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2720 किलो वजनी, 3.6 लाख डॉलर की कीमत… एक साल से क्यों गोदाम में बंद पड़ी है ट्रंप की आदमकद गोल्डन प्रतिमा?

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 15 फीट ऊंची, गोल्डन रंग की ब्रॉन्ज प्रतिमा बीते एक साल से बदहाल हालत में पड़ी हुई है। खास बात यह है कि यह प्रतिमा पूरी तरह बनकर तैयार है, लेकिन अब तक इसे कहीं स्थापित नहीं किया जा सका है। इसकी वजह सामने आने के बाद मामला और भी दिलचस्प हो गया है।

यह प्रतिमा ट्रंप के उस आइकॉनिक पोज को दर्शाती है, जिसमें वह मुट्ठी बांधकर हाथ ऊपर उठाए नजर आते हैं। यह पोज 2024 में ट्रंप पर हुए हमले के बाद का है, जब उन्होंने खुद को सुरक्षित दिखाते हुए समर्थकों को संदेश दिया था। उसी क्षण को अमर करने के लिए इस मूर्ति को तैयार किया गया।


दो मंजिला इमारत जितनी ऊंची प्रतिमा

ट्रंप की यह प्रतिमा करीब दो मंजिला इमारत जितनी ऊंची है। इसका कुल वजन लगभग 6 हजार पाउंड यानी 2720 किलोग्राम है। प्रतिमा के लिए एक भारी बेस भी तैयार किया गया है। इसकी कुल लागत करीब 3 लाख 60 हजार डॉलर आंकी गई है।

मूर्ति तैयार करने वाले कलाकार एलन कॉट्रिल का कहना है कि अब तक उन्हें पूरा भुगतान नहीं मिला है। उनके अनुसार, अभी भी करीब 92 हजार डॉलर बकाया हैं, जिस वजह से प्रतिमा को इंस्टॉल नहीं किया गया।


चार महीने में पूरी हुई थी तैयारी

73 वर्षीय मूर्तिकार एलन कॉट्रिल के मुताबिक, प्रतिमा का ढांचा तैयार करने में करीब एक महीना लगा, जबकि फिनिशिंग और डिटेलिंग में तीन महीने का समय गया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बिना पूरा भुगतान मिले किसी भी कीमत पर प्रतिमा को स्थापित करना समझदारी नहीं होगी।


क्रिप्टो विवाद से जुड़ा है मामला

इस प्रतिमा का नाम ‘डॉन कोलोसस’ रखा गया है। इसे ट्रंप समर्थक क्रिप्टो निवेशकों ने बनवाया था। नवंबर 2024 में $PATRIOT नाम का एक मीम कॉइन लॉन्च हुआ था, उसी दौरान ट्रंप की चुनावी जीत हुई थी।

इसके बाद जनवरी में ट्रंप ने अपनी खुद की क्रिप्टोकरेंसी $TRUMP लॉन्च कर दी, जिससे $PATRIOT की कीमत में भारी गिरावट आई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस कॉइन की वैल्यू करीब 95 फीसदी तक गिर चुकी है, हालांकि इसका ट्रेड अब भी जारी है।


इंस्टॉलेशन पर सस्पेंस बरकरार

भुगतान और क्रिप्टो विवाद के चलते ट्रंप की यह विशाल प्रतिमा अब भी एक कोने में पड़ी हुई है। सवाल यही है कि क्या यह प्रतिमा कभी किसी सार्वजनिक स्थान पर लग पाएगी या यह विवादों के साथ इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएगी।

Sports News:टी20 वर्ल्ड कप 2026 में टीम इंडिया सबसे बड़ी दावेदार, ये 3 टीमें बिगाड़ सकती हैं खेल

आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 का रोमांच शुरू हो चुका है और इस बार टूर्नामेंट सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं है। भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में खेले जा रहे इस विश्व कप में मैदान के बाहर की घटनाएं भी चर्चा में हैं। बावजूद इसके, सूर्यकुमार यादव की कप्तानी वाली टीम इंडिया खिताब की सबसे मजबूत दावेदार मानी जा रही है।

भारतीय टीम का संतुलन, गहराई और हालिया फॉर्म उसे बाकी टीमों से आगे खड़ा करता है। हालांकि कुछ टीमें ऐसी हैं, जो भारत की राह मुश्किल बना सकती हैं।


पाकिस्तान: नाम बड़ा, प्रदर्शन कमजोर

भारत-पाकिस्तान मुकाबला हमेशा हाई-वोल्टेज रहता है, लेकिन इस बार हालात अलग नजर आ रहे हैं। मौजूदा फॉर्म और टीम कॉम्बिनेशन को देखें तो पाकिस्तान की टीम भारत के सामने उतनी मजबूत नहीं दिखती। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान को 7 फरवरी को कोलंबो में नीदरलैंड के खिलाफ जीत के लिए भी संघर्ष करना पड़ा।


ऑस्ट्रेलिया: स्टार गेंदबाजों की कमी बनी चिंता

ऑस्ट्रेलिया की टीम इस बार कुछ कमजोर नजर आ रही है, क्योंकि पैट कमिंस और जोश हेजलवुड जैसे अनुभवी तेज गेंदबाज चोट के कारण टूर्नामेंट से बाहर हैं। गेंदबाजी का जिम्मा बेन ड्वारशुइस, जेवियर बार्लेट और नाथन एलिस पर है।

हालांकि बल्लेबाजी में ट्रेविस हेड, जोश इंगलिस, कप्तान मिचेल मार्श, मार्कस स्टोइनिस और ग्लेन मैक्सवेल जैसे धाकड़ खिलाड़ी मौजूद हैं। भारतीय पिचों पर स्पिनर एडम जम्पा और मैट कुहनेमन अहम भूमिका निभा सकते हैं।


दक्षिण अफ्रीका: गेंदबाजी में भारत को टक्कर

दक्षिण अफ्रीका इस वर्ल्ड कप की सबसे संतुलित टीमों में से एक मानी जा रही है। भारत के बाद अगर किसी के पास सबसे खतरनाक गेंदबाजी आक्रमण है, तो वह साउथ अफ्रीका है।

कैगिसो रबाडा, एनरिच नॉर्किया, मार्को यानसेन और केशव महाराज जैसे गेंदबाजों के साथ बल्लेबाजी में क्विंटन डिकॉक, एडेन मार्करम, डेविड मिलर, रियान रिकेलटन और ट्रिस्टन स्टब्स टीम को मजबूती देते हैं।


न्यूजीलैंड: अनुभव बन सकता है हथियार

न्यूजीलैंड पिछले एक महीने से भारत दौरे पर है, जिससे उसे भारतीय परिस्थितियों का अच्छा अनुभव मिल चुका है। फिन एलेन ने भारत के खिलाफ आखिरी टी20 में शानदार बल्लेबाजी की थी। ग्लेन फिलिप्स और डेरिल मिचेल भी अच्छी लय में हैं।

गेंदबाजी में लॉकी फर्ग्युसन, जैकब डफी और कप्तान मिचेल सेंटनर का अनुभव कीवी टीम को खतरनाक बनाता है।


श्रीलंका: घरेलू हालात का मिलेगा फायदा

श्रीलंका अपने घर में खेलते हुए किसी भी टीम को चौंका सकता है। टीम के पास वानिंदु हसरंगा, महीष तीक्षणा और दुनिथ वेलालागे जैसे शानदार स्पिनर हैं, जबकि तेज गेंदबाजी में मथीषा पथिराना और दुष्मंता चामीरा विरोधी बल्लेबाजों के लिए खतरा बन सकते हैं।

घरेलू परिस्थितियों और दर्शकों के समर्थन के साथ श्रीलंका इस टूर्नामेंट में बड़ा उलटफेर कर सकता है।

‘युद्ध भी थोप दिया जाए तो नहीं रुकेंगे’, अमेरिका से बातचीत के बीच ईरान का यूरेनियम संवर्धन पर सख्त संदेश

अमेरिका के साथ चल रही बातचीत के बीच ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर साफ शब्दों में अपना रुख जाहिर किया है। ईरान ने कहा है कि वह यूरेनियम संवर्धन (यूरेनियम इनरिचमेंट) को किसी भी हाल में नहीं छोड़ेगा, भले ही उस पर युद्ध ही क्यों न थोप दिया जाए।

तेहरान में आयोजित एक फोरम को संबोधित करते हुए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान ने अपने शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के लिए भारी कीमत चुकाई है और अब कोई भी ताकत उसे इस अधिकार से पीछे हटने के लिए मजबूर नहीं कर सकती।


ईरान बोला- कोई हमारे फैसले तय नहीं कर सकता

अराघची ने कहा कि ईरान इस मुद्दे पर इसलिए अडिग है क्योंकि किसी भी देश को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि ईरान कैसे व्यवहार करे। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर देश पर युद्ध थोपा जाता है, तब भी यूरेनियम संवर्धन जारी रहेगा।

यह बयान ऐसे समय आया है, जब दो दिन पहले ही उनकी अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ से मुलाकात हुई थी।


‘यूरेनियम संवर्धन हमारा अधिकार’

ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि यूरेनियम इनरिचमेंट ईरान का वैध अधिकार है और इसे जारी रहना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान इस मुद्दे पर किसी समझौते तक पहुंचने के लिए बातचीत को तैयार है।

उन्होंने ओमान की राजधानी मस्कट में हुई बातचीत को सकारात्मक शुरुआत बताया और कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ सीधे संपर्क की संभावना बनी है। लेकिन साथ ही यह भी स्वीकार किया कि विश्वास कायम करने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है और वार्ता को जल्द दोबारा शुरू करना होगा।


ट्रंप ने बातचीत को बताया सकारात्मक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान के साथ हुई बातचीत को “काफी अच्छी” बताया है और अगले सप्ताह बातचीत के एक और दौर का संकेत दिया है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि अमेरिका ने दबाव की नीति जारी रखी है।

वाशिंगटन ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर नए टैरिफ लागू किए हैं। इसके अलावा ईरानी तेल निर्यात से जुड़ी शिपिंग कंपनियों और जहाजों पर भी नए प्रतिबंध लगाए गए हैं।


अमेरिकी सैन्य गतिविधि और ईरान की चेतावनी

अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने अरब सागर में तैनात अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन का दौरा किया, जिसकी जानकारी यूएस सेंट्रल कमांड ने सार्वजनिक की।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के विदेश मंत्री ने चेतावनी दी कि किसी भी अमेरिकी हमले का जवाब अमेरिकी ठिकानों पर कार्रवाई करके दिया जाएगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम किसी भी हाल में बातचीत का विषय नहीं बनेगा, क्योंकि यह देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है।

गलवान झड़प के बाद चीन पर गुप्त परमाणु परीक्षण का आरोप, अमेरिकी दावे पर भड़का बीजिंग

अमेरिका ने चीन पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के कुछ ही दिनों बाद उसने एक गुप्त परमाणु परीक्षण किया था। इस दावे के सामने आने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। अब इस पूरे मामले पर चीन की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है।

अमेरिकी पक्ष के अनुसार, यह कथित परमाणु परीक्षण 22 जून 2020 को किया गया था। यह वही समय था, जब भारत-चीन सीमा पर गलवान घाटी में हिंसक संघर्ष हुआ था, जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे।


अमेरिका का आरोप: परमाणु परीक्षण छिपाने की कोशिश

अमेरिका ने यह आरोप अंतरराष्ट्रीय निरस्त्रीकरण से जुड़े एक मंच पर लगाए। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उन्हें चीन द्वारा किए गए परमाणु परीक्षण की जानकारी है और यह भी दावा किया गया कि इस गतिविधि को जानबूझकर छिपाने की कोशिश की गई।

अमेरिकी पक्ष के मुताबिक, इस तरह के परीक्षण अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के खिलाफ जाते हैं। अमेरिका ने यह भी दोहराया कि वह रणनीतिक स्थिरता और हथियार नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत करने की लंबे समय से मांग करता रहा है।


चीन का पलटवार, आरोपों को बताया बेबुनियाद

अमेरिका के आरोपों पर चीन ने सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा है कि वॉशिंगटन चीन के कथित परमाणु खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। चीन के प्रतिनिधि ने कहा कि इस तरह के आरोप पूरी तरह निराधार हैं और उनका देश ऐसे दावों का कड़ा विरोध करता है।

चीन की ओर से यह भी कहा गया कि हथियारों की होड़ को बढ़ावा देने में सबसे बड़ी भूमिका अमेरिका की रही है। बीजिंग ने स्पष्ट किया कि वह अमेरिका और रूस के बीच चल रही नई परमाणु हथियार नियंत्रण वार्ताओं में शामिल होने का इरादा नहीं रखता।


परमाणु हथियारों की संख्या को लेकर भी तकरार

अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया था कि 2030 तक चीन के पास एक हजार से अधिक परमाणु हथियार हो सकते हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए चीन ने कहा कि उसके पास मौजूद हथियारों की संख्या अमेरिका और रूस की तुलना में काफी कम है।

चीन का कहना है कि जहां अमेरिका और रूस के पास हजारों की संख्या में परमाणु हथियार हैं, वहीं उसका भंडार उनसे कहीं छोटा है, इसलिए उसे समान स्तर पर वार्ता में शामिल करना तर्कसंगत नहीं है।


क्या है न्यू स्टार्ट संधि?

न्यू स्टार्ट संधि अमेरिका और रूस के बीच हुआ एक समझौता है, जिसका उद्देश्य परमाणु हथियारों और मिसाइलों की तैनाती को सीमित करना है। इस समझौते के तहत दोनों देशों ने मिसाइलों और बॉम्बर्स पर तैनात परमाणु वॉरहेड की संख्या पर सीमा तय की थी।

यह संधि 2010 में हस्ताक्षरित हुई थी और बाद में इसकी अवधि को आगे बढ़ाया गया, ताकि दोनों देशों के बीच रणनीतिक संतुलन बना रहे।

Sports News:टी20 वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले भारत को करारा झटका, हर्षित राणा बाहर, सिराज की एंट्री

टी20 वर्ल्ड कप 2026 के आगाज़ से ठीक कुछ घंटे पहले टीम इंडिया को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। तेज गेंदबाज हर्षित राणा घुटने की चोट के चलते पूरे टूर्नामेंट से बाहर हो गए हैं। उनकी जगह भारतीय टीम में अनुभवी पेसर मोहम्मद सिराज को शामिल किया गया है।

🔹 वॉर्म-अप मैच में लगी थी चोट

हर्षित राणा को यह चोट दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले गए अभ्यास मुकाबले के दौरान लगी थी। उन्होंने मैच में केवल एक ओवर गेंदबाजी की थी, जिसके बाद असहज महसूस करते हुए मैदान छोड़ दिया। बाद में उनके घुटने पर पट्टी बंधी हुई नजर आई, जिससे उनकी फिटनेस को लेकर चिंता बढ़ गई थी। मेडिकल जांच के बाद यह साफ हो गया कि वह पूरे टूर्नामेंट के लिए फिट नहीं हो पाएंगे।

🔹 मोहम्मद सिराज की टीम में वापसी

हर्षित राणा के बाहर होने के बाद चयनकर्ताओं ने मोहम्मद सिराज को टीम में शामिल करने का फैसला किया। 31 वर्षीय सिराज के पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अच्छा अनुभव है। वह अब तक भारत के लिए 16 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके हैं और कई अहम मुकाबलों में गेंद से प्रभाव छोड़ चुके हैं। लंबे समय से टेस्ट और वनडे टीम का हिस्सा रहे सिराज का अनुभव बड़े टूर्नामेंट में टीम के लिए अहम साबित हो सकता है।

🔹 क्यों खलेगी हर्षित राणा की कमी

हर्षित राणा सिर्फ एक तेज गेंदबाज नहीं थे, बल्कि निचले क्रम में उपयोगी बल्लेबाजी का विकल्प भी देते थे। हाल के मैचों में उन्होंने बल्ले से भी योगदान दिया था, जिससे टीम को अतिरिक्त गहराई मिलती थी। ऐसे में उनका बाहर होना टीम संयोजन के लिहाज से चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। वहीं मोहम्मद सिराज को मुख्य रूप से गेंदबाजी विशेषज्ञ के तौर पर देखा जाता है।

🔹 भारत का वर्ल्ड कप शेड्यूल

डिफेंडिंग चैंपियन भारत अपने अभियान की शुरुआत अमेरिका के खिलाफ मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में करेगा। इसके बाद टीम का मुकाबला नामीबिया से दिल्ली में होगा। तीसरा मैच पाकिस्तान के खिलाफ कोलंबो में प्रस्तावित है, हालांकि इस मुकाबले को लेकर पहले ही स्थिति स्पष्ट नहीं है।

🔹 टीम इंडिया का अपडेटेड स्क्वाड

सूर्यकुमार यादव (कप्तान), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), ईशान किशन (विकेटकीपर), तिलक वर्मा, हार्दिक पंड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल (उपकप्तान), रिंकू सिंह, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव, वरुण चक्रवर्ती, वाशिंगटन सुंदर और मोहम्मद सिराज।