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लखनऊ: भव्य श्रीराम कथा आयोजन की प्रथम बैठक सम्पन्न, 25 दिसंबर से शुरू होगा महोत्सव

लखनऊ: 25 दिसंबर 2024 से 2 जनवरी 2025 तक श्रीराम कथा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। लखनऊ में आगामी दिसम्बर माह में 25 दिसंबर से 2 जनवरी तक बाल्मीकीय रामायण की दिव्य श्रीराम कथा का आयोजन किया जाएगा। इस भव्य आयोजन को लेकर तैयारियों की समीक्षा हेतु मोती महल लॉन में उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री और भारत सेवा संस्थान के अध्यक्ष डॉ.अशोक बाजपेई की अध्यक्षता में श्रीराम कथा सेवा समिति की पहली बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में इस महत्वपूर्ण आयोजन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई और तैयारियों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई।

आयोजन का मुख्य आकर्षण

आयोजन के संयोजक डॉ. सप्तर्षि मिश्र और अधिवक्ता संजीव पाण्डेय ने जानकारी दी कि अयोध्या से पधारे विश्व विख्यात कथा व्यास स्वामी राघवाचार्य जी महाराज के श्रीमुख से 25 दिसंबर से एक सप्ताह तक भक्ति और ज्ञान की गंगा बहेगी। भक्तजन इस अवसर पर रामायण के विभिन्न प्रसंगों से जुड़ी दिव्य कथाओं का आनंद ले सकेंगे।

श्रीराम कथा का शुभारंभ 25 दिसंबर को लोक विख्यात आचार्य अजय याग्निक जी द्वारा सुंदर काण्ड पाठ से किया जाएगा, जो भक्तों के बीच विशेष श्रद्धा और भक्ति का माहौल बनाएगा।

प्रमुख निर्णय और समिति की बैठक की चर्चा

बैठक में एक प्रमुख निर्णय लिया गया कि श्रीराम कथा सेवा समिति का मुख्य कार्यालय भारत सेवा संस्थान, मोती महल लॉन, लखनऊ में स्थापित किया जाएगा। आयोजन से संबंधित सभी जानकारी भक्तजन इस कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं।

बैठक में उपस्थित प्रमुख गणमान्य सदस्यों में डॉ. जे.एन. मिश्र, वेद प्रकाश त्रिपाठी, श्रीमती प्रज्ञा सिंह, ओंकार नाथ सिंह, सुशील दुबे, कैप्टन बंशीधर मिश्र, उदय शुक्ल, संजय मिश्रा, और जे.पी. मिश्र प्रमुख रूप से शामिल रहे।

श्रीराम कथा की तैयारियों की विस्तृत जानकारी

इस आयोजन को भव्य रूप देने के लिए समर्पित टीम दिन-रात कार्य कर रही है। सभी तैयारियां भक्तजनों के उत्साह और श्रद्धा को ध्यान में रखते हुए की जा रही हैं। आयोजकों ने यह भी जानकारी दी कि श्रीराम कथा के आयोजन स्थल पर विशेष भक्ति मंडप, भक्तों के लिए बैठने की व्यापक व्यवस्था, पार्किंग की सुविधा और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।

यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसमें स्थानीय जनता और देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक विशाल मंच होगा। यह महोत्सव लखनऊ के सांस्कृतिक परिदृश्य को और भी समृद्ध करेगा।

आयोजन से जुड़ी मुख्य जानकारी

आयोजन तिथि: 25 दिसंबर 2024 से 2 जनवरी 2025

स्थल: मोती महल लॉन, लखनऊ

मुख्य कथा वाचक: स्वामी राघवाचार्य जी महाराज (अयोध्या)

शुभारंभ: सुंदर काण्ड पाठ द्वारा (आचार्य अजय याग्निक जी)

सम्पर्क सूत्र: आयोजन से जुड़ी अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए भक्तजन भारत सेवा संस्थान, मोती महल लॉन, लखनऊ के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।

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सरोजनीनगर: स्कूटर इंडिया से रवाना हुई ‘रामरथ-श्रवण अयोध्या यात्रा’, महिलाओं व बुजुर्गों ने किए रामलला के दर्शन

  • 30 वीं रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा से अयोध्या पहुंचे सरोजनीनगर के श्रद्धालु : विधायक डॉ.राजेश्वर सिंह करवा रहे हैं, निःशुल्क यात्रा
  • डॉ.राजेश्वर सिंह ने पुनः 4 आरडब्लूए में स्थापित कराई लाइब्रेरी, अब तक 11 आरडब्लूए में स्थापित हुई लाइब्रेरी, लक्ष्य सभी 104 आरडब्लूए
  • उन्होंने नियमित संचालित रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा, सरोजनीनगर परिवार के सहयोग समर्थन का सुखद परिणाम

लखनऊ: सरोजनीनगर के समग्र विकास के लिए दृढ़ संकल्पित सरोजनीनगर विधायक डॉ.राजेश्वर सिंह की अनुपम पहल ‘रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा’ पिछले दो वर्ष से अधिक समय से वृद्धजनों के तीर्थयात्रा के सपने को पूरा कर रही है। मंगलवार को स्कूटर इंडिया चौराहा, सरोजनीनगर से संचालित हुई तीसवीं रामरथ श्रवण अयोध्या फ्री बस सेवा के माध्यम से ताराशक्ति केंद्र स्कूटर इंडिया एवं ताराशक्ति केंद्र गहरु की मातृशक्ति तथा क्षेत्र के वृद्धजनों को अयोध्या दर्शन कराया गया। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए खाने-पीने की व्यवस्था से लेकर आवश्यक सुविधाओं का प्रबंध भी किया गया।

अयोध्या पहुंच श्रद्धालुओं ने रामलला के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए। यात्रा के अंत में श्रद्धालुओं को रामचरितमानस की प्रति भेंट की गई। विधायक की टीम और अन्य वालंटियर्स ने पूरे सफर में वृद्धजनों और अन्य दर्शनार्थियों को किसी प्रकार की समस्या नहीं होने दी। अयोध्या यात्रा कर बुजुर्ग बेहद खुश और संतुष्ट दिखे। उन्होंने अपने विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की इस विशेष पहल की सराहाना की तथा उनका आभार व्यक्त किया। बता दें कि ‘रामरथ-श्रवण अयोध्या यात्रा’ पहल के अंतर्गत डॉ.राजेश्वर सिंह द्वारा महीने में दो बार फ्री बस सेवाओं का संचालन किया जाता है। जिनके माध्यम से सरोजनीनगर के वृद्धजनों व महिलाओं को ये सेवा निःशुल्क अयोध्या दर्शन करवाती है, जिसका पूर्ण व्यय विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा किया जाता है।

इस बारे में डॉ. राजेश्वर सिंह कहना है कि वृद्धजनों को तीर्थ यात्रा करवाना मेरा सौभाग्य है। तीर्थयात्रा के दौरान वरिष्ठजनों के चेहरे की खुशी और संतुष्टि देखना सुखद है, उनका आशीर्वाद ही मेरी सामर्थ्य है।’रामरथ-श्रवण अयोध्या यात्रा’ की सफलता माता तारा सिंह की प्रेरणा, वृद्धजनों का आशीर्वाद और क्षेत्रवासियों का समर्थन का ही सुखद परिणाम है। क्षेत्रवासियों को तीर्थयात्रा करवाने के लिए ‘रामरथ-श्रवण अयोध्या यात्रा’ अनवरत जारी रहेगी।

सुशांत गोल्फ सिटी स्थित सेलिब्रिटी गार्डन की चार आरडब्लूए में डॉ.राजेश्वर सिंह ने स्थापित कराई लाइब्रेरी

लाइब्रेरी बौद्धिक विकास का महान मंच है, जो सीखने की क्षमता और ज्ञान में वृद्धि करती है इसी संकल्प के साथ सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र की सभी आरडब्लूए में लाइब्रेरी की स्थापना करवा रहे डॉ.राजेश्वर सिंह ने पुनः सुशांत गोल्फ सिटी स्थित सेलिब्रिटी गार्डन की चार आरडब्लूए, चिन्मय वेलफेयर एसोसिएशन, एफ & एन टावर, सेलिब्रिटी ग्रीन और रिश्ता अपार्टमेंट में विज्ञान, अध्यात्म, कला और ज्ञान से संबंधित पुस्तकें उपलब्ध करवाकर लाइब्रेरी स्थापित करवाई। सरोजनीनगर में अब तक 11 आरडब्लूए में लाइब्रेरी की स्थापना की जा चुकी है, विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह का लक्ष्य सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र की सभी आरडब्लूए में लाइब्रेरी स्थापित कराना है। इस दौरान के महासचिव रतन श्रीवास्तव, रिश्ता के प्रेसिडेंट के. के. गुप्ता, एफ & एन टावर कोषाध्यक्ष अरुण कुमार गुप्त, एवं सेलिब्रिटी ग्रीन से रत्ना सिंह तथा अर्जुनगंज मंडल के भाजपा अध्यक्ष मोहित तिवारी, इब्राहिमपुर प्रथम की वार्ड मंत्री सुमन सिंह राठौड़ एवं अन्य रेजिडेंट्स उपस्थित रहे।

बहुत जल्द करेंगे शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोइयों की समस्याओं का समाधान: मंत्री संदीप सिंह

  • बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने शिक्षामित्रों, अंशकालिक अनुदेशकों और रसोइयों से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ की बैठक
  • परिषदीय विद्यालयों के कर्मचारियों की समस्याओं से रूबरू हुए बेसिक शिक्षा मंत्री
  • मंत्री ने अंशकालिक अनुदेशक, शिक्षामित्रों और रसोइयों की समस्याओं को जाना
  • मध्याह्न भोजन और कर्मचारियों की समस्याओं पर हुई चर्चा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन संचालित परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों, अंशकालिक अनुदेशकों और रसोइयों की विभिन्न मांगों और समस्याओं पर विचार-विमर्श के लिए मंगलवार को एक बैठक आयोजित की गई। यह बैठक विधानसभा स्थित राज्य मंत्री, बेसिक शिक्षा विभाग (स्वतंत्र प्रभार) के कार्यालय में संपन्न हुई।

मध्याह्न भोजन और कर्मचारियों की समस्याओं पर विचार

बैठक के दौरान छात्रों के मध्याह्न भोजन से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ शिक्षामित्रों, रसोइयों और अनुदेशकों के मानदेय, उनकी उपस्थिति और अन्य समस्याओं पर गहन विचार-विमर्श किया गया। इसमें शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए कर्मचारियों की भूमिका पर भी चर्चा हुई।

सरकार की प्रतिबद्धता: समस्याओं का शीघ्र समाधान

बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि सरकार संगठनों के सुझावों पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोइयों की समस्याओं का समाधान बहुत जल्द किया जाएगा। साथी इनके मानदेय बढ़ाने के संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर उनके समक्ष इस विषय को रखा जाएगा। इसके अलावा मंत्री संदीप ने शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोइयों की महत्वपूर्ण भूमिका को भी सराहा।

संगठनों के इन प्रतिनिधियों की रही उपस्थिति

बैठक में शिक्षामित्रों, अंशकालिक अनुदेशकों और रसोइयों के पंजीकृत संगठनों के राज्य स्तरीय अध्यक्ष, महामंत्री और उनके प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने विचार और समस्याएं सरकार के सामने रखीं।

भारत में कृषि सुधार और किसानों की समस्याएं व उन समस्याओं का समाधान

लखनऊ/नई दिल्ली: कृषि भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। देश की लगभग 58% आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर करती है, लेकिन इसके बावजूद किसान कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), कृषि कानूनों, जलवायु परिवर्तन, और बाजार की अस्थिरता जैसे मुद्दे भारतीय किसानों के सामने प्रमुख समस्याएं हैं। सरकार ने कृषि सुधारों की दिशा में कई कदम उठाए हैं, लेकिन किसानों की आय में वृद्धि और उनकी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए और अधिक प्रयासों की आवश्यकता है।

कृषि सुधार: सरकार के प्रयास

भारत सरकार ने हाल के वर्षों में कृषि सुधारों की दिशा में कई पहलें की हैं। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:

1. कृषि कानून (2020): केंद्र सरकार ने तीन प्रमुख कृषि कानून पेश किए, जिनका उद्देश्य किसानों को कृषि मंडियों से बाहर भी अपनी उपज बेचने की स्वतंत्रता देना था। हालांकि, इन कानूनों का देशभर में व्यापक विरोध हुआ, खासकर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों द्वारा। विरोध के बाद सरकार ने इन कानूनों को वापस लेने का निर्णय लिया।

2. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN): इस योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों को हर साल 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। यह योजना किसानों को आर्थिक रूप से समर्थन देने और उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।

3. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY): इस योजना का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक आपदाओं, कीटों और बीमारियों से फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए बीमा कवर प्रदान करना है। हालांकि, इस योजना में कई चुनौतियां भी सामने आई हैं, जैसे क्लेम प्रोसेस में देरी और सभी किसानों तक इसकी पहुंच न होना।

4. कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड: इस फंड के तहत किसानों और कृषि सहकारी समितियों को बेहतर भंडारण, कोल्ड स्टोरेज और कृषि-प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है। इसका उद्देश्य कृषि उत्पादों की बर्बादी को कम करना और किसानों को बाजार में बेहतर कीमत दिलाना है।

किसानों की प्रमुख समस्याएं

1. न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): किसानों की एक प्रमुख मांग है कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी दर्जा दे। MSP वह मूल्य है जिस पर सरकार किसानों से उनकी उपज खरीदती है। कई किसानों का कहना है कि उन्हें MSP नहीं मिलता, जिससे उन्हें बाजार में कम कीमतों पर अपनी फसल बेचनी पड़ती है।

2. बढ़ती लागत: उर्वरक, बीज, कीटनाशक, और सिंचाई जैसी कृषि उत्पादन की लागत में वृद्धि हो रही है, जबकि किसानों की आय में वृद्धि नहीं हो पा रही है। इससे किसानों को आर्थिक रूप से नुकसान उठाना पड़ता है, जिससे कर्ज का बोझ बढ़ता है।

3. जलवायु परिवर्तन: अनियमित बारिश, सूखा, और बाढ़ जैसी जलवायु घटनाओं ने किसानों की समस्याओं को और बढ़ा दिया है। फसल की विफलता और उत्पादन में कमी के कारण किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ता है।

4. कर्ज का बढ़ता बोझ: किसानों की आय सीमित होने के कारण उन्हें अक्सर कर्ज लेना पड़ता है। कई किसान साहूकारों से ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज लेते हैं, जिससे उनका वित्तीय संकट और गहरा जाता है।

5. सिंचाई की समस्या: देश के कई हिस्सों में सिंचाई की समुचित व्यवस्था नहीं है। किसान मानसून पर निर्भर होते हैं, और खराब मानसून के कारण फसल उत्पादन में कमी आ जाती है।

समाधान और भविष्य की दिशा

1. MSP का कानूनी दर्जा: किसानों को MSP का कानूनी दर्जा देने से बाजार में फसल की न्यूनतम कीमत सुनिश्चित की जा सकेगी, जिससे उन्हें अपनी उपज का सही मूल्य मिलेगा। इससे उनकी आय में वृद्धि हो सकती है।

2. कृषि तकनीक का उपयोग: उन्नत कृषि तकनीकों जैसे ड्रिप इरिगेशन, स्मार्ट खेती और डिजिटल प्लेटफार्मों का उपयोग किसानों की उत्पादकता को बढ़ा सकता है। इसके अलावा, किसानों को तकनीकी ज्ञान और प्रशिक्षण प्रदान करना जरूरी है।

3. प्राकृतिक खेती को बढ़ावा: सरकार द्वारा जैविक और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे उत्पादन की लागत कम होगी और किसानों की आय में सुधार होगा। साथ ही, इससे पर्यावरण को भी लाभ होगा।

4. कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार: भंडारण और प्रसंस्करण इकाइयों में सुधार से किसानों को उनकी फसलों का सही मूल्य मिलेगा। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसान सीधे बाजार से जुड़ सकेंगे।

5. जल प्रबंधन: सिंचाई परियोजनाओं में सुधार और जल संसाधनों का प्रभावी उपयोग करके किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधाएं प्रदान की जा सकती हैं। सूखे वाले क्षेत्रों में माइक्रो-इरिगेशन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

भारत में कृषि सुधारों की दिशा में कई प्रयास किए गए हैं, लेकिन किसानों की समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। MSP का कानूनी दर्जा, तकनीकी नवाचार, और जलवायु अनुकूलन जैसे कदम किसानों की स्थिति में सुधार लाने में मदद कर सकते हैं। कृषि क्षेत्र की समस्याओं को हल करने के लिए सरकार और किसानों के बीच निरंतर संवाद और सहयोग आवश्यक है। अगर सही दिशा में कदम उठाए जाते हैं, तो भारत के किसान न केवल आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं।

पुलिस कार्मिकों को मिलेगा ई-पेंशन प्रणाली का लाभ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

  • मुख्यमंत्री का निर्देश, किसी भी संवर्ग का कार्मिक हो, समय से पदोन्नति मिले, योग्यता अनुसार मिले पदस्थापना, सेवानिवृत्ति पर न होना पड़े परेशान
  • एडीजी स्तर के अधिकारियों से बोले मुख्यमंत्री, इकाई भले अलग-अलग पर लक्ष्य सबका एक, बेहतर रहे प्रदेश की कानून व्यवस्था
  • मुख्यमंत्री ने की एडीजी स्तर के अधिकारियों के साथ विशेष बैठक, हर इकाई के कार्यों की समीक्षा की
  • बोले मुख्यमंत्री, मृतक आश्रित नियमों में सुधार की जरूरत, व्यावहारिकता का रखें ध्यान
  • साइबर सुरक्षा को पुख्ता करने पर मुख्यमंत्री का जोर, कहा तकनीक अपनाएं, जागरूकता भी बढ़ाएं
  • सीएम योगी ने कहा- पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा का परिणाम इस माह के अंत तक जारी करने की तैयारी करें
  • मुख्यमंत्री का निर्देश, वरिष्ठ अधिकारी समय पर कार्यालय आएं, किसी भी कार्यालय में कोई फाइल तीन दिन से अधिक लंबित न हो
  • सीएम ने कहा- रेल ट्रैक पर अवरोध की घटनाएं चिंताजनक, समन्वय बढ़ाएं, इंटेलिजेंस को करें बेहतर
  • उन्होंने कहा- वीमेन पॉवर लाइन 1090 को और उपयोगी बनाने का प्रयास हो, जिन जिलों से कम फोन कॉल आ रहे हैं, वहां इसके बारे में जागरूकता बढ़ाएं

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस कार्मिकों को ‘ई-पेंशन’ से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर पुलिस कार्मिक को समय पर पदोन्नति मिले, उनकी चरित्र पंजिका पर सही विवरण अंकित हो, उनकी योग्यता और प्रतिभा के अनुरूप पदस्थापना मिले और सेवानिवृत्ति के समय देयकों का भुगतान समय से हो, यह प्रत्येक दशा में सुनिश्चित किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने पुलिस कार्मिकों को आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने और बेहतरीन प्रशिक्षण के लिए व्यवस्थाओं को और बेहतर करने के भी निर्देश दिए हैं।

शुक्रवार को अपर पुलिस महानिदेशक स्तर के सभी अधिकारियों के साथ विशेष बैठक में मुख्यमंत्री ने एक- एक कर सभी एडीजी से उनकी वर्तमान पदस्थापना अवधि में किये गए कार्यों, अपनाए गए नवाचारों और उपलब्धियों के बारे में जानकारी ली। विशेष बैठक में मुख्यमंत्री जी द्वारा दिये गए प्रमुख दिशा-निर्देश निम्नवत हैं

  • पुलिस की सभी इकाइयों के बीच बेहतर संवाद और समन्वय होना चाहिए। लॉजिस्टिक इकाई हो, अभिसूचना इकाई हो अथवा, एसआईटी, क्राइम, पीआरवी 112 आदि, इकाइयाँ भले ही अलग-अलग हैं, लेकिन सभी का लक्ष्य एक ही है, प्रदेश में बेहतर कानून व्यवस्था बनाये रखना। इसलिए सभी के बीच बेहतर तालमेल होना आवश्यक है।
  • वरिष्ठ अधिकारी समय पर कार्यालय आएं। किसी भी कार्यालय में कोई फाइल तीन दिन से अधिक लंबित न हो। यदि किसी तरह की समस्या हो तो डीजीपी कार्यालय, गृह विभाग अथवा सीधे मुझसे समय लेकर मिल सकते हैं, लेकिन अनिर्णय की स्थिति न होनी चाहिए। फाइल लंबित नहीं रहनी चाहिए।
  • बहुत सारी इकाइयों में फील्ड विजिट बढ़ाये जाने की आवश्यकता है। एडीजी स्तर के अधिकारी के जिलों में जाने से अच्छा अधीनस्थ पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। जिलों में जाएं अपनी इकाई से जुड़े कामकाज की समीक्षा करें, जहां सुधार की आवश्यकता हो, उस अनुरूप काम किया जाए।
  • पुलिस बल में लॉजिस्टिक्स का अभाव न हो। समय-समय पर इसकी समीक्षा करते रहें। हमारा पुलिस बल आधुनिक उपकरणों से लैस होनी चाहिए। अभी 40 अश्वों की आवश्यकता और है, कुंभ में इसकी आवश्यकता पड़ेगी। इनकी क्रय और प्रशिक्षण की प्रक्रिया यथाशीघ्र पूरी की जाए। प्रदेश में पहली बार होने जा रही कंडम वीपन्स के निस्तारण की प्रक्रिया को सावधानी से पूरा किया जाए।
  • बदलते समय के साथ साइबर क्राइम की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। हमें इसके लिए हर स्तर पर सतर्क होना होगा। साइबर फ्रॉड के संबंध में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। शिक्षक, उद्यमियों, व्यापारियों, चिकित्सकों सहित अलग-अलग वर्गों के साथ समय-समय पर गोष्ठियां की जाएं, लोगों को साइबर अपराध की घटनाओं से अवगत कराएं, सुरक्षा के तौर-तरीकों से अवगत कराएं।
  • सभी जिलों में साइबर क्राइम थाने स्थापित किये जा रहे हैं। इनके भवन निर्माण की कार्यवाही में अनावश्यक देर न की जाए। आवश्यकतानुसार मानव संसाधन की व्यवस्था करें। भारत सरकार द्वारा साइबर फॉरेंसिक लैब की स्थापना का प्रस्ताव है। इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही करें। हर जिले के हर थाने में साइबर हेल्प डेस्क क्रियाशील रखें। किसी भी तरह की शिकायत मिलने पर तत्काल रिस्पॉन्स होना चाहिए। फ़ॉरेंसिक इंस्टिट्यूट, लखनऊ को साधन-संपन्न बनाने के लिये सरकार हर आवश्यक सहयोग देगी। इसके निर्माण संबंधी अवशेष कार्यों को यथाशीघ्र पूरा कराएं।
  • देश की आपराधिक न्याय प्रणाली में लागू तीनों नए कानून अब पूरी तरह अमल में आ चुके हैं। इस संबंध में विधिवत प्रशिक्षण जारी रखा जाए।
  • हाल के दिनों में रेलवे ट्रैक पर सिलेंडर, रॉड आदि चीजें मिली हैं। इसी तरह ट्रेनों पर पत्थर फेंके जाने की घटनाएं भी हुई हैं। यह चिंताजनक है। इसके लिए जीआरपी, आरपीएफ, रेलवे प्रशासन और सिविल पुलिस को मिलकर काम करने की आवश्यकता है। लोकल इंटेलिजेंस को और मजबूत किया जाना चाहिए।
  • मृतक आश्रितों के प्रकरण में आश्रित की आयु को ध्यान में रखते हुए नियमों में बदलाव पर विचार किया जाना चाहिए। फिजिकल परीक्षण के नियम व्यावहारिक होने चाहिए। मृतक आश्रितों के प्रकरण का तय समय सीमा के भीतर निस्तारित होना सुनिश्चित करें।
  • विशेष परिस्थितियों में हमारी PRV 112 ने बेहतरीन परिणाम दिए हैं। आज औसत रिस्पॉन्स टाइम घटकर 7.5 मिनट तक आ गया है। कुछ जिलों में तो 3-5 मिनट में रिस्पॉन्स मिल रहा है। यह संतोषप्रद है लेकिन तकनीक की सहायता से इसे और कम किया जाना चाहिए। पीआरवी 112 के वाहनों की लोकेशनिंग और ठीक किया जाना आवश्यक है। इसके लिए पुलिस कप्तान के साथ-साथ थानाध्यक्ष तक को जवाबदेह बनाना होगा। सक्रियता और बढ़ाये जाने की जरूरत है। ब्लैक स्पॉट को चिन्हित कर वहां वाहनों की तैनाती करें।
  • वीमेन पॉवर लाइन 1090 को और उपयोगी बनाने का प्रयास हो। जिन जिलों से कम फोन कॉल आ रहे हैं, वहां इसके बारे में जागरूकता बढ़ाएं।
  • मुकदमों के प्रभावी अभियोजन की दिशा में और बेहतर प्रयास अपेक्षित है। हर जिले का लक्ष्य तय करें, पूरी तैयारी करें और ससमय दोषियों को दंड मिलना सुनिश्चित करायें। समय-समय पर सभी जनपदों में विजिट कर स्थानीय स्थितियों का आंकलन भी किया जाना चाहिए।
  • कार्मिक और स्थापना इकाई के पास हर अधिकारी के अच्छे कार्यों और गलतियों का पूरा ब्यौरा उपलब्ध होना चाहिए। किसी भी संवर्ग के अधिकारी/कर्मचारी हों, सभी को तय समय पर योग्यता अनुरूप पदोन्नति मिलनी चाहिए।
  • कमांडो ट्रेनिंग और बेहतर करने की आवश्यकता है। ऊर्जावान युवाओं को कमांडों प्रशिक्षण के लिए प्रोत्साहित करें। पुलिस बैंड को और व्यवस्थित करने की जरूरत है। पीएसी फ्लड यूनिट का रिस्पॉन्स टाइम और कम करने का प्रयास करें।
  • पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा का परिणाम इस माह के अंत तक जारी करने की तैयारी करें। रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाएं। परीक्षाओं की शुचिता को हर हाल में सुनिश्चित किया जाना है।
  • नगरों में यातायात जाम एक बड़ी समस्या का रूप ले रही है। इसके लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप नियोजन समाधान का प्रयास किया जाना चाहिए। स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर कार्ययोजना बनाएं। ई-रिक्शा चलाने वालों का वेरिफिकेशन कराया जाए, सुरक्षा की दृष्टि से यह जरूरी है। कहीं भी नाबालिग ई-रिक्शा न चलाये, यह सुनिश्चित करें। ई-रिक्शा का रूट तय होना चाहिये। यातायात को बाधित कर टैक्सी स्टैंड न चलाया जाए।
  • वीआईपी सुरक्षा में तैनात पुलिस बल का नियमित अंतराल पर स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए। इनकी तैनाती में युवाओं को वरीयता दें। वीआईपी सुरक्षा में लगे जवानों के आदर्श आचरण के लिए भी काउंसिलिंग कराई जानी चाहिए। वर्तमान में10 एयरपोर्ट की सुरक्षा यूपीएसएसएफ कर रही है। इनके जवानों का शूटिंग परीक्षण भी कराए।