Home Blog Page 86

तुर्की ने दोस्त बनकर पाकिस्तान की उम्मीदें ध्वस्त कर दी

पाकिस्तान को अपने खास दोस्त तुर्किए से तगड़ा झटका मिला है. अंकारा की तरफ से साफ कर दिया गया है कि वो सऊदी अरब और पाकिस्तान संग किसी बहुपक्षीय रक्षा समझौते में शामिल नहीं होगा. एएफपी की रिपोर्ट्स के मुताबिक, तुर्किए के रक्षा अधिकारियों ने बताया कि एर्दोगान सरकार न तो पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ किसी रक्षा समझौते का हिस्सा है और न ही वो इस पर विचार कर रहे हैं.

तुर्किए के एक टॉप सैन्य सूत्र के अनुसार पाकिस्तान की अपील के बावजूद वो पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ किसी बहुपक्षीय आपसी रक्षा समझौते में रुचि नहीं रखते. सूत्र ने बताया कि सऊदी अरब भी किसी बहुपक्षीय व्यवस्था के पक्ष में नहीं है, वो केवल द्विपक्षीय रक्षा समझौतों को ही प्राथमिकता देता है.

पाकिस्तानी सेना को लेकर तुर्किए ने चिंता जताई है. तुर्किए के सुरक्षा सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तान पहले से 3 सीमाओं पर सक्रिय है. इनमें भारत, अफगानिस्तान और ईरान शामिल है. इसके अलावा वो घरेलू स्तर पर भी चुनौतियों का सामना कर रहा है. सऊदी अरब के साथ हुई डील ने पाकिस्तानी सेना को और भी ज्यादा बांट दिया है. इन सबकी वजह से पाकिस्तानी सेना की क्षमता भी प्रभावित हुई है.

पाकिस्तान की सेनाएं पहले से दबाव में- तुर्किए
वरिष्ठ तुर्किए रक्षा अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तानी सेनाएं पहले से ही काफी दबाव में हैं और यही वास्तविकता किसी आपसी रक्षा समझौते के तहत जिम्मेदारियां निभाने की उसकी क्षमता को सीमित करती है. पाकिस्तान का ज्यादातर सैन्य साजो सामान चीन से आता है. इस ओर इशारा करते हुए तुर्किए अधिकारियों ने कहा कि पाकिस्तान सैन्य तकनीक के लिए बड़े पैमाने पर चीन पर निर्भर है, खासकर एयर डिफेंस और एयरफोर्स जैसे क्षेत्र में. पाकिस्तान की इसी तकनीकी निर्भरता के चलते अंकारा किसी बाध्यकारी बहुपक्षीय रक्षा ढांचे में शामिल होने को लेकर सतर्क है.

इसके अलावा तुर्किए ने पाकिस्तान के आर्थिक हालात की तरफ भी इशारा किया. उन्होंने कहा कि एक मजबूत अर्थव्यवस्था ही एक मजबूत सेना बनाती है. सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों की सेनाओं के पास सऊदी अरब के स्तर पर रक्षा आधुनिकीकरण में निवेश करने की क्षमता नहीं है, जिससे त्रिपक्षीय रक्षा गठबंधन व्यावहारिक नहीं लगता.

सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा पाकिस्तान
रक्षा समझौते की संभावना को खारिज करते हुए तुर्किए ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान और उसके रक्षा संबंध मजबूत हैं. अंकारा पहले से ही पाकिस्तान को सैन्य साजो-सामान, वायु रक्षा प्रणालियां, ड्रोन तकनीक और अन्य उपकरण उपलब्ध करा रहा है. तुर्किए के अधिकारियों के हवाले से आई यह रिपोर्ट वहां के विदेश मंत्री के उस बयान के समर्थन में है, जिसमें उन्होंने सुरक्षा के लिए दूसरों की तरफ देखने के खिलाफ चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि जब तक क्षेत्रीय पक्ष अपनी सुरक्षा चुनौतियों की जिम्मेदारी खुद नहीं लेते, तब तक स्थिरता संभव नहीं है.

पाकिस्तान की तरफ से मिडिल ईस्ट में एक इस्लामिक नाटो बनाए जाने का प्रयास किया जा रहा था. 30 जनवरी को तुर्किए के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ सेल्चुक बायरक्तारओग्लू की पाकिस्तान यात्रा के समय इस्लामाबाद की तरफ से प्रचार किया गया कि बस रक्षा समझौते का ऐलान होने वाला है. हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ.

बजट 2026 में 1240 करोड़ की बढ़ोतरी: मुस्लिम संगठनों ने जताई मिली-जुली प्रतिक्रिया

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार, 1 फरवरी 2026 को आम बजट पेश किया। इस बजट में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के लिए किए गए वित्तीय प्रावधानों को लेकर मुस्लिम संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। जहां कुछ संगठनों ने बजट में हुई बढ़ोतरी का स्वागत किया है, वहीं कई नेताओं ने इसे जरूरत के मुकाबले अपर्याप्त बताया है।

शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने जताई संतुष्टि, लेकिन रखी शर्त

ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने अल्पसंख्यकों के लिए बजट में 1240 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी को उत्साहजनक कदम बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026-27 के बजट में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के लिए पिछले संशोधित अनुमान की तुलना में अधिक आवंटन किया गया है, जो सकारात्मक संकेत है।
हालांकि, उन्होंने यह भी चिंता जताई कि अक्सर बजट का वास्तविक लाभ शिया समुदाय तक नहीं पहुंच पाता। ऐसे में सरकार को एक प्रभावी व्यवस्था लागू करनी चाहिए, जिससे सभी अल्पसंख्यक वर्गों को समान रूप से इसका फायदा मिल सके।

AIMPLB ने बजट बढ़ोतरी को बताया नाकाफी

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि देश में अल्पसंख्यकों की आबादी और उनकी शैक्षिक जरूरतों को देखते हुए बजट में और अधिक बढ़ोतरी होनी चाहिए थी।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में छात्रवृत्ति और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के बजट में कटौती या समाप्ति को देखते हुए इस बार की बढ़ोतरी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती। उनके मुताबिक, अल्पसंख्यकों के लिए रोजगार, उच्च शिक्षा और कौशल विकास से जुड़ी अधिक महत्वाकांक्षी योजनाओं की आवश्यकता है।

शैक्षिक सशक्तीकरण पर जोर

जमीयत उलेमा-ए-हिंद (एएम) की उत्तर प्रदेश इकाई के कानूनी सलाहकार मौलाना काब रशीदी ने बजट में अल्पसंख्यक छात्रों के शैक्षणिक सशक्तीकरण के लिए किए गए प्रावधानों को सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि इस दिशा में 832 करोड़ रुपये से अधिक का आवंटन एक सकारात्मक पहल है।

‘बेहतर योजना से हो बजट का उपयोग’

मौलाना काब रशीदी ने कहा कि अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के लिए कुल 3400 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है, जो पिछले संशोधित अनुमान से करीब 1240 करोड़ रुपये अधिक है। उन्होंने जोर दिया कि जरूरत इस बात की है कि बजट का इस्तेमाल ठोस योजना और प्रभावी क्रियान्वयन के साथ किया जाए, ताकि इसका पूरा लाभ अल्पसंख्यक समुदाय तक पहुंच सके।

बजट आवंटन के तहत अल्पसंख्यक छात्रों के शैक्षणिक सशक्तीकरण के लिए 831.7 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जबकि मंत्रालय की विभिन्न केंद्रीय योजनाओं और परियोजनाओं के लिए कुल 1,197.97 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव किया गया है।

Health News:पैरों को नमक मिले गुनगुने पानी में भिगोना क्यों है फायदेमंद? आयुर्वेद से जानें डिटॉक्स के चौंकाने वाले लाभ

आयुर्वेद में पैरों को शरीर का सबसे संवेदनशील और ऊर्जा से जुड़ा हिस्सा माना गया है। कहा जाता है कि पैरों में शरीर के कई महत्वपूर्ण बिंदु (एक्यूप्रेशर पॉइंट्स) होते हैं, जिनका सीधा संबंध आंतरिक अंगों से होता है। ऐसे में अगर पैरों को नमक मिले गुनगुने पानी में कुछ देर डुबोया जाए, तो इससे शरीर को कई तरह के फायदे मिल सकते हैं।

कैसे करता है नमक वाला पानी डिटॉक्स?

आयुर्वेद के अनुसार, नमक में शरीर से विषैले तत्वों (टॉक्सिन्स) को बाहर खींचने की प्राकृतिक क्षमता होती है। जब पैरों को नमक वाले गुनगुने पानी में डाला जाता है, तो त्वचा के रोमछिद्र खुलते हैं और शरीर में जमा अशुद्धियां बाहर निकलने लगती हैं। यही प्रक्रिया डिटॉक्स के रूप में काम करती है।

तनाव और थकान में मिलती है राहत

दिनभर की भागदौड़, मानसिक तनाव और शारीरिक थकान का असर सबसे पहले पैरों पर दिखता है। नमक वाले पानी में पैर डालने से नसें रिलैक्स होती हैं, जिससे दिमाग को भी शांति मिलती है। यह उपाय अनिद्रा और बेचैनी की समस्या में भी सहायक माना जाता है।

ब्लड सर्कुलेशन होता है बेहतर

गुनगुना पानी और नमक मिलकर पैरों में रक्त संचार को बेहतर बनाते हैं। इससे पैरों में सूजन, भारीपन और अकड़न की समस्या कम हो सकती है। खासतौर पर जो लोग लंबे समय तक खड़े रहते हैं या बैठकर काम करते हैं, उनके लिए यह उपाय फायदेमंद है।

इम्युनिटी को भी मिल सकता है सपोर्ट

आयुर्वेद मानता है कि नियमित रूप से यह प्रक्रिया अपनाने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती मिल सकती है। शरीर का संतुलन बेहतर होने से छोटी-मोटी बीमारियों से लड़ने की ताकत बढ़ती है।

कैसे करें यह आयुर्वेदिक उपाय?

एक टब या बाल्टी में गुनगुना पानी लें।
इसमें 1–2 चम्मच सेंधा नमक या समुद्री नमक मिलाएं।
अब 10–15 मिनट तक पैरों को पानी में डुबोकर रखें।
इसके बाद पैरों को साफ पानी से धोकर सुखा लें।

ध्यान रखने वाली बातें

अगर पैरों में घाव, फंगल इंफेक्शन या किसी तरह की एलर्जी है, तो यह उपाय करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

IND U19 vs PAK U19: सेमीफाइनल में पाकिस्तान की करारी हार, टीम इंडिया ने बुरी तरह किया परास्त

आईसीसी अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 में भारत-पाकिस्तान मुकाबला एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया है. भले ही यह मैच नॉकआउट की तस्वीर बदलने वाला नहीं था, लेकिन भारत ने मैदान पर ऐसा दबदबा दिखाया कि पाकिस्तान के लिए यह हार बेहद शर्मनाक बन गई. जिम्बाब्वे के क्वींस स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए इस मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान को 58 रन से हराकर अपनी ताकत साफ दिखा दी.

सेमीफाइनल से पहले ही बाहर हो चुका था पाकिस्तान

खास बात यह रही की इस मैच से पहले ही पाकिस्तान सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो चुका था. वहीं भारतीय अंडर-19 टीम ने पहले ही अंतिम चार में अपनी जगह पक्की कर ली थी. इसके बावजूद पाकिस्तान के पास सम्मान बचाने का मौका था, लेकिन टीम उस पर भी खरा नहीं उतर सकी.

भारत की बैटिंग

पाकिस्तान के लिए टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला असरदार नहीं साबित हुआ. वहीं भारतीय टीम की शुरुआत भी कुछ खास नहीं रही, लेकिन मिडिल ऑर्डर ने जिम्मेदारी संभाली. वेदांत त्रिवेदी ने सबसे ज्यादा 68 रन की अहम पारी खेली. उनके अलावा कनिष्क चौहान ने 35 और वैभव सूर्यवंशी ने 30 रन बनाकर स्कोर को आगे बढ़ाया. पूरी भारतीय टीम 49.5 ओवर में 252 रन पर सिमट गईच पाकिस्तान की ओर से अब्दुल सुभान ने 3 विकेट झटके, जबकि मोहम्मद सय्यम को 2 सफलताएं मिलीं.

लक्ष्य आसान लग रहा था, फिर पलट गया मैच

पाकिस्तान को सेमीफाइनल की उम्मीद जिंदा रखने के लिए 253 रन 33.3 ओवर में बनाने थे. शुरुआत देखकर ऐसा लगा कि वे इस लक्ष्य के करीब पहुंच सकते हैं. 151 रन तक पाकिस्तान के सिर्फ तीन विकेट गिरे थे और रन रेट भी काबू में था. हालांकि यहीं से कहानी बदल गई.

भारतीय गेंदबाजों का जबरदस्त कमबैक

भारतीय गेंदबाजों ने अचानक मैच पर शिकंजा कस दिया. पाकिस्तान के बल्लेबाज दबाव में आ गए और विकेट गिरने का सिलसिला शुरू हो गया. पाक टीम के आखिरी 7 बल्लेबाज महज 43 रन के अंदर ही पवेलियन लौट गए. पूरी पाकिस्तानी टीम 46.2 ओवर में 194 रन के शर्मनाक स्कोर पर ऑलआउट हो गई. भारत के लिए खिलन पटेल और आयुष म्हात्रे ने 3-3 विकेट लेकर मैच का रुख पूरी तरह पलट दिया. इसके अलावा आरएस एम्ब्रिश, हेनिल पटेल, कनिष्क चौहान और विहान मल्होत्रा को भी एक-एक सफलताएं मिली.

Health News:कुछ लोग बिना डाइट और एक्सरसाइज के भी क्यों रहते हैं स्लिम? जानिए इसके पीछे की असली वजहें

अक्सर देखा जाता है कि कुछ लोग बिना खास डाइट फॉलो किए या जिम जाए बिना भी पतले बने रहते हैं. जबकि कई लोग डाइटिंग और एक्सरसाइज के बावजूद भी वजन कम करने में संघर्ष करते रहते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है. दरअसल इसका जवाब सिर्फ जीन में नहीं बल्कि रोजमर्रा की आदतों और शरीर के काम करने के तरीके में भी छुपा होता है. इसे लेकर एक्सपर्ट्स बताते हैं कि जेनेटिक्स शरीर की नींव करती है, लेकिन लंबे समय तक पतला बने रहने में लाइफस्टाइल की भूमिका कहीं ज्यादा होती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि कुछ लोग बिना डाइट और जिम जाए भी पतले क्यों होते हैं.

जेनेटिक्स नहीं, रोजाना की आदतें निभाती है बड़ी भूमिका 

एक्सपर्ट बताते हैं कि जो लोग के नेचुरल रूप से पतले होते हैं वह अक्सर सख्त डाइट या भारी वर्कआउट नहीं करते. उनकी खासियत होती है कि वह कम मात्रा में खाना खाते हैं, बार-बार ओवरराइटिंग नहीं करते और दिनभर हल्की-फुल्की एक्टिविटी में बने रहते हैं. यही आदतें धीरे-धीरे वजन बढ़ने से रोकती है और उन्हें खुद एहसास भी नहीं होता कि वे अपने शरीर को कैसे संतुलित रख रहे हैं. वहीं पतले लोग और जल्दी वजन बढ़ने वालों में एक बड़ा फर्क यह भी होता है कि उनका शरीर भूख और पेट भरने के संकेतों को कैसे समझता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार कई पतले लोग जल्दी संतुष्ट हो जाते हैं और पेट बरते ही खाना रोक देते हैं, वहीं कुछ लोग इन संकेतों को नजर अंदाज कर देते हैं, जिससे जरूरत से ज्यादा खाना हो जाता है और वजन बढ़ने लगता है.

छोटी-छोटी आदतें जो डालती है, बड़ा असर 

एक्सपर्ट का कहना है कि वजन कंट्रोल रखने के लिए हर बार डाइटिंग जरूरी नहीं होती है. धीरे-धीरे खाना, कम स्नैकिंग करना, ज्यादा चलना,  बैठे रहने की बजाई खड़े रहना या हल्की हलचल में रहना यह सब आदतें समय के साथ कैलोरी बर्न करती है. इस तरह के नॉन एक्सरसाइज मूवमेंट भी वजन बढ़ने से बचाने मैं मदद करती है.

मेहनत के बाद भी क्यों नहीं घटता वजन?

कम पानी पीना और ज्यादा शुगर लेना

हार्ट अटैक, स्ट्रोक, डायबिटीज, फैटी लीवर और हाई बीपी जैसी गंभीर बीमारियों से बचने के लिए वजन कंट्रोल रखना जरूरी है. इसके बावजूद कई लोग डाइट और एक्सरसाइज करने के बाद भी वजन कम नहीं कर पाते हैं. इसके पीछे कुछ आम गलतियां जिम्मेदार होती है, जैसे कम पानी पीना और ज्यादा शुगर लेना. कम पानी पीने से मेटाबॉलिज्म धीमा हो सकता है और शरीर में वाटर रिटेंशन बढ़ सकता है. वहीं जरूरत से ज्यादा शुगर लेने पर इंसुलिन बढ़ता है, जिससे फैट बर्निंग पर असर पड़ता है.

ज्यादा तेल और कम प्रोटीन 

डाइट में जरूरत से ज्यादा तेल लेना भले ही वह गुड फैट हो तो कैलोरी बढ़ा सकता है. दूसरी तरफ प्रोटीन की कमी से मेटाबॉलिज्म स्लो होता है और मसल्स लॉस का खतरा बढ़ जाता है.

जरूरत से ज्यादा कार्डियो और हेल्दी फूड 

ज्यादा फायदेमंद चीजे भी कई बार नुकसान कर सकती है. ज्यादा कार्डियो करने से स्ट्रेस हार्मोन कार्टिसोल बढ़ सकता है, जिससे वजन घटने की बजाय रुक सकता है. वहीं हेल्दी फूड भी अगर ज्यादा मात्रा में खाया जाए तो कैलोरी बढ़ाकर वेट लॉस रोक सकता है.

फाइबर की कमी 

वजन घटाने के लिए फाइबर बहुत जरूरी होता है. यह पेट को देर तक भरा रखता है और बार-बार भूख लगने से बचाता है. खाने में फाइबर वाली सब्जियों को धीरे-धीरे बढ़ाने से वजन कंट्रोल में मदद मिल सकती है.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें