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श्री हनुमान टेकरी धाम: भूमाफ़िया अमरेन्द्र यादव ने आयोजन के लिए संगठनों का सहारा लिया, आयोजन पर विवाद की आशंका

लखनऊ, बख्शी का तालाब (बीकेटी): पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ के उत्तरी ज़ोन के बीकेटी तहसील के अन्तर्गत विकास खण्ड चिनहट के फ़र्रुख़ाबाद ग्राम पंचायत के सैदापुर गाँव में हाल ही में बड़ा विवाद उत्पन्न होने की आशंका है, अब भूमाफ़िया अमरेन्द्र यादव पैसों के दम पर विभिन्न संगठनों का सहारा लेकर “श्री हनुमान टेकरी धाम” में एक धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन करने की फ़िराक़ में है, दरअसल इसके आयोजन के पीछे की जो वजह है वो पूर्णतया मंदिर परिसर में क़ाबिज़ होने की नीयत है, जो कि इसने पिछले भंडारे के वक्त सार्वजनिक रूप से ज़बरदस्ती महंत रामेश्वर दास जी से मंदिर का महंत बनाने के रूप में ज़ाहिर करने के बाद सार्वजनिक रूप से ही एक पत्रकार को भी देख लेने की धमकी दी थी।

उसके बाद मंदिर परिसर में डेरा डाल लिया था, जिस उच्च स्तरीय शिकायत होने के बाद लगभग 10 दिन बाद इस भूमाफ़िया अमरेन्द्र यादव को एसएचओ सैरपुर जितेन्द्र कुमार गुप्ता ने मौक़े पर पहुँचकर इसे इसकी फॉर्च्यूनर कार समेत मंदिर से बाहर का रास्ता दिखाते हुए दोबारा मंदिर में दख़लंदाज़ी न करने के लिए कहा था।

बीती जनवरी में अमरेन्द्र व उसके गुर्गों को मंदिर परिसर से हटाए जाने की खबर

अब एक बार फिर से श्री हनुमान टेकरी धाम में क़ब्ज़े की नीयत से यह भूमाफ़िया सक्रिय हो गया है, फ़िलहाल खबर लिखे जाने तक इस भूमाफ़िया को किसी भी आयोजन के लिए अनुमति नहीं दी गई थी।

धार्मिक आयोजन और विवाद की शुरुआत

यह विवाद तब शुरू हुआ जब भूमाफ़िया प्रवृत्ति के अमरेन्द्र यादव ने श्री हनुमान टेकरी धाम में पुनः एक आयोजन का ऐलान किया। जब इसकी विवादित छवि को मद्देनज़र रखते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा इसको आयोजन के संबंध में अनुमति नहीं दी गई तो इसने हिन्दू धर्म के अनुयायियों का समर्थन जुटाने के लिए कई संगठनों से मदद माँगी। भूमाफ़िया अमरेन्द्र यादव ने पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए इस आयोजन को धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर प्रचारित किया और पुलिस पर आरोप लगाया कि वे धार्मिक आयोजन को रोकने के लिए दबाव डाल रहे हैं। इसके साथ ही इसने पुलिस पर हिन्दू धर्म के अनुयायियों के अधिकारों का हनन करने जैसा बेबुनियादी आरोप भी लगाया।

श्री हनुमान टेकरी धाम के नाम पर आयोजन के संबंध में पुलिस और प्रशासन का पक्ष

पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने अमरेन्द्र यादव के इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अमरेन्द्र यादव के खिलाफ पहले से ही लोगों के पैसे हड़पने, अवैध जमीन कब्जे और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के कई मामले लंबित हैं। अधिकारियों का कहना है कि यादव धार्मिक कार्यक्रम की आड़ में अपनी अवैध गतिविधियों को ढकने की कोशिश कर रहे हैं। दरअसल, यादव पर पहले से ही सरकारी जमीनों पर कब्जा करने, तालाबों और चकमार्गों की जमीन बेचने के गंभीर आरोप हैं। मुंबई के जिस कंपनी में यह कोई कार्य करता था उनसे भी ज़मीन के नाम पर 10 लाख रुपये हड़प लिया और आज तक वो लखनऊ के चक्कर काट रहे हैं, इस माफिया प्रवृत्ति के युवक ने आजतक उन्हें उनका पैसा वापस नहीं लौटाया, अब आप ही बताइए कि इस प्रवृत्ति का गृहस्थ में रहने वाला एक अर्द्ध साधु वेशधारी क्या वाक़ई में साधु हो सकता है, इस पर गंभीर जाँच कर कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है।

स्थानीयों समेत पुलिस का भी मानना है कि श्री हनुमान टेकरी धाम के आयोजन के पीछे अमरेन्द्र यादव की मंशा मंदिर पर कब्जा करने की है। यह स्थिति तब और भी गंभीर हो गई है जब बीती जनवरी में मंदिर परिसर में हुए भंडारे के दौरान अमरेन्द्र यादव ने मंदिर के महंत रामेश्वर दास जी से बदसलूकी की। अमरेन्द्र ने महंत जी को ख़ुद को मंदिर का महंत बनने के लिए न सिर्फ़ दबाव बनाया बल्कि सार्वजनिक रूप से मंदिर परिसर में ही अपमानित भी किया था। जब महंत जिनके कहने पर भंडारे में मौजूद एक स्थानीय पत्रकार ने महंत जी के समर्थन में आवाज उठाई, तो यादव और उसके गुर्गों ने उस पत्रकार को धमकियाँ दीं और उसके साथ बवाल किया। पत्रकार ने इस धमकी के खिलाफ स्थानीय सैरपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी और मामले में उचित कार्रवाई की मांग की थी। जिसके बाद अमरेन्द्र के ख़िलाफ़ एक के बाद एक कार्रवाई हो रही हैं जिसका विवरण स्थानीय पुलिस प्रशासन से प्राप्त किया जा सकता है।

अमरेन्द्र द्वारा महंत और स्थानीय समाज का विरोध

महंत रामेश्वर दास जी और स्थानीय समाज ने अमरेन्द्र यादव के इन कृत्यों का कड़ा विरोध किया है। महंत जी का कहना है कि अमरेन्द्र यादव का उद्देश्य धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि मंदिर परिसर पर अवैध कब्जा करना है। अमरेन्द्र ने धार्मिक आयोजन की आड़ में मंदिर की संपत्तियों पर अपना नियंत्रण जमाने की कोशिश की, जो कि पूरी तरह से अस्वीकार्य है। इस घटना से स्थानीय समाज में भी गहरा आक्रोश है, और लोगों ने पुलिस और प्रशासन से इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

आपराधिक पृष्ठभूमि और साधु वेश का सहारा

अमरेन्द्र यादव की आपराधिक गतिविधियाँ नई नहीं हैं। वह हाल ही में एक मामले में जेल जाकर भी आया है और उसके खिलाफ पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ के जॉइंट पुलिस कमिश्नर के न्यायालय में गुंडा एक्ट का मामला भी लंबित है। उसकी भूमाफ़िया प्रवृत्ति और आपराधिक मानसिकता का प्रमाण यह भी है कि उसने अपने गाँव उमरभारी के पास स्थित पल्हरी गाँव में स्थित अपनी प्लानिंग में सरकारी तालाब, चकमार्ग, और अन्य सरकारी जमीनों को भी बेच दिया है। जिसकी विस्तृत जाँच हुई तो इस धन से अर्जित अकूत संपत्तियों को कुर्क होना तय है। इसके कारण स्थानीय लोगों में भी गहरा आक्रोश है, लेकिन अमरेन्द्र यादव की आपराधिक छवि और उसके गुर्गों के डर के कारण लोग खुलकर इस भूमाफ़िया का विरोध नहीं कर पा रहे हैं।

भूमाफ़िया अमरेन्द्र यादव अपने आपराधिक कृत्यों को ढकने के लिए गृहस्थ होने के बावजूद समय-समय पर साधु वेश भी धारण कर लेता है। उसने अपनी गतिविधियों को धार्मिकता का आवरण देने की कोशिश की है ताकि लोगों का ध्यान उसके अवैध कार्यों से हट सके। हालाँकि, स्थानीय प्रशासन और पुलिस को उसकी यह चाल समझ में आ चुकी है। इसी कारण से पुलिस ने “श्री हनुमान टेकरी धाम” के आसपास किसी भी प्रकार के धार्मिक या अन्य आयोजन की अनुमति नहीं दी है।

जनवरी में भंडारे के दिन की घटना और पत्रकार पर हमले की कोशिस

बीती जनवरी में मंदिर परिसर में हुए भंडारे के दौरान अमरेन्द्र यादव ने महंत रामेश्वर दास जी को जबरन मंदिर का महंत बनाने के लिए अपमानित किया। जब इस पर एक स्थानीय पत्रकार ने विरोध किया, तो यादव और उसके गुर्गों ने पत्रकार को धमकी दी और उसे देख लेने की बात कही। यह घटना भंडारे के दौरान सार्वजनिक रूप से हुई, जिससे आयोजन में मौजूद लोगों में खलबली मच गई। पत्रकार ने इस घटना की शिकायत स्थानीय सैरपुर थाने में की और मामले में सख्त कार्रवाई की माँग की। इस घटना के बाद से स्थानीय समाज में तनाव की स्थिति बनी हुई है।

श्री हनुमान टेकरी धाम पर कब्जे की साजिश

अमरेन्द्र यादव ने श्री हनुमान टेकरी धाम के आयोजन के माध्यम से मंदिर पर कब्जे की योजना बनाई है। उसकी मंशा है कि वह हिन्दू संगठनों के समर्थन का इस्तेमाल कर मंदिर की संपत्तियों को अपने कब्जे में ले ले। हालांकि, पुलिस और प्रशासन की सतर्कता के कारण उसकी यह योजना विफल होती दिख रही है और प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि अमरेन्द्र यादव को श्री हनुमान टेकरी धाम और उसके आसपास की किसी भी सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार के आयोजन की अनुमति नहीं दी जाएगी।उसको अगर आयोजन ही करना है तो पास में ही उसका घर है वहाँ कर ले या फिर किसी निजी भूमि में कर ले, तब उसको कोई मदद चाहिए तो बताए लेकिन इस प्रकार से विवाद उत्पन्न करने के बाद मंदिर परिसर या फिर आसपास की सार्वजनिक भूमि में आयोजन की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

समाज में बढ़ता आक्रोश

अमरेन्द्र यादव की इन गतिविधियों के खिलाफ स्थानीय लोगों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। कई लोग प्रशासन से अपील कर रहे हैं कि यादव के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए और उसकी अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाई जाए। लोगों का कहना है कि यादव जैसे अपराधियों को धार्मिक आयोजनों का सहारा लेकर अपनी आपराधिक गतिविधियों को छुपाने का अवसर नहीं मिलना चाहिए। भूमाफिया अमरेन्द्र यादव की आपराधिक गतिविधियों और श्री हनुमान टेकरी धाम में धार्मिक आयोजन के बहाने मंदिर पर कब्जे की साजिश ने स्थानीय समाज में गंभीर तनाव पैदा कर दिया है। पुलिस और प्रशासन ने यादव के आरोपों को खारिज करते हुए उसकी अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की दिशा में काम किया है। इस पूरे मामले से यह स्पष्ट होता है कि धार्मिकता का सहारा लेकर अपराधी अपनी गतिविधियों को ढकने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन सतर्क प्रशासन और समाज इसे रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने भूमाफ़िया अमरेन्द्र यादव के किसी भी आयोजन को अनुमति देने से इनकार कर दिया है, जिससे समाज में एक सकारात्मक संदेश गया है कि कानून का पालन हर हाल में किया जाएगा, चाहे व्यक्ति कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो।

शारदीय नवरात्रि: आस्था, परंपरा और वैज्ञानिक महत्व

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शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म में सबसे प्रमुख और पवित्र त्योहारों में से एक है, जिसे पूरे भारतवर्ष में अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। यह पर्व देवी दुर्गा के नौ रूपों की आराधना के लिए समर्पित है और खासतौर पर अश्विन महीने में आता है, जिसे अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार सितंबर-अक्टूबर के बीच मनाया जाता है। इस त्योहार का नाम “नवरात्रि” दो शब्दों ‘नव’ और ‘रात्रि’ से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है ‘नौ रातें’। इन नौ रातों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है।

शारदीय नवरात्रि में माता दुर्गा को शक्ति, धैर्य और साहस की देवी माना जाता है, और उनकी पूजा से भक्त जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और समृद्धि प्राप्त करने की कामना करते हैं। इस लेख में हम शारदीय नवरात्रि के धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

शारदीय नवरात्रि का इतिहास और पौराणिक कथा

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शारदीय नवरात्रि के पीछे कई पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं। सबसे प्रमुख कथा महिषासुर और देवी दुर्गा की है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, महिषासुर नामक एक अत्याचारी राक्षस ने भगवान शिव से वरदान प्राप्त किया था कि उसे कोई देवता नहीं मार सकेगा। इस वरदान के कारण महिषासुर अत्यंत शक्तिशाली हो गया और देवताओं को हराकर स्वर्ग पर अपना अधिकार जमा लिया।

देवताओं की प्रार्थना पर देवी दुर्गा प्रकट हुईं और नौ दिनों तक महिषासुर के साथ युद्ध करने के बाद दसवें दिन उसे मार दिया। यह दिन विजयादशमी या दशहरा के रूप में मनाया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस तरह, शारदीय नवरात्रि में देवी दुर्गा की महिमा और शक्ति की पूजा की जाती है।

नवरात्रि का धार्मिक महत्व

शारदीय नवरात्रि का धार्मिक महत्व बहुत गहरा है। इसे धर्म, शक्ति और अध्यात्म का प्रतीक माना जाता है। इस पर्व के दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है:

  1. शैलपुत्री: प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है, जो पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं और नारी शक्ति का प्रतीक हैं।
  2. ब्रह्मचारिणी: दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है, जो तपस्या और भक्ति की देवी मानी जाती हैं।
  3. चंद्रघंटा: तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है, जो साहस और धैर्य का प्रतीक हैं।
  4. कूष्मांडा: चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा होती है, जो ब्रह्मांड की रचना करने वाली मानी जाती हैं।
  5. स्कंदमाता: पांचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा होती है, जो भगवान कार्तिकेय की माता हैं और मोक्ष का प्रतीक हैं।
  6. कात्यायनी: छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा होती है, जो ज्ञान और विवेक का प्रतीक मानी जाती हैं।
  7. कालरात्रि: सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है, जो नकारात्मक शक्तियों का नाश करती हैं।
  8. महागौरी: आठवें दिन मां महागौरी की पूजा होती है, जो पवित्रता और शुद्धता का प्रतीक हैं।
  9. सिद्धिदात्री: नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है, जो आठ सिद्धियों की दाता मानी जाती हैं।

नवरात्रि का सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व

शारदीय नवरात्रि का सांस्कृतिक महत्व भी अत्यधिक है। यह पर्व देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा में दुर्गा पूजा के रूप में इसे अत्यंत भव्यता के साथ मनाया जाता है। यहां भव्य पंडाल सजाए जाते हैं, जिसमें मां दुर्गा की मूर्तियों की स्थापना की जाती है और नौ दिनों तक विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।

गुजरात में नवरात्रि के दौरान गरबा और डांडिया का आयोजन किया जाता है। इस दौरान लोग पारंपरिक पोशाक में रंग-बिरंगे कपड़े पहनते हैं और नृत्य करते हैं। दक्षिण भारत में लोग घरों में गोलू का आयोजन करते हैं, जिसमें देवी-देवताओं की मूर्तियों का प्रदर्शन किया जाता है।

उत्तर भारत में, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली में रामलीला का आयोजन किया जाता है, जिसमें भगवान राम के जीवन और रावण के साथ उनके युद्ध को नाटकीय रूप से प्रस्तुत किया जाता है। दशहरे के दिन रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

नवरात्रि व्रत और पूजा विधि

नवरात्रि के दौरान व्रत रखने का विशेष महत्व है। भक्त लोग इस दौरान सात्विक भोजन करते हैं और भगवान की भक्ति में लीन रहते हैं। व्रत रखने से शरीर और मन की शुद्धि होती है और आत्मा को परमात्मा के निकट लाने का प्रयास किया जाता है। व्रत के दौरान लोग फल, दूध और सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजनों का सेवन करते हैं।

नवरात्रि के दौरान घरों और मंदिरों में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। देवी दुर्गा की मूर्ति या चित्र स्थापित कर उनकी पूजा की जाती है। मां को फूल, नारियल, चुनरी और श्रृंगार का सामान अर्पित किया जाता है। नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाने और दुर्गा सप्तशती का पाठ करने का भी विशेष महत्व है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नवरात्रि

शारदीय नवरात्रि केवल धार्मिक और सांस्कृतिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह पर्व मौसम परिवर्तन के समय आता है, जब वर्षा ऋतु से शरद ऋतु का आगमन होता है। इस समय शरीर में विभिन्न प्रकार के संक्रमण और बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है।

नवरात्रि के दौरान उपवास करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और शरीर के भीतर शुद्धिकरण की प्रक्रिया होती है। व्रत के दौरान हल्का और सात्विक भोजन करने से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलते हैं और पाचन तंत्र भी दुरुस्त रहता है। इस समय उपवास को आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से भी लाभकारी माना गया है।

इसके अलावा, नवरात्रि के दौरान ध्यान और प्रार्थना करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है। अध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह समय आत्मचिंतन और आत्मनिरीक्षण का भी होता है, जब व्यक्ति अपने भीतर की शक्तियों को पहचानने का प्रयास करता है।

नवरात्रि और अर्थव्यवस्था

शारदीय नवरात्रि का प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। इस दौरान व्यापार में तेजी देखी जाती है। लोग नए वस्त्र, आभूषण, पूजा सामग्री, और घर की सजावट के सामान खरीदते हैं। साथ ही, दुर्गा पूजा और रामलीला के आयोजन से जुड़े क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।

मेला, प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होने से पर्यटन उद्योग को भी बढ़ावा मिलता है। खासतौर पर पश्चिम बंगाल, गुजरात, और उत्तर भारत में इस समय पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।

शारदीय नवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह भारतीय समाज के जीवन में आस्था, संस्कृति, अध्यात्म और वैज्ञानिक सोच का प्रतीक है। यह त्योहार हमें न केवल देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर देता है, बल्कि हमें बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश भी देता है।

यह पर्व आत्मचिंतन, मन की शुद्धि और शरीर को रोगों से दूर रखने का समय है। शारदीय नवरात्रि हमें अपने जीवन में सदाचार, धर्म और न्याय के पथ पर चलने की प्रेरणा देती है। इस त्योहार का वैज्ञानिक महत्व हमें बताता है कि कैसे पुरानी परंपराएं हमारे स्वास्थ्य और समाज के लिए भी लाभकारी हैं।

इस नवरात्रि, आइए हम सभी मां दुर्गा से प्रार्थना करें कि वह हमें शक्ति, साहस और धैर्य प्रदान करें ताकि हम जीवन की हर चुनौती का सामना कर सकें और सच्चाई के पथ पर अग्रसर रहें।

लखनऊ: गांधी जयंती पर डॉ.राजेश्वर सिंह ने लगवाए 100 से अधिक भाजपा सदस्यता शिविर

डॉ.राजेश्वर के सदस्यता शिविरों के माध्यम से बड़ी संख्या में भाजपा से जुड़े युवा, लिया राष्ट्र प्रथम की विचारधारा को आगे बढ़ाने का संकल्प

लखनऊ: सरोजनीनगर विधायक डॉ.राजेश्वर सिंह द्वारा बुधवार को गांधी-शास्त्री जयंती के अवसर पर शक्ति केंद्र स्तरीय सदस्यता अभियान संचालित किया गया। सदस्यता अभियान के अंतर्गत सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र के सभी 6 मंडलों सरोजनीनगर दक्षिण प्रथम, द्वितीय, तृतीय तथा सरोजनीनगर, अर्जुनगंज और खुशहालगंज में 100 से अधिक सदस्यता शिविर आयोजित किए गए।

सदस्यता शिविरों पर पार्टी द्वारा उपलब्ध कराए गए नंबर पर मिसकॉल और नरेंद्र मोदी डॉट ओआरजी वेबसाइट पर क्लिक के माध्यम से बड़ी संख्या में उत्साहित युवाओं ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की और राष्ट्र प्रथम की विचारधारा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

बता दें कि सरोजनीनगर विधायक द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती के अवसर पर 25 सितंबर को सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में बूथ स्तरीय सदस्यता अभियान संचालित कर 550 से अधिक सदस्यता शिविर लगवाए गए थे।

लखनऊ: बीकेटी के अस्ती स्थित विद्यालय में मद्य निषेध विभाग द्वारा नशा मुक्ति पर कार्यशाला का आयोजन, बच्चों ने लिया नशा न करने का संकल्प

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार के मद्य निषेध विभाग ने मंगलवार को बख्शी का तालाब के महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज, अस्ती में एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराना और समाज में नशामुक्ति का संदेश फैलाना था।

कार्यक्रम की शुरुआत पोस्टर और निबंध प्रतियोगिताओं के साथ हुई, जिसमें छात्रों ने नशा मुक्ति विषय पर अपनी रचनात्मकता और विचारों को प्रस्तुत किया। इसके बाद छात्रों ने दौड़ प्रतियोगिता में भाग लिया, जिसमें उन्होंने जोश और उत्साह के साथ सहभागिता की।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण कठपुतली शो रहा, जिसमें नशे से होने वाली गंभीर बीमारियों और इसके दुष्परिणामों को रोचक तरीके से प्रस्तुत किया गया। कठपुतली शो के माध्यम से बच्चों को यह समझाया गया कि नशा किस प्रकार उनके स्वास्थ्य और समाज को प्रभावित करता है। इस अवसर पर सभी छात्रों और उपस्थित लोगों ने नशा न करने की शपथ ली।

प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस आयोजन में लगभग 300 छात्रों ने भाग लिया, जिन्होंने नशामुक्ति का समर्थन किया।

कार्यक्रम के समापन में वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया गया। क्षेत्रीय मद्य निषेध अधिकारी ब्रजमोहन, जिला मद्य निषेध अधिकारी नीतू वर्मा, पर्यावरणविद कृष्णानंद राय और विद्यालय के प्रबंधक एवं कुकरेल नदी के भागीरथ अनिल कुमार सिंह ने विद्यालय परिसर में केला और अशोक के पौधे लगाए। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षक, और अन्य स्टाफ भी उपस्थित रहे।

इस कार्यशाला ने न केवल बच्चों को नशा मुक्ति के प्रति जागरूक किया, बल्कि उन्हें पर्यावरण संरक्षण के महत्व को भी समझाया। इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो आने वाली पीढ़ी को एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य की ओर ले जाएंगे।

उल्लास-उमंग के त्योहारी माहौल में सब मिलकर करें प्रयास, ताकि न हो कोई अप्रिय घटना: मुख्यमंत्री

  • नवरात्र से छठ तक 24×7 अलर्ट रहे पुलिस और प्रशासन: मुख्यमंत्री
  • बीते वर्षों से सबक लेकर बनाएं कार्ययोजना, बढ़ानी होगी पुलिस पेट्रोलिंग: मुख्यमंत्री
  • मुख्यमंत्री का निर्देश, अगले दो दिन में दुर्गा पूजा कमेटियों से संवाद करें, आस्था को आहत करने वाली न हो कोई घटना
  • मुख्यमंत्री का निर्देश, सड़क खोद कर पंडाल न बनाया जाए, पंडाल बनाते समय यातायात की सुगमता का रखें ध्यान
  • दीपावली से पहले उज्ज्वला योजना के हर लाभार्थी के घर पर होगा निःशुल्क रसोई गैस सिलेंडर: मुख्यमंत्री
  • त्योहारों में होंगे सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, मुख्यमंत्री का निर्देश, बीट सिपाही-हल्का इंचार्ज से लेकर वरिष्ठ अधिकारी सड़कों पर उतरे, आम जन को हो सुरक्षा का अहसास
  • वरासत, नामांतरण, पारिवारिक बंटवारा, पैमाइश से जुड़े मामलों के निस्तार में न हो देरी, तत्काल हो समाधान
  • मुख्यमंत्री का निर्देश, पर्व-त्योहारों पर ग्रामीण रूट पर बढ़ाएं बसें, सड़क पर न दिखें डग्गामार, खस्ताहाल बसें
  • रेलवे ट्रैक को बाधित करने के प्रयासों में बड़ी साजिश की आशंका, चौकीदार जैसे इंटेलिजेंस सिस्टम को सक्रिय बनाना जरूरी: मुख्यमंत्री

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पर्व-त्योहारों के अवसर पर पुलिस और प्रशासन को 24×7 अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि सभी जिले विगत वर्षों में त्योहारों के समय प्रदेश में घटी हर छोटी-बड़ी घटना का आंकलन करें और ऐसी व्यवस्था बनाएं कि इस वर्ष शारदीय नवरात्र से छठ तक के पूरे त्योहारी माहौल में कहीं भी एक भी अप्रिय घटना न घटे। उल्लास और उमंग का यह समय शांति और सौहार्द पूर्ण माहौल में बीते, इसके लिए बीट सिपाही से लेकर चौकी, थाना, जिला, रेंज, ज़ोन, मंडल में तैनात हर अधिकारी को प्रयास करना होगा।

मंगलवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलाधिकारी व पुलिस कप्तानों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने त्योहारी माहौल में जिला स्तर पर बेहतर कानून-व्यवस्था के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री जी द्वारा दिये गए प्रमुख दिशा-निर्देश

● अगले दो दिनों में सभी दुर्गा पूजा कमेटियों से थाना, सर्किल और जनपद स्तर पर संवाद कर लिया जाए। कहीं भी सड़क खोद कर पंडाल न बनाया जाए। पंडाल बनाते समय यातायात की सुगमता का पूरा ध्यान रखा जाए। प्रतिमा की ऊंचाई एक सीमा से अधिक न हो। कमेटियों से बातचीत कर यह सुनिश्चित कराएं कि उनके परिसर में ऐसा कोई कृत्य नहीं होगा, जिससे किसी अन्य की आस्था आहत हो। फूहड़ अथवा कानफोड़ू गीत-संगीत-नृत्य नहीं होना चाहिए। कमेटी द्वारा पंडाल व आस-पास साफ-सफाई का माहौल बना कर रखना होगा।

● प्रतिमा विसर्जन का रूट पहले से स्पष्ट होना चाहिए। यह सुनिश्चित कर लें कि प्रतिमा विसर्जन रूट पर कहीं हाईटेंशन लाइन न हो। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी। पंडालों में फायर सेफ्टी के संबंध में आवश्यक प्रबन्ध होने चाहिए।

● बीट सिपाही से लेकर हल्का इंचार्ज और पुलिस कप्तान सहित हर अधिकारी सड़क पर उतरे। त्योहार के दिनों में कुछ अराजक तत्व माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में पुलिस को अलर्ट रहना होगा। आम आदमी को उसकी सुनिश्चित सुरक्षा के लिए पूरा भरोसा दिलाना होगा।

● शारदीय नवरात्र के समय यद्यपि सभी देवी स्थानों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। इसका ध्यान रखते हुए आवश्यक पुलिस बल की तैनाती की जानी चाहिए। मीरजापुर में माँ विंध्यवासिनी धाम, सहारनपुर में मां शाकुम्भरी मंदिर, वाराणसी में विशालाक्षी मंदिर और बलरामपुर में माँ पाटेश्वरी धाम में श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के दृष्टिगत बेहतर प्रबंध होने चाहिए। प्रत्येक मंदिर परिसर में साफ-सफाई होनी चाहिए।

● पर्व-त्योहार के समय बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं। परिवहन निगम को ग्रामीण रूट पर बसों को बढ़ाने की आवश्यकता है। यह सुनिश्चित कराएं की पुलिस हो या बस ड्राइवर/कंडक्टर, लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करें। डग्गामार, खस्ताहाल बसों का उपयोग नहीं होना चाहिए। नगरीय क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक बस सेवा को बढ़ाना होगा।

● दीपावली के अवसर पर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के सभी लाभार्थियों को निःशुल्क रसोई गैस सिलेंडर वितरित किया जाना है। इसके संबंध में समय से सारी औपचारिकताएँ पूरी कर ली जाएं। प्रत्येक दशा में दीपावली से पहले सभी लाभार्थियों के घर रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध हो जाना चाहिए।

● हाल के दिनों में रेलवे ट्रैक पर गैस सिलेंडर, पत्थर रखने जैसी सूचनाएं मिली हैं। इसमें रेल यातायात को बाधित करने और रेल दुर्घटना की साजिश की आशंका है। कुछ स्थानों पर ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाएं भी देखने को मिली हैं। रेलवे के साथ मिलकर इंटेलिजेंस को बेहतर बनाएं। हमें अपने ग्राम चौकिदारों के तंत्र को और सक्रिय करना होगा।

● खुले में मांस की बिक्री अथवा अवैध स्लाटर हाउस का संचालन कहीं भी न हो। इस पर यथोचित कड़ाई की जाए। धार्मिक स्थलों के आस-पास मांस-मदिरा की दुकानें न हों। मदिरा की दुकानें तय अवधि में ही खुलें। अवैध/जहरीली शराब के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रखें।

● सभी अस्पतालों में 24×7 चिकित्सकों की उपलब्धता हो। इमरजेंसी में उपयोगी दवाओं की कमी न हो। खान-पान की चीजों में मिलावटखोरी के खिलाफ सघन अभियान जारी रखें।

● गरीबों, धात्री महिलाओं और कुपोषित बच्चों के लिए सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा राशन तथा पौष्टिक आहार पात्र लोगों को जरूर मिले। राशन माफिया जैसे तत्वों को पनपने न दें। यदि कहीं भी ऐसी कोई सूचना मिले तो कठोर कार्रवाई की जाए।

● महिला सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को समर्पित ‘मिशन शक्ति’ का पांचवां चरण अतिशीघ्र प्रारंभ होने जा रहा है। अभियान के लिए हर विभाग की कार्ययोजना पूर्व से ही तय है, तदनुसार हर विभाग अपनी कार्यवाही सुनिश्चित कराएं।

● मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत ग्राम सचिवालय पर महिला बीट अधिकारी, आशा, एएनएम, बीसी सखी, पंचायत सचिव आदि द्वारा महिलाओं को एकत्रित कर उन्हें महिला हित संबंधी योजनाओं की जानकारी दी जानी चाहिए।

● नामांतरण, वरासत, पारिवारिक बंटवारे, पैमाइश जैसे आमजन से जुड़े राजस्व वादों के निस्तारण में लेटलतीफी न हो। एक समय सीमा के भीतर इनका निस्तारण किया जाए।