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लखनऊ: भाजपा विधायक डॉ० राजेश्वर सिंह ने दिया सपा प्रमुख अखिलेश यादव के चुनाव की डेट में सवाल उठाने वाले TWEET का जवाब

  • उन्होंने कहा कि हार और डर के साए से, उबर नहीं पा रहे हैं सपा प्रमुख
  • ⁠2014 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी बुरी तरह चुनाव हारी
  • ⁠डर के मारे 2017 विधानसभा चुनाव में सपा ने ‘मारे डर के’ कांग्रेस से गठबंधन किया और फिर से बड़ी हार ‘हाथ’ आई
  • ⁠2019 लोकसभा चुनाव में सपा ने हार के डर से हाथी की सवारी की लेकिन फिर भी हार ने पीछा नहीं छोड़ा
  • ⁠2022 विधानसभा चुनाव में एक बार फिर से सपा प्रमुख अपनी पार्टी को हार से बचा नहीं पाए
  • ⁠2024 के लोकसभा चुनाव में सपा इंडी-गठबंधन का हिस्सा बनीं, लेकिन गठबंधन को हार ही हाथ लगी

लखनऊ: निर्वाचन आयोग द्वारा उत्तरप्रदेश की 9 विधान सभाओं में हो रहे उप चुनाव की डेट में संशोधन करने पर सपा प्रमुख द्वारा भाजपा पर डेट बढ़वाने के आरोप पर डॉ०राजेश्वर सिंह ने Tweet का जवाब देते हुए लिखा कि चुनाव आयोग द्वारा यूपी में उपचुनाव की तारीख 13 नवंबर से 20 नवंबर किए जाने का निर्णय कार्तिक पूर्णिमा स्नान के दृष्टिगत विभिन्न राजनीतिक दलों के अनुरोध पर लिया गया है।

उन्होंने कहा कि आदरणीय अखिलेश जी, तुष्टिकरण की राजनीति से बाहर आइए, सनातन धर्म से जुड़े पर्वों के महत्व को भी समझिए, कार्तिक पूर्णिमा के दिन करोड़ों लोग गंगा स्नान करते हैं, कुंदरकी, मीरापुर, गाज‍ियाबाद और प्रयागराज में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर मेला में प्रतिभाग एवं पूजन के ल‍िए लोग 3-4 द‍िन पहले ही चले जाते हैं। आगे उन्होंने लिखा “नहींचाहिए समाजवादी_पार्टी” UPByelection2024

दरअसल सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उपचुनाव की डेट बढ़ाए जाने पर Tweet करते हुए लिखा था कि “टालेंगे तो और भी बुरा हारेंगे!

पहले मिल्कीपुर का उपचुनाव टाला, अब बाक़ी सीटों के उपचुनाव की तारीख़, भाजपा इतनी कमजोर कभी न थी।

दरअसल बात ये है कि उप्र में ‘महा-बेरोज़गारी’ की वजह से जो लोग पूरे देश में काम-रोज़गार के लिए जाते हैं, वो दिवाली और छठ की छुट्टी लेकर उप्र आए हुए हैं, और उपचुनाव में भाजपा को हराने के लिए वोट डालनेवाले थे। जैसे ही भाजपा को इसकी भनक लगी, उसने उपचुनावों को आगे खिसका दिया, जिससे लोगों की छुट्टी ख़त्म हो जाए और वो बिना वोट डाले ही वापस चले जाएं।

ये भाजपा की पुरानी चाल है :
हारेंगे तो टालेंगे

इसी Tweet की प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा विधायक डॉ०राजेश्वर सिंह ने अखिलेश यादव को करारा जवाब दिया है और उपचुनाव की डेट बढ़ाए जाने का असली कारण कार्तिक पूर्णिमा में लोगों की आस्था बताया है।

यूपी में विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए योगी सरकार की पहल, एफडीआई पॉलिसी में किया संशोधन

  • सीएम योगी की अगुवाई में हुई कैबिनेट बैठक में संशोधन के प्रस्ताव को दी गई मंजूरी
  • संशोधन के तहत इक्विटी के साथ अन्य स्रोत से पैसों की व्यवस्था करने वाली कंपनियां भी होंगी पात्र
  • निवेश की न्यूनतम सीमा 100 करोड़ में 10 प्रतिशत इक्विटी की सीमा होगी जरूरी

लखनऊ: योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में विदेशी निवेश को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सोमवार को लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में एफडीआई एवं फॉर्च्यून 500 कंपनियों के निवेश हेतु प्रोत्साहन नीति 2023 में संशोधन को मंजूरी दे दी। इस संशोधन के माध्यम से योगी सरकार ने विदेशी निवेशकों को बड़ी राहत दी है। इसके माध्यम से अब ऐसी विदेशी कंपनियां भी प्रदेश में निवेश कर सकेंगी जो इक्विटी के साथ-साथ लोन या किसी अन्य स्रोत से पैसों की व्यवस्था करती हैं। योगी सरकार के इस निर्णय से प्रदेश में विदेशी निवेश के बढ़ने की संभावना है।

फॉरेन कैपिटल इन्वेस्टमेंट को किया गया शामिल

योगी कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी देते हुए वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि 1/11/2023 को फॉरेन डायरेक्टर इन्वेस्टमेंट (एफडीआई) की नीति आई थी, इसमें थोड़ा संशोधन किया गया है। नीति में अर्हता के लिए निवेश की न्यूनतम सीमा 100 करोड़ रुपए रखी गई है। आरबीआई द्वारा जो एफडीआई की परिभाषा दी गई है, उसके अनुसार अभी तक मात्र इक्विटी में किए गए निवेश को ही एफडीआई में सम्मिलित किया जाता है। नीति में जो संसोधन किया गया है उसमें हमने इसे फॉरेन कैपिटल इन्वेस्टमेंट का रूप दिया है। उन्होंने कहा कि अभी तक एफडीआई के तहत कंपनी के पास अपनी इक्विटी होती थी लेकिन ज्यादातर कंपनी अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए बाहर से लोन के साथ ही दूसरे माध्यमों से भी पैसा मैनेज करती हैं। हमने उसको भी अलाऊ कर दिया है। यदि किसी कंपनी के पास इक्विटी केवल 10 प्रतिशत है और 90 प्रतिशत निवेश राशि की व्यवस्था दूसरे स्रोतों से कर रखी होगी तो हम उसको भी बेनिफिट प्रदान करेंगे।

100 करोड़ के निवेश को माना जाएगा पात्र

उन्होंने बताया कि अब इस नीति को फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट, फॉरेन कैपिटल इन्वेस्टमेंट एंड फॉर्च्यून ग्लोबल 500 एंड फॉर्च्यून इंडिया 500 इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी 2023 कहा जाएगा। फॉरेन कैपिटल इन्वेस्टमेंट के रूप में इक्विटी में निवेश करने वाली विदेशी कंपनी के लिए प्रिफरेंश शेयर, डिवेंचर्स, एक्सटर्नल कॉमर्शियल बॉरोइंग, स्टैंड बाई लैटर ऑफ क्रेडिट, लैटर्स ऑफ गारंटी व अन्य डेब्ट सिक्योरिटी को भी शामिल कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, अन्य मोड जो आरबीआई के द्वारा फ्रेमवर्क ऑन एक्सटर्नल कॉमर्शियल बॉरोइंग, ट्रेड क्रेडिट, स्ट्रक्चर्ड ऑब्लीगेशंस के अंतर्गत किए गए 100 करोड़ के विदेशी निवेश की गणना के लिए अर्ह होंगे। विदेशी निवेशक कंपनी द्वारा की गई फॉरेन कैपिटल इन्वेस्टमेंट राशि (जिसमें इक्विटी में न्यूनतम 10 प्रतिशत तथा शेष ऋण व अन्य इंस्ट्रूमेंट के माध्यम से मिलाकर 100 करोड़ रुपए का निवेश) को इस नीति के अंतर्गत पात्र माना जाएगा तथा पूंजी निवेश की गणना में सम्मिलित किया जाएगा।

बिना नॉमिनी भी हो सकेगा ग्रेच्युटी का भुगतान

योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश रिटायरमेंट बेनिफिट्स रूल्स 1961 में संशोधन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। इसके तहत यदि किसी कर्मचारी की मृत्यु सेवा में रहते हुए अथवा सेवानिर्वत्ति के उपरांत ग्रेच्युटी की धनराशि प्राप्त किए बिना हो जाती है और उसने अपने पीछे कोई परिवार नहीं छोड़ा है और न ही कोई नॉमिनी बनाया है तो ग्रेच्युटी का भुगतान उस व्यक्ति को किया जा सकता है जिसके पक्ष में किसी न्यायालय द्वारा उत्तराधिकार प्रमाण पत्र प्रदान किया गया हो। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि पहले कि व्यवस्था में ऐसे व्यक्ति की ग्रेच्युटी की धनराशि सरकार को चली जाती थी।

अखिलेश यादव के ट्वीट पर भाजपा विधायक डॉ.राजेश्वर सिंह का तीखा पलटवार: सपा शासनकाल के ‘गुंडाराज’ के आँकड़े पेश किए

लखनऊ, उत्तर प्रदेश: आगामी UP By-Election 2024 की पृष्ठभूमि में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा ट्वीट किए गए बयान पर भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। अपने ट्वीट के माध्यम से, डॉ. सिंह ने सपा शासनकाल में पत्रकारों पर हुए हमलों के आँकड़े सामने रखते हुए अखिलेश यादव को उनके कार्यकाल के काले अध्यायों की याद दिलाई।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा, “श्रीमान अखिलेश जी, कृपया समाजवादी शासनकाल में पत्रकारों पर हुए इन हमलों को भी याद कीजिए”। उन्होंने क्रमवार तरीके से उन घटनाओं का उल्लेख किया जिनमें सपा शासन के दौरान पत्रकारों को हिंसा का सामना करना पड़ा था:

1. साल 2013 – अखिलेश यादव के गृह जनपद इटावा में पत्रकार सुरेंद्र वर्मा की गोली मारकर हत्या।

2. साल 2015 – शाहजहांपुर में सपा के एक मंत्री के खिलाफ फेसबुक पर पोस्ट करने के चलते वरिष्ठ पत्रकार जगेंद्र सिंह को जिंदा जला दिया गया।

3. साल 2015 – चंदौली में टीवी पत्रकार हेमंत यादव को सरेआम गोली मार दी गई।

4. साल 2021 – मुरादाबाद में सपा कार्यकर्ताओं ने वरिष्ठ पत्रकार उबैद उर रहमान और फरीद शम्सी पर हमला कर उनकी पिटाई की, और ये घटना अखिलेश यादव की मौजूदगी में हुई थी।

डॉ. सिंह ने कहा कि समाजवादी शासनकाल के दौरान पत्रकारों की आवाज़ दबाने के आरोप लगे और पत्रकार खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे थे। उन्होंने इसे “गुंडाराज” करार देते हुए कहा कि प्रदेश के लोग और मीडियाकर्मी आज भी इन घटनाओं को भूले नहीं हैं। साथ ही उन्होंने हैशटैग #नहीं_चाहिए_समाजवादी_पार्टी और #UPByElection2024 के माध्यम से जनता के बीच संदेश फैलाने का प्रयास किया।

राजनीतिक प्रतिक्रिया का असर

डॉ. राजेश्वर सिंह के इस बयान से आगामी उपचुनाव में भाजपा और सपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति और तेज होती दिख रही है। भाजपा ने सपा शासनकाल में कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सपा सरकार के कथित “गुंडाराज” को मुद्दा बनाया है, और इसे चुनाव प्रचार में प्रमुखता से उठाने की योजना बना रही है।

सपा का पक्ष

हालांकि, समाजवादी पार्टी की ओर से इन आरोपों का जवाब अभी नहीं आया है, लेकिन यह संभव है कि आने वाले दिनों में सपा नेता इसका प्रत्युत्तर देंगे।

लखनऊ के सरोजनीनगर से भाजपा विधायक डॉ.राजेश्वर सिंह के इस ट्वीट से स्पष्ट है कि UP By-Election 2024 के लिए राजनीतिक दल एक-दूसरे पर हमलावर रुख अपनाए हुए हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि समाजवादी पार्टी कैसे इन आरोपों का सामना करती है और भाजपा अपने संदेश को किस प्रकार जनता तक पहुँचाती है।

शिक्षा और तकनीक में विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर हो मेरा भारत- डॉ.राजेश्वर सिंह

• डॉ. राजेश्वर सिंह ने “मेरे सपनों का भारत” थीम पर दीपावली पर विजन साझा किया।

• 2030 तक हर बच्चे को एआई-संचालित शिक्षा देने का संकल्प।

• भारत को “स्टार्टअप राष्ट्र” बनाकर वैश्विक केंद्र बनाने का लक्ष्य।

• बुजुर्गों के लिए सम्मान और सुरक्षा की गारंटी का प्रस्ताव।

• 2040 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य और 50% ऊर्जा नवीकरणीय स्रोतों से।

लखनऊ: सरोजनीनगर विधायक डॉ.राजेश्वर सिंह ने प्रकाश पर्व दीपावली के अवसर पर शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर “इंडिया ऑफ़ माय ड्रीम” टैगलाइन के साथ अपना विजन साझा किया, विधायक ने अपने विजन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि “पॉवर टू ड्रीम ही दुनिया का नेतृत्व करने की शक्ति है!” अपने पोस्ट में, डॉ. सिंह ने भारत के लिए विस्तृत दृष्टिकोण व्यक्त किया, जहां प्रत्येक व्यक्ति, भले ही उसकी उम्र या पृष्ठभूमि कुछ भी हो, वह व्यक्ति एक समृद्ध और समावेशी राष्ट्र के निर्माण में अपनी भूमिका निभा सके। डॉ. सिंह ने उल्लेखित किया कि “मेरे सपनों का भारत कोई दूर की कल्पना नहीं है; यह एक प्राप्य वास्तविकता है जिसे एक साथ मिलकर साकार किया जा सकता है।”

डॉ. सिंह के दृष्टिकोण में सबसे आगे शिक्षा प्रणाली का परिवर्तन है। उन्होंने घोषणा की, “2030 तक, हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हर बच्चे को व्यक्तिगत, एआई-संचालित शिक्षा तक पहुंच मिले, कोई भी पीछे न छूटे।” इस पहल का उद्देश्य प्रतिस्पर्धी वैश्विक परिदृश्य में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक कौशल के साथ बच्चों को सशक्त बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का लाभ उठाना है, अंततः भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार नवोन्वेषी विचारकों का पोषण करना है। डॉ. सिंह ने इस दृष्टिकोण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया और कहा कि वे प्रौद्योगिकी और नवाचार में वैश्विक लीडर के रूप में उभरेंगे। उन्होंने कहा, “2035 तक, हम अपने युवाओं को एआई, हरित प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष अन्वेषण में प्रगति करते हुए देखेंगे।” तकनीकी क्षेत्र में 60% भारतीय युवाओं को शामिल करने के लक्ष्य के साथ, डॉ. सिंह का मानना है कि युवा पीढ़ी को सशक्त बनाने से वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति फिर से विश्वगुरु की होगी।

इसके साथ ही, डॉ. सिंह भारत को “स्टार्टअप राष्ट्र” के रूप में स्थापित करने की इच्छा रखते हैं, उनकी कल्पना है कि 2030 तक दुनिया भर में तीन स्टार्टअप में से एक की स्थापना भारतीयों द्वारा की जाएगी। देश में 80 से अधिक यूनिकॉर्न के मौजूदा मील के पत्थर का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा, “भारत रचनात्मकता और नवाचार का वैश्विक केंद्र बन जाएगा, जिससे आर्थिक विकास होगा और नौकरियां पैदा होंगी।” यह उद्यमशीलता की भावना आर्थिक कायाकल्प के उनके दृष्टिकोण के केंद्र में है। वरिष्ठ नागरिकों के अमूल्य योगदान को मान्यता देते हुए, डॉ. सिंह ने बुजुर्गों के लिए सम्मान और देखभाल सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने टिप्पणी की “जो समाज अपने बुजुर्गों का सम्मान करता है वह अपने भविष्य का सम्मान करता है।” वरिष्ठ नागरिकों को सम्मान और वित्तीय सुरक्षा के साथ जीने की गारंटी देने के लिए तकनीक-सहायता आधारित देखभाल समाधान और एक सार्वभौमिक पेंशन योजना लागू करने पर जोर दिया। डॉ. सिंह ने पर्यावरणीय स्थिरता के महत्व पर भी जोर दिया और भारत द्वारा 2040 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन हासिल करने के लक्ष्य को एक साहसिक लक्ष्य बताया, इसके लिए ऊर्जा खफत का 50% नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त करने पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह प्रतिबद्धता न केवल पर्यावरण की रक्षा को समर्पित है बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए पृथ्वी को एक स्वस्थ ग्रह के रूप में भी स्थापित करेगी।

अपनी बात का उपसंहार करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने प्रत्येक नागरिक से राष्ट्र के इस सपने को आकार देने में भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा “आइए हम हाथ मिलाएं और इस दृष्टिकोण में सक्रिय रूप से भाग लें। साथ मिलकर, हम एक ऐसे भारत का निर्माण कर सकते हैं जो करुणा, नवाचार और फ्लैक्सिबिलिटी के साथ दुनिया का नेतृत्व करेगा।” डॉ. सिंह का मानना है कि अटूट दृढ़ संकल्प और सामूहिक प्रयास के साथ, उनके सपनों का भारत का निर्माण संभव है, जो समावेशिता और प्रगति के मूल्यों पर आधारित एक वैश्विक लीडर के रूप में आगे बढ़ने के लिए तैयार है।

Sports: अन्तर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं के लिए किक बॉक्सर रिंका को योगी सरकार देगी आर्थिक मदद

  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलीं अन्तर्राष्ट्रीय किक बॉक्सर रिंका सिंह चौधरी
  • गत दो माह में विश्व कप और एशियन किक बॉक्सिंग में सिल्वर मेडल जीतने पर सीएम ने की सराहना

गोरखपुर/लखनऊ: 1 नवंबर 2024: गत दो माह में विश्व कप और एशियन किक बॉक्सिंग में सिल्वर मेडल जीतने वाली गोरखपुर की रिंका सिंह चौधरी को आगामी अन्तर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं के लिए योगी सरकार आर्थिक मदद देगी। गोरखनाथ मंदिर में रिंका से मुलाकात करने के बाद इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देशित किया है। उन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय किक बॉक्सर को भरोसा दिया कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर खेल प्रतिभा का प्रदर्शन करने के लिए सरकार धन की कमी आड़े नहीं आने देगी।

गोरखपुर के खोराबार क्षेत्र स्थित गौरीमंगलपुर निवासी रिंका सिंह चौधरी ने 24 से 29 सितंबर तक उज्बेकिस्तान में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय किक बॉक्सिंग विश्व कप में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीता। साथ ही उन्होंने कम्बोडिया में 6 से 13 अक्टूबर में आयोजित एशियन किक बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भी सिल्वर मेडल अपने नाम किया। अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में अपने जीते इन दोनों मेडल के साथ रिंका सिंह चौधरी ने शुक्रवार को गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने रिंका को मेडल देखकर खूब उत्साह बढ़ाया और शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी। मुलाकात के दौरान इस अन्तर्राष्ट्रीय किक बॉक्सर ने आगामी इंटरनेशल टूर्नामेंट्स के लिए आर्थिक दिक्कत का जिक्र कर सहायता का अनुरोध किया। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी भी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन पैसे की कमी से बाधित नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि रिंका की पूरी मदद की जाए। सीएम योगी ने रिंका को उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद देते हुए यह मंगलकामना की कि आगामी अन्तर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में वह गोल्ड मेडल जीतें।