Home Blog Page 57

टॉप 10 से बाहर रही ‘ओ’रोमियो’, जानिए ओपनिंग वीकेंड पर कितना रहा वर्ल्डवाइड कलेक्शन

ओ’रोमियो ने रिलीज के साथ अच्छी शुरुआत की थी। दूसरे दिन वैलेंटाइन डे का फायदा मिला और फिल्म की कमाई में ठोस उछाल देखने को मिला। हालांकि तीसरे दिन यानी पहले रविवार को लगभग 30% की गिरावट दर्ज की गई, जिसकी बड़ी वजह भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच को माना जा रहा है।

तीन दिन में वर्ल्डवाइड कमाई कितनी?

फिल्म ने तीसरे दिन भारतीय बॉक्स ऑफिस पर करीब 9 करोड़ रुपये की नेट कमाई की। इसके साथ घरेलू बाजार में इसका कुल कलेक्शन लगभग 30.15 करोड़ नेट (करीब 35 करोड़ ग्रॉस) पहुंच गया है।

विदेशों में फिल्म ने लगभग 1.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 12 करोड़ रुपये से ज्यादा) का कारोबार किया है। इस तरह ओपनिंग वीकेंड पर फिल्म की वर्ल्डवाइड ग्रॉस कमाई 45 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। हालांकि बड़े बजट को देखते हुए इसे औसत शुरुआत माना जा रहा है।


शाहिद की वर्ल्डवाइड टॉप 10 में नहीं बना पाई जगह

तीन दिन बाद भी यह फिल्म Shahid Kapoor की वर्ल्डवाइड टॉप 10 फिल्मों में शामिल नहीं हो सकी है। शाहिद की 10वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म Mausam है, जिसका वर्ल्डवाइड ग्रॉस करीब 54.5 करोड़ रुपये रहा था।

ऐसे में ‘ओ’रोमियो’ को टॉप 10 में जगह बनाने के लिए अभी लगभग 10 करोड़ रुपये और कमाने होंगे।


शाहिद कपूर की टॉप 10 वर्ल्डवाइड ग्रॉस फिल्में

  1. Padmaavat – 560 करोड़
  2. Kabir Singh – 368.3 करोड़
  3. Teri Baaton Mein Aisa Uljha Jiya – 133.64 करोड़
  4. R… Rajkumar – 101.21 करोड़
  5. Udta Punjab – 97.01 करोड़
  6. Haider – 91.7 करोड़
  7. Kaminey – 68.01 करोड़
  8. Deva – 59.3 करोड़
  9. Batti Gul Meter Chalu – 55.84 करोड़
  10. Mausam – 54.5 करोड़

मंडे टेस्ट पर टिकी उम्मीदें

फिल्म का जॉनर डार्क रोमांटिक थ्रिलर की तरफ झुका हुआ है, जो पारंपरिक रोम-कॉम की तुलना में कम कमर्शियल माना जाता है। ऐसे में ओपनिंग वीकेंड का प्रदर्शन पूरी तरह निराशाजनक नहीं कहा जा सकता, लेकिन बजट के लिहाज से इसे मजबूत पकड़ बनाए रखना जरूरी है।

अब सबकी नजरें सोमवार के कलेक्शन पर टिकी हैं। अगर फिल्म वीकडेज में स्थिर प्रदर्शन करती है, तो थिएटर रन खत्म होने तक संतोषजनक आंकड़ा छू सकती है।

कौन है समुद्र का सबसे बड़ा ताकतवर देश? 14 देशों के पास एयरक्राफ्ट कैरियर, भारत कहां खड़ा है

समुद्री ताकत की बात हो और विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier) का जिक्र न हो, ऐसा संभव नहीं। ये विशाल जहाज किसी भी देश को समुद्र में दूर-दराज तक सैन्य पहुंच, स्ट्राइक क्षमता और रणनीतिक बढ़त देते हैं। 2026 तक दुनिया के 14 देशों के पास ऐसे पोत हैं—कुछ न्यूक्लियर पावर्ड सुपरकैरियर, तो कुछ STOBAR, CATOBAR या LHD/ STOVL प्लेटफॉर्म।

1. 🇺🇸 United States (11 कैरियर)**

अमेरिका समुद्री ताकत में सबसे आगे है। उसके पास USS Abraham Lincoln (CVN-72) और USS Gerald R. Ford (CVN-78) जैसे न्यूक्लियर सुपरकैरियर हैं।
निमित्ज़ और फोर्ड क्लास जहाजों के साथ अमेरिका का कुल डेक स्पेस बाकी दुनिया से ज्यादा है। F/A-18, F-35, E-2D जैसे एडवांस जेट्स के कारण यह ग्लोबल पावर प्रोजेक्शन में नंबर-1 है।

2. 🇨🇳 China (3 कैरियर)**

चीन के पास LiaoningShandong और Fujian हैं।
फुजियान में एडवांस इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट सिस्टम है। चीन इंडो-पैसिफिक और साउथ चाइना सी में अपनी मौजूदगी तेजी से मजबूत कर रहा है।

3. 🇬🇧 United Kingdom (2 कैरियर)**

क्वीन एलिजाबेथ क्लास के दो जहाज—HMS Queen Elizabeth और HMS Prince of Wales—F-35B जेट्स के साथ नाटो अभियानों में अहम भूमिका निभाते हैं।

4. 🇮🇳 India (2 कैरियर)**

भारत के पास INS Vikramaditya और स्वदेशी INS Vikrant हैं।
दोनों STOBAR सिस्टम पर आधारित हैं और MiG-29K जेट ऑपरेट करते हैं। हिंद महासागर में भारत की मजबूत रणनीतिक स्थिति है। संख्या के लिहाज से भारत चौथे स्थान पर है, जबकि क्षेत्रीय प्रभाव में शीर्ष देशों में गिना जाता है।

5. 🇮🇹 Italy (1 कैरियर + 1 LHD)**

Cavour और Trieste F-35B जेट्स के साथ भूमध्यसागर क्षेत्र में सक्रिय हैं।

6. 🇯🇵 Japan (2 कन्वर्जन में)**

JS Izumo और JS Kaga को STOVL ऑपरेशन के लिए बदला जा रहा है, ताकि F-35B जेट्स तैनात किए जा सकें।

7. 🇰🇷 South Korea (1)**

ROKS Dokdo मुख्यतः हेलीकॉप्टर ऑपरेशन के लिए है, भविष्य में STOVL जेट्स की योजना।

8. 🇪🇸 Spain (1)**

Juan Carlos I STOVL जेट्स और हेलीकॉप्टर के साथ लचीली क्षमता देता है।

9. 🇹🇭 Thailand (1)**

HTMS Chakri Naruebet अब मुख्यतः हेलीकॉप्टर प्लेटफॉर्म है।

10. 🇹🇷 Turkey (1)**

TCG Anadolu ड्रोन और हेलीकॉप्टर आधारित ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल हो रहा है।

11. 🇷🇺 Russia (1)**

Admiral Kuznetsov रूस का एकमात्र कैरियर है, जो लंबे समय से रिफिट में है।

12. 🇫🇷 France (1)**

Charles de Gaulle न्यूक्लियर पावर्ड कैटोबार कैरियर है—अमेरिका के बाद फ्रांस ही ऐसा देश है।

13. 🇪🇬 Egypt (2 LHD)**

ENS Gamal Abdel Nasser और ENS Anwar El Sadat हेलीकॉप्टर-आधारित एम्फीबियस ऑपरेशन के लिए।

14. 🇦🇺 Australia (2 LHD)**

HMAS Canberra और HMAS Adelaide मुख्यतः हेलीकॉप्टर और आपदा राहत मिशन के लिए।

170 मील प्रति घंटे की स्पीड, 30 टन का फाइटर जेट… समंदर में चीन ने दिखाई दमदार सैन्य ताकत

China ने समुद्री सैन्य ताकत के मामले में बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में सेवा में शामिल उसके अत्याधुनिक विमानवाहक पोत Fujian ने इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट सिस्टम का सफल परीक्षण किया है। माना जा रहा है कि यह तकनीक पारंपरिक स्टीम कैटापल्ट सिस्टम से कहीं ज्यादा उन्नत और प्रभावी है।

सरकारी प्रसारणकर्ता China Central Television द्वारा जारी वीडियो में परीक्षण का रोमांचक दृश्य दिखाया गया। परीक्षण के दौरान 30 टन वजनी लड़ाकू विमान, जो करीब 170 मील प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रहा था, उसे महज 0.2 सेकंड में नियंत्रित कर लिया गया। इसे आधुनिक इंजीनियरिंग की बड़ी उपलब्धि बताया जा रहा है। युद्ध की स्थिति में तेज और सुरक्षित टेकऑफ-लैंडिंग के लिहाज से यह अहम प्रगति मानी जा रही है।

स्टीम कैटापल्ट से एक कदम आगे

चालक दल के सदस्य बाओ यू के मुताबिक, इस सिस्टम की खासियत इसकी त्वरित ऊर्जा आपूर्ति क्षमता है। यह कम दूरी में ही विमान को उड़ान योग्य गति दे देता है और जरूरत पड़ने पर उतनी ही तेजी से रोक भी सकता है। भारी विमानों के संचालन के बावजूद इसमें पारंपरिक स्टीम सिस्टम की तुलना में कम शोर होता है।

लगातार हमले की क्षमता

सैन्य विशेषज्ञ सोंग झोंगपिंग का कहना है कि इस तकनीक से विमानवाहक पोत से उड़ानों की रफ्तार कई गुना बढ़ जाएगी। इसका सीधा मतलब है कि युद्ध के समय यह पोत बिना ज्यादा अंतराल के लगातार मिशन लॉन्च कर सकेगा।

आधुनिक फाइटर जेट्स के साथ अभ्यास

5 नवंबर को आधिकारिक रूप से शामिल होने के बाद फुजियान ने अपने पहले समुद्री अभियान में Shenyang J-35Shenyang J-15TShenyang J-15DT और KJ-600 जैसे विमानों के साथ टेकऑफ और लैंडिंग ड्रिल की।

इस अभ्यास ने संकेत दिया है कि चीन समुद्री रक्षा तकनीक में तेजी से आगे बढ़ रहा है और वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है।

भारत-पाक मैच का ‘ओ’रोमियो’ पर फीका असर, रविवार को नहीं दिखा बड़ा उछाल।

शाहिद कपूर स्टारर और विशाल भारद्वाज के निर्देशन में बनी फिल्म ‘ओ’रोमियो’ ने बॉक्स ऑफिस पर दमदार शुरुआत की है। रिलीज के पहले दिन फिल्म ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए शानदार ओपनिंग दर्ज की। इसके बाद शनिवार को वैलेंटाइन डे और सकारात्मक दर्शक प्रतिक्रिया का फायदा मिला, जिससे फिल्म की कमाई में जबरदस्त उछाल देखने को मिला और यह डबल डिजिट में पहुंच गई।

हालांकि रविवार को भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच की वजह से सिनेमाघरों में दर्शकों की संख्या प्रभावित हुई। छुट्टी के बावजूद फिल्म को अपेक्षित फायदा नहीं मिल सका और कमाई में गिरावट दर्ज की गई।

तीसरे दिन का कलेक्शन

शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी की इस रोमांटिक एक्शन थ्रिलर को रिलीज से पहले ज्यादा चर्चा नहीं मिली थी, लेकिन थिएटर में आने के बाद इसे अच्छा रिस्पॉन्स मिला।

  • पहले दिन फिल्म ने 8.25 करोड़ रुपये कमाए।
  • दूसरे दिन लगभग 48 फीसदी की बढ़त के साथ 12.65 करोड़ रुपये का कारोबार किया।
  • तीसरे दिन यानी रविवार को फिल्म ने करीब 9 करोड़ रुपये की कमाई की।

इसी के साथ तीन दिनों में फिल्म का कुल कलेक्शन 30.15 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

शाहिद की टॉप 10 फिल्मों में जगह?

तीन दिन की कमाई के बाद भी ‘ओ’रोमियो’ अभी तक शाहिद कपूर की टॉप 10 सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल नहीं हो पाई है। शाहिद के करियर की 10वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म ‘बदमाश कंपनी’ है, जिसका लाइफटाइम कलेक्शन 34.98 करोड़ रुपये रहा था। उम्मीद जताई जा रही है कि फिल्म जल्द ही इस आंकड़े को पार कर सकती है। अब सबकी नजरें मंडे टेस्ट पर टिकी हैं।

स्टार कास्ट और कहानी

फिल्म का निर्देशन विशाल भारद्वाज ने किया है। इसमें शाहिद कपूर के साथ तृप्ति डिमरी, तमन्ना भाटिया, विक्रांत मैसी, अविनाश तिवारी, फरीदा जलाल, नाना पाटेकर और दिशा पाटनी अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। फिल्म की कहानी हुसैन जैदी की किताब माफिया क्वीन्स ऑफ मुंबई से प्रेरित बताई जा रही है।

लखनऊ ग्रीन कॉरिडोर परियोजना में पुलिस हेड क्वार्टर के पास की साइड में कवरेज पर विवाद : ठेकेदारों द्वारा मीडिया की एंट्री पर रोक से पारदर्शिता पर उठे सवाल

लखनऊ : राजधानी लखनऊ में निर्माणाधीन ग्रीन कॉरिडोर परियोजना एक बार फिर चर्चा और विवाद के केंद्र में आ गई है। इस बार मामला निर्माण की गुणवत्ता या प्रगति को लेकर नहीं, बल्कि मीडिया प्रतिनिधियों को निर्माण स्थल में प्रवेश से रोके जाने को लेकर सामने आया है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सूरज बिल्डर प्राइवेट लिमिटेड के प्रोजेक्ट मैनेजर प्रवीण चंद्र दास द्वारा पत्रकारों को साइट पर जाने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

मीडिया की एंट्री पर रोक: क्या है पूरा मामला

जानकारी के अनुसार, कुछ पत्रकार ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति जानने और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग के उद्देश्य से स्थल पर पहुंचे थे। बताया जाता है कि उन्हें सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।

प्रोजेक्ट मैनेजर की ओर से यह कहा गया कि निर्माण क्षेत्र सेना की भूमि से सटा हुआ है और सुरक्षा मानकों के चलते बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश प्रतिबंधित है। हालांकि, इस स्पष्टीकरण के बाद भी यह प्रश्न बना हुआ है कि क्या मीडिया के लिए किसी निर्धारित अनुमति प्रक्रिया का पालन संभव था या नहीं।

सेना की भूमि का हवाला: सुरक्षा बनाम पारदर्शिता

यदि निर्माण स्थल वास्तव में सेना की भूमि के निकट है, तो सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य है। लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि संपूर्ण साइट प्रतिबंधित क्षेत्र में आती है या केवल सीमावर्ती हिस्सा संवेदनशील है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक हित से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं में पारदर्शिता सर्वोपरि होती है। मीडिया की भूमिका ऐसे कार्यों की निगरानी और तथ्य सामने लाने में महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में स्पष्ट दिशा-निर्देश और अधिकृत अनुमति प्रक्रिया सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि सुरक्षा और पारदर्शिता दोनों के बीच संतुलन बना रहे।

स्थानीय स्तर पर उठते सवाल

पत्रकारों को रोके जाने की घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों के बीच कई प्रश्न चर्चा का विषय बन गए हैं।

क्या निर्माण कार्य स्वीकृत नक्शे और मानकों के अनुरूप हो रहा है? क्या भूमि सीमांकन पूरी तरह स्पष्ट और विधिसम्मत है? क्या सभी आवश्यक वैधानिक अनुमति और पर्यावरणीय स्वीकृतियाँ प्राप्त हैं?

इन प्रश्नों पर अभी तक संबंधित एजेंसी या प्रशासन की ओर से विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

प्रशासनिक जवाबदेही की अपेक्षा

ग्रीन कॉरिडोर परियोजना शहर की यातायात व्यवस्था और शहरी विकास से सीधे जुड़ी एक महत्वाकांक्षी योजना है। ऐसे में जिला प्रशासन, संबंधित विभागों और निर्माण एजेंसी से पारदर्शी संवाद की अपेक्षा की जा रही है।

यदि परियोजना सभी नियमों और मानकों के अनुरूप संचालित हो रही है, तो मीडिया को नियंत्रित और अधिकृत तरीके से तथ्यात्मक कवरेज की अनुमति देने पर स्पष्ट नीति सामने आनी चाहिए। इससे अनावश्यक आशंकाओं और अफवाहों पर भी विराम लग सकेगा।

पारदर्शिता ही विश्वास की आधारशिला

शहरी बुनियादी ढांचा परियोजनाएँ केवल निर्माण कार्य नहीं होतीं, बल्कि वे जनता के विश्वास से भी जुड़ी होती हैं। पारदर्शिता, जवाबदेही और संवाद- ये तीनों तत्व किसी भी सार्वजनिक परियोजना की सफलता के लिए अनिवार्य हैं।

फिलहाल, प्रोजेक्ट मैनेजर द्वारा पत्रकारों को रोके जाने की घटना ने ग्रीन कॉरिडोर परियोजना को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें संबंधित एजेंसियों और प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस विषय पर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हैं और भविष्य में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।