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उत्तर प्रदेश में सड़क सुरक्षा को मिलेगा बड़ा बढ़ावा: परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह की मौजूदगी में परिवहन विभाग और मारुति सुजुकी के बीच 12 ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटरों के लिए एमओयू साइन

लखनऊ, 09 अक्टूबर 2024 – उत्तर प्रदेश सरकार और मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के बीच एक ऐतिहासिक एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) पर हस्ताक्षर हुए हैं, जिसके तहत राज्य में कुल 12 ड्राइविंग ट्रेनिंग और टेस्टिंग इंस्टीट्यूट (DTTI) और एडवांस्ड ड्राइविंग ट्रेनिंग टेस्टिंग इंस्टीट्यूट (ADTTI) स्थापित किए जाएंगे। इस कदम से सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा और राज्य में कुशल ड्राइवरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।

परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने इस मौके पर कहा कि यह एमओयू उत्तर प्रदेश की सड़क सुरक्षा को सुधारने में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश जनसंख्या और हाईवे नेटवर्क के मामले में देश में अग्रणी है, और सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ड्राइविंग ट्रेनिंग में सुधार की बेहद आवश्यकता थी। इस एमओयू के तहत 10 डीटीटीआई और 2 एडीटीटी का संचालन किया जाएगा, जिनमें मुरादाबाद, मेरठ, बस्ती, मिर्जापुर, बरेली, झांसी, अलीगढ़, देवीपाटन-गोण्डा, आजमगढ़ और मुजफ्फरनगर में डीटीटीआई और आजमगढ़ व प्रतापगढ़ में एडीटीटी का निर्माण होगा।

सड़क सुरक्षा के लिए उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम

श्री सिंह ने कहा कि मारुति सुजुकी के साथ इस साझेदारी से प्रदेश में ड्राइविंग टेस्टिंग और ट्रेनिंग की बेहतर व्यवस्था होगी। साथ ही, उन्होंने सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने और कुशल ड्राइविंग ट्रेनिंग के महत्व पर जोर दिया। प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और कुशल ड्राइवर तैयार करने के लिए यह योजना बेहद अहम साबित होगी।

अब 17 ड्राइविंग ट्रेनिंग टेस्टिंग इंस्टीट्यूट संचालित होंगे

इससे पहले मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में अयोध्या, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, और मथुरा में पहले से ही 5 DTTI संचालित हो रहे हैं। अब इस एमओयू के साथ कुल 17 इंस्टीट्यूट प्रदेश में काम करेंगे, जिससे ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया और अधिक सटीक और सुव्यवस्थित होगी।

मारुति सुजुकी का सहयोग

मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राहुल भारती ने बताया कि यह एमओयू सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को स्वचालित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी के माध्यम से केवल योग्य उम्मीदवारों को ही ड्राइविंग लाइसेंस मिलेगा, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव परिवहन एल.वेंकटेश्वर लू, परिवहन आयुक्त चंद्र भूषण सिंह और एमडी परिवहन निगम मासूम अली सरवर सहित अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद थे। श्री लू ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में विभाग कुशल ड्राइवरों की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा और सड़क सुरक्षा के नियमों के पालन में निरंतर सुधार करेगा। यह एमओयू उत्तर प्रदेश के परिवहन विभाग के साथ मिलकर प्रदेश में सड़क सुरक्षा को मजबूत करेगा और सड़क दुर्घटनाओं को कम करने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा।

दशहरा, दीपावली और छठ पूजा स्थलों के लिए सभी तैयारियां अभी से पूरी कर लें- मंत्री ए.के.शर्मा

  • नगर विकास मंत्री ए0के0शर्मा ने निकाय कार्यों की वर्चुअल समीक्षा की
  • त्योहारों के दृष्टिगत साफ सफाई, स्वच्छता पर विशेष ध्यान देंगे
  • सभी दुर्गा पूजा पंडालों के आसपास साफ सफाई, स्वच्छता, शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित कराए
  • संचारी रोगों, मच्छर मक्खी जनित बीमारियों, डेंगू, चिकनगुनिया व मलेरिया की रोकथाम, जल भराव न हो, संभावित क्षेत्रों में एंटी लार्वा और दवाओं का छिड़काव करें, फॉगिंग कराए
  • सभी कार्मिक निकायों में कराया जा रहे अच्छे कार्यों की जानकारी देने के लिए प्रचार प्रसार कराए, झूठी खबरों में अपना पक्ष रखते हुए खंडन कराए
  • सड़कों में दिख रहे निराश्रित पशुओं को पकड़ कर गौशालाओं में पहुंचाया जाए, पशुओं के सड़क पर दिखने से संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी
  • नगरीय क्षेत्रों की सड़कों को अतिशीघ्र गड्ढा मुक्त करने के साथ मार्ग प्रकाश व्यवस्था को व्यवस्थित रखने के लिए सभी खराब स्ट्रीट लाइटों को ठीक किया जाए

लखनऊ: प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में त्योहारों की दृष्टिगत साफ सफाई, स्वच्छता पर विशेष ध्यान देंगे, नगरीय क्षेत्रों में स्थापित सभी दुर्गा पूजा पंडालों के आसपास साफ सफाई, स्वच्छता, शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित कराए। दशहरा, दीपावली और छठ पूजा स्थलों के लिए सभी तैयारियां अभी से पूरी कर लें। धार्मिक स्थलों, ऐतिहासिक, पुरातात्विक व प्राचीन स्मारकों के रखरखाव, साफ-सफाई पर ध्यान देंगे, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को परेशानी न हो। नगर विकास मंत्री ने सभी निकाय कार्मिकों को यह निर्देश दिए।

नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के.शर्मा ने बुधवार को अधिकारियों के साथ निकाय कार्यों की वर्चुअल समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सभी निकाय अपने क्षेत्रों में साफ किए गए कूड़ा स्थलों को फिर से गंदा होने से बचाने के लिए ऐसे स्थलों की फेंसिंग या पौधारोपण कराए, ऐसे स्थलों को उपयोगी बनाने के लिए वहां पर वेंडिंग जोन, बच्चों के क्रीड़ा स्थल व पार्क, बुजुर्गों के बैठने के स्थान आदि बनाये जा सकते है, इसके लिए प्रयास करें। उन्होंने कहा कि सभी निकाय कार्मिक संचारी रोगों, मच्छर मक्खी जनित बीमारियों, डेंगू, चिकनगुनिया व मलेरिया की रोकथाम के लिए कहीं पर भी जल भराव न हो, संभावित क्षेत्रों में एंटी लार्वा और दवाओं का छिड़काव करें, फॉगिंग कराए। सभी कार्मिक निकायों में कराया जा रहे अच्छे कार्यों की जानकारी देने के लिए प्रचार प्रसार कराए, झूठी खबरों में अपना पक्ष रखते हुए खंडन कराए। इस दौरान उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी विभागीय कार्यों के प्रति सक्रिय होकर कार्य करें। नगरीय क्षेत्रों में सड़कों में दिख रहे निराश्रित पशुओं को पकड़ कर गौशालाओं में पहुंचाया जाए, जिससे पशुओं की सुरक्षा हो सके। साथ ही नागरिकों को भी किसी भी प्रकार की समस्याओं का सामना न करना पड़े। गौशालाओं में पशुओं के भरण पोषण और उनके संरक्षण की भी समुचित व्यवस्था की जाए।

उन्होंने कहा कि निराश्रित पशु सड़क पर दिखेंगे तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने कहा कि जो भी अधिशासी अधिकारी अपने निकाय मुख्यालय पर अधिवास नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। अब उनकी आवारागर्दी को और नहीं बर्दाश्त किया जाएगा, ऐसे कार्मिकों की कार्यों के प्रति लापरवाही और शिथिलिता पर कार्यवाही होगी। उन्होंने नगरीय क्षेत्रों की सड़कों को अतिशीघ्र गड्ढा मुक्त करने तथा मार्ग प्रकाश व्यवस्था को व्यवस्थित रखने के लिए सभी खराब स्ट्रीट लाइटों को ठीक करने के भी निर्देश दिए। बैठक में प्रमुख सचिव नगर विकास अमृत अभिजात, सचिव अजय कुमार शुक्ला, प्रबंध निदेशक जल निगम, निदेशक नगरीय निकाय अनुज कुमार झा, निगमों के नगर आयुक्त, निकायों के अधिशासी अधिकारी और अन्य कार्मिकों ने वर्चुअल प्रतिभाग किया।

स्वच्छ आहार दिवस: पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल पर विशेष स्वच्छता अभियान

लखनऊ: भारतीय रेलवे द्वारा ‘स्वच्छ रेल-स्वच्छ भारत मिशन’ के अंतर्गत 1 अक्टूबर से 15 अक्टूबर 2024 तक ‘स्वच्छता पखवाड़ा-2024’ मनाया जा रहा है। इस विशेष स्वच्छता अभियान के तहत पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल में आज ‘स्वच्छ आहार दिवस’ मनाया गया। मंडल रेल प्रबंधक श्री आदित्य कुमार के मार्गदर्शन में यह अभियान संचालित किया गया, जिसमें मंडल के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर खानपान सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विशेष जांच की गई।

स्वच्छता पखवाड़ा-2024: विशेष स्वच्छता अभियान 4.0

इस अभियान के तहत लखनऊ जंक्शन, गोंडा जंक्शन, गोरखपुर जंक्शन, मैलानी जंक्शन, सीतापुर जंक्शन, मनकापुर, बढ़नी, बस्ती, खलीलाबाद और ऐशबाग जंक्शन जैसे प्रमुख स्टेशनों पर विशेष निरीक्षण किए गए। रेलवे के नामित अधिकारियों, रेलवे चिकित्सकों, स्टेशन अधीक्षकों और संबंधित सुपरवाइजरों की देखरेख में खानपान स्टालों पर खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, साफ-सफाई और अन्य महत्वपूर्ण मानकों की जांच की गई।

स्टेशनों पर खानपान सेवाओं की विस्तृत जांच

स्वच्छ आहार दिवस के अवसर पर खानपान स्टालों पर उपलब्ध भोजन की गुणवत्ता, बर्तनों की सफाई, वेंडरों के मेडिकल प्रमाणपत्र, फूड लाइसेंस, यूनिफार्म, नेम प्लेट और मूल्य सूची की जांच की गई। इसके साथ ही, स्टेशनों पर डस्टबिन की उपलब्धता और कचरा निपटान की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। यह सुनिश्चित किया गया कि स्टेशनों और ट्रेनों में यात्रियों को स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य सामग्री उपलब्ध हो।

ट्रेनों की पैंट्री कारों में भी खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और सफाई का निरीक्षण किया गया। यात्रियों से भोजन की गुणवत्ता के संबंध में फीडबैक लिया गया और उनकी शिकायतों का तत्काल निराकरण किया गया। इस दौरान, खानपान स्टालों पर रखे गए खाद्य सामग्री के नमूनों को जांच हेतु लिया गया, ताकि भविष्य में भी स्वच्छता के मानकों का पालन हो सके।

यात्रियों में जागरूकता का प्रसार

स्वच्छता पखवाड़ा के दौरान रेलवे स्टेशनों पर पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम के माध्यम से स्वच्छता संबंधी संदेशों का प्रसार किया गया। यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों को रेल परिसरों को स्वच्छ रखने में सहयोग देने का आग्रह किया गया। यह अभियान यात्रियों के स्वास्थ्य और सफाई को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है।

स्वच्छ आहार दिवस के अंतर्गत यात्रियों को स्वच्छ और उच्च गुणवत्ता का भोजन उपलब्ध कराने के प्रयासों को मजबूत किया गया है। स्वच्छता पखवाड़ा के तहत 10 अक्टूबर 2024 को भी ‘स्वच्छ आहार दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा।

अभियान के मुख्य बिंदु:

खानपान स्टालों पर जांच: भोजन की गुणवत्ता, बर्तनों की सफाई, वेंडरों के मेडिकल प्रमाणपत्र और फूड लाइसेंस की जांच की गई।

डस्टबिन की उपलब्धता: स्टेशनों और ट्रेनों में पर्याप्त डस्टबिन और कचरा निपटान व्यवस्थाओं का निरीक्षण।

यात्रियों से फीडबैक: खानपान सेवाओं पर यात्रियों से फीडबैक लेकर उनकी समस्याओं का निराकरण।

स्वच्छता संदेश: पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम द्वारा स्वच्छता संबंधी संदेशों का प्रसार।

पूर्वोत्तर रेलवे द्वारा चलाया गया यह विशेष अभियान यात्रियों के लिए साफ-सफाई और स्वास्थ्यवर्धक खानपान सेवाएं सुनिश्चित करने की दिशा में एक सराहनीय कदम है। स्वच्छ रेल-स्वच्छ भारत मिशन के तहत इस प्रकार के प्रयास देशभर के रेलवे स्टेशनों पर स्वच्छता और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने का संदेश देते हैं।

यूक्रेन-रूस युद्ध: वैश्विक संकट की नई दिशा और इसके अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव

यूक्रेन-रूस युद्ध का व्यापक प्रभाव और विश्व पर पड़ता असर

लखनऊ/नई दिल्ली: यूक्रेन-रूस युद्ध फरवरी 2022 से चल रहा है और अभी तक इसका कोई समाधान नहीं निकला है। यह संघर्ष न केवल यूक्रेन और रूस को प्रभावित कर रहा है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की राजनीति, अर्थव्यवस्था और मानवाधिकारों पर भी हो रहा है। इस लेख में, हम इस युद्ध के विभिन्न पहलुओं और इसके वैश्विक प्रभावों की विस्तार से चर्चा करेंगे।

यूक्रेन-रूस युद्ध का आरंभ: कैसे शुरू हुआ यह संघर्ष?

प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ फरवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन पर अचानक सैन्य हमला किया, जिससे एक व्यापक युद्ध की स्थिति उत्पन्न हो गई। रूस का उद्देश्य यूक्रेन को नाटो से दूर रखना और उसके पूर्वी हिस्से पर नियंत्रण स्थापित करना था। रूस के इस आक्रमण के बाद पश्चिमी देशों ने यूक्रेन के समर्थन में खड़े होकर उसे सैन्य और आर्थिक सहायता प्रदान की। रूस के इस कदम से न केवल यूक्रेन, बल्कि पूरे यूरोप में अस्थिरता पैदा हो गई।

युद्ध की प्रमुख घटनाएं और परिणाम

1. मानवीय संकट और आपदा

यूक्रेन-रूस युद्ध ने यूक्रेन में अभूतपूर्व मानवीय संकट उत्पन्न किया है। लाखों लोगों को अपने घरों से भागकर शरणार्थी बनना पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, इस युद्ध में अब तक हजारों नागरिकों और सैनिकों की जान जा चुकी है। इसके अलावा, यूक्रेन की बुनियादी ढांचा प्रणाली—बिजली, पानी, सड़कें और स्वास्थ्य सेवाएं—भारी क्षति का सामना कर रही हैं। युद्धग्रस्त क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा का अभाव गंभीर स्थिति पैदा कर रहा है।

2. पश्चिमी देशों की प्रतिक्रिया: आर्थिक प्रतिबंध और समर्थन

अमेरिका, यूरोपीय संघ और नाटो देशों ने इस युद्ध में रूस के खिलाफ कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य रूस की अर्थव्यवस्था को कमजोर करना और उसके सैन्य अभियानों पर रोक लगाना है। रूस के तेल और गैस के निर्यात पर प्रतिबंध से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मची हुई है। यूरोप, जो अपनी ऊर्जा आपूर्ति के लिए रूस पर निर्भर था, अब वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश कर रहा है। इसके अलावा, अमेरिका और यूरोपीय देशों ने यूक्रेन को सैन्य सहायता प्रदान की है, जिससे यूक्रेन अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने में सक्षम हुआ है।

3. वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर प्रभाव

रूस और यूक्रेन दोनों ही विश्व के प्रमुख कृषि उत्पादक देश हैं, विशेष रूप से गेहूं और जौ के उत्पादन में। युद्ध के चलते इन कृषि उत्पादों की आपूर्ति बाधित हो गई है, जिससे वैश्विक खाद्य संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। अफ्रीका और एशिया के कई विकासशील देशों को खाद्यान्न की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी भारी वृद्धि हुई है, जिससे गरीब देशों में भुखमरी और कुपोषण का खतरा बढ़ गया है।

4. रूस-नाटो के बीच बढ़ता तनाव

रूस और नाटो के बीच इस युद्ध के कारण तनाव और भी बढ़ गया है। नाटो ने यूक्रेन का समर्थन करने के लिए अपनी सैन्य उपस्थिति को बढ़ा दिया है, जिससे रूस के साथ टकराव की संभावना बढ़ गई है। रूस ने चेतावनी दी है कि अगर नाटो ने अपनी सैन्य उपस्थिति को और बढ़ाया, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। इस संघर्ष ने रूस और पश्चिमी देशों के बीच संबंधों में और अधिक कटुता पैदा कर दी है, जो कि वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा हो सकता है।

5. रूस की सैन्य क्षमताओं पर सवाल

यूक्रेन ने पश्चिमी देशों से मिली सैन्य सहायता का उपयोग करके रूस के खिलाफ कड़ा प्रतिरोध किया है। यूक्रेन की सेना ने कई मोर्चों पर रूस को पीछे धकेलने में सफलता प्राप्त की है। इससे रूस की सैन्य रणनीति और क्षमताओं पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, रूस ने भी यूक्रेन के महत्वपूर्ण ठिकानों पर भारी नुकसान पहुंचाया है। दोनों देशों की सैन्य रणनीतियां और क्षमताएं इस युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

वैश्विक ऊर्जा संकट और आर्थिक मंदी की आशंका

यूक्रेन-रूस युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा संकट को और भी गंभीर बना दिया है। रूस दुनिया का प्रमुख तेल और गैस निर्यातक है, और उसके खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों के कारण ऊर्जा की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। यूरोप, जो अपनी ऊर्जा आपूर्ति के लिए रूस पर निर्भर था, अब वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश कर रहा है। यह संकट वैश्विक आर्थिक अस्थिरता का कारण बन रहा है, और दुनिया भर में मुद्रास्फीति की दर में वृद्धि हो रही है।

आर्थिक मंदी की आशंका

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि यूक्रेन-रूस युद्ध वैश्विक आर्थिक मंदी का कारण बन सकता है। ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी से दुनिया के कई देश आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। वैश्विक सप्लाई चेन की रुकावट और मुद्रास्फीति से विकासशील देशों में गरीबी और बेरोजगारी की स्थिति और गंभीर हो रही है।

रूस-चीन गठबंधन: नई कूटनीतिक समीकरण

इस युद्ध के बीच, रूस और चीन के बीच बढ़ते संबंधों ने वैश्विक कूटनीति में नया मोड़ ला दिया है। चीन ने रूस पर पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का विरोध किया और रूस के साथ अपने व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत किया है। इस नए गठबंधन से वैश्विक भू-राजनीतिक संतुलन बदल रहा है। चीन का यह रुख पश्चिमी देशों के लिए एक नई चुनौती पेश कर रहा है और इससे शीत युद्ध जैसी स्थिति का पुनर्जन्म हो सकता है।

भविष्य के लिए चुनौतियाँ और दीर्घकालिक प्रभाव

यह युद्ध न केवल वर्तमान के लिए बल्कि भविष्य के लिए भी गंभीर खतरे उत्पन्न कर रहा है। यूरोप में शांति और स्थिरता के लिए यह युद्ध एक बड़ा खतरा बन चुका है। इसके दीर्घकालिक प्रभाव निम्नलिखित हो सकते हैं:

1. वैश्विक ऊर्जा नीति में बदलाव

रूस के खिलाफ प्रतिबंधों के कारण यूरोपीय देशों ने वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया है। इससे भविष्य में ऊर्जा नीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

2. भू-राजनीतिक ध्रुवीकरण

रूस और चीन के गठबंधन ने वैश्विक कूटनीति को दो ध्रुवीय बना दिया है। एक तरफ पश्चिमी देश (अमेरिका, यूरोप) और दूसरी तरफ रूस-चीन का ध्रुवीकरण हो रहा है।

3. मानवीय संकट

युद्ध के चलते उत्पन्न हुआ शरणार्थी संकट लंबे समय तक दुनिया के लिए मानवीय और आर्थिक चुनौती बना रहेगा।

4. अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विकास

युद्ध के चलते व्यापार में आए व्यवधान और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़े असर से विकासशील देशों के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

यूक्रेन-रूस युद्ध ने विश्व को एक ऐसे संकट में डाल दिया है, जिसका समाधान निकट भविष्य में नहीं दिखता। इस युद्ध के कारण उत्पन्न मानवीय संकट, ऊर्जा संकट और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता ने पूरी दुनिया को हिला दिया है। आने वाले समय में, इस संघर्ष के परिणामस्वरूप वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में व्यापक बदलाव हो सकते हैं। यह समय है कि वैश्विक समुदाय इस युद्ध को समाप्त करने के लिए ठोस कूटनीतिक प्रयास करे और स्थिरता की दिशा में कदम बढ़ाए।

अस्वीकरण: इस लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं और न्यूज पोर्टल की नीतियों का प्रतिनिधित्व नहीं करते।

लेफ्टिनेंट जनरल कविता सहाय ने एक विशेष सैनिक सम्मेलन को संबोधित किया

लखनऊ: एएमसी सेंटर एवं कॉलेज की कमांडेंट तथा ओआईसी रिकॉर्ड्स और एएमसी के कर्नल कमांडेंट, लेफ्टिनेंट जनरल कविता सहाय, एसएम, वीएसएम को रक्षा मंत्रालय, नौसेना, नई दिल्ली के एकीकृत मुख्यालय में महानिदेशक चिकित्सा सेवा (नौसेना) के रूप में नई नियुक्ति दी गई है ।

एएमसी सेंटर एवं कॉलेज की कमांडेंट का पदभार छोड़ने से पहले लेफ्टिनेंट जनरल कविता सहाय ने 08 अक्टूबर 2024 को मेजर एलजे सिंह एसी ऑडिटोरियम में एक विशेष सैनिक सम्मेलन में आर्मी मेडिकल कोर सेंटर और कॉलेज के सभी अधिकारियों, नर्सिंग अधिकारियों, जूनियर कमीशंड अधिकारियों, जवानों और रंगरूटों को संबोधित किया।

इस दौरान लेफ्टिनेंट जनरल कविता सहाय ने आयोजित एक पारंपरिक ‘बड़ाखाना’ में एएमसी सेंटर और कॉलेज के पूरे रैंक के साथ दोपहर का भोजन किया। सैन्य परम्पराओं के अनुरूप जब कोई जनरल अफसर नई तैनाती पर जाता है तो एक ही छत के नीचे “बड़ा खाना”में सम्मिलित होता है।