यूपी सहित देश के अन्य राज्यों की 45/46 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 13 नवंबर को, मिल्कीपुर पर नहीं होगी वोटिंग
लखनऊ: भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने मंगलवार को यूपी सहित अन्य राज्यों की 45/46 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा कर दी है। उत्तर प्रदेश की 9 विधानसभा सीटों पर 13 नवंबर 2024 को मतदान होगा। हालांकि, अयोध्या के मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की तारीख घोषित नहीं की गई है।
• मतदान की तारीख: 13 नवंबर को यूपी की 9 विधानसभा सीटों पर
• मतगणना: 23 नवंबर 2024 को नतीजे घोषित होंगे
किन सीटों पर होंगे उपचुनाव ?
1. कटेहरी
2. खैर
3. गाजियाबाद शहर
4. मीरापुर
5. कुंदरकी
6. सीसामऊ
7. फूलपुर
8. मिर्जापुर की मझवां
9. मैनपुरी की करहल
मिल्कीपुर सीट पर क्यों नहीं होगा उपचुनाव?
अयोध्या की मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा नहीं की गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने जानकारी दी है कि मिल्कीपुर सीट पर चुनाव को लेकर मामला हाईकोर्ट में लंबित है। 2022 विधानसभा चुनाव में हारने के बाद पूर्व विधायक गोरखनाथ बाबा ने मिल्कीपुर सीट से जीते उम्मीदवार अवधेश प्रसाद के खिलाफ चुनाव याचिका दायर की थी। इस याचिका पर फैसला अभी पेंडिंग है, जिसके चलते निर्वाचन आयोग ने इस सीट पर उपचुनाव की तारीख नहीं घोषित की।
अखिल क्षत्रिय महासभा के प्रदेश अध्यक्ष हैं कौशाम्बी के टेंवा निवासी वीरेंद्र सिंह
कौशाम्बी की ज़िला पंचायत अध्यक्ष कल्पना सोनकर व पूर्व ब्लॉक प्रमुख सिराथू जितेन्द्र कुमार सोनकर भी साथ में रहे मौजूद
लखनऊ: भगवान श्री कृष्ण जन्मभूमि मथुरा व शाही ईदगाह विवाद के पक्षकार अखिल क्षत्रिय महासभा के प्रदेश अध्यक्ष व कौशांबी प्रधान संघ के पूर्व अध्यक्ष रहे वीरेंद्र सिंह ने सीएम योगी से मुलाकात की। इस दौरान उनके साथ कौशांबी की जिला पंचायत अध्यक्ष कल्पना सोनकर व सिराथू के पूर्व ब्लाक प्रमुख जितेंद्र सोनकर भी मौजूद थे।
इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रहे भगवान श्री कृष्ण जन्मभूमि विवाद की तात्कालिक स्थिति से अवगत कराया। इसके अलावा उन्होंने उत्तर प्रदेश व विशेष रूप से कौशांबी जनपद के राजनीतिक व सामाजिक परिस्थितियों की जानकारी भी मुख्यमंत्री को दी।
ज्ञात हो कि कौशांबी के टेवा निवासी वीरेंद्र सिंह भगवान श्री कृष्ण जन्मभूमि विवाद में अपने पुत्र विजय सिंह के साथ पक्षकार हैं। इसके अलावा उनके सुपुत्र समाज सेवी विजय सिंह ने वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मामले पर भी जिला न्यायालय में एक मुकदमा कर रखा है।
लखनऊ: सनातन धर्म के अनुयायियों पर सदियों से अत्याचार होते आए हैं, चाहे वह मुगल काल हो या अंग्रेजों का शासन। इतिहास साक्षी है कि कभी भी किसी हिंदू ने दूसरे धर्म को नष्ट करने का प्रयास नहीं किया। हम हिंदू गुरु गोबिंद सिंह के मासूम बेटों फतेह सिंह और जोरावर सिंह के बलिदान को नहीं भूले, जिन्हें इस्लाम न अपनाने पर दीवार में जिंदा चुनवा दिया गया था। इसी तरह, हम टीपू सुल्तान के अत्याचारों को भी याद रखते हैं, जिसने लाखों हिंदुओं का नरसंहार किया था।
1947 में भारत का विभाजन दुनिया का पहला और अंतिम विभाजन था जो मजहब के आधार पर हुआ। इस विभाजन के दौरान हजारों महिलाओं को बलात्कार, हत्या और धर्मांतरण का सामना करना पड़ा। कई महिलाओं ने खुदकुशी कर अपनी जान बचाई, और उनकी लाशों से कुएं भर गए। विभाजन के समय कुछ जिलों में हिंदू और सिख आबादी 30% से घटकर मात्र 1% रह गई। यह जिहाद नहीं तो और क्या था?
सदियों से हिंदुत्व पर आघात
विदेशी आक्रमणकारियों ने हजारों साल पहले हिंदुत्व को खत्म करने के इरादे से हिंदुस्तान की जमीन पर कदम रखा था। बाबर से लेकर अंग्रेजों तक, हिंदू मंदिरों का विध्वंस और निर्दोष हिंदुओं की हत्या एक क्रमिक जिहाद का हिस्सा रही है। विभाजन के बाद भी यह जहर खत्म नहीं हुआ, बल्कि हमारी पहचान और संस्कृति पर लगातार सवाल खड़े होते रहे।
कश्मीरी पंडितों का विस्थापन
1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों को अपने पूर्वजों की भूमि से विस्थापित होना पड़ा। आज तक संयुक्त राष्ट्र में इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई है। आखिर हर बार हिंदू ही क्यों पीड़ित होते हैं? क्या यह उनकी सहनशीलता की सजा है?
लव जिहाद और छद्म षड्यंत्र
आज के युग में, मुस्लिम युवक हिंदू नाम रखकर हिंदू युवतियों को प्रेम जाल में फंसा रहे हैं। इसे लव जिहाद कहा जाता है, और इसके लिए उन्हें मौलवियों से धनराशि भी मिलती है। सनातन धर्म को इन विभिन्न प्रकार के जिहादों से लड़ते हुए हजारों साल हो गए हैं, और अब समय आ गया है कि हम एक संगठित होकर इसका सामना करें।
धर्म युद्ध का आह्वान
रीना एन सिंह ने यह भी लिखा कि हमें यह समझना होगा कि अब धर्म की रक्षा के लिए हमें धर्म युद्ध का संकल्प लेना होगा। हमारा सनातन धर्म शास्त्र के साथ शस्त्र की भी शिक्षा देता है। हमें यह दिखाना होगा कि हम न केवल माला जप सकते हैं, बल्कि तलवार भी चला सकते हैं। अगर हमें अपनी पहचान की रक्षा करनी है, तो हमें इस जिहाद के खिलाफ खड़ा होना ही होगा।
उन्होंने लिखा कि भगवान कृष्ण के समय महाभारत का युद्ध हुआ था, और आज हमें भी एक नए धर्म युद्ध के लिए तैयार होना होगा। हमें संकल्प लेना होगा कि किसी भी हाल में हमारी पहचान और संस्कृति पर कोई आघात न हो।
ध्यान दें: यह लेख सनातन धर्म और हिंदू संस्कृति की सुरक्षा के संदर्भ में लिखा गया है। इसका उद्देश्य धार्मिक सहिष्णुता और आत्मरक्षा की भावना को जागृत करना है।
लखनऊ: आमजन को वाहन संबंधी सुविधाओं का लाभ प्रदान करने के लिए उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब वाहन स्वामी घर बैठे परिवहन विभाग की 09 सेवाओं का लाभ आधार प्रमाणिकरण के माध्यम से उठा सकते हैं। यह सुविधा प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के निर्देश पर लागू की गई है, जिसके तहत परिवहन मंत्री के आदेश पर इन सेवाओं को तुरंत प्रभाव से लाइव कर दिया गया है।
परिवहन आयुक्त श्री चंद्रभूषण सिंह ने बताया कि इन सेवाओं के लाइव होने से आमजनमानस को परिवहन कार्यालय जाने की ज़रूरत नहीं होगी। इससे भागदौड़ और अनावश्यक समय की बर्बादी से राहत मिलेगी। जिन सेवाओं को लाइव किया गया है उनमें शामिल हैं:
1. डुप्लिकेट आरसी
2. विशेष परमिट
3. आरसी विवरण
4. डुप्लिकेट परमिट
5. डुप्लिकेट फिटनेस सर्टिफिकेट
6. डुप्लिकेट डीएल
7. डीएल में पता परिवर्तन
8. डीएल प्रतिस्थापन
9. डीएल एक्सट्रैक्ट
इन सेवाओं के अतिरिक्त पहले से ही शिक्षार्थी लाइसेंस, स्थायी पंजीकरण हेतु आवेदन और लाइसेंस एवं वाहन से मोबाइल नंबर अपडेट की सेवाएं आधार प्रमाणिकरण के माध्यम से फेसलेस की गई थीं।
फेसलेस सेवाओं का बढ़ता दायरा
श्री सिंह ने कहा कि इन सेवाओं को फेसलेस किए जाने से जनता को आसानी से सेवाएं प्राप्त होंगी। भविष्य में और भी सुविधाओं को इस प्रणाली के तहत फेसलेस किया जाएगा, जिससे लोगों को वाहन संबंधी कार्यों के लिए परिवहन कार्यालय जाने की आवश्यकता कम हो जाएगी। परिवहन विभाग की यह पहल डिजिटल इंडिया मिशन को सशक्त बनाने के साथ ही नागरिकों के लिए अत्यधिक सुविधाजनक साबित हो रही है।
क्या है आधार प्रमाणिकरण के फायदे?
आधार प्रमाणिकरण के माध्यम से सेवाओं का लाभ उठाने से नागरिकों को न केवल समय की बचत होगी बल्कि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी और अनियमितताओं पर भी रोक लगाई जा सकेगी। इसके अलावा, सेवाएं पूरी तरह से ऑनलाइन हो जाने से दस्तावेजों का सत्यापन और प्रमाणिकरण प्रक्रिया और भी सरल हो गई है।
परिवहन विभाग की इस नई पहल से लाखों वाहन स्वामियों को घर बैठे सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उनकी जीवनशैली और भी आसान होगी। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि कार्यों में पारदर्शिता और सुगमता भी बढ़ेगी। उम्मीद है कि आने वाले समय में और भी सेवाओं को फेसलेस करके इस प्रणाली के तहत लाया जाएगा।
बालिकाओं को सशक्त बनाने के लिए योगी सरकार की महत्वपूर्ण पहल
सत्र 2023-24 में 16 लाख से अधिक बालिकाओं को आत्मरक्षा के प्रति किया गया जागरूक
सत्र 2024-25 में 32 लाख से अधिक बालिकाएं हैं पंजीकृत, 4.90 लाख को अब तक मिल चुका है प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान दी जा रही सुरक्षा और हिंसा से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनों की जानकारी
नवरात्रि के दौरान विभिन्न तिथियों में लाखों बालिकाओं को किया गया जागरूक
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा संचालित मिशन शक्ति के अंतर्गत परिषदीय बालिकाओं को सशक्त बनाने के लिए चलाये जा रहे ‘वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण’ कार्यक्रम के तहत लाखों बालिकाओं को आत्मरक्षा के गुर सिखा कर उन्हें आत्मरक्षा के प्रति जागरुक किया गया है। सत्र 2024-25 में अब तक 4.90 लाख बालिकाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जबकि 32 लाख से अधिक बालिकाएं इस प्रशिक्षण के लिए पंजीकृत हैं।
बता दें कि योगी सरकार ने पिछले सत्र यानी 2023-24 में वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण अनुश्रवण और मूल्यांकन में कुल 24 लाख 08 हजार 736 बालिकाओं को पंजीकृत किया था। जिसके माध्यम से 16 लाख से अधिक बालिकाओं को सशक्त बनाते हुए आत्मनिर्भरता की राह पर अग्रसर किया जा चुका है। योगी सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं को आत्मनिर्भर और समाज में अपनी सुरक्षा को लेकर सशक्त बनाना है। इस वर्ष नवरात्र में भी योगी सरकार ने इस पहल को जारी रखा और मिशन शक्ति के पांचवें चरण के अंतर्गत 3 अक्टूबर से 10 अक्टूबर के मध्य 19 लाख 50 हजार 216 बालिकाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनने के लिए विभिन्न गतिविधियां और कार्यक्रम आयोजित कर चुकी है।
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह का कहना है कि विभाग के माध्यम से इस सत्र में 19 लाख 50 हजार 216 बालिकाओं और समुदाय के साथ बाल अधिकार, सुरक्षा-संरक्षा, घरेलू हिंसा, यौन हिंसा, छेड़छाड़, सेफ-अनसेफ टच, हेल्प लाइन नंबर्स, बाल विवाह के नुकसान जैसी जानकारी साझा की गयी है। सत्र 2024-25 में अब तक 4.90 लाख बालिकाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है। हालांकि, अभी यह प्रयास जारी है और आगे भी चलता रहेगा। लक्ष्य है कि सभी बालिकाएं आत्मरक्षा का प्रशिक्षण लेकर सशक्त बनें और आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ें।
इन तिथियों में इतनी बालिकाएं हुईं जागरूक और प्रशिक्षित
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक नवरात्र के पहले दिन यानी 03 अक्टूबर को 6 लाख 72 हजार 840 बालिकाओं को जागरूक/ प्रशिक्षित किया गया जबकि 04 अक्टूबर को जागरुक/प्रशिक्षित की जानें वाली बालिकाओं की संख्या 01 लाख 91 हजार 969 रही। ऐसे ही 05 अक्टूबर को 01 लाख 56 हजार 472, 06 अक्टूबर को 77 हजार 503, 07 अक्टूबर को 02 लाख 08 हजार 923, 08 अक्टूबर को 01 लाख 30 हजार 924, 09 अक्टूबर को 04 लाख 934 और 10 अक्टूबर को 01 लाख 10 हजार 652 बालिकाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जा चुका है।
यह है उद्देश्य
बालिकाओं को आत्मरक्षा में सक्षम व स्वयं के प्रति सशक्त बनाना।
महिला एवं बालिकाओं के प्रति अपराधों से संबंधित कानूनों, प्रावधानों के बारे में बालिकाओं की समझ विकसित करना।
महिला एवं बालिकाओं की सुरक्षा हेतु संचालित विभिन्न हेल्पलाइन की सेवाओं के बारे में जानकारी उपलब्ध कराना।
बालिकायें आत्मरक्षा की विधाओं को सीखने के उपरांत अन्य बालिकाओं को भी जागरूक करने में सक्षम हो सकें।
बालिकाओं के प्रति होने वाली हिंसा की रोकथाम हेतु माहौल बनाना।
असुरक्षा के कारण शिक्षा से वंचित होने वाली बालिका की शिक्षा में निरंतरता सुनिश्चित करना।