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उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य तेजी से जारी, RDSS योजना के तहत 3 करोड़ स्मार्ट मीटर स्थापित होंगे

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  • RDSS योजना के तहत उत्तर प्रदेश में 3 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं।
  • अब तक 19,000 फीडरों और 7,800 परिवर्तकों पर स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं।
  • 2,700 सरकारी संयोजनों पर स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा चुके हैं।
  • UPPCL के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने उपभोक्ताओं से स्मार्ट मीटर लगाने में सहयोग की अपील की।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के लिए भारत सरकार की अति महत्वाकांक्षी RDSS (Revamped Distribution Sector Scheme) योजना के तहत सभी विद्युत उपभोक्ताओं, फीडरों और परिवर्तकों पर स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य तेजी से चल रहा है। इस योजना के तहत प्रदेश में लगभग 3 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जाने हैं। अब तक 19,000 फीडरों और 7,800 परिवर्तकों पर स्मार्ट मीटर लग चुके हैं, और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रदेश में 2,700 से अधिक सरकारी संयोजनों पर भी स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। इसी क्रम में, आज 22 अक्टूबर 2024 को, उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल के गौतम पल्ली स्थित सरकारी आवास पर भी स्मार्ट मीटर स्थापित किया गया। यह कार्य मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड द्वारा किया गया।

इस अवसर पर डॉ. आशीष कुमार गोयल ने बताया कि स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए लाभकारी साबित होंगे, क्योंकि ये उपभोक्ताओं को सटीक और पारदर्शी बिजली बिलिंग सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने सभी उपभोक्ताओं से स्मार्ट मीटर लगाने के काम में सहयोग देने की अपील की।

स्मार्ट मीटर का उद्देश्य, लाभ और एजेंसियों की नियुक्ति

RDSS योजना के तहत स्मार्ट मीटरिंग का उद्देश्य बिजली वितरण में पारदर्शिता और कुशलता लाना है। स्मार्ट मीटर से बिजली चोरी को रोकने और बिलिंग में सुधार होने की उम्मीद है। इसके साथ ही, उपभोक्ताओं को अपने बिजली उपयोग को बेहतर तरीके से मॉनिटर करने का मौका मिलेगा, जिससे बिजली की बर्बादी कम हो सकेगी। इस कार्य के लिए उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा चार एजेंसियों को नियुक्त किया गया है, जो पूरे प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य करेंगे। इस योजना का प्रमुख लक्ष्य उपभोक्ताओं को सटीक बिजली बिल प्रदान करना और बिजली की गुणवत्ता में सुधार लाना है।

लखनऊ: मंडलायुक्त डॉ.रोशन जैकब की अध्यक्षता में मण्डलीय उद्योग बन्धु समिति की बैठक सम्पन्न, औद्योगिक समस्याओं के समाधान पर चर्चा

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  • अमौसी और सरोजनी नगर औद्योगिक क्षेत्रों में जल भराव की समस्या पर ड्रेन निर्माण के निर्देश।
  • नादरगंज से रिंग रोड तक सड़क के चौड़ीकरण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया।
  • रायबरेली के औद्योगिक आस्थानों को यूपीसीडा से जिला उद्योग केंद्र को हस्तांतरित करने पर चर्चा।
  • रोजगार परक योजनाओं की समीक्षा में अधिक से अधिक लाभार्थियों को लाभान्वित करने के निर्देश।
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लखनऊ: मंडलायुक्त डॉ. रोशन जैकब की अध्यक्षता में मण्डलीय उद्योग बन्धु समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयुक्त सभागार कार्यालय में सम्पन्न हुई। बैठक में अमौसी, सरोजनी नगर, बन्थरा औद्योगिक क्षेत्रों में जल भराव की समस्या, सड़कों के चौड़ीकरण, सीवर लाइन और एसटीपी जैसी प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की गई। इसके अलावा, रायबरेली जनपद के औद्योगिक आस्थानों को यूपीसीडा से जिला उद्योग केंद्र को हस्तांतरित करने के प्रस्ताव पर भी विचार हुआ।

जल भराव की समस्या के समाधान पर चर्चा

बैठक में औद्योगिक इकाइयों में जल भराव की समस्या पर एनएचएआई द्वारा बताया गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे अतिरिक्त ड्रेन के निर्माण से जल भराव की समस्या का समाधान हो सकता है। इस पर जल निगम को ड्रेन निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर समिति के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।

सड़कों के चौड़ीकरण का प्रस्ताव

लोक निर्माण विभाग द्वारा अवगत कराया गया कि नादरगंज (अमौसी औद्योगिक क्षेत्र) से सुनहरा रोड होते हुए रिंग रोड तक 5.7 किलोमीटर लंबी सड़क के चौड़ीकरण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। इस पर स्वीकृति मिलते ही कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।

रायबरेली के औद्योगिक आस्थानों का हस्तांतरण

जनपद रायबरेली के उद्यमियों द्वारा मांग उठाई गई कि लालगंज, सलोन, महाराजगंज और अन्य औद्योगिक आस्थानों को यूपीसीडा से जिला उद्योग केंद्र को हस्तांतरित किया जाए। इस पर यूपीसीडा के वरिष्ठ प्रबंधक ने अवगत कराया कि इस प्रस्ताव को बोर्ड द्वारा अनुमोदन प्राप्त हो चुका है, और शासनादेश के लिए पत्र प्रेषित किया गया है।

रोजगार परक योजनाओं की समीक्षा

बैठक में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना और एक जनपद एक उत्पाद (ODOP) जैसी योजनाओं की समीक्षा की गई। मंडल के समस्त उपायुक्तों को निर्देशित किया गया कि योजनाओं के लक्ष्यों की शत-प्रतिशत पूर्ति सुनिश्चित की जाए और अधिक से अधिक व्यक्तियों को इन योजनाओं का लाभ मिले।

एमएसएमई नीति-2022 पर प्रेजेंटेशन, उपस्थित अधिकारी एवं प्रतिनिधि

इस बैठक में एमएसएमई नीति-2022 पर भी एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया गया, जिसमें औद्योगिक विकास के लिए नवीन नीतियों और योजनाओं को लागू करने पर बल दिया गया। इस बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उद्यमियों और औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे, जिनमें उमेश चन्द्र उपाध्याय (अपर जिलाधिकारी एलए-2), कंचन सुबोध (संयुक्त आयुक्त उद्योग, लखनऊ मंडल), विजय पाल सिंह (डिप्टी कमिश्नर राज्यकर), डॉ. यूसी शुक्ला (क्षेत्रीय अधिकारी, उ.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड), रजत मेहरा (महासचिव, अमौसी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन), राजीव बंसल (डिवीजनल चेयरमैन, आईआईए) सहित कई प्रमुख लोग शामिल थे।

मलिहाबाद में हनुमान जी का दिव्य श्रंगार, श्रीराम कथा की तैयारियों को लेकर बैठक आयोजित

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  • मलिहाबाद में हनुमान जी का भव्य श्रंगार किया गया, सुंदरकांड पाठ ने भक्तों को मंत्रमुग्ध किया।
  • श्रीराम कथा की तैयारियों को लेकर श्री गोपेश्वर गौशाला में बैठक आयोजित हुई।
  • 25 दिसंबर को अजय याग्निक की सुंदरकांड चर्चा के साथ श्रीराम कथा का शुभारंभ होगा।
  • बैठक में विभिन्न स्थानों से स्रोताओं को लाने के लिए संसाधनों की व्यवस्था पर चर्चा हुई।

मलिहाबाद/लखनऊ: मलिहाबाद में मंगलवार को चिंताहरण हनुमान जी का भव्य श्रंगार किया गया, जो भक्तों के लिए एक दिव्य अनुभव था। इस अवसर पर भजन सम्राट शशांक सागर द्वारा सुंदरकांड पाठ का गायन किया गया, जिसने उपस्थित भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह आयोजन मलिहाबाद क्षेत्र में विशेष आकर्षण का केंद्र बना।

इसी के साथ, जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री राघवाचार्य की आगामी श्रीराम कथा को लेकर श्री गोपेश्वर गौशाला में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता गौशाला प्रबंधक उमाकांत गुप्ता ने की और संचालन श्रीराम कथा के संयोजक आचार्य डॉ. सप्तर्षि मिश्र एवं अन्य प्रमुख सदस्यों द्वारा किया गया।

बैठक में क्षेत्रीय आयोजनों की तैयारियों को लेकर चर्चा हुई, जिसमें 25 दिसंबर से शुरू होने वाली श्रीराम कथा के लिए विभिन्न स्थानों से स्रोताओं को लाने-ले जाने के लिए संसाधनों की व्यवस्था की योजनाएं बनाई गईं।

बैठक में प्रमुख मुद्दे:

  1. श्रीराम कथा का शुभारंभ:
    25 दिसंबर को प्रसिद्ध विद्वान अजय याग्निक द्वारा सुंदरकांड की चर्चा से कथा का प्रारंभ होगा, जबकि 26 दिसंबर से स्वामी श्री राघवाचार्य की कथा शुरू होगी।
  2. संसाधनों की व्यवस्था:
    बैठक में चर्चा की गई कि क्षेत्र के विभिन्न स्थानों से स्रोताओं को कथा स्थल तक लाने के लिए विशेष संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।
  3. राम कथा को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प:
    सभी उपस्थित सदस्यों ने प्रस्ताव दिया कि अन्य संगठनों को भी इस आयोजन से जोड़ा जाए, ताकि राम चर्चा को घर-घर पहुँचाया जा सके।
  4. गौशाला परिवार की सेवा:
    गौशाला प्रबंधक उमाकांत गुप्ता ने बताया कि गौशाला परिवार राम कथा के आयोजन में समर्पित भाव से सेवा प्रस्तुत करेगा।

आयोजन की तैयारियों पर चर्चा

श्रीराम कथा की योजना और संसाधनों की व्यवस्थाओं को लेकर आयोजित इस बैठक में संजय मिश्र (एडवोकेट), संजीव पाण्डेय (एडवोकेट एवं पूर्व महामंत्री, सेंट्रल बार एसोसिएशन), पंकज गुप्ता (जिला सहकारी बैंक के डायरेक्टर), शैलेन्द्र श्रीवास्तव (अध्यक्ष, विनायक ग्रामोद्योग संस्थान) समेत अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की। सभी ने एकमत से यह निर्णय लिया कि राम कथा के आयोजन को सफल बनाने के लिए अधिक से अधिक संगठनों को जोड़कर इसे व्यापक स्तर पर प्रसारित किया जाएगा। मलिहाबाद में होने वाली इस श्रीराम कथा को लेकर सभी संबंधित पक्ष अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। यह कथा धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन के साथ-साथ क्षेत्र के लोगों को एकजुट करने का एक महत्वपूर्ण मंच बनेगी। आयोजन समिति द्वारा की गई तैयारियों से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि राम कथा का संदेश हर घर तक पहुँचे और इसे सफलतापूर्वक संपन्न किया जा सके।

SCERT: शिक्षकों में नवाचार को बढ़ावा दे रही योगी सरकार, राज्य स्तरीय प्रतियोगिता से शिक्षण में सुधार की कोशिश

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  • योगी सरकार शिक्षकों में नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन कर रही है
  • प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य शिक्षण में कला, क्राफ्ट और पपेट्री जैसी विधियों का उपयोग कर सुधार लाना है
  • इस प्रतियोगिता में 75 जनपदों के 150 शिक्षक भाग ले रहे हैं
  • प्रतियोगिता में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के शिक्षकों के लिए विषय निर्धारित किए गए हैं
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार शिक्षकों के बीच नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए एक अनूठी पहल कर रही है। राज्य स्तरीय कला, क्राफ्ट एवं पपेट्री शिक्षण प्रतियोगिता का आयोजन कर शिक्षकों को शिक्षा के पारंपरिक तरीकों से हटकर रचनात्मक और प्रभावशाली तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य शिक्षण को कला, शिल्प और कठपुतली जैसी रचनात्मक विधियों के माध्यम से अधिक आकर्षक और प्रभावी बनाना है।

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उत्तर प्रदेश राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता की शुरुआत वर्ष 2017-18 में योगी सरकार के गठन के साथ की गई थी। इस वर्ष प्रतियोगिता का आयोजन 21 से 25 अक्टूबर के बीच किया जा रहा है, जिसमें प्रदेश के 75 जनपदों से चयनित 150 शिक्षक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।

प्रतियोगिता के उद्देश्य और स्वरूप

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योगी सरकार की इस पहल का उद्देश्य परिषदीय शिक्षकों को शिक्षण में नवाचार अपनाने के लिए प्रेरित करना है। इस प्रतियोगिता के तहत शिक्षकों को यह दिखाने का मौका दिया जा रहा है कि टीएलएम (Teaching Learning Material) के सहयोग से कैसे बच्चों को बेहतर और निपुण बनाया जा सकता है। प्रतियोगिता के पहले चरण में 24 सितंबर को जनपद स्तर पर प्रतियोगिता का आयोजन हुआ था, जिसके बाद अब दूसरे चरण में राज्य स्तर पर प्रतियोगिता हो रही है।

पांच श्रेणियों में हो रही प्रतियोगिता

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इस प्रतियोगिता में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के शिक्षकों के लिए पांच श्रेणियों में विषय निर्धारित किए गए हैं। प्राथमिक स्तर पर ‘भाषा’ और ‘गणित’ विषय हैं, जबकि उच्च प्राथमिक स्तर पर ‘गणित’, ‘विज्ञान’ और ‘सामाजिक विज्ञान’ विषय शामिल हैं। इन विषयों पर शिक्षकों द्वारा कला, शिल्प और पपेट्री के माध्यम से शिक्षण विधियों का प्रदर्शन किया जा रहा है।

शिक्षकों को नवाचार का अवसर

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SCERT के संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान ने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि हर बार नए शिक्षक इस प्रतियोगिता में भाग लें और अपने नवाचारों को प्रदर्शित करें। उन्होंने बताया कि इस प्रतियोगिता के माध्यम से शिक्षकों को शिक्षण में रचनात्मकता और नई विधियों को जोड़ने का मौका मिल रहा है।

SCERT निदेशक गणेश कुमार ने कहा, “यह प्रतियोगिता शिक्षकों के लिए एक सुनहरा अवसर है, जहां वे अपनी रचनात्मकता को प्रदर्शित कर सकते हैं और शिक्षण के स्तर को ऊंचा उठाने में सहयोग कर सकते हैं। कला, क्राफ्ट और पपेट्री जैसी विधियों का उपयोग शिक्षा में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।”

योगी सरकार की इस पहल से उत्तर प्रदेश के परिषदीय शिक्षकों को अपनी प्रतिभा और नवाचारों को प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है। यह प्रतियोगिता न केवल शिक्षकों के बीच प्रतिस्पर्धा और रचनात्मकता को बढ़ावा दे रही है, बल्कि छात्रों के लिए भी शिक्षण को रोचक और प्रभावशाली बनाने में मददगार साबित हो रही है।

भाजपा विधायक डॉ.राजेश्वर सिंह का सपा पर हमला: पूर्व के गुंडाराज की याद दिलाई

  • भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने सपा के गुंडाराज को याद दिलाया।
  • सपा सरकार में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का मान-सम्मान नहीं था सुरक्षित
  • 2005 में पुलिस अधिकारी राजेश साहनी को जीप के बोनट पर लटकाने की घटना का किया उल्लेख
  • 2013 में कुंडा CO जिया उल हक और मथुरा SP City मुकुल द्विवेदी की हत्या हुई
  • IAS अधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल का निलंबन तुष्टिकरण का प्रतीक है
  • योगी सरकार में अपराधियों को सही जगह दिखाई जाती है, यूपी का सुशासन मॉडल अनुकरणीय है

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा के जनप्रिय भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के हालिया ट्वीट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सपा सरकार के गुंडाराज के इतिहास को जनता के सामने लाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता सपा सरकार के कुशासन को कभी नहीं भूलेगी और न ही जाति-धर्म आधारित प्रलोभनों में आएगी। डॉ. सिंह का यह बयान न केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा है, बल्कि यह उन घटनाओं की श्रृंखला का भी एक संकलन है, जो सपा शासन के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस बल के प्रति होने वाले अन्याय को दर्शाता है।

सपा शासनकाल की घटनाएँ

  1. 2005 में राजेश साहनी का मामला:
    डॉ. सिंह ने 2005 की उस कुख्यात घटना का उल्लेख किया, जब सपा संरक्षित गुंडों ने कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी राजेश साहनी को जीप के बोनट पर लटकाकर कैसरबाग से हजरतगंज तक खींचा था। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया था कि सपा सरकार में पुलिस बल के अधिकार और सम्मान की कोई कीमत नहीं थी। इस घटना ने न केवल पुलिस बल को शर्मिंदा किया, बल्कि यह दर्शाया कि गुंडाराज के खिलाफ आवाज उठाने वाले अधिकारियों की जान भी खतरे में थी।
  2. 2013 में मथुरा के SP City मुकुल द्विवेदी व प्रतापगढ़ में कुंडा CO जिया उल हक की हत्या:
    डॉ. सिंह ने 2013 में कुंडा के CO जिया उल हक की नृशंस हत्या का जिक्र किया। यह हत्या उस समय हुई जब सपा सरकार के संरक्षण में गुंडों ने अपने स्वार्थ के लिए इस ईमानदार अधिकारी की जान ले ली। इसी वर्ष, मथुरा के SP City मुकुल द्विवेदी की हत्या ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया कि सपा सरकार में पुलिस अधिकारी सुरक्षित नहीं थे। यह घटना न केवल पुलिस बल के लिए एक बड़ा धक्का थी, बल्कि इसने यह भी स्पष्ट कर दिया कि सपा सरकार के संरक्षण में गुंडों का मनोबल कितना ऊंचा था। डॉ. सिंह ने इस हत्या को भी सपा के गुंडाराज का प्रतीक बताते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि पुलिस अधिकारियों की जान भी इस शासन में सुरक्षित नहीं थी।
  3. दुर्गाशक्ति नागपाल का निलंबन:
    डॉ. सिंह ने बताया कि 2013 में सपा सरकार ने तुष्टिकरण की पराकाष्ठा पार करते हुए IAS अधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल को निलंबित कर दिया था। यह निलंबन तब हुआ जब उन्होंने अवैध मस्जिद की दीवार गिराने का कार्य किया। इस निर्णय ने यह साबित किया कि सपा सरकार न केवल कानून का उल्लंघन करती थी, बल्कि ईमानदार अधिकारियों को भी दंडित करने से नहीं चूकती थी। इसके परिणामस्वरूप, सपा सरकार ने केंद्र सरकार से सभी IAS अधिकारियों को वापस बुलाने की असंवैधानिक मांग भी की।
  4. आईएएस विजय शंकर पाण्डेय पर कार्रवाई:
    उन्होंने यह भी कहा कि जब वरिष्ठ IAS अधिकारी विजय शंकर पाण्डेय ने काले धन के खिलाफ आवाज उठाई, तो उन्हें विभागीय जांच का सामना करना पड़ा। यह मामला तब इतना गंभीर हो गया कि सुप्रीम कोर्ट को इस जांच को निरस्त करने का आदेश देना पड़ा और यूपी सरकार पर 5 लाख का जुर्माना भी लगाया गया। यह घटनाएँ स्पष्ट करती हैं कि सपा सरकार अपने खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती थी।

वर्तमान की योगी सरकार का मॉडल

डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने बयान में श्रद्धेय योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को देश का ग्रोथ इंजन बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान योगी सरकार में अपराधियों और माफियाओं को सही जगह दिखाई जाती है, जो कि सरकार की दृढ़ता और राजनीतिक इच्छाशक्ति को दर्शाता है। भाजपा सरकार ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि वह गुंडाराज को खत्म करने और कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सपा सरकार के कुशासन के प्रति जनता का गुस्सा और असंतोष बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोग सपा के जाति-धर्म आधारित प्रलोभनों को समझ चुके हैं और अब वे भाजपा के सुशासन की ओर देख रहे हैं। उनका यह बयान स्पष्ट करता है कि भाजपा सरकार अपनी उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

डॉ. राजेश्वर सिंह का यह बयान न केवल सपा सरकार के गुंडाराज को उजागर करता है, बल्कि वर्तमान योगी सरकार की उपलब्धियों और उसकी नीति की प्रशंसा भी करता है। यह स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा का शासन ना केवल विकास के लिए है, बल्कि यह प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा और उनके सम्मान की भी रक्षा करने के लिए है। डॉ. सिंह का यह बयान समाज के सभी वर्गों को यह संदेश देता है कि वे सपा के कुशासन और गुंडाराज को नकारते हुए, एक सुरक्षित और विकसित उत्तर प्रदेश की ओर अग्रसर हैं।