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अरिजीत सिंह ने प्लेबैक सिंगिंग से दूरी क्यों बनाई? सिंगर ने खुद बताईं वजहें

‘तुम ही हो’, ‘केसरिया’ और ‘छन्ना मेरेया’ जैसे गानों में अपनी दिल को छू लेने वाली आवाज़ से कई पीढ़ियों का दिल जीतने वाले बॉलीवुड के फेमस सिंगर अरिजीत सिंह ने बीते दिन प्लेबैक सिंगिंग से रिटायरमेंट की अनाउंसमेंट कर फैंस को हैरान कर दिया. उन्होंने अनाउंस किया है कि अब वह प्लेबैक वोकलिस्ट के तौर पर नए असाइनमेंट नहीं लेंगे. अपने करियर के एक चैप्टर को खत्म करते हुए, अरिजीत ने यह साफ कर दिया कि वह खुद म्यूजिक से दूर नहीं हो रहे हैं।

अरिजीत ने प्लेबैक सिंगिंग से रिटायरमेंट की अनाउंसमेंट की
इंस्टाग्राम पर एक दिल छू लेने वाला नोट शेयर करते हुए, अरिजीत ने इतने सालों तक साथ देने के लिए अपने सुनने वालों को शुक्रिया किया. अपने मैसेज में उन्होंने लिखा, “नमस्ते, आप सभी को नए साल की शुभकामनाएं. मैं आप सभी को इतने सालों तक सुनने वाले के तौर पर इतना प्यार देने के लिए थैंक्यू देना चाहता हूं. मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि अब से मैं प्लेबैक वोकलिस्ट के तौर पर कोई नया असाइनमेंट नहीं लूंगा. मैं इसे खत्म कर रहा हूं. यह एक शानदार सफर था.” अरिजीत सिंह की  इस अनाउंसमेंट से पूरे देश में हलचल मच गई, जिससे फैंस इस अचानक फैसले से इमोशनल और हैरान रह गए.

अरिजीत ने प्ले बैक सिंगिंग छोड़ने का फैसला क्यों किया
इसके तुरंत बाद, अरिजीत ने अपने प्राइवेट X अकाउंट पर कई पोस्ट के ज़रिए अपने फैसले को साफ किया. उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस कदम के पीछे कोई एक वजह नहीं थी. उन्होंने लिखा “इसके पीछे कोई एक वजह नहीं है, इसके कई कारण हैं और मैं लंबे समय से ऐसा करने की कोशिश कर रहा था. आखिरकार मैंने सही हिम्मत जुटा ली है.”

आगे बताते हुए उन्होंने कहा, “एक वजह यह थी कि मैं बहुत जल्दी बोर हो जाता हूं, इसलिए मैं एक ही गानों के अरेंजमेंट बदलता रहता हूं और उन्हें स्टेज पर परफॉर्म करता हूं. तो बात यह है, मैं बोर हो गया हूं मुझे जीने के लिए कुछ और म्यूज़िक करने की ज़रूरत है.” उन्होंने यह भी कहा कि वह नई आवाज़ों को उभरते हुए सुनने के लिए एक्साइटेड हैं, और कहा, “एक और वजह यह है कि मैं किसी सिंगर के सामने आने और मुझे असली मोटिवेशन देने के लिए एक्साइटेड हूं”

 ‘मैं फिर से शुरू करना चाहता हूं’
फैंस को भरोसा दिलाते हुए कि म्यूज़िक हमेशा उनका पैशन रहेगा, अरिजीत ने अपनी अगली क्रिएटिव दिशा का खुलासा किया. उन्होंने कहा, “मैं इंडियन क्लासिकल म्यूज़िक में वापस जाने वाला हूं. मैं म्यूज़िक बनाने में वापस जाना चाहता हूं. मैं फिर से शुरू करना चाहता हूं. ”

उन्होंने अब तक के सफर के लिए आभार भी जताया, और कहा, “भगवान मुझ पर बहुत मेहरबान रहे हैं. मैं अच्छे म्यूज़िक का फैन हूं और भविष्य में एक छोटे से कलाकार के तौर पर और सीखूंगा और खुद से और भी बहुत कुछ करूंगा,”

बाकी के कमिटमेंट्स पूरे करेंगे
अरिजीत ने आगे कन्फर्म किया कि वह अपने बाकी कमिटमेंट्स पूरे करेंगे. उन्होंने कहा, “मुझे अभी भी कुछ बाकी कमिटमेंट्स पूरे करने हैं, उन्हें पूरा करूंगा. इसलिए इस साल आपको कुछ रिलीज़ मिल सकती हैं. बस यह साफ कर दूं कि मैं म्यूज़िक बनाना बंद नहीं करूंगा. “

अरिजीत सिंह की जर्नी
अरिजीत सिंह ने अपने म्यूज़िकल सफ़र की शुरुआत 2005 में फेम गुरुकुल में एक कंटेस्टेंट के तौर पर की थी और उन्होंने अपनी हिंदी फ़िल्मों में डेब्यू मर्डर 2 (2011) के गाने फिर मोहब्बत से किया था. हालांकि, आशिकी 2 (2013) के गाने तुम ही हो ने उन्हें सुपरस्टार बना दिया और उन्हें अपना पहला फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड दिलाया.

पिछले कुछ सालों में, उन्होंने तुम ही हो, चन्ना मेरेया, अगर तुम साथ हो, राबता, केसरिया, ऐ दिल है मुश्किल, तेरा यार हूं मैं और तुझे कितना चाहने लगे जैसे यादगार गाने दिए, और आसानी से रोमांस, भक्ति और एनर्जी से भरे गानों के बीच स्विच किया. उनका लेटेस्ट गाना बॉर्डर 2 का घर कब आओगे एक बार फिर लाखों लोगों के दिलों को छू गया है. भले ही प्लेबैक सिंगिंग अब उनके भविष्य को तय न करे, लेकिन अरिजीत सिंह का म्यूज़िक सफ़र अभी खत्म नहीं हुआ है.

बेटे के जन्म के बाद पोस्टपार्टम से गुजर रहीं परिणीति चोपड़ा, खुद साझा किया मन को शांत रखने का तरीका

बॉलीवुड एक्ट्रेस परिणीति चोपड़ा की लाइफ मां बनने के बाद पूरी तरह से बदल चुकी है. उनका सारा ध्यान अब बेटे की परवरिश की तरफ है. परिणीति ने अक्टूबर 2025 में बेटे को जन्म दिया था. उनका बेटा अब तीन महीने का हो गया है. बेटे के जन्म के तीन महीने बाद परिणीति ने अब पोस्टपार्टम को लेकर खुलकर बात की है. उन्होंने बताया है कि कैसे महिलाएं खुद को इस दौरान शांत रख सकती हैं.

परिणीति फिल्मों में नजर नहीं आ रही हैं लेकिन व्लॉग के जरिए अपने फैंस से जुड़ी रहती हैं. उन्होंने अपने लेटेस्ट व्लॉग में बताया है कि इस समय में वो कैसे खुद को शांत रख रही हैं. उन्होंने बताया है कि इस समय उनके लिए मेंटल हेल्थ कितनी जरुरी है और पॉजिटिव रहने से कैसे उनकी बॉडी स्ट्रॉन्ग रहती है.

सुबह नहीं करती फोन का इस्तेमाल

परिणीति ने बताया कि एक आदत है जो हर किसी को रोज फॉलो करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि ज्यादातर लोग सुबह उठते ही अपना फोन चेक करने लगते हैं लेकिन बहुत नुकसानदायक है. उन्होंने कहा- ‘सबसे बुरी आदत ये है कि वो जागते ही फोन स्क्रॉल करना शुरू कर देते हैं. इससे आपका दिमाग सुन्न हो जाता है. अगर आप सुबह उठकर अपने फोन को नजरअंदाज करते हैं, एक घंटे के लिए बोर हो जाते हैं, बैठते हैं, संगीत सुनते हैं, नेचर में जाते हैं और पक्षियों की आवाज सुनते हैं तो इससे आपको शांत रहने में मदद मिलती है.’

परिणीति ने आगे कहा- ‘मंत्रों का जाप करें, मैं यही करती हूं. सुबह उठते ही हनुमान चालीसा का जाप करती हूं या फिर नमामि शमीशम का जाप करती हूं. इस तरह से मैं अपने दिन की शुरुआत करना पसंद करती हूं. मुझे लगता है कि दिन में चाहे कुछ भी हो, पॉजिटिव या नेगेटिव. आप उसके रिएक्शन को कंट्रोल कर सकते हैं क्योंकि आप अच्छी स्थिति में होते हैं।

दिल्ली से अयोध्या: ₹5000 में रामलला दर्शन संभव, देखें पूरा बजट और यात्रा योजना

इन दिनों अयोध्या में श्रीराम के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग यात्रा का प्लान बना रहे हैं। लेकिन सीमित बजट में ट्रिप कैसे की जाए। इसको लेकर कई लोग असमंजस में हैं। वजह यह है कि सोशल मीडिया पर कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि उन्होंने दिल्ली से अयोध्या की यात्रा सिर्फ 5 हजार रुपये में पूरी कर ली। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वाकई इतने कम बजट में अयोध्या की यात्रा संभव है? अगर आप भी यही सोच रहे हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद काम की है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि दिल्ली से अयोध्या तक श्रीराम के दर्शन की यात्रा को कम खर्च में कैसे प्लान किया जा सकता है और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

दिल्ली से अयोध्या चलने वाली ट्रेनें

– अयोध्या एक्सप्रेस (14206)- 18:20 बजे दिल्ली से हर दिन चलती है।

– कैफियत एक्सप्रेस (12226)- रात 8:30 बजे दिल्ली से चलती है।

– सद्भावना एक्सप्रेस (14018)- सप्ताह में एक बार चलने वाली ट्रेन है, इसलिए आपको समय का ध्यान रखना जरूरी है।

कैसे करें प्लान?

– यदि आप चाहती हैं कि आपका खर्चा ज्यादा न आए, तो आप रात की ट्रेन में सफर कर सकती हैं। आपको रात में ट्रेन में बैठना है, आप सुबह अयोध्या पहुंच जाएंगी।

– फिर आप होटल में चेक इन कर सकते हैं और फ्रेश होने के बाद मंदिर दर्शन के लिए जाएं।

– स्लीपर ट्रेन के टिकट का खर्च करीब 500 रुपये एक तरफ का आएगा। दोनों तरफ से खर्च 1000 रुपये तक आएगा।

– अयोध्या में ठहरने के लिए आपको 1500 से 2000 रुपये के बीच ठीक-ठाक होटल आसानी से मिल सकते हैं। श्रीराम के दर्शन करने के बाद यदि आप उसी दिन या अगले दिन दिल्ली लौटने की योजना बना रहे हैं, तो एक दिन के लिए होटल बुक करना सबसे बेहतर और किफायती विकल्प रहेगा।

– दर्शन करने के बाद आप रात में होटल में रुकें और अगले दिन सुबह की ट्रेन लेकर वापस दिल्ली आ जाएं।

– सिर्फ 5000 रुपये में अकेले दर्शन का प्लान आप आसानी से कर सकती हैं। यदि आप खाना-पीना भी साथ ले जाती हैं, तो 5 हजार में 2 लोग भी स्लीपर कोच में सफर कर लेंगे।

IND vs NZ 4th T20I:चौथे टी-20 में इस खिलाड़ी की हो सकती है छुट्टी, जानिए किसे मिल सकता है प्लेइंग-11 में मौका

 भारत और न्यूजीलैंड के बीच विशाखापत्तनम में खेले जाने वाले चौथे टी20 मुकाबले से पहले टीम इंडिया के प्लेइंग-11 को लेकर चर्चा तेज हो गई है. टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मैच जीतकर सीरीज पहले ही अपने नाम कर ली है. ऐसे में अब मैनेजमेंट के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि बचे हुए मुकाबलों में किन खिलाड़ियों को मौका दिया जाए और किन्हें आराम.

इस मैच में बदलाव लगभग तय माने जा रहे हैं. जसप्रीत बुमराह को लेकर पहले ही रोटेशन अपनाया जा चुका है, ऐसे में चौथे टी20 में उन्हें फिर से आराम मिल सकता है. हालांकि सिर्फ बुमराह ही नहीं, एक और बड़ा नाम है जिस पर कड़ा फैसला लेना जरूरी दिख रहा है- हार्दिक पंड्या.

हार्दिक हो जाएंगे प्लेइंग 11 से बाहर?

हार्दिक पंड्या इस सीरीज के तीनों मैच खेल चुके हैं. भले ही उन्होंने बल्लेबाजी सीमित रूप से की हो, लेकिन गेंदबाजी तीनों मुकाबलों में की है. टी20 वर्ल्ड कप 2026 बेहद करीब है और ऐसे समय में हार्दिक का वर्कलोड मैनेजमेंट सबसे अहम मुद्दा बन जाता है.

हार्दिक की फिटनेस का रिकॉर्ड किसी से छिपा नहीं है. वो पूरी तरह फिट रहें, यही टीम इंडिया की सबसे बड़ी जरूरत है. जब सीरीज पहले ही जीत ली गई है, तब ऐसे खिलाड़ी को खिलाना, जिसकी अहमियत वर्ल्ड कप में कई गुना ज्यादा है, एक बड़ा जोखिम हो सकता है. अगर इस मुकाबले में हार्दिक को कुछ भी होता है तो यह भारत के लिए भारी नुकसान साबित हो सकता है.

टीम इंडिया को क्या मिलेगा इस फैसले से?

हार्दिक को आराम देने से टीम इंडिया को नए विकल्प आजमाने का मौका मिलेगा. पहले से ही वॉशिंगटन सुंदर की फिटनेस चिंता का विषय बनी हुई है. ऐसे में किसी दूसरे ऑलराउंडर या बल्लेबाज को आजमाना समझदारी होगी.

टीम मैनेजमेंट चाहे तो एक अतिरिक्त बल्लेबाज के तौर पर श्रेयस अय्यर को मौका दे सकती है. इससे मिडिल ऑर्डर की मजबूती भी परखी जा सकेगी. इसके अलावा शिवम दुबे से ज्यादा गेंदबाजी कराकर उनके ऑलराउंडर रोल को भी टेस्ट किया जा सकता है.

वहीं, अगर टीम अतिरिक्त गेंदबाज के साथ उतरती है, तो पेस या स्पिन दोनों में से किसी एक विकल्प को आजमाया जा सकता है. इससे बेंच स्ट्रेंथ को परखने में मदद मिलेगी, जो बड़े टूर्नामेंट से पहले बेहद जरूरी है.

ट्रंप पड़े अकेले, भारत उभरेगा नया लीडर! EU के बाद ब्राजील और कनाडा से बड़ी डील की तैयारी

दुनिया की आर्थिक और व्यापारिक राजनीति तेजी से बदल रही है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संरक्षणवादी नीतियों, ऊंचे टैरिफ और अनिश्चित व्यापार रुख के चलते अब कई बड़े देश अमेरिका पर निर्भरता कम करने की रणनीति अपना रहे हैं. इस ग्लोबल चेंज के सेंटर में भारत एक मजबूत और भरोसेमंद आर्थिक साझेदार के रूप में उभर रहा है. यूरोप, एशिया और उत्तरी अमेरिका के कई देश अब पारंपरिक वेस्ट-सेंट्रिक मॉडल से हटकर पश्चिम-पूर्व आर्थिक धुरी की ओर बढ़ रहे हैं, जहां भारत को दीर्घकालिक विकल्प और रणनीतिक संतुलन के रूप में देखा जा रहा है.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर का चीन दौरा इसी बदलते वैश्विक समीकरण का संकेत है. पिछले 8 सालों में यह किसी ब्रिटिश प्रधानमंत्री की पहली चीन यात्रा होगी. इस दौरे का मकसद चीन के साथ बिगड़े रिश्तों को सुधारना और व्यापारिक सहयोग को दोबारा मजबूत करना है. स्टारमर के साथ वरिष्ठ मंत्री और कई बड़े कारोबारी नेता भी होंगे. बीजिंग में उनकी मुलाकात राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग से होगी, जबकि शंघाई में व्यापारिक बैठकों का आयोजन किया जाएगा. रॉयटर्स के अनुसार, ब्रिटेन अब अमेरिका को एक अनिश्चित साझेदार मान रहा है और अपनी आर्थिक निर्भरता कम करना चाहता है. फिलहाल चीन ब्रिटेन का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और 2025 के मध्य तक दोनों देशों के बीच व्यापार 100 अरब पाउंड से अधिक पहुंच चुका है.

कनाडा की रणनीति बदली, भारत बना प्राथमिक साझेदार

अमेरिका के करीबी सहयोगी रहे कनाडा ने भी अपनी विदेश और व्यापार नीति में बड़ा बदलाव शुरू कर दिया है. कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी मार्च के पहले सप्ताह में भारत दौरे की तैयारी कर रहे हैं. यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी और उसे 51वां अमेरिकी राज्य कहकर विवाद खड़ा किया. कनाडा की विदेश मंत्री अनिता आनंद ने दावोस में स्पष्ट कहा कि कनाडा कभी भी अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेगा. उन्होंने यह भी बताया कि कनाडा अगले दस वर्षों में अमेरिका के बाहर अपने निर्यात को दोगुना करना चाहता है. इसी रणनीति के तहत भारत और चीन को प्रमुख साझेदार के रूप में चुना गया है.

ब्राज़ील का भारत पर भरोसा, ग्लोबल साउथ की नई धुरी

ग्लोबल साउथ के देशों में भी भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है. ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा फरवरी में भारत दौरे पर आ रहे हैं. वे एक बड़े कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत पहुंचेंगे और भारतीय उद्योगपतियों के साथ व्यापक बातचीत करेंगे. यह दौरा इस बात का संकेत है कि विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाएं भारत को केवल बाजार नहीं, बल्कि रणनीतिक आर्थिक साझेदार के रूप में देख रही हैं.

भारत-यूरोपीय संघ FTA बना गेमचेंजर

इस ग्लोबल चेंज का सबसे बड़ा उदाहरण भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता है, जिस पर 26 जनवरी 2026 को हस्ताक्षर हुए. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे मदर ऑफ ऑल डील्स कहा है. यह समझौता दुनिया की लगभग 25 प्रतिशत ग्लोबल GDP और करीब दो अरब लोगों को जोड़ता है. इसके तहत यूरोपीय संघ भारत को भेजे जाने वाले लगभग 97 प्रतिशत उत्पादों पर टैरिफ घटाएगा या खत्म करेगा, जबकि भारत भी चरणबद्ध तरीके से 93 प्रतिशत यूरोपीय उत्पादों पर टैरिफ हटाएगा. इससे भारत में यूरोपीय कारें, वाइन, चॉकलेट और प्रोसेस्ड फूड सस्ते होंगे, जबकि भारतीय टेक्सटाइल, फार्मा, इंजीनियरिंग और आईटी उत्पादों को यूरोप में बड़ा बाजार मिलेगा.

अमेरिका की चिंता और भारत की स्पष्ट नीति

इन नए वैश्विक गठबंधनों से अमेरिका असहज नजर आ रहा है. अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भारत पर रूस से तेल खरीद को लेकर सवाल उठाए, जबकि कनाडा को चीन के सस्ते सामान के खिलाफ चेतावनी दी गई. इसके बावजूद देशों का रुख साफ है. वे अब रणनीतिक स्वायत्तता चाहते हैं और किसी एक शक्ति पर निर्भर नहीं रहना चाहते. भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि कोई भी देश यह उम्मीद नहीं कर सकता कि वह भारत के बाकी दुनिया से रिश्तों पर वीटो लगाए. यही सोच आज भारत को वैश्विक आर्थिक बदलाव का केंद्र बना रही है.