अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान ईरान की ओर खींच दिया है. उन्होंने दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना का एक बड़ा बेड़ा ईरान की तरफ बढ़ रहा है. इस बयान के बाद वैश्विक युद्ध की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई है. ट्रंप ने यह बात आयोवा के क्लाइव शहर में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कही.
समर्थकों के बीच ट्रंप का बयान ट्रंप ने मंगलवार कहा कि एक ‘खूबसूरत आर्माडा’ इस समय ईरान की ओर जा रहा है. उनका कहना था कि वह चाहते हैं कि ईरान समझौता कर ले. ट्रंप ने कहा, ‘अगर ईरान पहले ही समझौता कर लेता तो आज उसकी हालत अलग होती.’
ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले का दावा ट्रंप ने यह भी दावा किया कि पिछले साल जून में अमेरिका ने ईरान के कई परमाणु ठिकानों पर हमले कर उसकी परमाणु ताकत को पूरी तरह खत्म कर दिया. हालांकि, इन हमलों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कितना नुकसान हुआ, इस पर अब भी सवाल बने हुए हैं.
पहले भी समझौता तोड़ चुके हैं ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में ट्रंप ने ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते को रद्द कर दिया था. इसके बाद उन्होंने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, ताकि उसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाया जा सके.
ईरान की धमकी और चेतावनी अमेरिकी सेना के मध्य पूर्व में बढ़ते कदमों के बीच ईरान ने भी सख्त चेतावनी दी है. ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अगर अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई की तो उसे ‘भारी और पछतावे वाली प्रतिक्रिया’ झेलनी पड़ेगी.
तेहरान में लगाया गया चेतावनी वाला होर्डिंग ईरान की राजधानी तेहरान में एक बड़ा होर्डिंग लगाया गया है, जिसमें एक अमेरिकी विमानवाहक पोत को तबाह हालत में दिखाया गया है. उस पर फारसी और अंग्रेजी में लिखा है- ‘अगर तुम हवा बोओगे, तो तूफान काटोगे.’
अमेरिकी युद्धपोत क्षेत्र में पहुंचे पिछले हफ्ते ट्रंप ने बताया था कि अमेरिकी नौसेना का बेड़ा मध्य पूर्व की ओर भेजा जा रहा है. USS अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत और उसके साथ कई मिसाइल से लैस जहाज सोमवार को इलाके में पहुंच गए. इससे हजारों अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी वहां और बढ़ गई है.
‘सिर्फ एहतियात के तौर पर’ भेजा गया बेड़ा ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि यह बेड़ा ‘सिर्फ एहतियात के तौर पर’ भेजा गया है. उन्होंने कहा, ‘हमारे पास बहुत बड़ी ताकत उस दिशा में जा रही है, हो सकता है हमें इसका इस्तेमाल न करना पड़े.’
ईरान में विरोध प्रदर्शन और मौतें इस बीच, ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को लेकर भी हालात गंभीर बने हुए हैं. मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, प्रदर्शनों और कार्रवाई में अब तक 6,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें महिलाएं, बच्चे और आम नागरिक भी शामिल हैं.
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बारामती एयरपोर्ट पर हुए प्लेन क्रैश में निधन हो गया, वे 66 वर्ष के थे।
मुंबई से बारामती आ रहा चार्टर्ड विमान लैंडिंग के दौरान रनवे से फिसल गया और क्रैश लैंडिंग का शिकार हुआ।
हादसे में अजित पवार सहित कुल 5 लोगों की मौत हुई, जिसकी पुष्टि DGCA ने की है।
विमान VSR द्वारा संचालित लियरजेट-45 था, जिसमें पायलट और फर्स्ट ऑफिसर समेत क्रू सवार था।
पंचायत चुनाव की सभाओं को संबोधित करने बारामती पहुंचे अजित पवार के निधन से राज्य की राजनीति में शोक की लहर है।
बारामती/मुंबई : महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता अजित पवार का बुधवार सुबह एक दर्दनाक विमान हादसे में निधन हो गया। वे 66 वर्ष के थे। यह हादसा सुबह करीब 8:45 बजे बारामती एयरपोर्ट पर हुआ, जब उनका चार्टर्ड विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने हादसे में कुल 5 लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अजित पवार मुंबई से चार्टर्ड प्लेन के जरिए बारामती पहुंचे थे। लैंडिंग के दौरान विमान रनवे से फिसल गया, जिसके बाद यह क्रैश लैंडिंग का शिकार हो गया। हादसा इतना भीषण था कि विमान में सवार कोई भी व्यक्ति जीवित नहीं बच सका। इससे पहले 6 लोगों के मारे जाने की खबरें सामने आई थीं, हालांकि DGCA ने स्पष्ट किया है कि दुर्घटना में पांच लोगों की ही मौत हुई है।
बताया जा रहा है कि विमान में अजित पवार के साथ उनके पर्सनल असिस्टेंट, एक सुरक्षाकर्मी, और दो विमान चालक दल के सदस्य (पायलट इन कमांड और फर्स्ट ऑफिसर) सवार थे। सभी की इस हादसे में मौके पर ही मृत्यु हो गई।
हादसे का शिकार हुआ विमान VSR द्वारा संचालित लियरजेट-45 था, जिसका पंजीकरण नंबर VT-SSK बताया गया है। दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है और संबंधित एजेंसियां घटनास्थल पर मौजूद हैं। DGCA और अन्य विमानन सुरक्षा एजेंसियां हादसे की विस्तृत जांच कर रही हैं।
जानकारी के अनुसार, अजित पवार महाराष्ट्र पंचायत चुनाव के सिलसिले में बारामती में चार जनसभाओं को संबोधित करने वाले थे। हादसे की सूचना मिलते ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) प्रमुख शरद पवार और सांसद सुप्रिया सुले, जो उस समय दिल्ली में मौजूद थे, पूरे परिवार के साथ तुरंत बारामती के लिए रवाना हो गए हैं। वहीं परिवार के अन्य सदस्य मुंबई स्थित उनके आवास के लिए निकल चुके हैं।
अजित पवार के निधन से महाराष्ट्र की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई है। राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम जनता की ओर से लगातार शोक संदेश सामने आ रहे हैं। राज्य सरकार और केंद्र सरकार की ओर से भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
व्हाट्सऐप और उसकी पैरेंट कंपनी मेटा पर अमेरिका की संघीय अदालत में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन को लेकर क्लास एक्शन मुकदमा दायर किया गया है।
भारत सहित पांच देशों के यूज़र्स ने आरोप लगाया है कि उनके निजी और एन्क्रिप्टेड संदेशों तक कंपनी की आंतरिक पहुंच मौजूद है।
मुकदमे में दावा किया गया है कि मेटा के कर्मचारी तकनीकी टूल्स के जरिए यूज़र्स की चैट लगभग रियल-टाइम में देख सकते हैं।
व्हाट्सऐप के उन दावों पर सवाल उठाए गए हैं, जिनमें कहा गया था कि संदेशों की सामग्री तक कंपनी की कोई पहुंच नहीं होती।
यह मामला पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और डिजिटल निजता से जुड़े वैश्विक भरोसे के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
वाशिंगटन/नई दिल्ली: दुनिया के सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप और उसकी मूल कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक. पर अमेरिका की एक संघीय अदालत में बेहद गंभीर आरोपों के साथ मुकदमा दायर किया गया है। यह मामला केवल एक तकनीकी विवाद नहीं है, बल्कि डिजिटल युग में यूज़र्स की निजता, भरोसे और सुरक्षा से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। इस मुकदमे में दावा किया गया है कि व्हाट्सऐप द्वारा वर्षों से किए जा रहे एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के दावे वास्तविकता से मेल नहीं खाते।
यह क्लास एक्शन मुकदमा अमेरिका के नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ कैलिफोर्निया स्थित यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में दाखिल किया गया है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, भारत, मैक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के व्हाट्सऐप यूज़र्स वादी के रूप में शामिल हैं।
एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का दावा और व्हाट्सऐप की वैश्विक पहचान
व्हाट्सऐप ने खुद को शुरू से ही एक ऐसे सुरक्षित मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के रूप में प्रस्तुत किया है, जहां यूज़र्स की बातचीत पूरी तरह निजी रहती है। कंपनी का लगातार यह दावा रहा है कि उसके एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन सिस्टम के तहत संदेश केवल भेजने और प्राप्त करने वाले ही पढ़ सकते हैं और यहां तक कि व्हाट्सऐप या मेटा भी संदेशों की सामग्री तक नहीं पहुंच सकता।
इसी दावे के कारण व्हाट्सऐप को दुनियाभर में पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों का भरोसा मिला। खासकर उन देशों में, जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित है, व्हाट्सऐप को सुरक्षित संवाद का माध्यम माना गया।
मुकदमे में लगाए गए मुख्य आरोप
अदालत में दायर शिकायत में वादी पक्ष ने दावा किया है कि व्हाट्सऐप और मेटा के सार्वजनिक बयान भ्रामक हैं। शिकायत के अनुसार, कंपनी यूज़र्स के कथित रूप से एन्क्रिप्टेड संदेशों को न केवल स्टोर करती है, बल्कि उनका विश्लेषण भी करती है। इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि मेटा के कर्मचारी आंतरिक तकनीकी टूल्स के ज़रिए यूज़र्स के संदेशों तक लगभग वास्तविक समय में पहुंच बना सकते हैं।
शिकायत में कहा गया है कि मेटा के वरिष्ठ नेतृत्व ने जानबूझकर अलग-अलग टीमों को सीमित जानकारी देकर काम करने के निर्देश दिए, ताकि कोई भी कर्मचारी पूरे सिस्टम की वास्तविक स्थिति को समझ न सके और सच्चाई सार्वजनिक न हो।
मेटा के सीईओ मार्क ज़ुकरबर्ग के बयानों पर सवाल
इस मुकदमे में मेटा के सीईओ मार्क ज़ुकरबर्ग के उन बयानों का भी उल्लेख किया गया है, जो उन्होंने अमेरिकी सीनेट के समक्ष दिए थे। ज़ुकरबर्ग ने उस दौरान कहा था कि मेटा या फेसबुक की प्रणालियां व्हाट्सऐप संदेशों की सामग्री नहीं देख सकतीं।
वादी पक्ष का कहना है कि ये बयान वास्तविक स्थिति को छिपाने वाले थे और इनका उद्देश्य यूज़र्स और नियामक संस्थाओं को यह विश्वास दिलाना था कि व्हाट्सऐप की गोपनीयता प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित है, जबकि अंदरूनी तौर पर स्थिति कुछ और ही थी।
खास यूज़र्स के लिए अलग नियम होने का दावा
मुकदमे में यह भी दावा किया गया है कि कुछ खास वर्ग के यूज़र्स, जैसे राजनेता, सेलिब्रिटी और मेटा के अपने कर्मचारी, विशेष निगरानी व्यवस्था के अंतर्गत आते हैं। हालांकि इन खातों तक पहुंच को ट्रैक किया जाता है और कर्मचारियों की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है, फिर भी मेटा के पास उनके संदेशों तक पहुंच बनी रहती है। वादी पक्ष का कहना है कि यह तथ्य अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि व्हाट्सऐप का “पूर्ण गोपनीयता” का दावा वास्तविकता से मेल नहीं खाता और यह सभी यूज़र्स के साथ भ्रामक व्यवहार है।
किन कानूनी प्रावधानों के तहत दायर हुआ है मुकदमा
इस मुकदमे में मेटा और व्हाट्सऐप पर कैलिफोर्निया संविधान के अनुच्छेद 1, धारा 1 के तहत निजता के अधिकार के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा, कंपनी पर अनुचित लाभ कमाने और वैधानिक चोरी जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। वादी पक्ष का तर्क है कि व्हाट्सऐप ने यूज़र्स की निजता और भरोसे को अपने व्यापार मॉडल का हिस्सा बनाकर उससे आर्थिक लाभ कमाया, जो कानूनन गलत है।
किन यूज़र्स पर लागू होगा यह क्लास एक्शन मुकदमा
प्रस्तावित क्लास एक्शन में 5 अप्रैल 2016 के बाद से व्हाट्सऐप का इस्तेमाल करने वाले वैश्विक यूज़र्स को शामिल किया गया है। हालांकि अमेरिका और कनाडा के यूज़र्स को इस मुकदमे से बाहर रखा गया है, क्योंकि वे व्हाट्सऐप की सेवा शर्तों के तहत आर्बिट्रेशन क्लॉज़ से बंधे हैं। यूरोप और यूनाइटेड किंगडम के यूज़र्स को भी अलग क्षेत्रीय डेटा और कानूनी नियमों के कारण इस मुकदमे में शामिल नहीं किया गया है।
पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए क्यों है यह मामला बेहद संवेदनशील
मुकदमे में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया है कि व्हाट्सऐप की एन्क्रिप्शन नीति पर भरोसा करके दुनिया भर में पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और मानवाधिकार रक्षक संवेदनशील जानकारियों का आदान-प्रदान करते हैं। कई देशों में ऐसी जानकारी लीक होने पर लोगों की स्वतंत्रता ही नहीं, बल्कि जीवन तक खतरे में पड़ सकता है। यदि व्हाट्सऐप के एन्क्रिप्शन दावे असत्य साबित होते हैं, तो यह डिजिटल संवाद की सुरक्षा को लेकर पूरी दुनिया में गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
मेटा का पुराना प्राइवेसी रिकॉर्ड भी जांच के घेरे में
शिकायत में मेटा के खिलाफ पहले की गई अमेरिकी फेडरल ट्रेड कमीशन और यूरोपीय डेटा संरक्षण एजेंसियों की कार्रवाइयों का भी उल्लेख किया गया है। इससे यह दर्शाने की कोशिश की गई है कि कंपनी का अतीत भी निजता उल्लंघन से जुड़े मामलों से अछूता नहीं रहा है। वादी पक्ष का कहना है कि यह मुकदमा मेटा के लंबे समय से चले आ रहे प्राइवेसी संबंधी व्यवहार की एक और कड़ी है।
अदालत से क्या राहत मांग रहे हैं वादी
इस मुकदमे के माध्यम से वादी पक्ष आर्थिक हर्जाने के साथ-साथ अदालत से यह भी मांग कर रहा है कि मेटा और व्हाट्सऐप को भविष्य में यूज़र्स की निजता को लेकर किसी भी प्रकार का भ्रामक दावा करने से रोका जाए। इसके अलावा, मामले में जूरी ट्रायल की भी मांग की गई है।
सिर्फ व्हाट्सऐप नहीं, पूरी टेक इंडस्ट्री पर असर
यह मामला केवल व्हाट्सऐप और मेटा तक सीमित नहीं है। यह डिजिटल युग में टेक कंपनियों की जवाबदेही, यूज़र्स की निजता और भरोसे से जुड़ा एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है। आने वाले समय में इस मुकदमे का फैसला न केवल मेटा की नीतियों को प्रभावित कर सकता है, बल्कि पूरी टेक इंडस्ट्री की प्राइवेसी रणनीतियों पर भी गहरा असर डाल सकता है।
मेडिकल इमरजेंसी में महिला को AB+ रक्त की थी तत्काल आवश्यकता
सूचना मिलते ही टीम राजेश्वर ने दिखाई त्वरित सक्रियता
नेहा सिंह और पंकज त्रिपाठी ने किया रक्तदान
विधायक राजेश्वर सिंह के नेतृत्व में सेवा को मिली नई परिभाषा
लखनऊ : सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के नेतृत्व में उनकी टीम ने यह सिद्ध कर दिया कि जब नेतृत्व संवेदनशील हो, तो सेवा स्वतः राजनीति से ऊपर हो जाती है। मंगलवार को टीम राजेश्वर द्वारा किया गया समय पर रक्तदान एक महिला के जीवन के लिए जीवनदायी साबित हुआ।
परवर पश्चिम निवासी प्रवेश कश्यप की धर्मपत्नी ज्ञान देवी को अचानक गंभीर चिकित्सकीय स्थिति में AB+ रक्त की तत्काल आवश्यकता पड़ी। परिजनों की सूचना मिलते ही बिना किसी औपचारिकता और विलंब के टीम राजेश्वर के सक्रिय सदस्य नेहा सिंह एवं पंकज त्रिपाठी तत्काल बिजनौर स्थित अस्पताल पहुँचे और रक्तदान कर महिला की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभाई।
यह घटना मात्र रक्तदान तक सीमित नहीं रही, बल्कि उस विचारधारा का सशक्त प्रमाण बनी, जहाँ सेवा को दायित्व नहीं, बल्कि सामाजिक धर्म माना जाता है। संकट की घड़ी में पीड़ित परिवार के साथ खड़े होकर टीम ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि सच्ची राजनीति वही है, जो सबसे पहले पीड़ा को समझे और मदद के लिए आगे बढ़े।
मार्गदर्शन से मिलती है दिशा
विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के मार्गदर्शन में उनकी टीम लगातार ज़मीनी स्तर पर मानवीय मूल्यों को व्यवहार में उतार रही है। इससे पूर्व भी टीम ने कई अवसरों पर गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुँचाने, आवश्यक चिकित्सकीय संसाधन उपलब्ध कराने, आपात परिस्थितियों में रक्तदान कर जीवन बचाने जैसे कार्यों के माध्यम से समाज में सेवा की मिसाल कायम की है।
विश्वास, करुणा और सकारात्मक राजनीति की पहचान
डॉ. राजेश्वर सिंह के नेतृत्व में उनकी टीम की यह तत्परता और सेवा-निष्ठा जनविश्वास को सुदृढ़ करने के साथ-साथ समाज में करुणा, सहयोग और मानवीय संवेदना को भी मजबूती प्रदान कर रही है। यही कारण है कि सरोजनीनगर आज केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि संवेदनशील और सशक्त सामाजिक सोच का प्रतीक बनता जा रहा है।
सरोजनीनगर तिरंगा यात्रा में खुली जिप्सी से तिरंगा थामे डॉ. राजेश्वर सिंह ने किया जन-जन का अभिवादन
संविधान ही भारत की अस्मिता और शक्ति का आधार : डॉ. राजेश्वर सिंह
गणतंत्र दिवस पर डॉ. राजेश्वर सिंह ने किया राष्ट्र को कमजोर करने वाली विचारधाराओं के विरुद्ध एकजुटता का आह्वान
77वें गणतंत्र दिवस पर सरोजनीनगर में राष्ट्रभक्ति का विराट दृश्य, विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के नेतृत्व में भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन
लखनऊ: हाथों में तिरंगा, दिलों में राष्ट्रप्रेम और सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब, 77वें गणतंत्र दिवस पर सरोजनीनगर राष्ट्रभक्ति के विराट उत्सव में परिवर्तित हो उठा, जब डॉ. राजेश्वर सिंह के नेतृत्व में ‘सरोजनीनगर भव्य तिरंगा यात्रा’ ने पूरे क्षेत्र को तिरंगे के रंग में रंग दिया। हजारों बाइक और कारों पर लहराते राष्ट्रीय ध्वज, देशभक्ति गीतों पर थिरकते उत्साही युवा और नागरिक,खुली जिप्सी में हाथों में तिरंगा थामे, जन-जन का अभिवादन करते हुए विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह, सरोजनीनगर का यह दृश्य, राष्ट्र के प्रति समर्पण का चलता-फिरता उद्घोष बन गया।
छठ पूजा स्थल, सैनिक स्कूल ग्राउंड, नवीन गौरी से प्रारंभ होकर कानपुर रोड, स्कूटर इंडिया चौराहे से यू टर्न लेते हुए एयरपोर्ट तक, विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के नेतृत्व में पहुँची यह तिरंगा यात्रा, तिरंगे की आन, बान और शान को समर्पित जनभावनाओं की अभिव्यक्ति थी, जिसने सम्पूर्ण सरोजनीनगर को देशभक्ति के जयघोषों से गुंजायमान कर दिया। इस भव्य तिरंगा यात्रा से पूर्व विधायक ने उत्तर प्रदेश जनहित व्यापार मंडल’ द्वारा छठ पूजा स्थल, सैनिक स्कूल ग्राउंड, नवीन गौरी में आयोजित झंडारोहण कार्यक्रम एवं ‘सरोजनीनगर भव्य तिरंगा यात्रा’ में विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने सहभागिता करते हुए तिरंगे को सम्मानपूर्वक आकाश की ओर आरोहित किया।
सेनाओं के शौर्य, संविधान के सम्मान और राष्ट्र की एकता पर दिया सशक्त संदेश
छठ पूजा स्थल, सैनिक स्कूल ग्राउंड, गौरी में उपस्थित व्यापारियों, क्षेत्रवासियों एवं नागरिकों को संबोधित करते हुए विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि,“आज हम जिस अमन, शांति और सुरक्षित वातावरण में सांस ले रहे हैं, वह हमारी सेनाओं के शौर्य और बलिदान का परिणाम है। माइनस चालीस से माइनस पचास डिग्री तापमान में भी सीमाओं की रक्षा करने वाले हमारे वीर सैनिकों को नमन है। यह तिरंगा यूँ ही नहीं लहराता, इसके पीछे असंख्य बलिदानों की कहानी है।”
उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उनकी प्रेरणा से हजारों युवाओं ने राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। विधायक ने यह भी घोषणा की कि 18 अगस्त को नेताजी की पुण्यतिथि पर सरोजनीनगर में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसे राष्ट्रव्यापी स्वरूप देने का संकल्प लिया गया है।
संविधान की शक्ति और भारत की विकास यात्रा पर विस्तार से प्रकाश
डॉ. सिंह ने गणतंत्र दिवस को संविधान के प्रति सम्मान व्यक्त करने का दिन बताते हुए कहा कि, “संविधान ही हमारी अस्मिता, स्वतंत्रता और सम्मान का आधार है। यही संविधान आज भारत को विश्व की नई ऊंचाइयों तक ले जा रहा है।” उन्होंने स्वतंत्रता के समय और वर्तमान भारत की तुलना करते हुए बताया कि आज भारत विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, प्रति व्यक्ति आय में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है, तथा भारत चंद्रमा पर सफल लैंडिंग कर चुका है।
राष्ट्र को कमजोर करने वाली विचारधाराओं के विरुद्ध एकजुटता का आह्वान
विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि आज देश को बाहरी और आंतरिक दोनों प्रकार की चुनौतियों से सतर्क रहना होगा। सीमाओं के पार सक्रिय शत्रु शक्तियों और समाज को जाति, क्षेत्र व संप्रदाय में बांटने वाली विचारधाराओं के विरुद्ध एकजुट होकर खड़े होने का यही समय है। उन्होंने कहा कि, “राष्ट्र प्रथम की भावना ही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। जितना मजबूत भारत आज हम बनाएंगे, उतना ही सुरक्षित और समृद्ध भारत हम आने वाली पीढ़ियों को सौंप पाएंगे।” इस अवसर पर विधायक द्वारा देश के नेतृत्व में नरेंद्र मोदी तथा प्रदेश के नेतृत्व में योगी आदित्यनाथ द्वारा राष्ट्र प्रथम की विचारधारा को आगे बढ़ाने का उल्लेख करते हुए उनके मार्गदर्शन में कार्य करने का संकल्प दोहराया गया।
तारा शक्ति केंद्रों की मातृशक्ति को विशेष नमन
डॉ. सिंह ने सरोजनीनगर की मातृशक्ति की सराहना करते हुए बताया कि तारा शक्ति केंद्रों के माध्यम से अब तक 50 हजार से अधिक तिरंगे बनाकर देश को समर्पित किए जा चुके हैं, जो महिला सशक्तिकरण और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत उदाहरण है।
इस अवसर पर ‘उत्तर प्रदेश जनहित व्यापार मंडल प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश शर्मा, दिलीप द्विवेदी, जितेन्द्र हजेला, राजेश चौहान, विमर्श रस्तोगी, प्रमोद हजेला, अरुण शुक्ला, सचिन चमोली, अमित पाण्डेय, जगजीत सिंह, दीपक गुप्ता, सुनील रावत, रंजीत रावत, रमा शंकर त्रिपाठी, के एन सिंह, लवकुश रावत सहित बड़ी संख्या में व्यापारीगण, वरिष्ठजन, मातृशक्ति एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।