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बाराबंकी: पुलिस अधीक्षक ने किया साप्ताहिक परेड का निरीक्षण, अनुशासन और फिटनेस पर दिए विशेष निर्देश

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  • पुलिस अधीक्षक बाराबंकी ने शुक्रवार की साप्ताहिक परेड में ली सलामी।
  • फिटनेस और अनुशासन के लिए पुलिसकर्मियों को कराई गई दौड़ और ड्रिल।
  • यू.पी. 112 पीआरवी वाहनों का निरीक्षण कर उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की।
  • पुलिस लाइन्स परिसर का निरीक्षण, सुरक्षा और सुविधाओं में सुधार के दिए निर्देश।
  • आदेश कक्ष में रजिस्टरों की जांच और अद्यावधिक रखने के निर्देश।

बाराबंकी/लखनऊ: 25 अक्टूबर 2024 : बाराबंकी के पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार सिंह ने शुक्रवार को आयोजित होने वाली साप्ताहिक परेड का निरीक्षण किया। यह परेड रिजर्व पुलिस लाइन्स के परेड ग्राउंड में आयोजित की गई थी, जहां उन्होंने पूरे जोश के साथ परेड की सलामी ली। इस दौरान श्री सिंह ने परेड में शामिल पुलिसकर्मियों को शारीरिक और मानसिक रूप से फिट रहने के लिए प्रेरित किया, जिसके तहत उन्हें दौड़ का अभ्यास कराया गया।

पुलिसकर्मियों के अनुशासन और फिटनेस पर जोर, यू.पी. 112 पीआरवी वाहनों का निरीक्षण और निर्देश

परेड निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक ने सभी पुलिसकर्मियों के टर्न आउट (वेशभूषा और अनुशासन) की गहन जांच की और उन्हें अनुशासन में एकरूपता बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने पुलिसकर्मियों को नियमित रूप से शारीरिक अभ्यास और फिटनेस बनाए रखने की बात कही। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य पुलिसकर्मियों के आत्मबल को बढ़ाना और अनुशासन का एक सशक्त संदेश देना था।

निरीक्षण के अगले चरण में एसपी दिनेश कुमार सिंह ने यू.पी. 112 पीआरवी वाहनों का मुआयना किया। इस दौरान उन्होंने पुलिस वाहन में मौजूद उपकरणों का जायजा लिया और यह सुनिश्चित किया कि सभी आवश्यक उपकरण मानकों के अनुसार उपलब्ध हों। उन्होंने पुलिसकर्मियों को रिस्पांस टाइम में सुधार लाने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में समय पर सहायता पहुंचाई जा सके। उन्होंने मौके पर उपस्थित पुलिसकर्मियों से उनकी ड्यूटी के दौरान आने वाली समस्याओं के बारे में भी चर्चा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

पुलिस लाइन्स परिसर का निरीक्षण और व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश, आदेश कक्ष में रजिस्टर और अभिलेखों की जांच

परेड के बाद पुलिस अधीक्षक ने पुलिस लाइन्स परिसर का व्यापक निरीक्षण किया। इसमें मेस, बैरक, व्यायामशाला, सीपीसी कैंटीन, शस्त्रागार, परिवहन शाखा, और आवासीय परिसर शामिल थे। श्री सिंह ने सभी सुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया और आवश्यक सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने पुलिस लाइन्स की साफ-सफाई, सुरक्षा और पुलिसकर्मियों के आराम के इंतजामों पर विशेष ध्यान देने को कहा।

इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने आदेश कक्ष का भी निरीक्षण किया, जहां उन्होंने विभिन्न रजिस्टरों और अभिलेखों की जांच की। उन्होंने सुनिश्चित किया कि सभी रजिस्टर समय पर अद्यावधिक किए जा रहे हैं और उनकी देखभाल में कोई कमी न हो। उन्होंने संबंधित पुलिसकर्मियों को निर्देश दिया कि वे इन अभिलेखों को सुचारु रूप से अद्यावधिक रखें ताकि भविष्य में किसी भी जांच या निरीक्षण के दौरान स्पष्टता बनी रहे। इस निरीक्षण के दौरान क्षेत्राधिकारी लाइन्स हर्षित चौहान, प्रशिक्षु क्षेत्राधिकारी गरिमा पंत, प्रतिसार निरीक्षक राजेश कुमार सहित कई अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर इस निरीक्षण प्रक्रिया को सुचारु रूप से सम्पन्न करने में सहयोग दिया। इस तरह के नियमित निरीक्षण से न केवल पुलिसकर्मियों में अनुशासन और सजगता बढ़ती है, बल्कि उनके मनोबल में भी वृद्धि होती है। पुलिस अधीक्षक का यह प्रयास यह सुनिश्चित करता है कि पुलिस बल हमेशा तैयार, अनुशासित और फिट रहे ताकि जनता की सुरक्षा और सहायता में कभी कोई कमी न हो।

राज्यपाल की अध्यक्षता में कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बाँदा का 10वां दीक्षांत समारोह सम्पन्न हुआ

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  • समारोह में कुल 347 छात्र-छात्राओं को उपाधियाँ प्रदान की गईं
  • राज्यपाल ने किया 150 आंगनबाड़ी केन्द्रों हेतु आंगनबाड़ी किटों का वितरण
  • देश के विकास में ही सभी का विकास समाहित
  • सरकार द्वारा संचालित तकनीकी एवं अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं को लाभार्थी तक पहुँचाए विश्वविद्यालय
  • वैज्ञानिक पद्धति से उन्नतशील खेती करें किसान
  • उर्वरकों एवं रासायनिक छिड़काव आदि का उपयोग कम करें
  • कृषि कार्य के साथ बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन को भी अपनाएं किसान: कृषि को आगे बढ़ाने के लिए हर सम्भव प्रयास जरूरी- राज्यपाल आनंदीबेन पटेल

बांदा/लखनऊ: 24 अक्टूबर, 2024: प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में गुरुवार को कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बाँदा का 10वां दीक्षांत समारोह सम्पन्न हुआ। दीक्षांत समारोह में राज्यपाल जी ने कृषि, उद्यान, वानिकी और सामुदायिक विज्ञान विभागों के कुल 347 छात्र-छात्राओं को उपाधियाँ प्रदान कीं, जिनमें 259 स्नातक, 81 परास्नातक और 06 शोध के विद्यार्थी शामिल थे। समारोह में 73 प्रतिशत पदक छात्राओं ने प्राप्त किए। कुलाधिपति जी द्वारा सभी उपाधियों को डिजीलॉकर में अपलोड किया गया।

राज्यपाल ने अपने उद्बोधन में सभी उपाधि प्राप्त छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि पिछले दो वर्षों में कृषि विश्वविद्यालयों में छात्राओं ने उल्लेखनीय प्रगति करते हुए अधिक मेडल प्राप्त किये हैं और आज इस विश्वविद्यालय में 21 में से 16 छात्राओं को विभिन्न संकायों में मेडल प्राप्त हुए हैं। जिन छात्र/छात्राओं को आज मेडल नहीं मिला है वे सभी अपने जीवन के लिए इतना अच्छा कार्य करें, जिससे उन्हें भी मेडल प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि महिलायें सभी क्षेत्रों में आगे बढ रही हैं तथा कृषि, वानिकी, उद्यान के क्षेत्र में भी आगे बढ़कर मेडल प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि केन्द्र व प्रदेश सरकार द्वारा संचालित तकनीकी एवं अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं को किसानों, महिलाओं, स्वयंसेवी संस्थाओं तक अवश्य पहुंचाये, जिससे वे स्वावलम्बी एवं सशक्त बन सकें। जानकारी के अभाव में कृषक योजनाओं के लाभों से वंचित रह जाते हैं, ऐसे में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों का यह दायित्व है कि समावेशी विकास हेतु अपना योगदान करें। देश के विकास में ही सभी का विकास समाहित है। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी का सपना है कि स्वयं सहायता समूह की सखियां लखपति एवं ड्रोन दीदियां बने इस दिशा में कार्य निरन्तर किये जा रहे हैं।

इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि बुन्दलेखण्ड क्षेत्र में कृषि क्षेत्र की अपार सम्भावनायें हैं। किसान वैज्ञानिक पद्धति से उन्नतशील खेती करें तथा उर्वरकों एवं रासायनिक छिड़काव आदि का उपयोग कम करें, जिससे विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचाव होगा। उन्होंने कहा कि किसान प्राकृतिक खेती की ओर आगे बढें और लक्ष्य बनाकर प्राकृतिक खेती को अपनायें, जिससे आगामी वर्षों में परिवर्तन अवश्य आयेगा। उन्हांेने निर्देश दिया कि विश्वविद्यालय दलहन, तिलहन मिशन के अन्तर्गत मूंगफली, सरसों, अलसी, तिलहन में आत्मनिर्भर बनने के लिए कार्य करे तथा किसानों के बीच में बैठकर कृषि के विषय में वैज्ञानिक जानकारी दें ताकि किसान कृषि कार्य वैज्ञानिक एवं उन्नतशील तरीके से करके अपना उत्पादन बढ़ा सकें। उन्होंने जल संरक्षण हेतु तालाबों का निर्माण कराये जाने एवं कृषि उत्पाद को बढ़ाने के लिए कृषि क्षेत्र में अलग-अलग योजनाएं बनाकर कार्य करने पर जोर दिया। उन्होंने किसानों को कृषि कार्य के साथ बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन को भी अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि कृषि को आगे बढ़ाने के लिए हर सम्भव प्रयास करना होगा। उन्होंने बताया कि कृषि विश्वविद्यालय में पॉच महाविद्यालय क्रमशः कृषि, उद्यान, वानिकी, सामुदायिक विज्ञान एवं कृषि अभियांत्रिकी एवं तकनीकी संचालित हैं तथा कृषि अभियांत्रिकी एवं खाद्य प्रौद्योगिकी में स्नातक डिग्री कार्यक्रम का शैक्षणिक कार्य शुरू किया गया है, जिससे छात्र/छात्राओं को कृषि क्षेत्र के अध्ययन में सुविधा होगी।

कुलाधिपति जी ने कहा कि आंगनबाड़ी केन्द्रों कोे विश्वविद्यालय से जोड़कर उन्हें बेहतर बनाने का कार्य किया जा रहा है, जिससे कि गरीब परिवारों के बच्चों की शिक्षा एवं स्वास्थ्य में सुधार हो सके। उन्होंने समारोह के दौरान आंगनबाड़ी केन्द्रों को सशक्त बनाने के लिए 150 आंगनबाड़ी किटों का वितरण भी किया, जिसमें 50 किट विश्वविद्यालय एवं 100 किट जिला प्रशासन बांदा के सौजन्य से प्रदान की गईं। इन आंगनबाड़ी किटों का वितरण बच्चों के समग्र विकास और शिक्षा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल जी ने स्कूली बच्चों के बीच आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को सम्मानित किया और अध्यापकों और प्रधानाध्यापकों को राजभवन की ओर से पुस्तकंे भेंट की जो स्कूलों के पुस्तकालयों में रखी जाएंगी। राज्यपाल ने इस अवसर पर बांदा कृषि विश्वविद्यालय बोटेनिकल गार्डन एवं फसलोक्तर प्रबन्धन प्रयोगशाला का लोकार्पण किया तथा मेडिटेशन एण्ड वेलनेश सेन्टर (केन नेचर पार्क) का शिलान्यास भी किया।

दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि एवं पूर्व निदेशक आई0ए0आर0आई0 नई दिल्ली डॉ0 एच0एस0 गुप्ता ने कहा कि बुन्देलखण्ड में कृषि क्षेत्र को बढ़ाने के साथ खाद्यान उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता है, जिससे कि इस क्षेत्र की ग्रामीण अर्थ व्यवस्था की उन्नति हो सके। बुन्देलखण्ड में मोटे अनाजों की खेती को पुनर्जीवित करने हेतु सार्थक प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अलसी व तिल की नयी प्रजातियों के विकसित होने से तिलहन उत्पादन में वृद्धि होगी। श्रीअन्न की खेती एवं दलहन, तिलहन की खेती के लिए यह क्षेत्र उपयोगी है। उन्होंने कृषि क्षेत्र में और अधिक शोध कार्यों को किये जाने तथा ग्रामीण कृषि अनुसंधान को और प्रभावी किये जाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में कुलपति डॉ.नरेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा विश्वविद्यालय द्वारा कृषि क्षेत्र में किये जा रहे कार्यों तथा शोध कार्यों के सम्बन्ध में जानकारी दी गयी। कार्यक्रम में आयुक्त चित्रकूटधाम मण्डल बांदा बालकृष्ण त्रिपाठी, जिलाधिकारी बांदा नागेन्द्र प्रताप, कुलसचिव डॉ.एस के सिंह, जनप्रतिनिधिगण, विश्वविद्यालय के कार्य परिषद एवं विद्या परिषद के सदस्यगण, आमंत्रित अतिथिगण, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां, स्कूली बच्चे, विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक एवं कर्मचारीगण, छात्र एवं छात्राएं, उपस्थित रहे।

विधायक हो तो ऐसा: विधानसभा के युवाओं को डिजिटल साक्षर बना रहे सरोजनीनगर विधायक डॉ.राजेश्वर सिंह, नौकरी मिलने के बाद प्रोत्साहित करने के लिए लैपटॉप देकर किया सम्मान

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  • डॉ.राजेश्वर सिंह ने 6 युवाओं को लैपटॉप प्रदान कर किया सम्मानित, सभी ने रण बहादुर सिंह डिजिटल शिक्षा एवं युवा सशक्तिकरण केन्द्रों पर प्रशिक्षण प्राप्त कर हासिल की है नौकरी
  • चाय पे चर्चा कर डॉ. राजेश्वर सिंह ने प्रबुद्धजनों संग किया संवाद, विकास कार्यों पर मांगे सुझाव
  • परिवार के अभिभावक की तरह विधानसभा के युवाओं को डिजिटली शिक्षित करने के साथ ही रोजगार दिलाने तक के लिए पूरी जिम्मेदारी से कर रहे काम

लखनऊ: सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने वृहस्पतिवार को अपने आशियाना स्थित आवास पर प्रबुद्धजनों संग क्षेत्र के विकास कार्यों एवं चाय पे चर्चा कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले सरोजनीनगर के गणमान्य जनों संग सकारात्मक संवाद किया साथ ही रण बहादुर सिंह डिजिटल शिक्षा एवं युवा सशक्तिकरण केन्द्रों पर प्रशिक्षण प्राप्त कर विभिन्न संस्थानों में चयनित हो चुके 6 प्रशिक्षणार्थियों अभिषेक कुमार यादव, मुस्कान, अंचल यादव, रंजना, दीपक कुमार एवं आकांक्षा त्रिवेदी को लैपटॉप प्रदान कर सम्मानित भी किया।

गौरतलब है कि रण बहादुर सिंह डिजिटल शिक्षा एवं सशक्तिकरण केंद्र डॉ.राजेश्वर सिंह द्वारा युवाओं को निःशुल्क डिजिटल प्रशिक्षण दिलाने के उद्देश्य से शुरू की गयी पहल है। डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा क्षेत्र में 7 स्थापित किये जा चुके हैं, जहाँ युवाओं को ग्राफिक डिजाइनिंग, पर्सनालिटी डेवलपमेंट, एमएस ऑफिस, टैली, डाटा एंट्री, वीडियो एडिटिंग आदि रोजगारपरक कोर्सों का निःशुल्क प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है। विधायक राजेश्वर सिंह का लक्ष्य क्षेत्र में इस तरह के 100 केन्द्रों की स्थापना का है।

कार्यक्रम में एम्एलसी राम चन्द्र सिंह प्रधान, पूर्व सांसद रीना चौधरी, पूर्व एमएलसी प्रदीप सिंह एवं कांति सिंह, एसकेडी एकेडमी के निदेशक मनीष सिंह, शिव शंकर अवस्थी, अजीत शुक्ला, सुजय कुमार त्रिपाठी, मंजीत तलवार, अभिषेक पाल, पवन धवन, संजीव अवस्थी, जी एम शुक्ला, अतुल जैन, अतुल टंडन, जे एस चड्ढा, राज कुमार सिंह चौहान, शंकरी सिंह, सेवानिवृत्त आईपीएस हरीश कुमार, अनिल गट्टानी, राजू अनेजा, संजीव अवस्थी, श्यामेन्द्र सिंह, राजशेखर सिंह व अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

अपर मुख्य सचिव परिवहन की अध्यक्षता में विभागीय समीक्षा बैठक सम्पन्न

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आगामी त्योहारों पर आरामदायक, सुरक्षित एवं सुगम यात्रा सुनिश्चित की जाए

लखनऊ: 24 अक्टूबर, 2024 : परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के निर्देशों के क्रम में आज अपर मुख्य सचिव परिवहन विभाग एल0 वेंकटेश्वर लू की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आरएम, एआरएम, आरटीओ एवं एआरटीओ के साथ मीटिंग की। उन्होंने आगामी दीपावली एवं छठ पर्व के दृष्टिगत परिवहन व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए की गई तैयारियों की समीक्षा की।

अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि त्योहारों की अवधि मेंयात्रा करने वाले जनमानस को बस स्टेशनों पर किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। बसों की साफ-सफाई व धुलाई अच्छे से होनी चाहिए। आगामी त्यौहारों पर प्रदेश के लोगों को आरामदायक, सुरक्षित एवं सुगम यात्रा सुनिश्चित कराई जायेगी। उन्हांेने निर्देश दिये कि चालक-परिचालक वर्दी में हो, ब्रेथ एनलाइजर से चालकों की चेकिंग की जाए, शराब पीकर गाड़ी चलाने की शिकायत नहीं आनी चाहिए तथा शिकायत पाये जाने पर सख्त कार्रवाई की जायेगी।

बैठक में प्रबंध निदेशक परिवहन निगम मासूम अली सरवर ने निर्देश दिए कि त्यौहार की अवधि में भीड़ के दृष्टिगत बसों के शेड्यूल संचालन में छूट रहेगी। जहां भी यात्री उपलब्ध हो, उन क्षेत्रों में बसों का संचालन कराया जाए। बसों को निर्धारित मानक पर चेक करके ही मार्ग पर भेजा जाए। फिट बसों का ही मार्ग पर संचालन हो। उन्होंने निर्देश दिये कि बसों में पटाखे लेकर यात्रा न हो। चालकों की तथा अवैध संचालन हेतु जॉइंट चेकिंग भी कराई जाए। पर्व अवधि में संचालन दुर्घटना मुक्त हो। दुर्घटना की स्थिति में उच्चतम स्तर पर उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए कार्रवाई की जायेगी।

विशेष सचिव परिवहन के0पी0 सिंह ने निर्देशित किया कि पर्व अवधि में कोई भी अधिकारी बिना अनुमति के अवकाश नहीं लेंगे और न ही अपना स्टेशन छोड़ेंगे। अपने कार्यों के सफल संचालन हेतु क्षेत्रीय स्तर पर कार्य योजना बनाएं। पर्व अवधि में प्रदूषण भी नियंत्रित रहे, इसका भी ध्यान रखा जाए। बैठक में अपर परिवहन आयुक्त, अपर प्रबंध निदेशक राम सिंह वर्मा सहित परिवहन विभाग एवं परिवहन निगम के मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बहराइच में पुलिसकर्मियों का डिमोशन: इंस्पेक्टर बने एसआई और दरोगा बने कांस्टेबल

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बहराइच/लखनऊ: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है, जहां दो पुलिसकर्मियों को उनके पदों से डिमोट कर दिया गया है। यह मामला बहराइच के जरवल रोड थाने का है, जहां प्रभारी निरीक्षक और चौकी इंचार्ज को अपने गलत आचरण के कारण प्रमोशन की जगह डिमोशन का सामना करना पड़ा। पुलिस जांच के बाद दोनों पुलिसकर्मियों को उनके मूल पदों पर वापस भेज दिया गया है, जो कि एक अभूतपूर्व मामला है।

घटना की पृष्ठभूमि

यह मामला 2024 का ही है, जब जरवल रोड थाने में विनोद राय प्रभारी निरीक्षक और मोहम्मद असलम चौकी इंचार्ज थे। इस दौरान जमीन कब्जेदारी के एक विवाद में दोनों पुलिसकर्मियों पर आरोप लगा कि उन्होंने एक पक्ष का समर्थन करते हुए ज़मीन पर कब्जा करा दिया। इस मुद्दे को लेकर दूसरे पक्ष ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) से शिकायत की, जिसके बाद एसपी ने दोनों पुलिसकर्मियों को तत्काल पुलिस लाइन भेज दिया और मामले की जांच शुरू की।

जांच में हुआ खुलासा

पुलिस अधिकारियों की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि विनोद राय और मोहम्मद असलम दोनों ही जमीन कब्जेदारी के मामले में एक पक्ष का समर्थन कर रहे थे। उनके इस अनुचित आचरण के चलते पुलिस अधीक्षक वृंदा शुक्ला ने सख्त कदम उठाते हुए दोनों पुलिसकर्मियों को उनके प्रमोशन से डिमोट कर दिया। विनोद राय, जो सब इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर बने थे, को वापस सब इंस्पेक्टर बना दिया गया। वहीं, मोहम्मद असलम, जो कांस्टेबल से दरोगा बने थे, को वापस कांस्टेबल बना दिया गया। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि पुलिस महकमे में अनुचित आचरण की कोई जगह नहीं है। जहां सरकारी नौकरी में प्रमोशन आमतौर पर अच्छे कामों के लिए मिलता है, वहीं अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार के मामलों में अधिकारियों को डिमोशन का सामना भी करना पड़ सकता है।