े पहनें: विशेष रूप से दिन के समय मच्छरों के काटने से बचने के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनें। मच्छर डेंगू के वायरस को दिन में भी फैलाते हैं, इसलिए दिन के समय विशेष सतर्कता बरतें।
  3. मच्छर रोधी क्रीम का उपयोग करें: शरीर के खुले हिस्सों पर मच्छर रोधी क्रीम लगाएं ताकि मच्छरों के काटने से बचा जा सके।
  4. बुखार होने पर चिकित्सक से संपर्क करें: यदि किसी को बुखार होता है, तो बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें। चिकित्सक के परामर्श से ही दवाओं का सेवन करें, क्योंकि डेंगू और मलेरिया में स्व-उपचार घातक हो सकता है।

क्या न करें: मच्छरों की ब्रीडिंग रोकने के लिए आवश्यक सावधानियां

  1. कूलर और बाल्टी में पानी जमा न होने दें: घर में या घर के आस-पास कूलर, बाल्टी, बैरल, फूलदान, बर्ड बाथ, फ्रीज, टायर और नारियल के खोल में पानी जमा न होने दें। ये वस्तुएं मच्छरों की ब्रीडिंग के लिए अनुकूल स्थान बन सकती हैं।
  2. कबाड़ का सही निस्तारण करें: पुराने टायर, टूटे बर्तन, अनुपयोगी बोतलें, टिन और कबाड़ को घर में न रखें और न ही घर के पास फेंकें। इनका उचित निस्तारण सुनिश्चित करें ताकि मच्छरों की ब्रीडिंग न हो सके।
  3. स्व-उपचार से बचें: यदि बुखार हो, तो स्व-उपचार करने से बचें। चिकित्सक की सलाह के बिना कोई भी दवा न लें, खासकर डेंगू और मलेरिया जैसे गंभीर मामलों में।

स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा किए जा रहे प्रयास

स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम लखनऊ की टीमें विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से मच्छर रोधी अभियान चला रही हैं। इन अभियानों के तहत निम्नलिखित कार्य किए जा रहे हैं:

  1. साफ-सफाई अभियान: शहर के विभिन्न इलाकों में साफ-सफाई के कार्य किए जा रहे हैं। नागरिकों को भी अपने आस-पास की सफाई बनाए रखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
  2. लार्वा रोधी रसायन का छिड़काव: मच्छरों के लार्वा को नष्ट करने के लिए लार्वा रोधी रसायनों का छिड़काव किया जा रहा है, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां मच्छरों की ब्रीडिंग की संभावना अधिक होती है।
  3. फॉगिंग अभियान: मच्छरों को नष्ट करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में फॉगिंग का काम किया जा रहा है। इससे मच्छरों की संख्या में कमी आएगी और मच्छर जनित बीमारियों का प्रसार रुकेगा।

स्वास्थ्य शिक्षा और जागरूकता अभियान

स्वास्थ्य विभाग द्वारा नागरिकों को मच्छर जनित बीमारियों से बचाव के लिए “क्या करें, क्या न करें” संबंधी स्वास्थ्य शिक्षा प्रदान की जा रही है। विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में यह स्पष्ट किया गया है कि लोग अपने घरों के आस-पास पानी जमा न होने दें, पूरी बांह के कपड़े पहनें और मच्छरों के काटने से बचने के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करें।

मच्छर जनित बीमारियों के प्रसार को रोकने के लिए ठोस प्रयास

स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम लखनऊ के संयुक्त प्रयासों से शहर में मच्छर जनित बीमारियों के प्रसार को रोकने के लिए सघन अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों का उद्देश्य मच्छरों की ब्रीडिंग को रोकना, नागरिकों को जागरूक करना और डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के प्रकोप को कम करना है।

मौसमी बीमारियों से जुड़ी जानकारी और सहयोग के लिए नागरिक मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय, लखनऊ के कंट्रोल रूम नंबर 0522-2622080 पर संपर्क कर सकते हैं।

नहरों की सिल्ट सफाई पर जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के कड़े निर्देश: भौतिक सत्यापन, ड्रोन वीडियोग्राफी और जियो टैगिंग अनिवार्य

लखनऊ, 28 सितंबर 2024: उत्तर प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने नहरों की सिल्ट सफाई को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को चेतावनी दी है कि सिल्ट सफाई के कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह निर्देश उन्होंने सिंचाई और जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंताओं के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में दिए। बैठक में नहरों की सिल्ट सफाई के गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। मंत्री ने कार्यों का भौतिक सत्यापन, जियो टैगिंग, ड्रोन वीडियोग्राफी और सिल्ट के उचित डिस्पोजल की अनिवार्यता पर भी विशेष ध्यान देने को कहा।

सिल्ट सफाई में गुणवत्ता और पारदर्शिता जरूरी: जलशक्ति मंत्री

बैठक के दौरान जलशक्ति मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सिल्ट सफाई के सभी कार्य विभागीय मापदंडों के अनुसार किए जाएं और इसमें किसी भी प्रकार की अनियमितता पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। मंत्री ने साफ तौर पर कहा कि नहरों की सिल्ट सफाई में शिथिलता या लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जलशक्ति मंत्री ने जोर देकर कहा कि नहरों की सिल्ट सफाई का कार्य शुरू करने से पहले, कार्य के दौरान और कार्य समाप्ति के बाद फोटोग्राफी अनिवार्य रूप से की जाए और इसकी जियो टैगिंग भी कराई जाए। इसके साथ ही, ड्रोन से वीडियोग्राफी कराई जाए ताकि कार्य की शुरुआत और अंत की स्थिति साफ तौर पर प्रदर्शित हो सके। इस प्रक्रिया से कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोका जा सकेगा।

ड्रोन वीडियोग्राफी और जियो टैगिंग से काम की निगरानी

स्वतंत्र देव सिंह ने बैठक में यह भी कहा कि नहरों की सिल्ट सफाई के दौरान ड्रोन से वीडियोग्राफी कराना अनिवार्य होगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वीडियोग्राफी में कार्य की शुरुआत और कार्य के बाद की स्थिति दोनों स्पष्ट रूप से दिखाई दें। इसके साथ ही, नहरों की स्थिति का रिकॉर्ड रखा जाएगा ताकि भविष्य में इसका उपयोग जांच और सत्यापन के लिए किया जा सके।

उन्होंने निर्देश दिए कि नहरों से निकाली गई सिल्ट का उचित ढंग से डिस्पोजल किया जाए। सिल्ट को नहर के आंतरिक भाग में न छोड़ा जाए, और इसका उचित निस्तारण सुनिश्चित हो। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सिल्ट के निपटान की जिम्मेदारी अवर अभियंता और सहायक अभियंता की होगी। वे व्यक्तिगत रूप से निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करेंगे कि सिल्ट का सही ढंग से निपटान किया गया हो।

सिल्ट सफाई के लिए ठोस कदम: डिस्पोजल और सत्यापन पर विशेष जोर

जलशक्ति मंत्री ने यह भी कहा कि सिल्ट सफाई के बाद नहरों के हेड और टेल का फोटोग्राफ लेकर रिकॉर्ड में रखा जाए। इससे यह पता चलेगा कि सफाई का अंतिम परिणाम क्या है। इसके अलावा, नहरों के सिल्ट सफाई की सूची भी तैयार की जाएगी जिसमें जनपद, विकासखंड और विधानसभा क्षेत्र का नाम दर्ज होगा। इस सूची में नहर के आंतरिक भाग में की जाने वाली सिल्ट सफाई की लंबाई और स्क्रैपिंग की जानकारी दी जाएगी।

सफाई के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नहर का संरेखण और घुमाव सही बना रहे। पुलों के नीचे जमा सिल्ट को विशेष ध्यान देकर साफ किया जाएगा, ताकि पानी का प्रवाह बाधित न हो।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि नहरों से निकाली गई सिल्ट का संतोषजनक डिस्पोजल सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए अल्पिकाओं (छोटी नहरें) के लिए अवर अभियंता और राजवाहों (बड़ी नहरें) के लिए सहायक अभियंता उत्तरदायी होंगे। वे प्रत्येक माइनर या राजवाहा की जांच कर यह सुनिश्चित करेंगे कि सिल्ट का सही निपटान किया गया है और इसके प्रमाण के रूप में एक सर्टिफिकेट भी देंगे।

सिल्ट सफाई में तकनीकी साधनों का उपयोग: ड्रोन और जियो टैगिंग अनिवार्य

बैठक में मंत्री ने निर्देश दिए कि सिल्ट सफाई के कार्य की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इसे जियो टैगिंग और ड्रोन वीडियोग्राफी के माध्यम से मॉनिटर किया जाए। उन्होंने कहा कि कार्य स्थल की फोटोग्राफी में नहर का नाम, जनपद का नाम और स्थान के अक्षांश और देशांतर भी दर्ज होना चाहिए। इसके साथ ही, नहरों की सिल्ट सफाई के कार्यों का अभिलेखीकरण भी समुचित रूप से किया जाए।

मंत्री ने यह भी कहा कि नहरों की सिल्ट सफाई और स्क्रैपिंग के लिए एक सूची तैयार की जाए जिसमें नहर के नाम, जनपद, विकासखंड और विधानसभा क्षेत्र की जानकारी के साथ सफाई की लंबाई भी दी जाए। नहर के हेड पर या किसी प्रमुख स्थान पर एक बोर्ड लगाया जाएगा, जिसमें खंड का नाम, नहर का नाम, सफाई की लागत, सहायक अभियंता, अवर अभियंता और ठेकेदार का नाम और मोबाइल नंबर अंकित किया जाएगा। इससे स्थानीय लोगों को भी जानकारी मिल सकेगी और काम की पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

समीक्षा बैठक में मुख्य अभियंताओं की मौजूदगी

समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, अनिल गर्ग, प्रमुख अभियंता एवं विभागाध्यक्ष अखिलेश सचान, प्रमुख अभियंता परिकल्प एवं नियोजन संदीप कुमार सहित कई मुख्य अभियंता और अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। सभी अधिकारियों ने सिल्ट सफाई कार्यों की समीक्षा की और इस दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी दी।

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे नियमित रूप से नहरों का निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि सिल्ट सफाई के कार्य निर्धारित मापदंडों के अनुसार हो रहे हैं। किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

नहरों की सफाई का प्रभाव: किसानों को मिलेगा फायदा

नहरों की सिल्ट सफाई से सबसे अधिक लाभ किसानों को मिलेगा, क्योंकि इससे नहरों में जल प्रवाह सुचारू रहेगा और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी। नहरों में सिल्ट जमा होने से जल प्रवाह धीमा हो जाता है, जिससे खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाता। सिल्ट सफाई से यह समस्या दूर होगी और किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा मिलेगी।

इसके अलावा, नहरों की सिल्ट सफाई से बाढ़ और जलजमाव की समस्याओं को भी रोका जा सकेगा। नहरों में जमा सिल्ट के कारण जल प्रवाह बाधित होता है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। सिल्ट सफाई से यह खतरा कम होगा और जलस्रोतों का समुचित उपयोग हो सकेगा।

सिल्ट सफाई का काम पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से होना चाहिए: स्वतंत्र देव सिंह

जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने स्पष्ट किया कि सिल्ट सफाई का काम पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से होना चाहिए। सभी कार्य निर्धारित मापदंडों के अनुसार पूरे किए जाएं और इसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे समय-समय पर कार्यों का निरीक्षण करें और सुनिश्चित करें कि नहरों की सफाई ठीक प्रकार से हो रही है।

अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे नहरों की सफाई के लिए नवीनतम तकनीकों का उपयोग करें और कार्यों का पूर्ण रिकॉर्ड रखें। इससे भविष्य में किसी भी जांच या सत्यापन के दौरान आवश्यक साक्ष्य उपलब्ध होंगे और पारदर्शिता बनी रहेगी।

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो: उत्तरप्रदेश कौशल विकास मिशन को सर्वश्रेष्ठ स्टॉल का सम्मान

लखनऊ: ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन को सर्वश्रेष्ठ स्टॉल का पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इस आयोजन में यूपी कौशल विकास मिशन का पवेलियन आगंतुकों के बीच खास आकर्षण का केंद्र रहा, जहां पर विभिन्न उभरते हुए तकनीकी और व्यावसायिक कौशलों का लाइव प्रदर्शन किया गया।

इस मौके पर केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह और उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग राकेश सचान ने कौशल विकास मिशन की अपर मिशन निदेशक प्रिया सिंह को सर्वश्रेष्ठ स्टॉल का पुरस्कार स्वरूप ट्रॉफी भेंट कर सम्मानित किया। यह पुरस्कार मिशन के उत्कृष्ट प्रदर्शन और युवाओं के कौशल विकास के प्रति समर्पण का प्रमाण है।

प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को नई तकनीकों से प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें। इस स्टॉल को मिले सम्मान से यह सिद्ध होता है कि हमारा प्रदेश कौशल के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है।

प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने बताया कि इस पवेलियन में कई महत्वपूर्ण कौशलों का लाइव प्रदर्शन किया जा रहा है, जिनमें मेडिकल सपोर्ट, सोलर पैनल इंस्टॉलेशन, वर्चुअल रियलिटी (माइनिंग सिम्युलेटर और पेंटिंग एवं फायर फाइटिंग सिम्युलेटर), हैंड एम्ब्रॉयडरी, फॉरेन लैंग्वेज लर्निंग, मेटल एनग्रेविंग, एनिमेशन, ड्रोन टेक्नोलॉजी और पंचकर्म टेक्नीशियन शामिल हैं। इन कौशलों के प्रति आगंतुकों में विशेष रुचि देखी जा रही है, जो राज्य के युवाओं के लिए संभावनाओं का एक नया द्वार खोल रही है।

गौतम बुद्ध नगर: ज़िलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा की अध्यक्षता में व्यापार बंधुओं की बैठक संपन

डीएम ने व्यापारियों के सम्मुख आने वाली समस्याओं का त्वरित गति के साथ निस्तारण के निर्देश दिये

गौतमबुद्धनगर/लखनऊ: जनपद गौतम बुद्ध नगर में व्यापारिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने एवं व्यापारियों के सम्मुख आने वाली समस्याओं का त्वरित गति के साथ निस्तारण संभव कराने के उद्देश्य से आज जिला अधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने कैंप कार्यालय सेक्टर 27 नोएडा के सभागार में व्यापार बंधु की बैठक की अध्यक्षता करते हुए सभी व्यापार बंधुओं की समस्याओं को बहुत ही गहनता के साथ अनुश्रवण किया।

आयोजित बैठक में विभिन्न व्यापारिक प्रतिनिधियों के द्वारा जीएसटी विभाग एवं भंगेल एलिवेटेड रोड, दादरी अतिक्रमण, जाम एवं पार्किंग, सड़कों की मरम्मत, बिजली चोरी आदि समस्याओं जिलाधिकारी को अवगत कराया गया।

जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी अधिकारी गण व्यापारियों की समस्याओं का निराकरण तत्परता के साथ सुनिश्चित करें ताकि जनपद का व्यापार और अधिक तेजी से आगे बढ़ सके। उन्होंने जी०एस०टी० विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि उनके द्वारा अभियान चलाकर जनपद में अपंजीकृत व्यापारियों को पंजीयन जारी किये जाने की कार्यवाही सुनिश्चित की जाये। साथ ही नगर पालिका दादरी के अधिकारियों को निर्देश दिये कि दादरी में अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाये जाने की कार्यवाही सुनिश्चित की जायें।बैठक में उपायुक्त (प्रशासन) राज्य कर अधिकारी, ए०आर०टी०ओ० (ई), ए०सी०पी० ट्रैफिक एवं अन्य संबंधित अधिकारियों तथा व्यापार मण्डल के पदाधिकारीगणों के द्वारा भाग लिया गया।
सौजन्य से सूचना विभाग गौतमबुद्धनगर।

लखनऊ: हाईकोर्ट ने चाइनीज लहसुन की बिक्री पर जताई सख्त नाराज़गी, खाद्य सुरक्षा आयुक्त और डीएम को जांच के आदेश

लखनऊ, 28 सितंबर 2024: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रतिबंधित चाइनीज लहसुन की बिक्री का मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए खाद्य सुरक्षा आयुक्त और लखनऊ के डीएम को तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब 2014 से चाइनीज लहसुन पर प्रतिबंध लगा हुआ है, तो यह कैसे खुलेआम बाजारों में बिक रहा है?

चाइनीज लहसुन की बिक्री पर क्यों लगा प्रतिबंध?

चाइनीज लहसुन, जो चीन के शेडोंग प्रांत में उगाया जाता है, आकार में बड़ा और देखने में अधिक आकर्षक होता है। इसका रंग सफेद और चमकदार होता है, जो इसे सामान्य लहसुन से अलग करता है। हालांकि, यही लहसुन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना गया है क्योंकि इसमें कई खतरनाक धातुएं जैसे जिंक, आर्सेनिक, और सिंथेटिक रसायन पाए जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह लहसुन खाने से लीवर संबंधी समस्याएं और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा हो सकता है।

चाइनीज लहसुन पर भारत में 2014 में प्रतिबंध लगा दिया गया था, क्योंकि इसके सेवन से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी खतरों की पुष्टि की गई थी। इसके बावजूद, लखनऊ सहित कई बाजारों में यह धड़ल्ले से बिक रहा है, जो खाद्य सुरक्षा अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है।

कोर्ट में पहुंचे वकील, साथ लाए चाइनीज लहसुन

मामले की सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता मोतीलाल यादव ने अदालत के सामने चाइनीज लहसुन से जुड़े खतरे और उसकी बिक्री के बारे में विस्तार से जानकारी दी। यादव ने चिनहट के बाजार से खरीदा गया चाइनीज लहसुन कोर्ट में पेश किया, जिसे देखकर जज भी हैरान रह गए। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत खाद्य सुरक्षा आयुक्त और लखनऊ के जिलाधिकारी को जांच के आदेश दिए।

हाईकोर्ट ने कहा, “2014 से चाइनीज लहसुन पर प्रतिबंध है, फिर भी यह बाजार में बिक रहा है। प्रशासन इसे रोकने के लिए क्या कदम उठा रहा है?” कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि खाद्य सुरक्षा विभाग और STF (स्पेशल टास्क फोर्स) ने अब तक क्या कार्रवाई की है?

नेपाल के रास्ते भारत में आ रहा है चाइनीज लहसुन

जांच में सामने आया है कि चाइनीज लहसुन नेपाल के रास्ते भारत में लाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों, जैसे महराजगंज, बहराइच, और लखीमपुर खीरी, से चाइनीज लहसुन की तस्करी हो रही है। इन जिलों की सीमा नेपाल से सटी हुई है, जिससे तस्करों के लिए यह रास्ता आसान हो जाता है। भारत-नेपाल की खुली सीमा का फायदा उठाकर चाइनीज लहसुन को अवैध तरीके से देश में प्रवेश कराया जा रहा है।

चाइनीज लहसुन की पहचान और स्वास्थ्य पर असर

चाइनीज लहसुन को आसानी से पहचाना जा सकता है। इसका आकार सामान्य लहसुन से बड़ा होता है और रंग अत्यधिक सफेद और चमकीला होता है। यह लहसुन दिखने में बेहद आकर्षक होता है, जिससे लोग इसे खरीदने में झिझक नहीं करते। हालांकि, यह लहसुन स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। इसमें जिंक और आर्सेनिक जैसी खतरनाक धातुएं पाई जाती हैं, जो शरीर में घातक बीमारियों का कारण बन सकती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, चाइनीज लहसुन में इस्तेमाल होने वाले सिंथेटिक रसायन लीवर के लिए बेहद नुकसानदायक होते हैं। लंबे समय तक इसका सेवन करने से लीवर की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, इसमें मौजूद हानिकारक धातुएं शरीर में जमा होकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती हैं।

एफएसडीए (खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन) और STF की कार्रवाई

हाईकोर्ट के आदेश के बाद, खाद्य सुरक्षा विभाग और STF की संयुक्त टीम ने लखनऊ की मंडियों में छापेमारी शुरू कर दी है। टीमों ने कई बाजारों में जाकर चाइनीज लहसुन की बिक्री की जांच की और कुछ दुकानों से नमूने भी एकत्रित किए। चिनहट बाजार, जहां चाइनीज लहसुन धड़ल्ले से बिक रहा था, वहां कई दुकानों पर छापेमारी की गई।

STF ने चाइनीज लहसुन के व्यापार से जुड़े तस्करों का भी पता लगाने के लिए कार्रवाई शुरू की है। नेपाल से लाकर इसे यूपी के विभिन्न जिलों में वितरित किया जा रहा है, जिसमें कुछ बड़ी मंडियों का भी नाम सामने आया है।

कोर्ट ने तंत्र बनाने के दिए निर्देश

हाईकोर्ट ने यह भी पूछा कि प्रशासन चाइनीज लहसुन की बिक्री को रोकने के लिए क्या तंत्र अपना रहा है। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाजारों में नियमित रूप से जांच की जाए और अगर किसी दुकान पर प्रतिबंधित चाइनीज लहसुन पाया जाता है, तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

अदालत ने यह भी कहा कि चाइनीज लहसुन के खतरों के बारे में आम जनता को जागरूक करना बेहद जरूरी है। बाजारों में जो लोग इस लहसुन को बेच रहे हैं, उन्हें इसके स्वास्थ्य संबंधी खतरों के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि वे इसे बेचना बंद कर दें।

आखिर क्यों बिक रहा है चाइनीज लहसुन?

चाइनीज लहसुन, अपने बड़े आकार और आकर्षक रंग के कारण, भारतीय बाजार में लोकप्रिय है। लोग इसकी ओर आकर्षित होते हैं, लेकिन उन्हें इसके खतरों के बारे में जानकारी नहीं होती। चूंकि यह लहसुन सामान्य लहसुन की तुलना में दिखने में बेहतर होता है, इसलिए दुकानदार इसे आसानी से बेच देते हैं।

इसके अलावा, इसका मूल्य भी सामान्य लहसुन की तुलना में कम होता है, जिससे इसकी बिक्री बढ़ जाती है। लेकिन इसकी सस्ती कीमत के पीछे छिपे स्वास्थ्य खतरों के बारे में लोगों को शायद ही पता हो।

हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणियां

हाईकोर्ट ने चाइनीज लहसुन की अवैध बिक्री पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह गंभीर स्वास्थ्य समस्या का कारण बन सकता है। कोर्ट ने खाद्य सुरक्षा विभाग से यह सुनिश्चित करने को कहा कि बाजारों में इस लहसुन की बिक्री तुरंत रोकी जाए। कोर्ट ने अधिकारियों से यह भी कहा कि वे सुनिश्चित करें कि किसी भी बाजार में चाइनीज लहसुन की खेप न पहुंचे।

अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच इस मामले में 1 अक्टूबर 2024 को फिर से सुनवाई करेगी, जिसमें खाद्य सुरक्षा आयुक्त और डीएम लखनऊ को अपनी जांच रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया है। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि अगर जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गैर-जिम्मेदाराना रवैया सामने आया, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इस मुद्दे पर अब सभी की नजरें 1 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी हैं, जिसमें यह स्पष्ट होगा कि चाइनीज लहसुन की बिक्री पर रोक लगाने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाएगा और तस्करों के खिलाफ किस प्रकार की कार्रवाई की जाएगी।


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