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यूपी में प्रत्येक क्षेत्र में देखने को मिला आमूलचूल परिवर्तनः सीएम योगी

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  • पीएम मोदी की अध्यक्षता में नौवें आयुर्वेद दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल हुए सीएम योगी ने मेरठ में रखीं अपनी बातें।
  • सीएम ने कहा- गाजियाबाद में सेटेलाइट सेंटर बनाने के लिए एम्स दिल्ली से किया गया आग्रह, शीघ्र ही आगे बढ़ेगा यह काम।
  • सीएम का आह्वान- भगवान राम के विराजमान के बाद यह पहला दीपोत्सव, सभी के घरों में दीप जलने चाहिए।
  • उन्होंने कहा- पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में उभरा है मेरठ।

मेरठ/लखनऊ, 29 अक्टूबर2024: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आयुर्वेद में स्वास्थ्य की परिभाषा कही गई है ‘स्वस्थ्स्य स्वाथ्यम् लघुरक्षणम, आतुरस्य विकार प्रशमन च’ यानी स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा व रोगी के रोग का शमन करना आयुर्वेद का प्रयोजन है। आयुर्वेद के जनक की स्मृति में आज आयुर्वेद दिवस पर मनाया जाता है, इसकी थीम दी गई है कि ‘वैश्विक स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद नवाचार’। सीएम ने कहा कि यूपी में स्वास्थ्य के प्रत्येक क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिला है। आज हर जनपद में मेडिकल कॉलेज बन रहे हैं। 1947 से 2017 तक यूपी में मात्र 17 मेडिकल कॉलेज बन पाए थे, आज यूपी में 64 जनपद में मेडिकल कॉलेज बन चुका है या बन रहा है। 11 जनपद के लिए नई नीति का निर्माण किया है। इसके अंतर्गत मेडिकल कॉलेज के निर्माण के कार्यक्रम को युद्ध स्तर पर बढ़ा रहे हैं। आाज यूपी के पास दो एम्स है। एम्स दिल्ली से आग्रह किया है कि लैंड हम देंगे, गाजियाबाद में सेटेलाइट सेंटर बना दीजिए, जिससे दिल्ली एम्स की सुविधा का लाभ हापुड़, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहरवासियों को प्राप्त हो सके। इसके लिए सहमति बन रही है। यह कार्यक्रम शीघ्र बढ़ाने का कार्य करेंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नौवें आयुर्वेद दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मेरठ से वर्चुअली शामिल हुए। यहां उन्होंने अपनी बातें रखीं। सीएम योगी ने कहा कि आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर कमलों से देशवासियों को हजारों करोड़ की योजना का सौगात मिल रहा है। सीएम योगी ने एसआईसी हॉस्पिटल के शिलान्यास, आयुष्मान भारत की सुविधा 70 वर्ष से प्रत्येक नागरिक के लिए प्रत्येक नागरिक के लिए प्रारंभ होने, यूपी में सीडीआरआई और एम्स गोरखपुर को आधुनिक सुविधा से लैस करने की परियोजना के साथ ही देश में तमाम चिकित्सा संस्थान प्रारंभ करने के लिए पीएम के प्रति आभार प्रकट किया।

उत्तर प्रदेश सर्वाधिक आयुष्मान भारत की सुविधा का लाभ प्रदान करने वाला राज्य

सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सर्वाधिक आयुष्मान भारत की सुविधा का लाभ प्रदान करने वाला राज्य है। 5.14 करोड़ से अधिक नागरिक आयुष्मान भारत का गोल्डन कार्ड प्राप्त कर चुके हैं। श्रमिकों के लिए और भी सुविधा बढ़ाई गई है। उप्र श्रम व सेवायोजन विभाग के माध्यम से पीएम मोदी के मार्गदर्शन में यूपी के अंदर सरकार ने निर्माण श्रमिकों के लिए हर मंडल मुख्यालय पर अटल आवासीय विद्यालय बनाए हैं। यह शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन की दिशा में उठाया गया कदम है, जिसमें पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को निःशुल्क अध्ययन, रहने, शैक्षणिक व सर्वांगीण विकास के बड़े कार्यक्रम चल रहे हैं। निर्माण श्रमिकों के बच्चों की निःशुल्क शादी हो सके, इसके लिए सामूहिक विवाह योजना और 75000 रुपये की राशि बच्चों के लिए उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही निर्माण श्रमिकों के बच्चे उच्च अध्ययन के लिए जाते हैं तो अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराने की कार्रवाई भी बढ़ाई जा रही है।

सबका साथ-सबका विकास के भाव के साथ प्रत्येक तबके को योजनाओं का दिया जा रहा लाभ

सीएम योगी ने कहा कि पीएम मोदी के मंत्र ‘सबका साथ-सबका विकास’ के साथ समाज के प्रत्येक तबके को बिना भेदभाव योजनाओं का लाभ देने का कार्य हो रहा है। देश के अंदर सर्वाधिक आवास (56 लाख) देने वाला प्रदेश यूपी है। 2.62 करोड़ से अधिक घरों में शौचालय का निर्माण किया जा चुका है। उज्ज्वला योजना के तहत 1.86 करोड़ परिवारों को सिलेंडर दिया है। राज्य सरकार दीपावली व होली में मुफ्त सिलेंडर मुफ्त में उपलब्ध करा रही है। दुनिया जब कोरोना के सामने पस्त थी, तब डबल इंजन सरकार निर्माण श्रमिकों को भत्ता दे रही थी तो पिछले साढ़े चार वर्ष से 80 करोड़ लोगों को देश व 15 करोड़ लोगों को प्रदेश में निःशुल्क राशन दिया जा रहा है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में उभरा है मेरठ

सीएम योगी ने कहा कि मेरठ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में उभरा है। सात वर्ष पहले दिल्ली-मेरठ की दूरी साढ़े तीन से चार घंटे में पूरी होती थी। आज दिल्ली व मेरठ के बीच 12लेन का एक्सप्रेसवे बन चुका है। अब यह दूरी महज 45 मिनट में दूरी तय होती है। मेरठ व दिल्ली को रैपिड रेल जोड़ चुकी है, इससे मात्र 40 गंगा में दिल्ली की दूरी तय होती है। गंगा एक्सप्रेस-वे मेरठ को प्रयागराज से जोड़ रहा है। एक्सप्रेस-वे बनने के बाद यह दूरी महज छह से सात घंटे में पूरी होगी और 2025 प्रयागराज कुंभ में पश्चिमी उप्र के लोगों को संगम की त्रिवेणी में स्नान करने का पुण्य प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

स्पोट्रस आइटम में दुनिया के आवश्यकताओं की पूर्ति कर रहे मेरठ में हैं काफी संभावनाएं

सीएम योगी ने कहा कि ओडीओपी के क्षेत्र में मेरठ को स्पोट्र्स आइटम का हब बनाने की दिशा में सरकार ने कदम बढ़ाया है। मेरठ स्पोट्रस आइटम में न केवल देश, बल्कि दुनिया के आवश्यकता की पूर्ति कर रहा है। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की स्मृति में पहला खेल विश्वविद्यालय मेरठ में बन रहा है। जब यह विश्वविद्यालय तैयार होगा तो ओलंपिक में मेडल के लिए यहां से प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का कार्य करेंगे। यह विश्वविद्यालय विश्व स्तरीय सुविधा के साथ नए खिलाड़ियों को तलाशने व तराशने का कार्य करेगा।

सीएम योगी ने कहा कि मेऱठ के अंदर शिक्षा के बड़े हब के रूप में भी नए विश्वविद्यालय, तकनीकी केंद्र स्थापित हो रहे हैं। आज मैं मेरठ की एयरस्ट्रिप पर ही उतरा भी हूं और मात्र 15 मिनट में संकटखेड़ा में पहुंचा हूं। मेरठ में काफी संभावनाएं हैं। देश का सबसे बड़ा जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट बन रहा है। यमुना अथॉरिटी (यहां से कुछ ही मिनट की दूरी) ट्वाय सिटी, फिल्म सिटी, अपरैल पार्क, मेडिकल डिवाइस पार्क का निर्माण होने जा रहा है। युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए सभी कार्य मेरठ व आसपास के क्षेत्रों में होते दिखेंगे। यहां के विकास की कड़ी को नई ऊंचाई प्रदान करने के लिए मेरठ में श्रम विभाग के माध्यम से राज्य बीमा कर्मचारियों के लिए एसआईसी हॉस्पिटल (100 बेडेड आधुनिक सुविधा से युक्त) 150 करोड़ की लागत से होगा, इसका शिलान्यास भी पीएम के करकमलों से होने जा रहा है।

सीएम का आह्वान- भगवान राम के आगमन पर सभी के घरों में दीप जलने चाहिए

सीएम योगी ने सभी को धनतेरस, दीपावली, भैयादूज, गोवर्धन पूजा की शुभकामना दीं। उन्होंने कहा कि रामलला के विराजमान होने के बाद 30 अक्टूबर को अयोध्या धाम का पहला दीपोत्सव है। सीएम ने आह्वान किया कि अयोध्या के दीप के साथ भगवान राम के आगमन पर सभी के घरों में दीप जलने चाहिए।

इस अवसर पर प्रदेश सरकार के मंत्री सोमेंद्र तोमर, दिनेश खटिक, सांसद अरुण गोविल, राज्यसभा सांसद डॉ.लक्ष्मीकांत वाजपेयी, महापौर हरिकांत अहलूवालिया, विधायक अमित अग्रवाल, गुलाम मोहम्मद, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिसौदिया, जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा, विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र भारद्वाज, अश्विनी त्यागी, पूर्व सांसद राजेंद्र अग्रवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी आदि मौजूद रहे।

40 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्रदेश के विकास की गाथा को बयां कर रहे: सीएम योगी

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  • बोले, साढ़े सात वर्ष पहले पहचान के संकट से जूझने वाले प्रदेश की आज देश-दुनिया में अलग पहचान बनी
  • पहले कोई भी निवेशक प्रदेश में निवेश से कतराता था, आज लालायित है, निवेश के नये नये अवसर ढूंढ रहा
  • सीएम योगी आदित्यनाथ ताज होटल में एबीपी न्यूज के शिखर सम्मेलन में हुए सम्मिलित
  • सीएम ने प्रदेशवासियों को दी धनतेरस और दीपोत्सव की बधाई और शुभकामनाएं
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लखनऊ, 29 अक्टूबर2024: साढ़े सात वर्ष पहले उत्तर प्रदेश के सामने पहचान का संकट खड़ा हो गया था। प्रदेश की पहचान देश और दुनिया में दंगे, दुर्दांत माफिया, माफिया गिरोह, राजनीति के अपराधिकरण और शासन के भ्रष्टाचार के रूप में हो गयी थी। इसकी वजह से प्रदेश के युवाओं के सामने नौकरी, सम्मान और स्वाभिमान का संकट खड़ा हो गया था। उस दौरान गुंडागर्दी चरम पर थी। प्रदेश में पर्व और त्योहार के नजदीक आते ही लोगों के मन में भय के साथ दहशत पैदा हो जाती थी। उन्हे डर रहता था कि कब कहां दंगा हो जाए। वहीं आज प्रदेश दंगा और अराजकता मुक्त हो गया है। पहले जहां निवेशक प्रदेश में निवेश नहीं करना चाहता था। वहीं जिसने निवेश भी किया था तो वह यहां से अपना कारोबार समेट कर भागने की फिराक में रहता था। पिछले साढ़े सात वर्षों में प्रदेश की तस्वीर देश और दुनिया में बदली। आज देश और दुनिया के इंवेस्टर प्रदेश में निवेश के लिए आकर्षित हो रहे हैं। यही वजह है कि पिछले वर्ष ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में प्रदेश को 40 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। ये निवेश प्रस्ताव उत्तर प्रदेश की बदलती तस्वीर और विकास की गाथा का बयां कर रहे हैं। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को गोमतीनगर स्थित होटल ताज में आयोजित एबीपी न्यूज के शिखर सम्मेलन में कही।

आज कोई भी माफिया और अपराधी कानून से खिलवाड़ नहीं कर सकता

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश ने भव्य ग्लोबल इंवेस्टर समिट का आयोजन कर देश के सामने नजीर पेश की है। पूरे देश में आज इसकी चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में आए प्रस्ताव में से 12 लाख करोड़ की परियोजनाओं की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है। वहीं वर्तमान में 10 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव तैयार हैं जबकि शेष पर लगातार काम चल रहा है। सीएम ने कहा कि यह केवल निवेश नहीं है बल्कि प्रदेश के नौजवानों की नौकरी की संभावनाओं को आगे बढ़ाने वाला अवसर है। आज उत्तर प्रदेश देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था है। प्रदेश ने तेजी के साथ आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ खुद को स्थापित किया है। वर्ष 2029 तक प्रदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरुप वन ट्रिलियन डालर इकोनॉमी के रूप में खुद को स्थापित करेगा। इसके लिए सभी प्रदेशवासी संकल्पित हैं।

उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में निवेश और टूरिज्म के लिए अनुकुल माहौल बना है। यह केवल पॉलिसी और ईज आॅफ डूइंग बिजनेस से नहीं हुआ है बल्कि इसके लिए प्रदेश सरकार को चरणबद्ध तरीके से कार्य करना पड़ा था। इसमें जीरो टॉलरेंस नीति की अहम भूमिका रही है। यही वजह है कि आज कोई भी माफिया और अपराधी कानून के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकता है। अगर वह सोचता भी है तो कानून उसकी गर्दन पकड़ने का काम करेगी, जैसी वह कानून की धज्जियां उड़ाने के बारे में सोचता है। इसी का नतीजा है कि प्रदेश में हर किसी को सुरक्षा का माहौल मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कभी पहचान के संकट से जूझने वाले उत्तर प्रदेश पर देश-दुनिया के हर व्यक्ति की नजरें हैं। वह प्रदेश में निवेश और टूरिज्म का हिस्सा बनने के लिए उत्सुक हैं। इसके लिए प्रदेश सरकार को कई परिवर्तन करने पड़े।

आज प्रदेश का युवा नौकरी के लिए भटकने वाला नहीं बल्कि रोजगार के अवसर प्रदान करने वाला

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए कई रिफॉर्म करने पड़े। इसके अलावा कई सेक्टोरियल पॉलिसी बनायी गयी। उत्तर प्रदेश में आज निवेशकों के लिए 28 सेक्टर की अलग-अलग पॉलिसी है। इसमें हर एक इंवेस्टर के लिए द्वार खुले हैं। पहली बार प्रदेश में सिंगल विन्डो के जरिये निवेश मित्र एक साथ 450 एनओसी जारी कर रहे हैं। वहीं निवेशकों की मदद के लिए निवेश सरथी पोर्टल बना हुआ है। इसके जरिये निवेशकों को ऑनलाइन इंसेंटिव दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने जो कहा था, वह आज करके दिखा दिया है। इसके लिए सरकार को प्रमाण देने की जरुरत नहीं है बल्कि उसके परिणाम सबके सामने है। पहले जहां प्रदेश के युवाओं को नौकरी के लिए भटकना पड़ता है, वहीं आज उन्हे उनके जिले में ही नौकरी के अवसर मिल रहे हैं।

सीएम ने कहा कि पिछले साढ़े सात वर्षों में सात लाख सरकारी नौकरी युवाओं को दी गयी है जबकि करोड़ों युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने के साथ उन्हे रोजगार देने वाला बनाया गया है। अब प्रदेश के युवाओं, व्यापारियों, उद्यमियों और सामान्य नागरिक के सामने देश-दुनिया के सामने पहचान का संकट नहीं है बल्कि लोग प्रदेश के हर नागरिक को सम्मान से देखते हैं। वह प्रदेशवासियों से पिछले साढ़े सात वर्षों में बदली तस्वीर के बारे में उत्सुकता से जानना चाहते हैं।

सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश का एक गौरवशाली इतिहास रहा है। प्रदेश के पर्व और त्योहार धनतेरस-दीपोत्सव इसकी का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि भगवान धन्वंतरि का जन्म प्रदेश के सबसे प्राचीनतम नगरी वाराणसी में हुआ था, जिसके प्रति आज पूरा देश कृतिज्ञता ज्ञापित करेगा। वहीं अयोध्या में बुधवार को दीपोत्सव का आयोजन होगा। यह पहला आयोजन होगा जबकि 500 वर्षों के बाद रामलला के अपने पावन धाम में विराजमान होने के बाद भव्य दीपोत्सव होगा। सीएम योगी ने अंत में सभी प्रदेशवासियों को धनतेरस और दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी।

दिव्य दीपावली मेला-2024: मंत्री नरेंद्र कश्यप ने सहारागंज मॉल में किया मेले का शुभारंभ

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  • मंत्री नरेंद्र कश्यप ने लखनऊ में ‘दिव्य दीपावली मेला-2024’ का उद्घाटन किया और स्टालों का निरीक्षण किया।
  • उन्होंने दिव्यांगजनों के उत्पादों की सराहना करते हुए समाज से उन्हें प्रोत्साहित करने की अपील की।
  • मेले में 25 संस्थाओं ने दिव्यांगजनों के बने दीपक, मोमबत्तियां, रंगोली आदि उत्पाद प्रदर्शित किए।
  • इस मेले का उद्देश्य दिव्यांगजनों की रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।
  • प्रमुख सचिव सुभाष चंद्र शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

लखनऊ: 29 अक्टूबर 2024: प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा आयोजित ‘दिव्य दीपावली मेला-2024’ का सहारागंज मॉल लखनऊ में शुभारंभ किया गया। मंत्री ने मेले में लगे विभिन्न स्टालों का निरीक्षण किया और दिव्यांगजन बच्चों से मिलकर उनका हौसला बढ़ाया।

इस अवसर पर दिव्यांगजन मंत्री ने दिव्यांगजनों के उत्पादों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस प्रकार के मेलों का आयोजन दिव्यांगजनों को उनके कौशल के लिए एक मंच प्रदान करने में सहायक सिद्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहलें समाज में दिव्यांगजनों को मुख्यधारा में शामिल करने और उनके द्वारा निर्मित उत्पादों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी सहायक होती हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि मेले में दिव्यांगजनों के आत्मनिर्भर बनने के प्रयासों का समर्थन करना समाज की जिम्मेदारी है। इस अवसर पर उन्होंने समाज से आग्रह किया कि दिव्यांगजनों द्वारा निर्मित वस्तुओं का उपयोग करें ताकि उन्हें आर्थिक रूप से प्रोत्साहन मिल सके।

दिव्य दीपावली मेला-2024 में दिव्यांगजन द्वारा तैयार की गई वस्तुओं की भव्य प्रदर्शनी रही। यह मेला दिव्यांगजनों के कौशल, सृजनशीलता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। लगभग 25 सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं ने इस मेले में अपने स्टाल लगाए, जिनमें रंग-बिरंगे दीपक, फैंसी मोमबत्तियां, कलश, फ्लावर पॉट, रंगोली, आरती की थालियां, तोरण, लटकन, विभिन्न प्रकार की लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, गोबर व मिट्टी के दीये, जूट के झोले और टेडी वियर जैसी अनेक वस्तुएं प्रदर्शित की गईं। इन वस्त्रों और सजावटी सामान का प्रदर्शन न केवल उनकी रचनात्मकता का प्रमाण है बल्कि उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव सुभाष चंद्र शर्मा, निदेशक भूपेंद्र एस. चौधरी और राज्य आयुक्त प्रो. हिमांशु शेखर झा सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

राम मंदिर का मुहूर्त देने वाले गणेश्वर शास्त्री बोले- दीपावली का सर्वोत्तम मुहूर्त 1 नवंबर को, स्वाति नक्षत्र व अमावस्या के संयोग में महालक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व

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  • पंडित गणेश्वर शास्त्री के अनुसार, दीपावली का सर्वोत्तम मुहूर्त 1 नवंबर को है।
  • पंचांगों और शास्त्रों के अध्ययन से 1 नवंबर की उदया तिथि, प्रदोष काल और अमावस्या का संयोग शुभ।
  • महालक्ष्मी पूजन का सही समय सूर्यास्त के बाद 24 मिनट तक अमावस्या के संयोग में बताया गया।
  • पांच प्रमुख पंचांगों में से तीन ने भी 1 नवंबर को दीपावली का सही समय माना है।
  • इस विशेष योग में स्वाति नक्षत्र और प्रतिपदा भी शामिल, जो पूजन के लिए विशेष शुभ माना गया है।

वाराणसी: श्रीराम मंदिर और काशी विश्वनाथ मंदिर का मुहूर्त देने वाले प्रख्यात पंडित गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ ने इस साल दीपावली के महालक्ष्मी पूजन का सर्वोत्तम मुहूर्त 1 नवंबर बताया है। पंडित शास्त्री का कहना है कि देशभर से आए 250 से अधिक सवालों के जवाब में उन्होंने दो दिन तक विभिन्न शास्त्रों और पंचांगों का गहन अध्ययन किया। इसके बाद वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि 1 नवंबर की उदया तिथि में प्रदोष काल और सूर्यास्त के बाद अमावस्या का संयोग बन रहा है, जो महालक्ष्मी पूजन के लिए विशेष शुभ माना गया है।

पंडित गणेश्वर शास्त्री ने बताया कि पांच प्रमुख पंचांगों में से तीन ने भी दीपावली का सही दिन 1 नवंबर माना है। शास्त्रों के अनुसार, महालक्ष्मी पूजन सूर्यास्त के तुरंत बाद प्रदोष काल में किया जाना चाहिए, और इसके लिए अमावस्या का सूर्यास्त के बाद कम से कम 24 मिनट तक रहना अनिवार्य है। यह विशेष संयोग 1 नवंबर को उदय तिथि के साथ बन रहा है, जिसमें स्वाति नक्षत्र और प्रतिपदा का शुभ योग भी शामिल है।

इन शास्त्रों और पंचांगों का किया अध्ययन:

पंडित शास्त्री ने बताया कि उन्होंने कृत्यसारसमुच्चय, जयसिंहकल्पद्रुम, शब्दकल्पद्रुम, प्रातिवार्षिक पूजा कथा संग्रह, पर्वनिर्णय और देश के पांच प्रमुख पंचांगों का अध्ययन कर इस निर्णय पर पहुंचे हैं।

पंचांगों के अनुसार 1 नवंबर को ही सही तिथि:

शास्त्री जी के अनुसार, हृषिकेश पंचांग 31 अक्टूबर को दीपावली मनाने की तिथि देता है, लेकिन गणेश आपा पंचांग और म.म. श्रीमद् बापूदेवशास्त्री प्रवर्तित दृक्सिद्ध पंचांग के अनुसार 1 नवंबर को सही तिथि है। इसके साथ श्री वेंकटेश्वर शताब्दी पंचांग भी 1 नवंबर को ही अमावस्या के सही समय का संयोग बनता देख रहा है। इस प्रकार, पंचांगों की गणना के आधार पर 1 नवंबर को ही महालक्ष्मी पूजन का सर्वोत्तम समय है।

महालक्ष्मी पूजन के लिए 1 नवंबर का महत्व:

शास्त्री जी ने सुझाव दिया कि जो लोग सूर्यास्त के बाद 24 मिनट अमावस्या का समय पा सकते हैं, उन्हें 1 नवंबर को महालक्ष्मी पूजन करना चाहिए। वहीं, जिन क्षेत्रों में यह संयोग 31 अक्टूबर को बनता है, वहां उसी दिन पूजन करने का विकल्प भी रहेगा।

कालीबाड़ी मंदिर: लखनऊ में कैसरबाग के घसियारी मंडी में स्थित है आस्था और तंत्र साधना का 161 साल पुराना सिद्धपीठ

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•   1863 में मधुसूदन मुखोपाध्याय ने कैसरबाग में कालीबाड़ी मंदिर की स्थापना की।
•   मंदिर में माँ काली की मिट्टी से बनी पंचमुण्डी स्वरूप की मूर्ति है।
•   पंचमुण्डी स्वरूप तंत्र साधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
•   दीपावली पर महास्नान के बाद अन्नकूट का भोग लगाया जाता है।
•   नवरात्र में महिषासुर मर्दिनी पाठ और ढाक प्रतियोगिता होती है।
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लखनऊ: उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ के कैसरबाग स्थित कालीबाड़ी मंदिर, जिसे नगर का सबसे पुराना कालीबाड़ी मंदिर माना जाता है, अपने आप में एक ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर है। इस मंदिर की स्थापना 1863 में बंगाल के रहने वाले साधक मधुसूदन मुखोपाध्याय द्वारा की गई थी। मंदिर का यह ऐतिहासिक सफर, उसकी प्राचीन परंपराओं और मां काली के अनूठे पंचमुण्डी स्वरूप की आराधना के साथ, श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का केंद्र बन गया है।

मंदिर का इतिहास: मधुसूदन मुखोपाध्याय का सपना

मंदिर की स्थापना का किस्सा बेहद दिलचस्प और धार्मिक महत्व से भरा है। मधुसूदन मुखोपाध्याय, जो मूल रूप से बंगाल के निवासी थे, ने इस मंदिर की नींव तब रखी, जब उन्होंने सपने में माँ काली के पंचमुण्डी स्वरूप का दर्शन किया। कहा जाता है कि सपना देखने के बाद उन्होंने माँ के आदेशानुसार मिट्टी से मूर्ति बनाई और 1863 में कैसरबाग के घसियारी मंडी इलाके में उसकी प्राण प्रतिष्ठा की।

मूर्ति की सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह से मिट्टी की बनी हुई है और 161 साल बाद भी वैसी ही स्थिति में है। इस मूर्ति का स्वरूप पंचमुण्डी है, जिसमें माँ काली पाँच मुंडों की आधारशिला पर स्थापित हैं। पंचमुण्डी स्वरूप के तहत यहाँ पाँच जीवों—मानव, वानर, पक्षी (बादर), उल्लू, और सियार—के मुंडों का आधार है, जो देवी के तांत्रिक स्वरूप की अनूठी विशेषता को दर्शाता है।

माँ काली के पंचमुण्डी स्वरूप का महत्व

पंचमुण्डी आसन माँ काली के तांत्रिक स्वरूप का प्रतीक है। तंत्र साधना में माँ के इस स्वरूप की पूजा विशेष महत्व रखती है, जिसे आमतौर पर बंगाली परंपरा के लोग करते हैं। तंत्र साधना में, पंचमुण्डी आसन को ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। कहा जाता है कि देवी के इस स्वरूप के माध्यम से साधक तांत्रिक अनुष्ठानों को संपन्न करते हैं, जिसमें पंचभूतों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) का प्रतिनिधित्व भी सम्मिलित होता है। उत्तर प्रदेश में इस प्रकार का पंचमुण्डी आसन पर स्थापित देवी की मूर्ति अपने आप में एकमात्र अनूठी मूर्ति मानी जाती है।

पूजा विधि और विशेष अनुष्ठान

कालीबाड़ी मंदिर के पुजारी डॉ. अमित गोस्वामी जी पिछले 21 वर्षों से यहाँ नियमित पूजा-अर्चना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर में माँ काली की पूजा खासतौर से दीपावली के अवसर पर विशेष महत्व रखती है। बंगाली मूल के लोग इस दिन को काली पूजा के रूप में मनाते हैं। इस अवसर पर पंचमुण्डी स्वरूप की मूर्ति का महास्नान (सात समुद्र के जल, 10 प्रकार के तेल और मिट्टी से स्नान) कराया जाता है।

इसके बाद, विशेष प्रकार की पूजा विधि का आयोजन होता है, जिसमें पंच उपचार, दस उपचार और 16 उपचार शामिल होते हैं। पूजा के दौरान, अन्नकूट का विशेष भोग लगाया जाता है, जिसे ‘महाप्रसाद’ के रूप में जाना जाता है। मान्यता है कि इस महाप्रसाद को ग्रहण करने वाले भक्तों के जीवन में कभी भी अन्न की कमी नहीं होती है।

नवरात्रि और अन्य उत्सव

कालीबाड़ी मंदिर में शारदीय नवरात्रि के दौरान महिषासुर मर्दिनी का विशेष अनुष्ठान होता है, जिसमें माँ दुर्गा की महिषासुर का वध करने की कथा का विशेष आयोजन होता है। इसके साथ ही, ढाक प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाता है, जिसमें ढाक वादकों की प्रतियोगिता होती है, जो इस पूजा को और भी रंगीन बना देती है। इस आयोजन में शहर भर के भक्त उत्साहपूर्वक हिस्सा लेते हैं और इस परंपरा को जीवंत बनाए रखते हैं।

कालीबाड़ी मंदिर का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

लखनऊ का कालीबाड़ी मंदिर धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण स्थान है। यहाँ की पूजा पद्धति और अनुष्ठान बंगाली परंपराओं से गहरे जुड़े हुए हैं। यहाँ की मिट्टी की मूर्ति और पंचमुण्डी स्वरूप का विशेष महत्व, तंत्र साधना के महत्व को दर्शाता है। यह स्थान न केवल बंगाली समाज के लिए, बल्कि तंत्र साधना में विश्वास रखने वाले साधकों के लिए भी एक तीर्थस्थल के रूप में प्रसिद्ध है। कालीबाड़ी मंदिर का यह इतिहास और उसकी पूजा विधि एक समृद्ध परंपरा का प्रतीक है, जो न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी अद्वितीय है। यहां का हर त्योहार, हर अनुष्ठान, और हर पूजा विधि भक्तों के मन में श्रद्धा और आस्था की भावना को प्रज्वलित करती है।