Home Blog Page 52

Health News:क्या पेट की गैस सिर तक पहुंच सकती है? जानें कितना गंभीर हो सकता है गैस से होने वाला सिरदर्द

क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि सिर में तेज धड़कता दर्द शुरू हुआ और आपने उसे सिर्फ तनाव समझकर नजरअंदाज कर दिया? भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित दिनचर्या और जल्दबाजी में खाया गया खाना सिरदर्द को आम बना देता है। लेकिन हर बार सिरदर्द की वजह सिर्फ टेंशन नहीं होती। कई बार इसकी जड़ पेट की गड़बड़ी में छिपी होती है। आम बोलचाल में इसे गैस से होने वाला सिरदर्द या गैस्ट्रिक हेडेक कहा जाता है। आइए समझते हैं कि आखिर गैस सिर तक कैसे असर डालती है।

गैस्ट्रिक सिरदर्द सामान्य तनाव या साइनस से होने वाले सिरदर्द से अलग होता है। जब पाचन तंत्र में समस्या जैसे अपच, एसिडिटी या ज्यादा गैस बनती है, तो उसका असर शरीर के अन्य हिस्सों पर भी पड़ सकता है। पेट और दिमाग के बीच गहरा संबंध होता है। पाचन बिगड़ने पर कुछ लोगों को सिरदर्द की शिकायत होने लगती है। मसालेदार भोजन, अनियमित खानपान, अत्यधिक चाय-कॉफी का सेवन और लगातार मानसिक तनाव इस परेशानी को बढ़ा सकते हैं।

कब बढ़ती है परेशानी?

साधारण गैस्ट्रिक सिरदर्द और गैस्ट्रिक माइग्रेन में फर्क समझना जरूरी है। गैस्ट्रिक सिरदर्द हल्का या लंबे समय तक बना रहने वाला दर्द हो सकता है, जबकि गैस्ट्रिक माइग्रेन में तेज, धड़कन जैसा दर्द महसूस होता है। इसके साथ रोशनी और शोर से चिड़चिड़ाहट, मतली या उल्टी जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। दोनों ही स्थितियों में मूल कारण पाचन तंत्र की गड़बड़ी होती है।

अगर यह समस्या कभी-कभार हो तो ज्यादा चिंता की जरूरत नहीं होती। लेकिन यदि बार-बार सिरदर्द होने लगे तो इसे हल्के में न लें। लगातार गैस से जुड़ा सिरदर्द क्रॉनिक गैस्ट्राइटिस, पेप्टिक अल्सर, गॉलब्लैडर की समस्या, इर्रिटेबल बॉवेल सिंड्रोम या एसिड रिफ्लक्स जैसी गंभीर स्थितियों का संकेत हो सकता है।

डॉक्टर से कब लें सलाह?

यदि सिरदर्द हफ्ते में दो से अधिक बार हो रहा है, बिना कारण वजन कम हो रहा है, बार-बार उल्टी हो रही है, पेट में तेज दर्द बना रहता है या घरेलू उपायों से राहत नहीं मिल रही, तो विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर एंडोस्कोपी जैसी जांच के जरिए पाचन तंत्र की स्थिति का पता लगाया जा सकता है।

इस समस्या का समाधान केवल दर्द निवारक दवा लेना नहीं है, बल्कि पाचन तंत्र को बेहतर बनाना जरूरी है। समय पर भोजन करना, हल्का और संतुलित आहार लेना, पर्याप्त पानी पीना और तनाव को नियंत्रित रखना काफी मददगार साबित हो सकता है। बार-बार होने वाले सिरदर्द को सिर्फ “सिर में गैस चढ़ गई” कहकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। समय रहते ध्यान न देने पर यह आगे चलकर गंभीर परेशानी बन सकता है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी विभिन्न शोध और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए योग्य डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।

संगठित और सजग हो हिंदू समाज- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन जी भागवत

लखनऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत ने कहा कि हिंदू समाज को संगठित और सशक्त होने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि “हमें किसी से भय नहीं है, लेकिन सजग रहना आवश्यक है।” वे निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक को संबोधित कर रहे थे।

जनसंख्या और मतांतरण पर चिंता

अपने संबोधन में उन्होंने हिंदुओं की घटती जनसंख्या पर चिंता व्यक्त की और लालच अथवा दबाव में होने वाले मतांतरण पर रोक लगाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि जो लोग पुनः हिंदू धर्म में लौटते हैं, उनका सम्मान और समुचित ध्यान रखना भी समाज की जिम्मेदारी है। बढ़ती घुसपैठ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अवैध घुसपैठियों की पहचान कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि परिवारों में संतुलित जनसंख्या वृद्धि पर विचार होना चाहिए। वैज्ञानिकों के हवाले से उन्होंने कहा कि यदि किसी समाज में औसत जन्मदर तीन से कम होती है तो दीर्घकाल में वह समाज कमजोर हो सकता है। इस विषय पर नवदंपतियों को जागरूक करने की आवश्यकता बताई।

सद्भाव और समन्वय पर जोर

डॉ. भागवत ने कहा कि भेदभाव का कारण सद्भाव की कमी है। “हम सब एक देश और एक मातृभूमि के पुत्र हैं।” उन्होंने कहा कि सनातन विचारधारा मूलतः सद्भाव और समन्वय की विचारधारा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि विरोधियों को मिटाने का भाव संघ नहीं रखता, बल्कि समन्वय और संवाद के माध्यम से आगे बढ़ने में विश्वास करता है। “संघर्ष नहीं, समन्वय से दुनिया आगे बढ़ती है,” उन्होंने कहा।

मातृशक्ति की भूमिका

सरसंघचालक ने परिवार व्यवस्था में मातृशक्ति की केंद्रीय भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में महिला को शक्ति स्वरूपा माना गया है। उन्होंने महिलाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

कानून का पालन आवश्यक

यूजीसी गाइडलाइन से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और उसका पालन होना चाहिए। यदि कोई कानून अनुचित प्रतीत होता है तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से उसे बदला जा सकता है।

उन्होंने कहा कि जातियां संघर्ष का कारण न बनें। समाज में यदि अपनेपन का भाव विकसित होगा तो कई समस्याएं स्वतः समाप्त हो जाएंगी।

विश्व को दिशा देगा भारत

डॉ. भागवत ने कहा कि भारत निकट भविष्य में विश्व का मार्गदर्शन करेगा और वैश्विक समस्याओं के समाधान भारतीय चिंतन में निहित हैं।

नियमित सद्भाव बैठकों का आह्वान

उन्होंने बस्ती स्तर पर नियमित सामाजिक सद्भाव बैठकों के आयोजन का आह्वान करते हुए कहा कि आपसी संवाद से गलतफहमियां दूर होती हैं। रूढ़ियों को त्यागकर सज्जन शक्ति को समाज में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

विदेशी शक्तियों को लेकर सावधानी

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि कुछ विदेशी शक्तियां भारत की सामाजिक एकता के विरुद्ध योजनाएं बना सकती हैं, इसलिए समाज को सतर्क और संगठित रहना होगा।

कार्यक्रम में सिख, बौद्ध, जैन समाज के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के सदस्य उपस्थित रहे। बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई।

लखनऊ में मोहन भागवत का आह्वान: सभी हिन्दुओं के लिए खुले हों मंदिर, कुआँ और श्मशान

लखनऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने कहा है कि मंदिर, कुआँ और श्मशान सभी हिन्दुओं के लिए बिना किसी भेदभाव के खुले होने चाहिए। वे निराला नगर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर के माधव सभागार में आयोजित “कार्यकर्ता कुटुम्ब मिलन” कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

सामाजिक समरसता पर जोर

सरसंघचालक ने कहा कि सामाजिक समरसता केवल भाषणों से नहीं, बल्कि व्यवहार से स्थापित होती है। संघ पूरे हिन्दू समाज को एक मानता है, इसलिए व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर मेलजोल बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संघ के कुटुम्ब में जात-पात का भेद नहीं है और यही भावना समाज में भी विकसित की जानी चाहिए।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि जो वर्ग संघ के निकट नहीं है, उनके पास आत्मीयता से पहुँचा जाए और संबंधों का विस्तार चौराहे से लेकर परिवार तक किया जाए।

करियर की नई परिभाषा

मोहन भागवत जी ने कहा कि बच्चों को यह समझाना होगा कि करियर केवल अधिक कमाने और उपभोग तक सीमित नहीं है। सच्चा करियर कमाने से अधिक बाँटने में है। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को ऐसे संस्कार दें जिससे वे समाज और राष्ट्र के लिए जीना सीखें।

उनका कहना था कि विद्या और धन का उपयोग देशहित में होना चाहिए। “मेरा देश पहले है” — यह भाव हर परिवार में विकसित होना चाहिए।

परिवार को बताया समाज की इकाई

सरसंघचालक ने कहा कि समाज की मूल इकाई व्यक्ति नहीं, बल्कि परिवार है। सामाजिक व्यवहार का परीक्षण परिवार में ही होता है। उन्होंने मातृभाषा के ज्ञान, अनुशासन, प्रमाणिकता और कुटुम्ब गौरव के महत्व पर भी बल दिया।

उन्होंने सुझाव दिया कि बस्ती और शाखा स्तर पर 70 से 100 परिवारों के कुटुम्ब मिलन कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि सामाजिक समरसता को व्यवहार में उतारा जा सके।

तकनीक के अनुशासित उपयोग की आवश्यकता

अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि तकनीक को रोका नहीं जा सकता, लेकिन उसका उपयोग अनुशासन में होना चाहिए। स्क्रीन टाइम निर्धारित होना चाहिए और नई पीढ़ी को एआई, मोबाइल, टीवी और फिल्मों के संभावित दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करना आवश्यक है।

“हिन्दुस्थान हिन्दू राष्ट्र है”

मोहन भागवत जी ने कहा कि हिन्दुस्थान हिन्दू राष्ट्र है और सभी हिन्दू परस्पर सहोदर हैं। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक स्वीकृति का उल्लेख करते हुए कहा कि यह विषय नई पीढ़ी तक पहुँचाना चाहिए, ताकि उन्हें अपनी पहचान और विरासत का बोध हो सके।

उन्होंने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि संघ एक “चिरतरुण संगठन” है और युवाओं की सक्रिय भागीदारी इसकी विशेषता है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक और उनके परिवारजन उपस्थित रहे।

भाजपा विधायक द्वारा आयोजित निःशुल्क रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा : सरोजनीनगर से 54वां जत्था अयोध्या धाम के लिए रवाना, तीन वर्षों में 8,100 से अधिक श्रद्धालुओं को मिला दर्शन का अवसर

लखनऊ : सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र से मंगलवार को 54वीं निःशुल्क ‘रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा’ ग्राम शिवरी से श्रद्धालुओं को लेकर अयोध्या धाम के लिए रवाना हुई। इस पहल का संचालन क्षेत्रीय विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के नेतृत्व में किया जा रहा है। आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

ग्राम शिवरी से रवाना हुआ श्रद्धालुओं का दल

तारा शक्ति केंद्र की संचालिका श्रीमती कुसुमा के अनुरोध पर आयोजित इस यात्रा में ग्राम शिवरी से 100 से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम भेजा गया। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए श्रीराम लला के मंदिर, हनुमानगढ़ी तथा अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन की व्यवस्था की गई।

रवानगी से पूर्व सभी श्रद्धालुओं का सम्मान शाल और पटका पहनाकर किया गया। आयोजकों के अनुसार यात्रा के दौरान भोजन, जलपान, स्वास्थ्य सुविधा और विश्राम की व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी। वापसी पर श्रद्धालुओं को प्रसाद, धार्मिक ग्रंथ और अंगवस्त्र भेंट किए गए।

तीन वर्षों से जारी पहल

यह यात्रा सितंबर 2022 से निरंतर आयोजित की जा रही है। आयोजकों के अनुसार अब तक 54 निःशुल्क यात्राओं के माध्यम से लगभग 8,100 ग्रामीण क्षेत्रों के बुजुर्गों और महिलाओं को अयोध्या धाम के दर्शन कराए जा चुके हैं।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने इस अवसर पर कहा कि यह पहल उन लोगों तक आस्था का अवसर पहुँचाने का प्रयास है, जो आर्थिक या अन्य कारणों से अयोध्या की यात्रा नहीं कर पाते। उन्होंने इसे सेवा और श्रद्धा से जुड़ी सामाजिक पहल बताया।

स्थानीय स्तर पर इस यात्रा को जनसहभागिता और धार्मिक आस्था से जुड़ी पहल के रूप में देखा जा रहा है। कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित वातावरण में संपन्न हुआ।

“स्वस्थ नागरिक ही स्वस्थ राष्ट्र की नींव”- सरोजनी नगर विधायक की मौजूदगी में मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यशाला संपन्न: बढ़ती गैर-संचारी बीमारियों पर चिंता, संतुलित जीवनशैली और समय पर जांच को बताया आवश्यक

लखनऊ। सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य जागरूकता और सकारात्मक जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ द्वारा हेल्थ केयर ट्रस्ट के सहयोग से ‘पॉजिटिव थिंकिंग, हेल्दी लाइफ’ विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि किसी भी विकसित राष्ट्र की आधारशिला उसके स्वस्थ नागरिक होते हैं। यदि भारत को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है, तो स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता देना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि उपचार से अधिक महत्वपूर्ण है – जागरूकता, रोकथाम और समय पर जांच।

गैर-संचारी रोगों (NCDs) पर जताई चिंता

डॉ. सिंह ने बढ़ती गैर-संचारी बीमारियों (NCDs) के आंकड़ों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विभिन्न अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार वर्ष 1990 में जहां इन रोगों का अनुपात लगभग 37 प्रतिशत था, वहीं वर्तमान में यह 60 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। उन्होंने बताया कि मधुमेह के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है तथा हृदय संबंधी अनेक मृत्यु के मामले 70 वर्ष की आयु से पहले सामने आ रहे हैं।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वैश्विक आर्थिक आकलनों के अनुसार वर्ष 2012 से 2030 के बीच भारत को NCDs के कारण भारी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार इन बीमारियों से उत्पादकता में कमी, उपचार व्यय में वृद्धि और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न होती हैं, जो राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डालती हैं।

सरोजनीनगर में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार

अपने संबोधन में डॉ. सिंह ने कहा कि सरोजनीनगर क्षेत्र में संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI), लोकबंधु राज नारायण संयुक्त चिकित्सालय, अपोलो हॉस्पिटल्स, मेदांता, वेलसन हॉस्पिटल, टेंडर पाम हॉस्पिटल तथा वृंदावन योजना में निर्माणाधीन 900 बेड के मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल जैसे संस्थानों की उपस्थिति इस क्षेत्र को राज्य के प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र के रूप में स्थापित कर रही है।

उन्होंने कहा कि यह चिकित्सा क्षेत्र में बढ़ते निवेश, आधारभूत संरचना के विकास और नागरिकों के बढ़ते विश्वास का संकेत है।

जीवनशैली में सुधार पर जोर

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि केवल बड़े अस्पतालों का निर्माण पर्याप्त नहीं है, बल्कि नागरिकों को स्वयं भी स्वस्थ जीवनशैली अपनानी होगी। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान और समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण ही गैर-संचारी रोगों से बचाव के प्रभावी उपाय हैं।

कार्यक्रम में मैक्स लखनऊ के निदेशक प्रमित मिश्रा, हेल्थ केयर ट्रस्ट के अध्यक्ष सरित सिंह, डॉ. देबज्योति धर, डॉ. प्रीति शर्मा, आशीष शर्मा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति एवं बड़ी संख्या में प्रतिभागी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का समापन सकारात्मक संदेश के साथ हुआ, जिसमें स्वास्थ्य जागरूकता को जन-आंदोलन बनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।