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ईरान पर हमला किसी भी वक्त संभव, समुद्र में अमेरिकी विध्वंसक तैनात; ट्रंप के संकेत से तनाव बढ़ा

अमेरिकी नौसेना ने अपनी रणनीतिक तैनाती में बड़ा बदलाव करते हुए USS Abraham Lincoln Carrier Strike Group को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से हटाकर अब मध्य पूर्व में तैनात कर दिया है. इस कदम के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है और यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का आदेश दे सकते हैं. यह तैनाती ऐसे समय पर हुई है, जब ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को लेकर वैश्विक दबाव लगातार बढ़ रहा है और अमेरिका और ईरान के बीच संबंध पहले से ही बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं.

USS Abraham Lincoln, जिसे CVN-72 के नाम से जाना जाता है, निमिट्ज-क्लास का न्यूक्लियर एनर्जी से ऑपरेट होने वाला एयरक्राफ्ट कैरियर है. यह अमेरिकी नौसेना के Carrier Strike Group-3 का नेतृत्व करता है. इसे दुनिया के सबसे शक्तिशाली समुद्री टुकड़ियों में गिना जाता है. 19 जनवरी को यह स्ट्राइक ग्रुप मलक्का जलडमरूमध्य से गुजरा. इस दौरान इसकी सुरक्षा के लिए तीन अत्याधुनिक Arleigh Burke-class guided missile destroyers तैनात किए गए थे, जिनमें USS Frank E. Petersen Jr, USS Spruance और USS Michael Murphy शामिल हैं. अमेरिकी Central Command यानी CENTCOM ने इस तैनाती को मध्य पूर्व में क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया कदम बताया है.

Sailors aboard USS Abraham Lincoln (CVN 72) perform routine maintenance as the aircraft carrier sails in the Indian Ocean, Jan. 26. The Abraham Lincoln Carrier Strike Group is currently deployed to the Middle East to promote regional security and stability. pic.twitter.com/dkuN946hce

— U.S. Central Command (@CENTCOM) January 26, 2026

ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर बढ़ाया दबाव

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सैन्य जमावड़े को ईरान में जारी देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों और मानवाधिकार उल्लंघनों से जोड़कर देखा है. दिसंबर से ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं, जिनमें हजारों लोगों की मौत और गिरफ्तारी के दावे किए जा रहे हैं, हालांकि ईरान सरकार इन आंकड़ों को सिरे से खारिज करती रही है. ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि अमेरिका की एक बहुत बड़ी नौसैनिक ताकत उस क्षेत्र की ओर बढ़ रही है और संभव है कि इसका इस्तेमाल न करना पड़े, लेकिन अमेरिका हर स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है. इस बयान को अमेरिका की शो ऑफ फोर्स नीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें सैन्य दबाव और रणनीतिक अनिश्चितता दोनों शामिल हैं.

पेंटागन ने बढ़ाई सैन्य गतिविधियां

USS Abraham Lincoln की तैनाती के साथ-साथ पेंटागन ने ईरान के आसपास अपनी सैन्य मौजूदगी को और मजबूत कर दिया है. क्षेत्र में अतिरिक्त लड़ाकू विमानों की तैनाती की गई है और सैन्य कार्गो उड़ानों के जरिए लॉजिस्टिक सपोर्ट भी बढ़ाया गया है. इससे अमेरिका को हवाई हमले, सटीक मिसाइल स्ट्राइक और मजबूत डिटरेंस विकल्प उपलब्ध हो गए हैं.

ईरान की चेतावनी और मध्य पूर्व में बढ़ती चिंता

ईरान ने अमेरिकी तैनाती पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी है कि यदि उस पर कोई सैन्य हमला किया गया तो उसका जवाब निर्णायक और कठोर होगा. इस चेतावनी के बाद पूरे मध्य पूर्व में तेल आपूर्ति, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ गई है.

क्या कूटनीति का रास्ता अब भी खुला है

तनावपूर्ण हालात के बावजूद अमेरिका ने संकेत दिया है कि बातचीत का विकल्प अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है. एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा है कि ईरान को अच्छी तरह पता है कि बातचीत के लिए शर्तें क्या होंगी और अब फैसला तेहरान को करना है.

वहीदा रहमान ने ए.आर. रहमान के बयान पर दी प्रतिक्रिया: ‘शांति से रहो, ये देश हमारा’

म्यूजिशियन ए आर रहमान ने बॉलीवुड में कम्युनल बायसनेस को लेकर बात की थी. अब एक्ट्रेस वहीदा रहमान ने इस पर रिएक्ट किया है. उन्होंने कहा कि वो इन सब चीजों से दूर रहती हैं.

वहीदा रहमान ने किया रिएक्ट

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए वहीदा रहमान ने कहा, ‘ये हमारा देश है, शांति से रहिए.’ वहिदा ने कहा कि वो ऐसी चीजों में दखल कम देती हैं. उन्होंने कहा, ‘ये छोटी चीजें हर देश में होती हैं. तो, किस पर विश्वास करें और कितना विश्वास करें?  फिर चाहे वो सच हो या नहीं. हमें इसमें इंवॉल्व क्यों होना चाहिए? खासतौर पर मेरी उम्र में. मैं इंवॉल्व नहीं होना चाहती हूं. अपनी शांति से रहो, ये मुल्क है हमारा. बस खुश रहो. इतना ही मैं कह सकती हूं.’

आगे वहीदा ने कहा, ‘काम तो ऊपर नीचे होता ही रहता है. एक उम्र के बाद लोग कहते हैं कि किसी नए को लेकर आओ. इसी वजह से कुछ लोग पीछे रह जाते हैं. अगर वो बहुत ऊंचाई पर पहुंचे हैं और वो वहीं रहेंगे, उन्हीं को लेंगे, ऐसा भी तो नहीं होता है ना. ऊपर नीचे होता ही रहता है. ऐसी कोई नई बात नहीं है.’

ए आर रहमान ने कहा था ये
बता दें ए आर रहमान ने कुछ समय पहले बीबीसी एशियन नेटवर्क को इंटरव्यू दिया था. इस में उन्होंने कहा था, ‘पिछले आठ सालों में बॉलीवुड में पावर शिफ्ट हुई है. अब पावर उन लोगों के पास है जो क्रिएटिव नहीं हैं. मुझे पिछले आठ साल में बॉलीवुड में काम भी कम मिला है. ये कोई कम्युनल चीज़ भी हो सकती है. लोग मेरे सामने नहीं कहते हैं. मुझे कानाफूसी में पता चला कि उन्होंने मुझे किसी काम के लिए बुक किया था लेकिन म्यूज़िक कंपनी ने बाद में अपने 5 कम्पोज़र्स को हायर कर लिया. मुझे लगता है कि अच्छा है, इसी बहाने मुझे अपने परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा.’

ए आर रहमान के इस बयान के बाद काफी विवाद हुआ था.

Sports News:वर्ल्ड कप से पहले पाकिस्तान टीम को लेकर बवाल, काली पट्टी पहनने की चर्चा—ICC ने क्या कहा?

टी20 वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत 7 फरवरी से होनी है, लेकिन टूर्नामेंट से पहले ही पाकिस्तान को लेकर सस्पेंस और विवाद दोनों बने हुए हैं. एक तरफ पाकिस्तान का वर्ल्ड कप में खेलना अभी तक पूरी तरह कन्फर्म नहीं है, वहीं दूसरी तरफ बांग्लादेश के समर्थन में उसके संभावित कदमों ने आईसीसी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अगर पाकिस्तान टूर्नामेंट में उतरता है तो वह बांग्लादेश के समर्थन में काली पट्टी बांधकर खेल सकता है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या ऐसा करना ICC के नियमों के खिलाफ होगा और अगर हां, तो पाकिस्तान पर क्या कार्रवाई हो सकती है.

ICC के नियम क्या कहते हैं?

आईसीसी के अनुसार, अगर कोई खिलाड़ी या टीम बिना पूर्व अनुमति इंटरनेशनल मैच में काली पट्टी या किसी तरह का प्रतीक पहनती है, तो इसे नियमों के विरुद्ध माना जाएगा.  इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं. 2023 में ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी उस्मान ख्वाजा को बिना अनुमति काली पट्टी पहनने पर आईसीसी की ओर से सख्त चेतावनी दी गई थी.

पाकिस्तान पर क्या हो सकता है एक्शन?

अगर पाकिस्तान की टीम बिना अनुमति काली पट्टी पहनती है, तो पहली बार में आईसीसी फटकार या चेतावनी दे सकती है. इसे ‘अन्य उल्लंघन’ की श्रेणी में रखा जाता है. वहीं, अगर नियमों का दोबारा उल्लंघन हुआ तो खिलाड़ियों पर मैच फीस का 25 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है. गंभीर स्थिति में टीम पर और भी सख्त कार्रवाई संभव है.

बांग्लादेश मुद्दे पर पाकिस्तान का खुला समर्थन

दरअसल, सुरक्षा कारणों से भारत में खेलने से इनकार करने के बाद आईसीसी ने बांग्लादेश को टी20 वर्ल्ड कप 2026 से बाहर कर दिया था और उसकी जगह स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में शामिल किया गया. इस फैसले से पाकिस्तान नाखुश है और वह लगातार बांग्लादेश के पक्ष में खड़ा नजर आ रहा है. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने भले ही अपनी टीम का ऐलान कर दिया हो, लेकिन यह साफ कर दिया गया है कि टूर्नामेंट में खेलने का अंतिम फैसला सरकार के स्तर पर लिया जाएगा.

काली पट्टी पहनना क्यों बना चर्चा का विषय?

कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान बांग्लादेश के समर्थन में वर्ल्ड कप के दौरान काली पट्टी पहनकर उतर सकता है. आमतौर पर काली पट्टी विरोध या शोक का प्रतीक मानी जाती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इसे पहनना नियमों के खिलाफ माना जाता है. आईसीसी के क्लोथिंग और इक्विपमेंट नियम खिलाड़ियों को बिना अनुमति किसी भी तरह का राजनीतिक, धार्मिक या व्यक्तिगत संदेश प्रदर्शित करने की इजाजत नहीं देते.

बर्फीले तूफान के बीच अमेरिका में प्राइवेट जेट हादसा, उड़ान भरते समय 7 की जान गई

अमेरिका में बर्फीले तूफान के चलते एक प्राइवेट बिजनेस जेट क्रैश होने की घटना सामने आई है. हादसा मेन के बैंगोर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुआ है. इसमें सात लोगों की मौत की खबर है. वहीं, एक क्रू मेंबर गंभीर रूप से घायल हुआ है. जेट बॉम्बार्डियर चैलेंजर 600 रविवार रात टेकऑफ कर रहा था, तभी वह क्रैश हो गया. हादसा बोस्टन से लगभग 200 किमी के उत्तर में हुआ है.

हादसे के समय बर्फबारी हो रही थी. फेडरल अधिकारियों और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर के अनुसार, जेट टेकऑफ की कोशिश करते में पलट गया. उसमें आग लग गई. घटना शाम 7:45 के आसपास की बताई जा रही है. मामले में फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन और नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड जांच कर रहे हैं. शुरुआती जानकारी में पता चला है कि विमान उड़ान भरने के तुरंत बाद क्रैश हुआ है, उसमें आग लग गई. जांचकर्ताओं के आने के बाद ही मामले में स्पष्टता सामने आएगी.

अमेरिका के बड़े हिस्से में बर्फबारी का दौर है

बैंगोर इंटरनेशनल एयरपोर्ट ऑरलैंडो, फ्लोरिडा, वाशिंगटन, डी.सी., और शार्लोट, नॉर्थ कैरोलिना जैसे शहरों के लिए सीधी उड़ानें प्रदान करता है. यह बोस्टन से लगभग 200 मील (320 किलोमीटर) उत्तर में स्थित है. इसे क्रैश के तुरंत बाद बंद कर दिया गया था. यह कम से कम बुधवार दोपहर तक बंद रहेगा. यह क्रैश तब हुआ है, जब न्यू इंग्लैंड और देश का ज्यादातर हिस्सा एक बड़े बर्फीले तूफान से जूझ रहा था. बैंगोर में लगातार बर्फबारी हो रही थी.

इस हफ्ते अमेरिका में बड़े तूफान के चलते अमेरिका के पूर्वी आधे हिस्से में कई जगह ओले, जमा देने वाली बारिश और बर्फ गिरी है. इससे हवाई और सड़क यातायात काफी हद तक रुक गया. लाखों घरों की बिजली गुल हुई है. अमेरिका में ज्यादातर हिस्सों में कमर्शियल हवाई ट्रैफिक प्रभावित हुआ है.

अबतक इतनी फ्लाइटें रद्द की गईं

फ्लाइट ट्रैकर के मुताबिक, करीबन 12000 उड़ाने रद्द कर दी गई हैं. वहीं, 20 हजार फ्लाइट को देरी का सामना करना पड़ा है. फिलाडेल्फिया, वॉशिंगटन, बाल्टीमोर, नॉर्थ कैरोलिना, न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी के हवाई अड्डे प्रभावित हुए हैं.

9 से 11 यात्रियों के लिए बनाया गया है  बॉम्बार्डियर चैलेंजर

बॉम्बार्डियर चैलेंजर 600 एक बिजनेस जेट है. इसे 9 से 11 यात्रियों के लिए कॉन्फिगर किया गया है. साल 1980 में इसे वॉक अबाउट केबिन के पहले प्राइवेट जेट के तौर पर लॉन्च किया गया था. यह एक लोकप्रिय चार्टर बना हुआ है.

भारत-EU की ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ से अमेरिका भड़का, ट्रंप के करीबी बोले—‘खुद के खिलाफ जंग’

भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने लंबे समय से चल रही मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत को पूरा कर लिया है. यह कदम ऐसे समय पर आया है, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति से दुनिया के कई देशों के व्यापारिक रिश्तों में तनाव बढ़ा हुआ है. खास तौर पर रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका ने भारत पर कड़े आरोप लगाए हैं.

भारत-EU FTA: बातचीत पूरी
भारत और यूरोपीय संघ के बीच FTA की बातचीत 2007 में शुरू हुई थी. अब दोनों पक्षों ने कहा है कि समझौता ‘कानूनी जांच’ के लिए तैयार है. इसे औपचारिक रूप से 27 जनवरी को घोषित किया जा सकता है. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे ‘सभी समझौतों की जननी’ कहा है.

रूस के तेल पर अमेरिका का आरोप
अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदता है, उसे रिफाइन करता है और फिर यूरोपीय देश वही तेल उत्पाद खरीदते हैं. उनके मुताबिक, इससे रूस-यूक्रेन युद्ध को पैसा मिल रहा है. उन्होंने दावा किया कि इस वजह से अमेरिका ने भारत पर 25% टैरिफ लगाया, जिसे बाद में बढ़ाकर 50% कर दिया गया.

ट्रंप प्रशासन का सख्त रुख
डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए उसने यूरोप से ज्यादा ‘कुर्बानी’ दी है. ट्रंप प्रशासन का मानना है कि यूरोप खुद के खिलाफ चल रही जंग को ही पैसा दे रहा है.

भारत पर 50% तक टैरिफ
अमेरिका ने भारत पर कुल 50% टैरिफ लगाए हैं. इसमें से 25% टैरिफ खास तौर पर रूस से तेल खरीदने के कारण लगाए गए हैं. यह फैसला अगस्त 2025 में लिया गया था. इन सबके बीच डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने लोकतंत्र हैं और दोनों के रिश्ते ऐतिहासिक हैं.

ट्रंप की नीति से असहमत रिपब्लिकन नेता
रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर टेड क्रूज ने कथित तौर पर कहा कि ट्रंप की टैरिफ नीति से अमेरिका को नुकसान हो सकता है. एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने ट्रंप को चेताया था कि इससे चुनावी नुकसान और राजनीतिक संकट खड़ा हो सकता है.

कनाडा भी भारत की ओर झुका
अमेरिका की सख्त व्यापार नीति के चलते कनाडा भी अपने रिश्ते नए सिरे से बना रहा है. प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व में कनाडा भारत को एक अहम रणनीतिक और व्यापारिक साझेदार मान रहा है. अमेरिका ने कनाडा पर भी भारी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है. जानकारों का मानना है कि  यूरोपीय संघ और कनाडा के साथ मजबूत होते रिश्तों से भारत को फायदा मिल सकता है. इससे भारत को ऊर्जा सुरक्षा, नए बाजार और अमेरिका के टैरिफ दबाव से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है.

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