Home Blog Page 67

भारत से दुश्मनी का खामियाजा, चीन भी नाराज़: अफगान नीति पर मौलाना फजलुर रहमान का शहबाज़ सरकार पर हमला

पाकिस्तान की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाले जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (JUI-F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने खास तौर पर अफगानिस्तान से जुड़े सुरक्षा मुद्दों और पाकिस्तान की विदेश नीति को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया।

अफगान नीति की विफलता पर सवाल

एरियानान्यूज (ariananews) के मुताबिक, रविवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए मौलाना फजलुर रहमान ने कहा कि बीते कई दशकों में पाकिस्तान ने कभी गंभीरता से यह सवाल नहीं उठाया कि उसकी अफगान नीति आखिर क्यों असफल रही।
उन्होंने कहा कि जहां व्यापारिक सामान तक सीमा पार नहीं कर पाता, वहीं आतंकवादी आसानी से पाकिस्तान में दाखिल हो जाते हैं। अगर आतंकवादी सीमा पार से आ रहे हैं, तो उन्हें रोका जाना चाहिए और इस चुनौती से सख्ती से निपटना चाहिए।

विदेश नीति पर कड़ी टिप्पणी

मौलाना रहमान ने पाकिस्तान की मौजूदा विदेश नीति को पूरी तरह विफल बताते हुए कहा कि हालात ऐसे बन गए हैं कि भारत को दुश्मन माना जाता है, अफगानिस्तान से रिश्ते खराब हैं, और ईरान व चीन जैसे करीबी माने जाने वाले देश भी नाराज़ हैं।
उन्होंने कहा कि देश की जनता इन नीतिगत विफलताओं का जवाब चाहती है।

सेना के प्रभाव पर भी उठाए सवाल

उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की विदेश और सुरक्षा नीतियां निर्वाचित सरकार नहीं, बल्कि सेना तय करती है।
मौलाना रहमान के मुताबिक, “एक जनरल आता है और कहता है कि बातचीत होगी, दूसरा आता है और युद्ध की बात करता है। ऐसे में देश में स्पष्ट नीति कैसे बनेगी?”

CPEC को लेकर भी सरकार पर निशाना

मौलाना फजलुर रहमान ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) परियोजना का जिक्र करते हुए कहा कि यह परियोजना इमरान खान के कार्यकाल में ठप पड़ी, लेकिन मौजूदा सरकार भी इसे आगे बढ़ाने में नाकाम रही है।
उन्होंने दावा किया कि इसी वजह से चीन पाकिस्तान से नाखुश है और द्विपक्षीय रिश्तों में पहले जैसी गर्मजोशी नहीं रही।

नीतियों के बिना देश नहीं चल सकता

अपने भाषण के अंत में उन्होंने कहा कि कोई भी देश ऐसी नीतियों के सहारे नहीं चल सकता, जो अलगाव, अविश्वास और असुरक्षा को बढ़ावा दें। मजबूत और स्पष्ट नीतियां ही किसी भी देश की स्थिरता की नींव होती हैं।

भाजयुमो अध्यक्ष पद की जंग : अयोध्या बनाम मऊ, लखनऊ से दिल्ली तक सियासी हलचल

भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा के बाद अब संगठन को पूरी तरह कसने की तैयारी शुरू कर दी है। अगला बड़ा फोकस प्रदेश पदाधिकारियों और मोर्चों के गठन पर है। इसी कड़ी में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) का प्रदेश अध्यक्ष पद इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में है। खासकर क्षत्रिय समाज ने इस बार मन ही मन मान लिया है कि युवा मोर्चा की कमान अब उनके समाज के किसी बेटे को ही मिलेगी।

इसके पीछे तर्क भी समाज के पास पूरे हैं। दयाशंकर सिंह के बाद से अब तक भाजयुमो को कोई भी क्षत्रिय अध्यक्ष नहीं मिला। लंबे अंतराल के बाद क्षत्रिय समाज को लगता है कि अब उनकी बारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं क्षत्रिय होकर प्रदेश का नेतृत्व कर रहे हैं, लेकिन समाज का एक वर्ग यह मानता है कि योगी जी संत हैं, इसलिए उनके कारण क्षत्रिय समाज की राजनीतिक भागीदारी संतुलित नहीं मानी जा सकती। इसी सोच के चलते पहले से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष क्षत्रिय नहीं होगा, और वही हुआ- इस बार भी प्रदेश अध्यक्ष पिछड़ा वर्ग से चुना गया।

इसी कारण अब पार्टी और समाज दोनों स्तरों पर यह धारणा बन रही है कि भाजयुमो का अध्यक्ष सामान्य वर्ग से होना चाहिए। ब्राह्मण कोटे से पहले ही हरीश द्विवेदी, सुब्रत पाठक, आशुतोष राय और प्रांशु दत्त द्विवेदी जैसे चेहरे मोर्चा की कमान संभाल चुके हैं। ऐसे में क्षत्रिय समाज इस बार पूरी उम्मीद लगाए बैठा है कि युवा मोर्चा की कमान अब किसी क्षत्रिय को सौंपी जाएगी।

क्षत्रिय दावेदारों में फिलहाल दो नाम सबसे प्रबल माने जा रहे हैं। पहला नाम अयोध्याधाम से जुड़े एक प्रदेश पदाधिकारी का है और दूसरा मऊ से आने वाले एक राष्ट्रीय नेता का। सियासी गलियारों में चर्चा है कि अयोध्या वाले इसलिए मजबूत माने जा रहे हैं क्योंकि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक “बड़े भाई साहब” का संरक्षण प्राप्त है और वे उनके शिष्य माने जाते हैं। वहीं मऊ वाले नेता जी की समस्या यह है कि उनका खुद का कोई मजबूत व्यक्तिगत राजनीतिक आधार नहीं बताया जाता।

हालांकि अयोध्या वाले दावेदार की ताकत ही उनकी सबसे बड़ी कमजोरी भी मानी जा रही है। माना जा रहा है कि दिल्ली वाले बड़े भाई साहब के विरोधी यदि एकजुट हो गए तो अयोध्या वाले को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में दिल्ली की टीम पूरे प्रदेश में सक्रिय होकर लखनऊ के खिलाफ माहौल बना सकती है।

दूसरी ओर मऊ वाले नेता जी की सबसे बड़ी कमजोरी उनके पारिवारिक अतीत से जुड़ी बताई जाती है। उनके पिता का मुख्तार अंसारी के साथ व्यापारिक साझेदारी का पुराना किस्सा आज भी उनके रास्ते में रोड़ा माना जा रहा है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा आम है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ऐसे किसी भी नाम को मंजूरी देने के पक्ष में नहीं होंगे, जिस पर इस तरह का साया हो।

दिलचस्प बात यह है कि दोनों दावेदारों की सबसे बड़ी ताकत उनके अभिभावक माने जाते हैं और विडंबना यह है कि वही अभिभावक उनकी सबसे बड़ी कमजोरी भी बनते नजर आते हैं। तर्क, गणित और जोर-आजमाइश- तीनों ही पक्षों में दमदार है, लेकिन फिलहाल सियासी समीकरणों को देखते हुए अयोध्या वाले पदाधिकारी ही इस रेस में थोड़ा आगे दिखते हैं। बड़े भाई साहब का साथ उनके पलड़े को भारी करता नजर आ रहा है।

अंततः ताजपोशी किसके सिर सजेगी, इसका फैसला तो वक्त ही करेगा, लेकिन इस समय भाजयुमो की इस रेस में यही दो घोड़े सबसे ज्यादा ताकतवर माने जा रहे हैं- एक अयोध्या का, दूसरा मऊ का। कहा भी जा रहा है कि अयोध्या के लोग हर्षीले होते हैं और मऊ के लोग पॉवर वाले। अब देखना यह है कि हर्ष जीतता है या पॉवर।

संवैधानिक परंपराओं की अनदेखी कर किया गया विरोध लोकतंत्र को कमजोर करता है : डॉ. राजेश्वर सिंह

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानमंडल का बजट सत्र सोमवार से प्रारंभ हुआ, जिसमें 11 फरवरी को प्रदेश का बजट प्रस्तुत किया जाना है। सत्र के शुरू होने के साथ ही विपक्ष द्वारा हंगामा किया गया। राज्यपाल के अभिभाषण से पूर्व ही सपा विधायकों ने सदन में नारेबाज़ी करते हुए कार्यवाही को बाधित किया और योगी सरकार के विरुद्ध विरोध दर्ज कराया।

इस घटनाक्रम पर सरोजनीनगर से विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया माध्यमों के जरिए कहा कि विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्षी दलों द्वारा किया गया व्यवधान निंदनीय है और यह लोकतांत्रिक मर्यादाओं के प्रतिकूल है। राज्यपाल का अभिभाषण एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसे बिना सुने बाधित करना संसदीय परंपराओं और लोकतंत्र की गरिमा को आघात पहुँचाता है।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने आगे कहा कि विरोध करना विपक्ष का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन यह विरोध शोर-शराबे, अव्यवस्था और सदन की कार्यवाही रोककर नहीं, बल्कि बहस, तर्क और तथ्यों के माध्यम से होना चाहिए। बिना सुने किया गया विरोध किसी भी दृष्टि से रचनात्मक राजनीति नहीं कहा जा सकता, बल्कि यह नकारात्मक सोच को दर्शाता है।

डॉ. सिंह ने कहा कि विधानसभा जनता के करों से संचालित होने वाली सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है। इसकी कार्यवाही को बाधित करना करदाताओं की मेहनत की कमाई का दुरुपयोग और जनता के विश्वास का अपमान है। उन्होंने विपक्ष से सकारात्मक भूमिका निभाने का आग्रह करते हुए कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए जिम्मेदार और रचनात्मक विपक्ष आवश्यक है, जो पहले सुने, फिर समझे और उसके बाद संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर सरकार को चुनौती दे। हंगामे की राजनीति लोकतंत्र को सशक्त नहीं बनाती, बल्कि संवाद और सार्थक बहस ही लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति हैं।

Health News:लगातार थकान और बार-बार बुखार आना नहीं है सामान्य, हो सकते हैं ब्लड कैंसर के शुरुआती संकेत

Early Warning Signs Of Blood Cancer:
लगातार थकान महसूस होना, बार-बार बुखार आना या छोटी-छोटी बीमारियों का जल्दी ठीक न होना अक्सर लोग सामान्य कमजोरी या बदलते मौसम का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार ये लक्षण ब्लड कैंसर के शुरुआती संकेत भी हो सकते हैं। ब्लड कैंसर धीरे-धीरे शरीर के अंदर पनपता है और शुरुआत में इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं, जिस वजह से समय पर पहचान नहीं हो पाती।

ब्लड कैंसर मुख्य रूप से ल्यूकेमिया, लिंफोमा और मल्टीपल मायलोमा के रूप में सामने आता है। ये बीमारियां बोन मैरो में शुरू होती हैं, जहां खून की कोशिकाएं बनती हैं, और धीरे-धीरे शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली को प्रभावित करने लगती हैं।

शुरुआती पहचान क्यों है जरूरी

अंबाला स्थित पूजा सुपरस्पेशलिटी क्लीनिक के विशेषज्ञ डॉ. दीपक सहोता के मुताबिक, ब्लड कैंसर की शुरुआती पहचान इलाज को काफी आसान बना सकती है। समय रहते बीमारी पकड़ में आ जाए तो इलाज की सफलता की संभावना बढ़ जाती है और ब्लड स्टेम सेल ट्रांसप्लांट जैसे विकल्पों पर भी बेहतर तरीके से विचार किया जा सकता है।

लगातार थकान को न करें नजरअंदाज

अगर बिना ज्यादा मेहनत के भी लगातार कमजोरी, थकान या सांस फूलने की शिकायत बनी रहती है और आराम करने के बाद भी राहत नहीं मिलती, तो यह एनीमिया का संकेत हो सकता है। डॉ. सहोता के अनुसार ब्लड कैंसर में शरीर पर्याप्त स्वस्थ रेड ब्लड सेल्स नहीं बना पाता, जिससे लगातार थकान महसूस होती है।

बार-बार बुखार और इंफेक्शन

ब्लड कैंसर में इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि व्यक्ति को बार-बार बुखार, सर्दी या इंफेक्शन हो सकते हैं और छोटी बीमारियां भी गंभीर रूप ले सकती हैं। यह संकेत देता है कि व्हाइट ब्लड सेल्स ठीक से काम नहीं कर रही हैं।

बिना वजह खून आना या जल्दी चोट लगना

नाक या मसूड़ों से खून आना, मामूली चोट पर भी ज्यादा नीला पड़ जाना या त्वचा पर छोटे लाल-बैंगनी दाग दिखना प्लेटलेट्स की कमी का लक्षण हो सकता है। ल्यूकेमिया में ये लक्षण आम हैं, लेकिन लोग अक्सर इन्हें हल्के में ले लेते हैं।

वजन घटना, रात में पसीना और गांठें

अगर बिना डाइट या एक्सरसाइज के वजन तेजी से घट रहा हो, रात में अत्यधिक पसीना आता हो या गर्दन, बगल या जांघ में दर्द रहित गांठ दिखाई दे, तो सतर्क हो जाना चाहिए। ये लक्षण खासतौर पर लिंफोमा से जुड़े हो सकते हैं। वहीं हड्डियों, रीढ़ या पसलियों में लगातार दर्द मल्टीपल मायलोमा की ओर इशारा कर सकता है।

स्टेम सेल ट्रांसप्लांट बन सकता है उम्मीद

ब्लड कैंसर के कई मामलों में ब्लड स्टेम सेल ट्रांसप्लांट एक प्रभावी इलाज माना जाता है। इसमें खराब बोन मैरो की जगह स्वस्थ स्टेम सेल्स दी जाती हैं, जिससे नया ब्लड और मजबूत इम्यून सिस्टम विकसित होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी संदिग्ध लक्षण को नजरअंदाज न करें और समय रहते डॉक्टर से सलाह लें।

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे चिकित्सीय सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी लक्षण या उपचार से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर करें।

‘कनाडा की सड़कों पर गुज़ारी रात, गैस स्टेशन पर किया काम’—एपी ढिल्लों ने याद किए संघर्ष के दिन

The Great Indian Kapil Show 4:
ग्लोबल स्टार एपी ढिल्लों हाल ही में द ग्रेट इंडियन कपिल शो सीजन 4 में कॉमेडियन अनुभव बस्सी के साथ गेस्ट बनकर पहुंचे। इस दौरान एपी ने अपनी जिंदगी के उस दौर को याद किया, जब सपनों के लिए उन्होंने कनाडा में बेहद कठिन हालातों का सामना किया।

क्रेडिट कार्ड न होने पर सड़क पर सोए

कपिल शर्मा के सवाल पर एपी ढिल्लों ने बताया कि जब वे पहली बार कनाडा पहुंचे थे, तब उनके पास होटल में रुकने के लिए क्रेडिट कार्ड तक नहीं था। उन्होंने कहा,
“मेरे पिता ने कुछ पैसे दिए थे, लेकिन मैं किसी अमीर परिवार से नहीं आता। होटल वालों ने क्रेडिट कार्ड मांगा और जब मैंने पूछा कि ये क्या होता है, तो उन्होंने कमरा देने से मना कर दिया। उस रात मैं होटल के बाहर ही सो गया।”

एपी ने यह भी बताया कि उनकी फ्लाइट में पांच स्टॉपओवर थे, जिससे उन्हें जबरदस्त जेट लैग हो गया था।

इंडियन कपल ने बढ़ाया मदद का हाथ

दूसरी रात भी सड़क पर बिताने के दौरान एक इंडियन कपल ने एपी की मदद की। एपी ने बताया कि लड़की ने अपने बॉयफ्रेंड से क्रेडिट कार्ड देने को कहा।
“उसने मज़ाक में कहा—‘भाई, कुछ तोड़ना मत, वरना चार्ज मुझ पर आएगा।’ उस पल की मदद मैं कभी नहीं भूल सकता।”

गैस स्टेशन से Best Buy तक की नौकरी

कॉलेज शुरू होने के बाद एपी ने गैस स्टेशन, कन्वीनियंस स्टोर और बाद में Best Buy में नौकरी की।
वे रोज़ 10–12 घंटे काम करते, फिर कॉलेज जाते और अपने किराए व खर्च खुद उठाते थे।

गैरेज में बनाया म्यूज़िक स्टूडियो

एपी ढिल्लों ने बताया कि उन्होंने अपने किराए के घर के छोटे से गैरेज में 10×6 फीट का कमरा प्लाईवुड से बनाकर म्यूज़िक सीखना शुरू किया।
“वहीं बैठकर मैंने खुद पर काम किया। मैंने कभी हार नहीं मानी।”

आज करोड़ों की नेट वर्थ

कभी सड़कों पर रात गुज़ारने वाले एपी ढिल्लों आज ग्लोबल म्यूज़िक आइकन हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक उनकी नेट वर्थ करीब 83 करोड़ रुपये है और उनके गानों को यूट्यूब पर लाखों-करोड़ों व्यूज़ मिलते हैं।