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मेरठ: बीजेपी नेता नवीन अरोड़ा के होटल में कैसिनो पर पुलिस का छापा, 15 गिरफ्तार

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  • बीजेपी नेता नवीन अरोड़ा के होटल में अवैध कैसिनो का आयोजन, 15 गिरफ्तार
  • कैसिनो में एंट्री फीस एक लाख रुपये थी और इसमें शामिल होने के लिए मुंबई से मॉडल्स को बुलाया गया था
  • सूचना लीक होने पर कई प्रभावशाली लोग मौके से फरार, लेकिन बीजेपी नेता नवीन अरोड़ा गिरफ्तार
  • पुलिस ने नोचंदी थाने में 13G की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया, अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी

मेरठ/लखनऊ: मेरठ के गढ़ रोड स्थित बीजेपी नेता नवीन अरोड़ा के होटल ‘हारमनी इन’ में पुलिस ने एक हाई-प्रोफाइल अवैध कैसिनो पर छापेमारी की। एसएसपी रोहित सिंह सजवाण के नेतृत्व में यह छापेमारी की गई, जिसमें एसपी सिटी और अन्य पुलिस अधिकारियों की टीम भी शामिल रही। पुलिस ने मौके से बीजेपी नेता नवीन अरोड़ा समेत 15 लोगों को गिरफ्तार किया और इनके खिलाफ नोचंदी थाने में 13G की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

कैसिनो आयोजन और भारी एंट्री फीस

सूत्रों के अनुसार, इस अवैध कैसिनो में शामिल होने के लिए एक लाख रुपये की एंट्री फीस तय की गई थी। इस आयोजन में शहर के करीब तीन दर्जन से अधिक धनाढ्य लोग शामिल हुए थे, जिनमें से कई बड़े व्यापारी और प्रभावशाली लोग भी थे। पुलिस का मानना है कि यह आयोजन बड़े स्तर पर किया गया था, जिसमें हाई-प्रोफाइल लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की गई थी। इसके लिए विशेष रूप से मुंबई से मॉडल्स को बुलाया गया था, जो इस आयोजन का आकर्षण बढ़ाने के लिए शामिल की गई थीं।

सूचना लीक और फरारी

पुलिस के अनुसार, छापेमारी की सूचना लीक हो जाने के कारण कई बड़े और प्रमुख लोग मौके से फरार हो गए। हालांकि, पुलिस ने बीजेपी नेता नवीन अरोड़ा को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की, जो बीजेपी मेरठ महानगर के पूर्व कोषाध्यक्ष भी रह चुके हैं। नवीन अरोड़ा के अलावा जिन 15 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उन पर भी अवैध जुए के आयोजन और भागीदारी के आरोप लगे हैं।

पुलिस की जांच और कार्रवाई

पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और फरार हुए अन्य आरोपियों की तलाश में दबिश जारी है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस हाई-प्रोफाइल कैसिनो के आयोजन में और कौन-कौन शामिल था और कितने समय से यह अवैध गतिविधियां चल रही थीं। पुलिस की यह कार्रवाई बड़े स्तर पर की गई है, जिसमें स्थानीय प्रशासन और खुफिया एजेंसियों की भी मदद ली जा रही है।

कैसिनो के पीछे की रणनीति

पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस कैसिनो का आयोजन गुप्त रूप से किया गया था और इसमें शामिल लोगों को विशेष आमंत्रण के माध्यम से बुलाया गया था। कैसिनो की सेवा और सुविधा को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए आयोजकों ने मुंबई से मॉडल्स को बुलवाया था, जो कि खेल के दौरान उपस्थित रहती थीं। इसके अलावा, यह आयोजन बेहद गोपनीय ढंग से संचालित हो रहा था, जिसमें बाहरी लोगों को कोई जानकारी नहीं थी।

आरोपियों पर कानूनी कार्यवाही

बीजेपी नेता नवीन अरोड़ा समेत अन्य गिरफ्तार लोगों पर नोचंदी थाने में 13G की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि इन सभी पर अवैध जुआ खेलने और कैसिनो चलाने के आरोप हैं। इसके साथ ही, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए भी पुलिस छापेमारी कर रही है। यह घटना मेरठ शहर के सामाजिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल का विषय बन गई है, क्योंकि इसमें एक प्रभावशाली बीजेपी नेता की संलिप्तता सामने आई है। पुलिस की यह छापेमारी जहां अवैध गतिविधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का उदाहरण है, तो वहीं इस घटना ने राजनीतिक हलकों में भी चिंता पैदा कर दी है, आगे अब देखना यह होगा कि पुलिस इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है और फरार आरोपियों को कब तक गिरफ्तार कर पाती है। यह मामला न केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा है बल्कि राजनीतिक साख पर भी असर डाल सकता है।

केजीएमयू को हरसंभव सहयोग मिलेगा: उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक

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  • उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि केजीएमयू को संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी
  • कुलपति प्रो.सोनिया नित्यानंद ने सरकार के प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया और नए लीनियर एक्सीलरेटर की स्थापना की घोषणा की
  • प्रशामक देखभाल इकाई के तहत गंभीर रोगियों के उपचार और देखभाल में हो रहे नवाचारों पर चर्चा की गई
  • कार्यक्रम में विभिन्न विशेषज्ञों ने गंभीर बीमारियों से जूझ रहे रोगियों की मानसिक और शारीरिक देखभाल पर अपने विचार साझा किए
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लखनऊ: किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के रेडियोथेरेपी विभाग में प्रशामक देखभाल इकाई द्वारा आयोजित सतत चिकित्सा कार्यक्रम में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद रहीं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे रोगियों की देखभाल और उपचार में हो रहे नवाचारों पर चर्चा करना था।

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का संबोधन

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उपमुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि केजीएमयू प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में से एक है, और यह अपनी परंपरा को बखूबी निभा रहा है। राज्य सरकार केजीएमयू के कार्यों से अत्यंत प्रसन्न है और हरसंभव वित्तीय एवं प्रशासनिक सहायता प्रदान करने के लिए कटिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि केजीएमयू को किसी भी प्रकार की संसाधनों की कमी नहीं होने दी जाएगी, ताकि यह संस्थान अपनी उत्कृष्ट सेवाएं जारी रख सके।

कुलपति केजीएमयू का धन्यवाद ज्ञापन

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कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने राज्य सरकार और उपमुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया, जिनके प्रयासों के चलते केजीएमयू को एक्सटेंशन के लिए भूमि उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने जानकारी दी कि रेडियोथेरेपी विभाग में जल्द ही एक नया लीनियर एक्सीलरेटर स्थापित किया जाएगा, जिससे कैंसर के रोगियों को और बेहतर उपचार मिल सकेगा।

प्रशामक देखभाल की महत्ता पर चर्चा

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कार्यक्रम में प्रशामक देखभाल के विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया। प्रशामक देखभाल (पैलियेटिव केयर) का उद्देश्य उन रोगियों की देखभाल करना है, जिनकी जीवन की संभावना शून्य होती है।

प्रो. राजेंद्र कुमार ने बताया कि वर्ष 2016 में जीव दया फाउंडेशन के सहयोग से इस परियोजना की शुरुआत हुई थी। अब सिप्ला फाउंडेशन इस परियोजना का संचालन कर रहा है, जिसमें 21,000 से अधिक रोगियों को चिकित्सा सेवाएं दी गई हैं। इसके तहत मानसिक चिकित्सा, पोषण संबंधी सुविधाएं, और रोगियों की देखभाल में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की जा रही है।

प्रो. शालीन कुमार ने कहा कि मरीज के आखिरी समय की देखभाल अत्यंत कठिन और भावनात्मक होती है। हमारे देश में इच्छामृत्यु की अनुमति नहीं है, इसलिए ऐसी स्थिति में रोगियों और उनके परिवार के साथ दार्शनिक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक होता है।

प्रो. संजय धीराज ने बताया कि इस प्रकार के रोगियों को नारकोटिक्स की दवाएं, जैसे अफीम, दी जाती हैं, जो कि बेहद दर्दनिवारक होती हैं। इसकी खुराक 2.5 से 5 मिलीग्राम से शुरू की जाती है और आवश्यकता अनुसार इसे बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, इसका प्रमुख दुष्प्रभाव कब्ज होता है, जिस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।

कार्यक्रम में शामिल प्रमुख विशेषज्ञ

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कार्यक्रम में प्रो. विनीत शर्मा, प्रो. अपजीत कौर, प्रो. राजीव गुप्ता, प्रो. अभिनव सोनकर, प्रो. संदीप तिवारी, प्रो. बीके ओझा, प्रो. क्षितिज श्रीवास्तव, प्रो. आनंद मिश्रा, और प्रो. पवित्र रस्तोगी सहित कई प्रमुख विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. सुधीर सिंह ने किया और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. सीमा गुप्ता ने दिया।

इस कार्यक्रम ने गंभीर बीमारियों से जूझ रहे रोगियों की देखभाल और उपचार में आ रही चुनौतियों पर चर्चा करने के साथ ही, प्रशामक देखभाल के महत्व पर प्रकाश डाला। उपमुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकार केजीएमयू को हरसंभव सहायता प्रदान करेगी, जिससे यह संस्थान अपने चिकित्सीय प्रयासों को और मजबूत बना सके।

यह कदम केजीएमयू की उत्कृष्ट सेवाओं को बनाए रखने और रोगियों को बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा परियोजना (एनपीईपी) की समीक्षा बैठक संपन्न, किशोरों के समग्र विकास पर जोर

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लखनऊ: लखनऊ के एक निजी होटल में 19 से 21 अक्टूबर तक आयोजित राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा परियोजना (एनपीईपी) की तीन दिवसीय मध्यावधि समीक्षा बैठक का सफल समापन हुआ। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य किशोरों में टीम वर्क, मूल्य संवर्धन और भारतीय ज्ञान परंपरा की समझ विकसित करना था, ताकि उनके समग्र विकास को और अधिक प्रभावी ढंग से सुनिश्चित किया जा सके। कार्यक्रम के दौरान किशोरों से जुड़ी नीतियों पर गहन विचार-विमर्श और मंथन हुआ, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, और सामाजिक कल्याण के महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया।

बैठक के मुख्य उद्देश्य और चर्चाएँ

बैठक में मुख्य रूप से किशोरों में भारतीय ज्ञान परंपरा, टीम वर्क और मूल्य संवर्धन के महत्व पर जोर दिया गया। इसके अलावा, किशोरों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर विशेष चर्चा की गई। किशोरों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने, और समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करने के उपायों पर भी विस्तार से बात की गई।

34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी

इस महत्वपूर्ण बैठक में देशभर के 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ 5 क्षेत्रीय शिक्षा संस्थानों से लगभग 70 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इन प्रतिनिधियों ने किशोरों के स्वास्थ्य, शिक्षा और समाज में उनकी सकारात्मक भागीदारी से जुड़े विषयों पर चर्चा की।

प्रमुख मुद्दों पर विशेष मंथन: एनपीईपी का उद्देश्य एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति (2020) का संदर्भ

बैठक में किशोरों की कुछ गंभीर समस्याओं, जैसे कि कम उम्र में विवाह, मादक द्रव्यों का सेवन, और हिंसा, पर भी गहन चर्चा हुई। विशेष रूप से उत्तर-पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में इन समस्याओं की स्थिति पर ध्यान केंद्रित किया गया। इन क्षेत्रों में किशोरों की चुनौतियों और उनके विकास के लिए उठाए जा रहे कदमों पर भी विचार-विमर्श हुआ। शिक्षा नीतियों में सुधार और नए पाठ्यक्रमों को शामिल करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया, ताकि किशोरों की समस्याओं को अधिक प्रभावी ढंग से सुलझाया जा सके।

राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा परियोजना (एनपीईपी) का उद्देश्य किशोरों को जनसंख्या, विकास और स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर जागरूक करना और उन्हें इन मुद्दों पर सशक्त बनाना है। इस वर्ष एनपीईपी की गतिविधियों को आयुष्मान भारत के अंतर्गत चल रहे स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम की नीतियों के साथ समायोजित किया गया है, जिसमें किशोरों के स्वास्थ्य और कल्याण को प्राथमिकता दी जा रही है।

बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (2020) के तहत किशोरों के बीच टीम वर्क, मूल्य संवर्धन और भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रमुखता से उठाया गया। इस नीति के तहत शिक्षा के महत्व को समझते हुए किशोरों के समग्र विकास के लिए कई नई पहल की जा रही हैं। विशेष रूप से, किशोरों को आत्मनिर्भर और जागरूक नागरिक बनाने के लिए उन्हें भारतीय संस्कृति और परंपराओं से अवगत कराना अनिवार्य माना गया।

प्रमुख अधिकारियों की उपस्थिति

समापन समारोह में एनसीईआरटी के संयुक्त निदेशक प्रो. श्रीधर श्रीवास्तव, प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर डॉ. विजय कुमार मलिक, एससीईआरटी के निदेशक गणेश कुमार, और अन्य प्रमुख प्रतिनिधि शामिल रहे। सभी वरिष्ठ अधिकारियों ने किशोरों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए नई योजनाओं और उपायों पर मंथन किया, ताकि उनकी शिक्षा और जीवन के अन्य क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लाया जा सके।

बैठक के प्रमुख निष्कर्ष

  1. किशोरों में टीम वर्क और मूल्य संवर्धन: किशोरों के बीच सामूहिक कार्यों के महत्व और नैतिक मूल्यों की शिक्षा को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
  2. भारतीय ज्ञान परंपरा: किशोरों को भारतीय संस्कृति, योग, ध्यान और अन्य परंपरागत ज्ञान से जोड़ने के लिए नीतियों में सुधार की आवश्यकता को समझा गया।
  3. स्वास्थ्य और कल्याण: किशोरों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को सशक्त बनाने के लिए आयुष्मान भारत योजना के तहत विशेष कार्यक्रमों को लागू करने पर विचार किया गया।
  4. समस्याओं पर चर्चा: कम उम्र में विवाह, मादक द्रव्यों का सेवन, और हिंसा जैसी समस्याओं के समाधान के लिए शिक्षा प्रणाली में सुधार और नए पाठ्यक्रमों की आवश्यकता पर बल दिया गया।

इस बैठक के माध्यम से, किशोरों के हित में कई महत्वपूर्ण सिफारिशें सामने आईं, जो उनके समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होंगी। एनपीईपी द्वारा किए जा रहे प्रयासों का उद्देश्य किशोरों को न केवल शैक्षणिक रूप से बल्कि सामाजिक और नैतिक रूप से भी सशक्त बनाना है।

परिषदीय बच्चों में भारतीय इतिहास, संस्कृति और धरोहरों के प्रति गर्व का बीजारोपण कर रही योगी सरकार

  • 15 हजार बच्चों को शैक्षिक भ्रमण से ऐतिहासिक व सांस्कृतिक के इतिहास से करा रही परिचित
  • बच्चों के यात्रा भाड़े, नाश्ता-भोजन और आपातकालीन खर्चों के लिए भी की गई है बजटीय व्यवस्था
  • प्रत्येक जनपद से 200 बच्चों को कराया जा रहा शैक्षिक भ्रमण
  • शिक्षक संभाल रहे हैं सुरक्षा और मार्गदर्शन का दायित्व
  • हर 20 बच्चों के समूह के साथ एक शिक्षक अथवा शिक्षिका है नियुक्त

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के समग्र शैक्षिक विकास के लिए एक अभिनव पहल की है। सरकार का उद्देश्य न केवल बच्चों को शैक्षिक रूप से सशक्त बनाना है, बल्कि उनमें भारतीय इतिहास, संस्कृति और धरोहरों के प्रति जागरूकता और गर्व की भावना विकसित करना भी है। इसके लिए प्रदेश के सभी 75 जिलों से 15,000 बच्चों का चयन कर उन्हें राज्य के ऐतिहासिक स्थलों का एक दिवसीय शैक्षिक भ्रमण कराया जा रहा है।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक जिले से 200 बच्चों को इसमें सम्मिलित किया गया है, जो मुख्य रूप से ग्रामीण और शहरी परिषदीय विद्यालयों के गरीब और आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के हैं।

भ्रमण का पूरा खर्च उठा रही योगी सरकार

योगी सरकार इस योजना के अंतर्गत 75 लाख रुपये का व्यय कर रही है, जिसमें बच्चों की यात्रा के लिए भाड़े का खर्च, नाश्ता और भोजन की व्यवस्था तथा आपातकालीन परिस्थितियों के लिए बजटीय प्रावधान शामिल हैं। इसका उद्देश्य बच्चों को उनके सामान्य शैक्षिक पाठ्यक्रम से इतर व्यावहारिक और ऐतिहासिक जानकारी देना है, ताकि वे भारतीय धरोहरों और ऐतिहासिक स्थलों को न केवल देखें बल्कि उनके महत्व को समझें और उनसे प्रेरणा लें।

शुरू है यात्रा, बच्चों की सुरक्षा और संरक्षा का है पूरा ध्यान

यह शैक्षिक भ्रमण 24 सितंबर से शुरू हुआ है और इसे बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आयोजित किया जा रहा है। हर 20 बच्चों के समूह के साथ एक शिक्षक अथवा शिक्षिका की जिम्मेदारी तय की गई है, जो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ भ्रमण के दौरान उन्हें ऐतिहासिक स्थलों से जुड़ी जानकारी भी प्रदान करेंगे। प्रत्येक जनपद से 10 शिक्षकों को इस भ्रमण कार्यक्रम में शामिल किया गया है। इन शिक्षकों को यह भी जिम्मेदारी दी गई है कि वे बच्चों को भ्रमण के दौरान भारत के इतिहास, संस्कृति और धरोहरों के प्रति जागरूक करें। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक जिले के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और संबंधित अधिकारियों को इस योजना की निगरानी और सुचारू संचालन का दायित्व सौंपा गया है ताकि भ्रमण के दौरान बच्चों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। यात्रा के दौरान बच्चों को सुरक्षा और संरक्षा के अलावा आवश्यक जानकारी और सहयोग प्रदान करने के लिए सभी प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधित उपाय किए गए हैं।

व्यक्तित्व विकास के साथ राष्ट्रप्रेम का संदेश

योगी सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों को उनके पाठ्यक्रम से बाहर वास्तविक दुनिया में शैक्षिक अनुभव प्रदान करना है। साथ ही, इस योजना का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि बच्चों को भारत की समृद्ध धरोहरों और गौरवशाली इतिहास से परिचित कराया जाए। भ्रमण के दौरान बच्चों को विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों, स्मारकों और संग्रहालयों की यात्रा कराई जाएगी, जहां उन्हें उन स्थलों के महत्व, उनके निर्माण के समय की परिस्थितियों और उनसे जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इससे बच्चों में न केवल इतिहास के प्रति रुचि जाग्रत होगी बल्कि उनमें राष्ट्रप्रेम और देशभक्ति की भावना भी मजबूत होगी।

व्यक्तित्व विकास और समाज के स्तंभों का निर्माण है उद्देश्य: संदीप सिंह

इस सम्बन्ध में बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह का कहना है कि सरकार का यह मानना है कि ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों में न केवल शैक्षिक समझ बढ़ती है बल्कि उनके व्यक्तित्व का भी सर्वांगीण विकास होता है। इस प्रकार के शैक्षिक भ्रमण से बच्चों की सोचने और समझने की क्षमता का विस्तार होता है। वे अपने परिवेश से बाहर निकलकर वास्तविक दुनिया के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं, जो उनके मानसिक विकास और सृजनात्मकता को बढ़ावा देने में सहायक होता है। बच्चों के लिए इस प्रकार के अनुभव बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि यह उनके भविष्य के निर्णय लेने की क्षमता और उनके सोचने के दृष्टिकोण को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।

पुलिस स्मृति दिवस: रिजर्व पुलिस लाइन लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में शामिल सीएम योगी ने वर्दी भत्ते में बढ़ोत्तरी के साथ की महत्वपूर्ण घोषणा, बहुमंजिल आवास और प्रशासनिक भवन के रखरखाव को दिये ₹1,380 करोड़

  • ₹1,380 करोड़ रुपये के कॉरपस फंड की घोषणा, वर्दी भत्ते में कुल खर्च पर 70 प्रतिशत की वृद्धि की
  • खिलाड़ी पुलिस कर्मियों के प्रशिक्षण, आहार को दिये 10 करोड़ रुपये

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को रिजर्व पुलिस लाइन में आयोजित पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर वर्दी भत्ते में 70 प्रतिशत की वृद्धि, बैरक में रहने वाले आरक्षियों के पुलिस अकोमोडेशन अलाउंस में 25 प्रतिशत की वृद्धि और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खेलकूद में प्रतिभाग करने वाले खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, आहार समेत अन्य मदों के लिए अगले वित्तीय वर्ष के बजट में 10 कराेड़ रुपये बढ़ाने की घोषणा की। इन घोषणाओं पर प्रदेश सरकार 115 करोड़ रुपये का खर्च वहन करेगी। सीएम योगी ने बहु मंजिल आवास और प्रशासनिक भवन के रखरखाव के लिए 1,380 करोड़ रुपए के कॉरपस फंड की घोषणा की। वहीं अंतरराष्ट्रीय आयोजन में पुलिस बल पर आने वाले खर्च पर प्रस्तावित शुल्क लगाने की स्वीकृति की, जो पुलिस महानिदेशक के अधीन रहेगा। साथ ही इसका सम्मान प्रस्तावित कॉरपस नियमावली के तहत किया जाएगा। इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए दिवगंत शहीद पुलिस कर्मियों को याद किया।

115 शहीद कार्मिकों के आश्रितों को दी 36.20 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कर्तव्यों का पालन करते हुए शहीद पुलिस कर्मी, केंद्रीय अर्ध सैनिक बलों तथा भारतीय सेवा में कार्यरत उत्तर प्रदेश के 115 शहीद कार्मिकों के आश्रितों को 36 करोड़ 20 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की गयी है। वहीं जिलों में तैनात पुलिस कर्मियों की सुख सुविधा के लिए 3 करोड़ 50 लाख, कल्याण के लिए 4 करोड़, कार्यरत, सेवानिवृत पुलिसकर्मी एवं उनके आश्रितों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति संबंधी 2,66 दावों के निस्तारण के लिए 30 लाख 56,000 रुपए की राशि दी गयी। इसी तरह पांच लाख से अधिक चिकित्सा प्रतिपूर्ति संबंधी 3,12 प्रकरण के लिए 12 करोड़ 60 लाख, 135 पुलिस कर्मियों और उनके आश्रितों की गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए अग्रिम ऋण के रूप में 5 करोड़ 5 लाख , जीवन बीमा योजना के तहत 3,06 मृतक पुलिस कार्मिकों के आश्रितों की सहायता के लिए 9 करोड़ 8 लाख रुपए, पुलिस कर्मियों और उनके आश्रितों द्वारा कराए गए कैशलेस उपचार के तहत 31 लाख 16 हजार रुपए, पुलिस कार्मिकों के 205 मेधावी छात्रों को शिक्षा निधि के माध्यम से 53 लाख 30,000 रुपये की छात्रवृत्ति का भुगतान किया गया।

एक हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को अति उत्कृष्ट सेवा पदक से किया गया सम्मानित

सीएम योगी ने कहा कि गणतंत्र और स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति द्वारा विशिष्ट सेवाओं के लिए चार तथा दीर्घ-सराहनीय सेवाओं के लिए 110 अधिकारियों और कर्मचारियों को पुलिस पदक का प्रदान किये गये। गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा 1,013 पुलिस कार्मिकों को अति उत्कृष्ट सेवा पदक तथा 729 कार्मिकों को उत्कृष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया। वहीं तीन राजपत्रित अधिकारियों संग कर्मचारियों को मुख्यमंत्री उत्कृष्ट सेवा पुलिस पदक प्रदान किया गया।

पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश द्वारा मानदेय और राजपत्रित पुलिस कार्मिकों को उत्कृष्ट सेवा सम्मान चिन्ह, 455 पुलिस कर्मियों को सराहनीय सेवा सम्मान चिन्ह प्रदान किया गया। पुलिस कार्मिकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश का प्रशंसा चिन्ह डीजी कमेंडेशन डिस्क 29 प्लेटिनम, 51 गोल्ड और 783 सिल्वर राजपत्रित और अराजपत्रित कार्मिकों को प्रदान किए गए।

गैंगस्टर एक्ट के तहत 77,811 अपराधियों के खिलाफ की गई कार्रवाई

सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में 2017 के बाद पुलिस विभाग के विभिन्न पदों पर 1,54,000 से अधिक भर्तियां की गयीं। इसमें 22,000 से अधिक महिला कार्मिक शामिल हैं। वहीं विभिन्न राजपत्रित पदों पर एक लाख 41,000 से अधिक कार्मिकों को पदोन्नति दी गयी। वर्तमान में 60,000 से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। सीएम ने कहा कि प्रदेश में शांति और कानून का राज्य स्थापित करने के लिए पिछले 7 वर्ष में 17 जवानों ने अप्रतिम शौर्य का प्रदर्शन करते हुए वीरगति को प्राप्त किया जबकि 1,618 पुलिसकर्मी घायल हुए। प्रदेश में अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए गैंगस्टर एक्ट के तहत 77,811 और 9,23 अभियुक्तों के विरुद्ध कार्रवाई की गई। माफिया और अपराधी गिराहों के 68 मुकदमों में प्रभावी पैरवी कर 31 माफिया तथा उनके 66 सहयोगियों को आजीवन कारावास की सजा दिलायी गयी। इसके अलावा दो को फांसी की सजा हुई है। माफिया और उनके गैंग के सदस्यों द्वारा अर्जित चार हजार 57 करोड़ की अवैध संपत्ति को जब्त किया गया। सीएम ने कहा कि एंटी रोमियो स्क्वायड द्वारा 22 मार्च 2017 से 2 अक्टूबर 2024 तक 1 करोड़ 2 लाख से अधिक स्थानों पर चेकिंग की। साथ ही 3 करोड़ 68 लाख से अधिक व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की। इस दौरान 23,375 अभियोग पंजीकृत कर 31 हजार 517 के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की गयी जबकि एक करोड़ 39 लाख से अधिक व्यक्तियों को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। प्रदेश के हर थाने में महिला बीट आरक्षित तथा महिला हेल्थ डेस्क की स्थापना की गई। सभी जनपदों में 15,130 महिला पुलिसकर्मी को नियुक्त करते हुए 10,378 महिला बीट आवंटित की गयी। ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत 11 लाख 71,000 से अधिक सीसीटीवी स्थापित किए गए।

धार्मिक स्थलों से एक लाख से अधिक लाउडस्पीकर उतारे गये

सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में एक अभियान के तहत धार्मिक स्थलों से 1,08,037 से अधिक लाउडस्पीकर उतारे गए या उच्चतम न्यायालय की गाइडलाइन के अनुसार उनकी ध्वनि नियंत्रित की गयी। 31 मई 2017 से 2 अक्टूबर 2024 तक पुलिस द्वारा दो करोड़ 68 लाख से अधिक स्थानों पर फुट पेट्रोलिंग के माध्यम से सुरक्षा का एक बेहतर वातावरण प्रस्तुत किया गया। सीएम योगी ने कहा कि पुलिस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की कर्तव्य पालन के दौरान मृत्यु होने पर जो विभिन्न प्रकार की शिकायतें शासन के पास उपलब्ध होती रही हैं, उसी क्रम में उन कर्मियों के परिवारजनों खासतौर पर उनकी पत्नी तथा माता-पिता के जीवित न रहने की दिशा में शासन आदेश में वर्णित व्यवस्था के अनुसार मृतक के परिवार को पूर्ण धनराशि नहीं मिलने की समस्या बताई गई थी। इस पर विचार करते हुए निर्णय लिया गया है कि वर्तमान शासन आदेश को संशोधित करते हुए अनुग्रह की संपूर्ण धनराशि 25 लाख या 50 लाख रुपए जैसी अनुमान्यता है को पूर्णतया मृतक की पत्नी, माता-पिता या जो भी कानूनी वारिस हो उसको उपलब्ध कराई जाए। इस अवसर पर मंत्री असीम अरुण, महापौर सुषमा खर्कवाल, मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह, डीजीपी प्रशांत कुमार, अपर मुख्य सचिव गृह दीपक कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक सुजीत पांडेय और मंडलायुक्त रोशन जैकब आदि शामिल हुए।