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मुंबई पुलिस ने किया खुलासा: रोहित शेट्टी और रणवीर सिंह केस में कॉपीकैट अपराधियों पर सख्त निगरानी

मुंबई में हाल ही में रोहित शेट्टी के घर फायरिंग और रणवीर सिंह को मिली धमकी के मामले में पुलिस ने नया खुलासा किया है। मुंबई पुलिस के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, लॉरेंस बिश्नोई और अनमोल बिश्नोई की गिरफ्तारी के बाद गैंग की गतिविधियां काफी कमजोर हो गई हैं।

बिश्नोई गैंग का खौफ कम

पुलिस का कहना है कि बिश्नोई भाइयों की गिरफ्तारी के बाद गैंग का दबदबा कम हुआ है। हालांकि कुछ लोग उनके नाम का दुरुपयोग कर डर का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस ने शुभम लोनकर और आरजू बिश्नोई जैसे नामों पर विशेष ध्यान रखा है, जो बिश्नोई गैंग के नाम का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।

रोहित शेट्टी के घर की फायरिंग

रोहित शेट्टी के घर पर हुई गोलीबारी के बाद, फेसबुक पोस्ट में शुभम लोनकर के नाम और लॉरेंस बिश्नोई की तस्वीर का इस्तेमाल कर जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया था। पुलिस ने शूटरों की तलाश तेज कर दी है और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस नष्ट किए जाने के बावजूद उम्मीद जताई है कि जल्द ही गिरफ्तारी होगी।

रणवीर सिंह को मिली धमकी

पुलिस ने स्पष्ट किया कि रणवीर सिंह को भेजे गए धमकी भरे मैसेज में बिश्नोई गैंग का कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया है। जांच जारी है कि क्या यह कोई कॉपीकैट अपराधी VPN या प्रोटोन मेल जैसे माध्यमों का इस्तेमाल कर भेजा गया।

जांच और सावधानी

मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि रोहित शेट्टी के मामले को छोड़कर हाल के दिनों में किसी अन्य बड़े सेलिब्रिटी ने धमकी की औपचारिक शिकायत नहीं दर्ज कराई है। सोशल मीडिया पर फिल्म जगत से जुड़े कुछ नाम चर्चा में हैं, लेकिन इनमें से कोई नया मामला नहीं है।

सारांश: मुंबई पुलिस का कहना है कि बिश्नोई गैंग कमजोर हुआ है, लेकिन उनके नाम का दुरुपयोग कर कॉपीकैट अपराधी सक्रिय हैं। रोहित शेट्टी और रणवीर सिंह मामलों की जांच जारी है और पुलिस इस पर सतर्क नजर रखे हुए है।

Sports News:टी20 वर्ल्ड कप में विराट कोहली ने बनाया रिकार्ड, रोहित और गेल भी रहे टॉप पर

आईसीसी मेंस टी20 वर्ल्ड कप का इतिहास कई यादगार पारियों से भरा हुआ है। जब भी बड़े मंच पर दबाव बढ़ता है, कुछ खिलाड़ी अपने बल्ले से टीम को संभाल लेते हैं। ऐसे ही खिलाड़ियों की सूची में सबसे ऊपर नाम आता है विराट कोहली का, जिन्होंने इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 50 या उससे बड़ी पारियां खेली हैं।

कोहली ने 2012 से 2024 तक खेले गए टी20 वर्ल्ड कप मुकाबलों में 15 अर्धशतक लगाए। उन्होंने 35 मैचों में 1292 रन बनाए और उनका औसत 58 से ज्यादा रहा। भले ही उनके नाम कोई शतक नहीं है, लेकिन लगातार बड़ी पारियां खेलना ही उन्हें इस सूची में सबसे ऊपर रखता है।

भारत के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा इस सूची में दूसरे स्थान पर हैं। 2007 से 2024 तक उन्होंने 12 अर्धशतक जमाए हैं। 47 मैचों में 1220 रन बनाकर उन्होंने टीम इंडिया को कई अहम मुकाबलों में जीत दिलाई। रोहित की खासियत तेज स्ट्राइक रेट और बड़े शॉट्स लगाने की क्षमता है।

वेस्टइंडीज के क्रिस गेल अपने आक्रामक खेल के लिए जाने जाते हैं। उनके नाम टी20 वर्ल्ड कप में 2 शतक और 7 अर्धशतक दर्ज हैं। यानी कुल 9 बार उन्होंने 50 या उससे ज्यादा रन बनाए हैं। 117 रन की पारी उनका सर्वोच्च स्कोर है। गेल ने इस टूर्नामेंट में 63 छक्के लगाए हैं।

ऑस्ट्रेलिया के डेविड वॉर्नर ने 8 अर्धशतक जमाए हैं। उन्होंने कई बार टीम को मजबूत शुरुआत दी और पावरप्ले में विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाया। उनका स्ट्राइक रेट और आक्रामक अंदाज उन्हें टी20 वर्ल्ड कप के सफल बल्लेबाजों में शामिल करता है।

श्रीलंका के महेला जयवर्धने ने 1 शतक और 6 अर्धशतक लगाए हैं। शांत स्वभाव और तकनीकी मजबूती के साथ उन्होंने टीम को कई अहम मैचों में संभाला।

सारांश: विराट कोहली ने 15 अर्धशतकों के साथ टी20 वर्ल्ड कप में शीर्ष स्थान बनाया है, जबकि रोहित शर्मा 12 अर्धशतकों के साथ दूसरे स्थान पर हैं। गेल, वॉर्नर और जयवर्धने भी इस लिस्ट में शामिल हैं।

Health News:अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड बन रहा टाइप-2 डायबिटीज का कारण, नेपाल में शुरू हुई अहम रिसर्च

दक्षिण एशिया और भारत सहित दुनिया के कई देशों में टाइप-2 डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस दिशा में ग्लासगो विश्वविद्यालय, स्कॉटलैंड के नेतृत्व में नेपाल में एक महत्वपूर्ण अध्ययन शुरू किया गया है। इस रिसर्च का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या पारंपरिक खानपान की ओर लौटकर टाइप-2 डायबिटीज को रोका जा सकता है या बीमार लोगों में इसे उल्टा किया जा सकता है।

टाइप-2 डायबिटीज में तेजी

दक्षिण एशिया और अन्य निम्न व मध्यम आय वाले देशों में टाइप-2 डायबिटीज के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड और उच्च कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ इसके फैलाव के मुख्य कारण हो सकते हैं।

CoDIAPREM परियोजना

ग्लासगो विश्वविद्यालय ने नेपाल के धुलीखेल अस्पताल के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय परियोजना CoDIAPREM शुरू की है। यह चार वर्षीय परियोजना 2026 से 2030 तक चलेगी और इसे हॉवर्ड फाउंडेशन से 17.8 लाख पाउंड की फंडिंग मिली है।

प्रोफेसर माइकल लीन, जो डायबिटीज और मानव न्यूट्रिशन विशेषज्ञ हैं, इस स्टडी का नेतृत्व करेंगे। स्टडी में यह देखा जाएगा कि:

  • समुदाय स्तर पर पारंपरिक आहार अपनाने से नई डायबिटीज के मामले कितने कम हो सकते हैं।
  • पहले से बीमार लोग कितने समय तक रिमिशन (रक्त शुगर सामान्य रखना) प्राप्त कर सकते हैं।
  • हल्का वजन घटाने से टाइप-2 डायबिटीज को रोकने या नियंत्रित करने में कितना प्रभाव पड़ता है।

नेपाल में स्थिति

कुछ दशक पहले नेपाल में टाइप-2 डायबिटीज के मामले बहुत कम थे। हालांकि दक्षिण एशियाई आबादी में जेनेटिक जोखिम मौजूद है, लेकिन प्रोसेस्ड और ऊर्जा-घने खाद्य पदार्थों के बढ़ते चलन और बढ़ते वजन के कारण मामलों में तेजी आई है।

  • अनुमान है कि नेपाल में 40 वर्ष से अधिक उम्र के हर पांच में से एक व्यक्ति टाइप-2 डायबिटीज से प्रभावित है।
  • लंबे समय तक दवाओं और नियमित जांच का खर्च कई लोगों के लिए मुश्किल है।

स्टडी का तरीका

CoDIAPREM परियोजना अस्पताल आधारित नहीं, बल्कि समुदाय आधारित होगी।

  • इसमें स्थानीय स्वयंसेवकों की मदद से पारंपरिक आहार अपनाने और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को कम करने के उपाय लागू किए जाएंगे।
  • देखा जाएगा कि क्या इससे लोग वजन घटा सकते हैं, नई डायबिटीज के मामलों को रोका जा सकता है और मरीज बिना दवा के लंबे समय तक सामान्य ब्लड शुगर बनाए रख सकते हैं।
  • शुरुआती पायलट स्टडी ने कम लागत में उत्साहजनक परिणाम दिखाए हैं।

वैज्ञानिक आधार

वैश्विक प्रमाण बताते हैं कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड, मोटापा और इंसुलिन रेजिस्टेंस के बीच संबंध है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन और इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के अनुसार शरीर में अतिरिक्त चर्बी लीवर और पैंक्रियास जैसे अंगों को प्रभावित करती है और ब्लड शुगर कंट्रोल बिगाड़ती है।

पाकिस्तान के इस्लामिया कॉलेज पेशावर में तालिबानी आदेश, महिला छात्राओं और पुरुष शिक्षकों के बीच बातचीत पर पूरी पाबंदी

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत की राजधानी पेशावर में स्थित सरकारी विश्वविद्यालय इस्लामिया कॉलेज ने तालिबानी आदेश जारी कर दिया है। इस आदेश के तहत महिला छात्राओं को पुरुष शिक्षकों के साथ किसी भी प्रकार की पढ़ाई या अन्य बातचीत करने की अनुमति नहीं है।

आदेश के मुख्य बिंदु

पॉलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट के अध्यक्ष डॉ. आमिर उल्लाह खान की ओर से जारी इस आदेश में कहा गया है कि:

  • महिला छात्राएं पुरुष शिक्षकों के कार्यालय में नहीं जा सकतीं।
  • पुरुष छात्र महिला शिक्षकों के कार्यालय में नहीं जा सकते।
  • यदि किसी बातचीत की आवश्यकता अत्यंत जरूरी हो, तो इसके लिए खैबर पख्तूनख्वाह के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी या प्रांत के गवर्नर से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा।

आदेश में दावा किया गया है कि यह कदम छात्र-छात्राओं की भलाई के लिए उठाया गया है और यह मुख्यमंत्री और गवर्नर के निर्देश पर लागू किया गया है।

पाकिस्तान में महिलाओं की स्थिति

खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत में महिलाओं की शिक्षा की स्थिति बहुत कमजोर है। यहां महिलाओं की साक्षरता दर केवल 37% है, जबकि पूरे पाकिस्तान में यह आंकड़ा 52% है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के आदेश महिलाओं के अधिकारों और शिक्षा की स्वतंत्रता पर गंभीर हमला हैं। पाकिस्तान पहले ही महिला शिक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय आलोचना झेल चुका है।

राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ

  • पिछले साल अक्टूबर में मुख्यमंत्री बने 36 वर्षीय सुहैल अफरीदी ने खैबर पख्तूनख्वाह में कई ऐसे कदम उठाए हैं, जिनकी पहले आलोचना होती थी।
  • पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के दौर में महिलाओं को पुरुषों के बराबरी के अधिकार देने और कुप्रथाओं को खत्म करने पर जोर था।
  • अफरीदी के प्रशासन में खैबर पख्तूनख्वाह के सबसे पुराने कॉलेज में महिला छात्राओं और पुरुष शिक्षकों की बातचीत पर प्रतिबंध लग गया।

तालिबानी और आतंकवादी गतिविधियों का विस्तार

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सुहैल अफरीदी के शासन में प्रांत में अपराध और आतंकवादी गतिविधियों में वृद्धि हुई है।

  • लोअर डिर के कुम्बन मैदान इलाके में लश्कर ए तैयबा का नया ट्रेनिंग कैंप तैयार किया जा रहा है।
  • जैश ए मोहम्मद के प्रशिक्षण कैंप मनसेहरा और हंगू में संचालित हो रहे हैं।
  • अफरीदी की सरकार ने कुछ आतंकवादी रोड-शो और गतिविधियों को मंजूरी दी है और पुलिस सुरक्षा मुहैया करवाई है।

पूर्व में इमरान खान ने हाफिज सईद और मसूद अजहर को नजरबंद कर आतंकी गतिविधियों पर रोक लगाई थी, जबकि अफरीदी के शासन में प्रांत में तालिबानी और आतंकवादी गुटों के लिए सुविधाजनक माहौल बन गया है।

Health News:सिरहाने मोबाइल रखकर सोना: क्या सच में कैंसर का खतरा है? डॉक्टर ने बताया असली स्थिति

भारत में ज्यादातर लोग सोने से पहले मोबाइल फोन स्क्रॉल करते हैं या फोन को सिरहाने के पास ही रखते हैं। यह आदत आम हो चुकी है, लेकिन क्या यह स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है?

लॉस एंजेलेस, कैलिफोर्निया के एनेस्थीसियोलॉजिस्ट डॉ. मायरो फिगुरा ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में इस मुद्दे पर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि सोते समय फोन को सिर के पास रखना सुरक्षित नहीं है

क्या मोबाइल से कैंसर हो सकता है?

डॉ. फिगुरा के मुताबिक, “फोन तब भी रेडिएशन छोड़ता है जब आप उसे इस्तेमाल नहीं कर रहे होते। यह नींद की गुणवत्ता बिगाड़ सकता है, सिरदर्द पैदा कर सकता है और लंबे समय में कैंसर का जोखिम बढ़ा सकता है।”

नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन

मोबाइल फोन से निकलने वाला रेडिएशन नॉन-आयोनाइजिंग होता है। यह आयोनाइजिंग रेडिएशन (जैसे सूरज की किरणें, मेडिकल इमेजिंग या रेडियोधर्मी स्रोत) की तरह सीधे डीएनए को नुकसान नहीं पहुंचाता। लेकिन इसके बावजूद इसे रेडिएशन श्रेणी में रखा गया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे “इंसानों के लिए संभावित रूप से कार्सिनोजेनिक” श्रेणी में रखा है — उसी श्रेणी में कॉफी और अचार जैसी चीजें भी आती हैं।

डॉ. फिगुरा यह भी बताते हैं कि फोन चार्जिंग के दौरान ओवरहीट हो सकता है, जिससे आग लगने की घटनाएं भी सामने आई हैं। इसलिए सोते समय फोन को सिर के पास रखना सुरक्षित नहीं माना जाता। उनका सुझाव है कि फोन को बिस्तर से दूर रखें, बेहतर होगा कि कमरे के दूसरी ओर रख दें। इससे नींद बेहतर होगी और लंबे समय में स्वास्थ्य पर संभावित जोखिम भी कम होंगे।

बाकी एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

कोलकाता के अपोलो कैंसर सेंटर की रेडिएशन ऑन्कोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. अरुंधति डे कहती हैं कि अब तक कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जो यह साबित करता हो कि मोबाइल फोन की रेडियोफ्रीक्वेंसी तरंगें ब्रेन ट्यूमर या कैंसर का कारण बनती हैं।
उनका कहना है: “दुनिया भर में लंबे समय तक मोबाइल इस्तेमाल पर अध्ययन किए जा रहे हैं, लेकिन मौजूदा आंकड़े यह नहीं बताते कि सिर के पास फोन रखकर सोने से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।”

सबसे बड़ा असर नींद पर पड़ता है

डॉक्टरों के अनुसार, मोबाइल पास रखने का सबसे स्पष्ट असर नींद की गुणवत्ता पर होता है। स्मार्टफोन लगातार रोशनी, नोटिफिकेशन, अलर्ट और स्क्रीन की चमक छोड़ते रहते हैं। भले ही आप उन पर प्रतिक्रिया न दें, लेकिन दिमाग इन संकेतों को रिकॉर्ड करता रहता है। यही वजह है कि फोन पास रखने से नींद प्रभावित हो सकती है।

सलाह

यह जानकारी रिसर्च स्टडी और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी नई आदत या स्वास्थ्य संबंधी बदलाव को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श लें।