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लखनऊ: श्री राम औद्योगिक अनाथालय में 9 नाबालिग लड़कियां संदिग्ध हालात में लापता, पुलिस जांच जारी

लखनऊ: प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित श्रीराम औद्योगिक अनाथालय से 9 नाबालिग लड़कियों के संदिग्ध परिस्थितियों में लापता होने की घटना ने सनसनी फैला दी है। ये सभी लड़कियां पास्को एक्ट (POCSO Act) की पीड़िता थीं, और उनके गायब होने से अनाथालय प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दो लड़कियों को बरामद कर लिया है, जबकि बाकी सात लड़कियों की तलाश जारी है।

घटना का विस्तृत विवरण

अनाथालय से ये 9 लड़कियां जाली और ग्रिल काटकर गायब हुई हैं। प्रशासन का दावा है कि लड़कियां भाग गईं, लेकिन घटनास्थल पर मिले सबूत और हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। शुरुआती जांच में यह अंदेशा जताया जा रहा है कि लड़कियों को भगाया गया या उनका अपहरण किया गया हो सकता है।

अनाथालय में उत्पीड़न के आरोप

सूत्रों के मुताबिक, इस अनाथालय में बच्चियों को लगातार शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा था। कुछ बच्चियों ने अधिकारियों पर उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे, और यह माना जा रहा है कि इन्हीं प्रताड़नाओं से तंग आकर लड़कियों ने भागने का प्रयास किया। इस अनाथालय से पहले भी कई बार बच्चियां गायब हो चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई थी।

एसीपी वृजनारायण सिंह का महत्वपूर्ण बयान

घटना के संबंध में सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) वृज नारायण सिंह ने बताया

  • “थाना अलीगंज में सुबह 3:45 बजे 9 लड़कियों के भाग जाने की सूचना प्राप्त हुई। पुलिस ने तुरंत घटना का संज्ञान लिया और त्वरित कार्रवाई शुरू की।”
  • “दो लड़कियों को तुरंत बरामद कर लिया गया है और बाकी सात की तलाश के लिए पुलिस पूरी कोशिश कर रही है।”
  • “लड़कियों की तलाश रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन और अन्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में की जा रही है। पीड़िताओं के परिजनों से संपर्क किया जा रहा है और हर संभावित कदम उठाए जा रहे हैं।”

श्रीराम औद्योगिक अनाथालय अराजक गतिविधियों का केंद्र

श्रीराम औद्योगिक अनाथालय पहले से ही विवादों में घिरा रहा है। सूत्रों की मानें तो यह संस्थान लंबे समय से अराजक गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। कई बार इस संबंध में शिकायतें और खबरें सामने आईं, लेकिन आज तक प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। बच्चियों के गायब होने की यह घटना अनाथालय की सुरक्षा और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने सक्रियता दिखाई और तत्काल तलाशी अभियान शुरू किया। अब तक दो लड़कियों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया है, जबकि बाकी सात लड़कियों की तलाश के लिए पुलिस ने रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर विशेष निगरानी बढ़ा दी है।

प्रशासन और कानून व्यवस्था पर सवाल

इस घटना ने लखनऊ के प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। डीएम और एडीएम जैसे उच्च अधिकारियों की निगरानी में चल रहे अनाथालय से लड़कियों का भागना एक गंभीर सुरक्षा चूक की ओर इशारा करता है। सवाल उठ रहे हैं कि इतने कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बावजूद लड़कियां कैसे भागने में सफल हुईं ? यह घटना न केवल लखनऊ बल्कि देशभर के अनाथालयों की सुरक्षा और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करती है। पुलिस अपनी जांच कर रही है, लेकिन लड़कियों का इस तरह से गायब होना समाज और प्रशासन दोनों के लिए एक चेतावनी है।

कौशाम्बी: मां आनंदेश्वरी रामलीला सेवा ट्रस्ट ने किया मुकुट पूजन, 19 अक्टूबर से रामलीला का शुभारंभ

कौशांबी/लखनऊ: विकास खंड सरसवा क्षेत्र के ग्राम पंचायत अढौली में गुरुवार को मां आनंदेश्वरी रामलीला सेवा ट्रस्ट द्वारा भव्य मुकुट पूजन समारोह संपन्न हुआ। इस पूजन के साथ ही 19 अक्टूबर से शुरू होने वाली रामलीला की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह रामलीला 23 अक्टूबर तक चलेगी, जिसमें रावण वध और भरत मिलाप जैसे प्रमुख कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

मेला कमेटी के अध्यक्ष रामअभिलाष सिंह ने बताया कि इस बार की रामलीला में स्थानीय कलाकारों के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों के जाने-माने कलाकार भी भाग लेंगे। हर साल की तरह इस वर्ष भी रामलीला में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिनमें बड़ी संख्या में दर्शकों के जुटने की संभावना है।

मुख्य आकर्षण:

1. रामलीला का शुभारंभ: 19 अक्टूबर को श्रीराम के राज्याभिषेक के साथ रामलीला का शुभारंभ होगा।

2. रावण वध: 23 अक्टूबर को रावण वध का दृश्य प्रस्तुत किया जाएगा, जो रामलीला का मुख्य आकर्षण होता है।

3. भरत मिलाप: रावण वध के बाद 23 अक्टूबर को ही भरत मिलाप का आयोजन किया जाएगा, जो रामलीला का समापन होगा।

विशेष तैयारियां:

• रामलीला मंचन के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं, जिसमें साउंड सिस्टम, लाइटिंग, और सेट डिजाइनिंग पर विशेष ध्यान दिया गया है।

• सुरक्षा और सुविधा के दृष्टिकोण से मेला क्षेत्र में व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पुलिस और स्वयंसेवकों की टीमों को भीड़ नियंत्रण और ट्रैफिक व्यवस्था के लिए तैनात किया जाएगा।

• रामलीला के दौरान सांस्कृतिक और धार्मिक झांकियां भी प्रस्तुत की जाएंगी, जो दर्शकों को आकर्षित करेंगी।

स्थानीय जनता का उत्साह:

ग्राम अढौली और आसपास के क्षेत्रों के लोग हर साल इस रामलीला में बड़ी संख्या में भाग लेते हैं। मुकुट पूजन के बाद लोगों में रामलीला को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। गांव के बुजुर्गों के अनुसार, मां आनंदेश्वरी रामलीला एक पुरानी परंपरा है, जो हर साल लोगों को रामायण की शिक्षाओं से प्रेरित करती है।

आयोजन से जुड़ी प्रमुख जानकारी:

आयोजन स्थल: ग्राम पंचायत अढौली, विकास खंड सरसवा, कौशांबी

तारीख: 19 से 23 अक्टूबर 2024

कार्यक्रम: रामलीला, रावण वध, भरत मिलाप

यूपी राजभवन: कार्मिकों द्वारा सी.पी.आर. का किया गया व्यवहारिक अभ्यास

  • राजभवन में ‘‘सडन कार्डियक अरेस्ट‘‘ की जागरूगता पर कार्यशाला का हुआ आयोजनकार्डियोलॉजी विभाग एस0जी0पी0जी0आई0 के चिकित्सक एवं टीम द्वारा दिया गया बचाव प्रशिक्षण

लखनऊ: राजभवन में आज ‘‘सडन कार्डियक अरेस्ट‘‘ के सम्बन्ध में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कार्डियोलॉजी विभाग एस0जी0पी0जी0आई0, लखनऊ के डॉ0 आदित्य कपूर एवं उनकी टीम ने राजभवन के कर्मचारियों एवं अधिकारियों को महत्वपूर्ण जानकारी व प्रशिक्षण प्रदान किया।

कार्यशाला में ‘‘सडन कार्डियक अरेस्ट‘‘ के लक्षण, सी0पी0आर0 एवं आपात स्थिति से निपटने हेतु उपाय व त्वरित उपचार के बारे में बताया गया। इस अवसर पर पी0पी0टी0 एवं वीडियो के माध्यम से एक प्रस्तुतिकरण भी किया गया, जिसमें सी0पी0आर0 की प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से दिखाया गया।
डॉ0 आदित्य कपूर ने सडन कार्डियक अटैक और हार्ट अटैक में अंतर, आपातकालीन स्थिति में सहायता, कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सी0पी0आर0) तकनीक, वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन, ए0ई0डी0 मशीन, शॉक मशीन आदि के सम्बन्ध में जानकारी प्रदान की। इस अवसर पर आपातकालीन परिस्थितियों में पीड़ितों की तत्काल सहायता से सम्बन्धित गुड समैरिटन लॉ व अन्य कानूनी प्रावधानों की भी चर्चा की गई।

डॉ0 कपूर ने अपने प्रस्तुतिकरण के माध्यम से उपस्थित लोगों को बताया कि समय पर सही जानकारी और त्वरित कार्यवाही कितनी महत्वपूर्ण होती है। कार्यशाला में उपस्थित लोगों ने इस संदर्भ में व्यवहारिक अभ्यास भी किया, जिससे उन्हें आवश्यक कौशल सीखने का अवसर मिला। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव राज्यपाल डॉ0सुधीर महादेव बोबडे, विशेष कार्याधिकारी शिक्षा डॉ0 पंकज एल0 जानी, विशेष सचिव राज्यपाल श्रीप्रकाश गुप्ता समेत राजभवन के समस्त अधिकारी व कर्मचारीगणों की उपस्थिति रही।

वृंदावन योजना की 32 एकड़ भूमि पर बनेगा भव्य कन्वेंशन सेंटर, डॉ.राजेश्वर सिंह ने सीएम योगी का जताया आभार

  • जय श्रीराम के नारों के बीच कल्ली पूरब गांव से रवाना हुई 31 वीं रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा
  • बुजुर्गों, महिलाओं को निरंतर अयोध्या दर्शन करवा रहे डॉ. राजेश्वर सिंह, कल्ली पश्चिम से रवाना हुई 31वीं रामरथ श्रवण अयोध्या बस सेवा
  • आजादी कभी मुफ्त में नहीं मिलती, क्रांतिकारियों के साहस, बलिदान से प्रेरणा लें युवा- डॉ. राजेश्वर सिंह
  • 23 साल की उम्र में भगत सिंह फांसी चढ़े, 10 साल से ज्यादा सावरकर ने काटी काला पानी की सजा, क्रांतिकारियों के सपनों के एकजुट-आत्मनिर्भर भारत के निर्माण को आगे आएं युवा

लखनऊ: सरोजनीनगर विधायक डॉ.राजेश्वर सिंह ने तेलीबाग, लखनऊ स्थित वृंदावन योजना में देश के दूसरे सबसे बड़े कन्वेशन सेंटर की स्वीकृति पर क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “वृंदावन योजना में प्रस्तावित यह इंटरनेशनल एग्जीबिशन कम कन्वेंशन सेंटर 32 एकड़ भूमि पर विस्तृत होगा जिसमें 10 हजार दशकों के बैठने की व्यवस्था होगी। आधुनिकता की चमक और संस्कृति की आभा से परिपूर्ण यह केंद्र लखनऊ को नई पहचान दिलाएगा।”

  • विधायक ने आगे लिखा, “सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में इस भव्य केंद्र के निर्माण की स्वीकृति हेतु श्रद्धेय योगी आदित्यनाथ जी का कोटिशः वंदन, अभिनंदन एवं हृदय से आभार!”
  • 31वीं रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा (निःशुल्क बस सेवा) के माध्यम से कल्ली पश्चिम वासियों ने किया भव्य राममंदिर के दर्शन
  • वृहस्पतिवार को सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा अपनी मां तारा सिंह की स्मृति में अनवरत संचालित रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा का संचालन ग्राम पंचायत कल्ली पूरब से किया गया
  • इस निःशुल्क बस सेवा के माध्यम से कल्ली पश्चिम गांव के बुजुर्गों और महिलाओं को अयोध्या लाने, ले जाने से लेकर रास्ते में उनके भोजन, नाश्ता और सुलभता पूर्वक दर्शन कराने की व्यवस्था भी विधायक की टीम द्वारा की गई
  • डॉ. राजेश्वर सिंह ने क्रांतिकारियों के बलिदान को किया याद, क्रांतिकारियों के सपनों के भारत के निर्माण को युवाओं का किया आह्वान्

सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने वृहस्पतिवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स(ट्विटर) पर पोस्ट कर स्वाधीनता संग्राम सेनानियों के बलिदान को याद करते हुए लिखा कि स्वतंत्रता अमूल्य है, लोकतंत्र को बनाए रखना और भारत की संप्रभुता की रक्षा करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रत्येक पीढ़ी हमारे देश के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने ट्वीट में क्रांतिकारियों को हुए कारावास से संबंधित आंकड़े प्रस्तुत करते हुए आगे लिखा असहयोग और भारत छोड़ो आंदोलन सहित विभिन्न आंदोलनों के नेतृत्व के दौरान महात्मा गांधी 2,088 दिन जेल में रहे। 1941 में नजरबंदी के दौरान भागने से पहले नेता जी सुभाष चंद्र बोस अनुमानित तीन साल जेल में रहे। अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण विनायक दामोदर सावरकर को सेलुलर जेल में 10 वर्षों से अधिक समय बिताना पड़ा। बाल गंगाधर तिलक को लगभग छह साल जेल में बिताना पड़ा जिसमें उन्हें दो साल मांडले, बर्मा में बंद रहे। कई आंदोलनों के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल लगभग दो साल जेल में बंद रहे।

युवा स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करते हुए डॉ. सिंह ने आगे लिखा 23 मार्च 1931 को 23 साल की उम्र में भगत सिंह को फाँसी पर लटका दिया गया। सुखदेव थापर को 23 मार्च 1931 को 23 साल की उम्र में फाँसी दी गई, शिवराम राजगुरु को 23 मार्च 1931 को 22 साल की उम्र में फाँसी दी गई, राजेंद्र नाथ लाहिड़ी को 17 जून 1926 को 29 साल की उम्र में फाँसी दी गई, उधम सिंह को माइकल ओ’डायर की हत्या के लिए 31 जुलाई 1940 को 40 साल की उम्र में फांसी दी गई।

सरोजनीनगर विधायक ने आगे लिखा ये आंकड़े हमें याद दिलाते हैं कि आज़ादी कभी मुफ़्त में नहीं मिलती, अपने बलिदान से आजादी दिलाने वाले क्रांतिकारियों के साहस और प्रतिबद्धता से आज के युवाओं को आगे बढ़ने, लोकतंत्र की रक्षा और न्याय के लिए खड़े होने की प्रेरणा मिलनी चाहिए।

डॉ. सिंह ने आगे जोड़ा जिस तरह हम क्रांतिकारियों की विरासतों का सम्मान करते हैं, आइए यह सुनिश्चित करें कि हम उस भारत के निर्माण में योगदान करें जिसकी इन नायकों ने कल्पना की थी- एक एकजुट, आत्मनिर्भर राष्ट्र।

नवाबों के शहर लखनऊ से शेख़ों के शहर दुबई तक: डॉ. पीयूष शुक्ला को होम्योपैथी में अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान

  • ऑफलाइन चिकित्सा से लेकर ऑनलाइन कंसल्टेशन तक के इस दौर में सफल इलाज
  • होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के बारे में डॉ०पीयूष का कहना है कि यह पद्धति बीमारियों का जड़ से इलाज करती है और शरीर का संतुलन बनाए रखती है
  • डॉ. पीयूष शुक्ला की चिकित्सकीय यात्रा: उन्होंने भारत और विदेशों में शिक्षा प्राप्त कर होम्योपैथी को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाया
  • अंतरराष्ट्रीय सम्मान: उन्हें हाल ही में दुबई में मिले “प्राइड ऑफ होम्योपैथी अवार्ड” समेत कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिल चुके हैं
  • उनकी क्लीनिक में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से मिल रही हैं होम्योपैथी में आधुनिक चिकित्सा सेवाएँ
  • चिकित्सा सेवा में परिवार का योगदान: डॉ. शुक्ला और उनकी पत्नी अपने पिता की होम्योपैथी धरोहर को आगे बढ़ा रहे हैं, साथ ही उनका पूरा परिवार चिकित्सा सेवा से जुड़ा हुआ है

लखनऊ: उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में चिकित्सा सेवाओं का क्षेत्र दिनोंदिन विकसित हो रहा है। शहर की चिकित्सा पद्धतियों में होम्योपैथी एक ऐसी विधा है, जिसने बीमारियों का जड़ से इलाज करने के लिए अपनी प्रासंगिकता बनाए रखी है। इस विधा में लखनऊ के डॉ. पीयूष शुक्ला का नाम एक प्रतिष्ठित और विश्वसनीय होम्योपैथिक चिकित्सक के रूप में उभर कर सामने आया है। उनके क्लीनिक, डॉ. पीयूष होम्योपैथी (A Unit of Anand Homeo Care), ने न केवल स्थानीय बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी चिकित्सा सेवाओं का विस्तार किया है।

होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति: एक ऐतिहासिक पद्धति

होम्योपैथी की उत्पत्ति 18वीं सदी में हुई, लेकिन इसके सिद्धांत आज भी उतने ही प्रभावी माने जाते हैं। इसमें किसी बीमारी का इलाज उसकी जड़ से किया जाता है, जिससे मरीज की समग्र स्वास्थ्य स्थिति बेहतर हो जाती है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह दवाइयाँ शरीर के प्राकृतिक संतुलन को नुकसान पहुंचाए बिना रोगों को ठीक करती हैं। यही कारण है कि आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के बावजूद, होम्योपैथी का महत्व आज भी कम नहीं हुआ है।

डॉ. पीयूष शुक्ला: एक चिकित्सकीय धरोहर

डॉ. पीयूष शुक्ला का चिकित्सा के क्षेत्र में योगदान एक पारिवारिक धरोहर से जुड़ा है। उनके पिता, डॉ. शिव कुमार (S.K.) शुक्ला, ने लखनऊ के लाल कुआं इलाके में अपने होम्योपैथी क्लीनिक की शुरुआत की थी और पिछले 50 वर्षों से वे लोगों की सेवा कर रहे हैं। अपने पिता से चिकित्सा की गहनता को देखते हुए, डॉ. पीयूष ने भी इस पद्धति में रुचि ली और इसे ही अपने जीवन का उद्देश्य बनाया।

डॉ. शुक्ला ने होम्योपैथी को केवल एक पारंपरिक व्यवसाय के रूप में नहीं अपनाया, बल्कि इसे अपनी लगन, मेहनत और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ जोड़कर इसे एक नई ऊंचाई तक पहुँचाया। इसी लगन की वजह से आज उन्होंने न सिर्फ़ लखनऊ, उत्तरप्रदेश व भारत बल्कि विश्व के नामचीन होम्योपैथी डॉक्टरों के बीच दुबई में भी सम्मान प्राप्त किया है।

डॉ. पीयूष शुक्ला की शैक्षणिक यात्रा और विशेषज्ञता

डॉ. शुक्ला ने होम्योपैथी चिकित्सा में अपनी शिक्षा भारत से शुरू की और फिर विदेशों में जाकर इस पद्धति के विभिन्न आयामों का अध्ययन किया। उन्होंने पुणे स्थित भारतीय विद्यापीठ डीम्ड यूनिवर्सिटी से BHMS (बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी) की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने इंग्लैंड से PGDEMS (पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन इमरजेंसी मेडिकल सर्विसेज) की डिग्री हासिल की। इसके साथ ही, मुंबई से उन्होंने CCH (Certificate in Child Health), CGO (Certificate in Gynecology and Obstetrics), PGDEMLT (Post Graduate Diploma in Emergency Medical Laboratory Techniques) जैसे प्रतिष्ठित पाठ्यक्रम भी पूरा किए।

उनकी शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान अर्जित करना नहीं था, बल्कि मरीजों की जटिल समस्याओं का समाधान ढूंढना था। इसके लिए उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यताओं का सही उपयोग कर, प्रैक्टिकल अनुभव के साथ इसे नई दिशा दी।

पेशेवर सफर: लखनऊ के लालबाग से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का सफ़र

डॉ. पीयूष शुक्ला का चिकित्सा सफर 2008 में लखनऊ के लालबाग इलाके से शुरू हुआ। उनकी क्लीनिक, जो लालबाग चौराहे पर स्थित है, स्थानीय मरीजों के लिए एक भरोसेमंद केंद्र बन चुकी है। धीरे-धीरे उनके मरीजों की संख्या में इज़ाफा होता गया, और आज उनकी सेवाएँ देशभर में और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहुंच चुकी हैं। उनकी क्लीनिक आधुनिक तकनीक से लैस है, जहाँ पर ऑनलाइन कंसल्टेशन की सुविधा भी उपलब्ध है। सोशल मीडिया पर उनकी क्लीनिक की मजबूत उपस्थिति ने उन्हें नए दौर के मरीजों से जोड़ने में मदद की है।

डॉक्टर अंजू शुक्ला: धर्मपत्नी के रूप में एक सशक्त सहायक

डॉ.पीयूष शुक्ला के सफर में उनकी पत्नी डॉ.अंजू शुक्ला का भी अहम योगदान है। वह खुद भी होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति की विशेषज्ञ हैं और लाल कुआं व लालबाग स्थित क्लीनिक में अपने मरीजों का इलाज करती हैं। इस प्रकार, यह चिकित्सा सेवा शुक्ला परिवार के लिए केवल व्यवसाय नहीं बल्कि जनसेवा का एक माध्यम है।

डॉ. पीयूष शुक्ला एक संयुक्त परिवार में रहते हैं, जहाँ उनके परिवार के अधिकांश सदस्य चिकित्सा के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। यह परिवार समाज सेवा की भावना से ओत-प्रोत है और चिकित्सा के माध्यम से लोगों की भलाई के लिए कार्यरत है। शुक्ला परिवार के सभी सदस्य अपने-अपने क्षेत्र में विशेषज्ञ हैं, और जनसेवा को ही अपना प्रमुख उद्देश्य मानते हैं।

डॉ. पीयूष होम्योपैथी की मुख्य विशेषताएँ

डॉ.पीयूष शुक्ला की क्लीनिक कई गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज के लिए प्रसिद्ध है। उनके द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाएँ निम्नलिखित हैं:

  1. जटिल रोगों का जड़ से निदान: चाहे वह स्टोन की समस्या हो, एलोपेसिया (बाल झड़ने की समस्या), हार्मोनल डिसऑर्डर, या महिलाओं से संबंधित स्वास्थ्य समस्याएँ, डॉ. पीयूष ने इन बीमारियों का जड़ से इलाज किया है।
  2. मानसिक स्वास्थ्य का उपचार: वह मानसिक समस्याओं जैसे कि डिप्रेशन, अनिद्रा, तनाव, और चिंता (एंजायटी) का भी सफल इलाज करते हैं। उनके होम्योपैथिक इलाज ने कई मरीजों को मानसिक शांति और स्वास्थ्य प्रदान किया है।
  3. ऑनलाइन कंसल्टेशन: दूर-दराज़ के मरीजों की सुविधा के लिए उनकी क्लीनिक ऑनलाइन कंसल्टेशन की सुविधा भी प्रदान करती है, जिससे मरीज घर बैठे अपनी स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकते हैं।
  4. सोशल मीडिया पर सक्रियता: वर्तमान डिजिटल युग को ध्यान में रखते हुए, उनकी क्लीनिक सभी प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय है। इससे मरीज आसानी से उनकी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान

होम्योपैथी चिकित्सा में डॉ.पीयूष शुक्ला के योगदान को न केवल भारत में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। जुलाई 2024 में, उन्हें “प्राइड ऑफ होम्योपैथी अवार्ड” से सम्मानित किया गया, जो उन्हें दुबई (UAE) में आयोजित वर्ल्ड होम्योपैथी समिट-2 में प्रदान किया गया। यह सम्मान बुर्ज-अल-अरब, दुबई में आयोजित एक समारोह में दिया गया, जहाँ विश्व के 18 देशों से पहुंचे होम्योपैथी चिकित्सकों के बीच चुनिंदा भारतीय होम्योपैथी चिकित्सकों का सम्मान किया गया।

इसके अतिरिक्त, उन्हें नेशनल होमियोकॉन आइकॉनिक अवार्ड, आदर्श गौरव सम्मान, होम्योपैथी चिकित्सा रत्न सम्मान, होम्योपैथी विभूषण सम्मान, और होम्योपैथी गौरव सम्मान जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भारत में भी मिल चुके हैं।

डॉ०शुक्ला की भविष्य की योजनाएँ

डॉ. पीयूष शुक्ला की योजनाओं में उनकी सेवाओं को और व्यापक बनाना शामिल है। वे होम्योपैथी चिकित्सा को और भी प्रभावी बनाने के लिए अनुसंधान और विकास पर जोर दे रहे हैं। साथ ही, वह चाहते हैं कि अधिक से अधिक लोग इस पद्धति का लाभ उठाएँ, इसलिए वह ऑनलाइन कंसल्टेशन और टेलीमेडिसिन सेवाओं को और भी उन्नत बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

डॉ. पीयूष शुक्ला ने अपने अथक परिश्रम, समर्पण और होम्योपैथी चिकित्सा के प्रति असीम विश्वास से लखनऊ में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। उनके द्वारा प्रदान की जाने वाली चिकित्सा सेवाएँ केवल शारीरिक बीमारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और समग्र कल्याण के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। उनकी सेवाओं से न केवल लखनऊ के लोग लाभान्वित हो रहे हैं, बल्कि देश और विदेश से भी लोग उनके पास इलाज कराने आते हैं। डॉ.पीयूष शुक्ला का यह सफर निरंतर आगे बढ़ रहा है और वे समाज के प्रति अपनी सेवा भावना को और भी मजबूती से आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।