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युवाओं को विरासत से जोड़ने की अनूठी पहल, लखनऊ में ‘यूथ हेरिटेज लीडरशिप प्रोग्राम’ का सफल आयोजन

छतर मंजिल से जनरल कोठी तक शैक्षणिक भ्रमण, छात्रों ने जाना ऐतिहासिक धरोहरों का महत्व

70 विद्यार्थियों की सहभागिता, विरासत संरक्षण के लिए नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर जोर

ऐतिहासिक धरोहरों पर गर्व करें युवा, संरक्षण में निभाएं सक्रिय भूमिका: जयवीर सिंह

विरासत केवल अतीत नहीं, हमारी पहचान और भविष्य की दिशा भी है: जयवीर सिंह

लखनऊ, 21 फरवरी 2026

उत्तर प्रदेश में सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और युवाओं में ऐतिहासिक चेतना विकसित करने के उद्देश्य से एक दिवसीय “यूथ हेरिटेज लीडरशिप प्रोग्राम” का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री की प्रेरणा से उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय (संस्कृति विभाग) द्वारा इतिहास संस्थान, नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को भारतीय विरासत के महत्व से परिचित कराना और उन्हें सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय नेतृत्वकर्ता के रूप में तैयार करना था।

ऐतिहासिक स्थलों का शैक्षणिक भ्रमण

कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागी छात्रों को लखनऊ की प्रमुख ऐतिहासिक धरोहरों का भ्रमण कराया गया। विद्यार्थियों ने तथा का दौरा किया। भ्रमण के दौरान इन स्मारकों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, स्थापत्य शैली, सांस्कृतिक महत्व और संरक्षण संबंधी पहलुओं की जानकारी सरल और संवादात्मक शैली में दी गई।

विशेषज्ञों ने बताया कि छतर मंजिल अवध काल की स्थापत्य कला का अनूठा उदाहरण है, जबकि कैसरबाग परिसर लखनऊ की नवाबी विरासत का प्रतीक माना जाता है। छात्रों ने इन इमारतों की वास्तु संरचना, ऐतिहासिक घटनाओं और वर्तमान संरक्षण प्रयासों को प्रत्यक्ष रूप से समझा, जिससे उनकी ऐतिहासिक दृष्टि और गहरी हुई।

विरासत की परिभाषा और युवाओं की भूमिका

कार्यक्रम के दौरान निदेशक सुश्री रेनू द्विवेदी ने विद्यार्थियों को विरासत की परिभाषा, स्वरूप और उसके सांस्कृतिक आयामों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विरासत केवल भौतिक इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि परंपराएं, भाषा, लोक कला और जीवन शैली भी इसका अभिन्न हिस्सा हैं। संवाद के माध्यम से छात्रों को यह समझाया गया कि सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

विद्यार्थियों को जागरूक, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा दी गई, ताकि वे भविष्य में विरासत संरक्षण से जुड़े अभियानों में सक्रिय योगदान दे सकें।

मंत्री का संदेश: विरासत से जुड़ाव ही असली उद्देश्य

इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कराना नहीं, बल्कि युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भावनात्मक रूप से जोड़ना है। उन्होंने कहा, “विरासत केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि हमारी पहचान और भविष्य की दिशा है। जब युवा अपनी विरासत पर गर्व करना सीखते हैं, तभी संरक्षण का भाव स्वाभाविक रूप से विकसित होता है।”

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं और समाज में जागरूकता फैलाएं।

70 छात्रों की सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में जय प्रकाश नारायण सर्वोदय बालक विद्यालय और जय प्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय के कक्षा 9वीं और 11वीं के लगभग 70 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इतिहास संस्थान से सुश्री सुयशा जी सहित पुरातत्व निदेशालय के अधिकारी, शिक्षकगण एवं विद्यालय स्टाफ भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

यह पहल न केवल विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक अनुभव सिद्ध हुई, बल्कि उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुई। युवाओं में जागरूकता और नेतृत्व क्षमता विकसित करने वाला यह कार्यक्रम भविष्य में विरासत संरक्षण की मजबूत नींव रखने का प्रयास माना जा रहा है।

संपर्क सूत्र – अभिषेक सिंह

युवा पर्यटन अंतर्गत शहीद चंद्रशेखर आजाद पक्षी विहार, नवाबगंज (उन्नाव) का कराया गया शैक्षणिक भ्रमण

  • प्रकृति की पाठशाला में युवा कदम, शहीद चंद्रशेखर आजाद पक्षी विहार में छात्रों ने पढ़ा जैव-विविधता और संरक्षण का पाठ
  • नेचर ट्रेल्स से वॉच टॉवर तक, पर्यटन संग पर्यावरण संरक्षण की राह पर बढे विद्यार्थी
  • ईको-टूरिज्म से सशक्त हो रही पर्यावरण चेतना, भावी पीढ़ी बनेगी प्रकृति संरक्षण की अग्रदूत- जयवीर सिंह

खनऊ, 21 फरवरी 2026 : पर्यटन एवं प्राकृतिक धरोहरों से युवाओं को जोड़कर उन्हें पर्यावरण संरक्षण का सक्रिय भागीदार बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड (यूपीईटीडीबी) लगातार सार्थक पहल कर रहा है। इसी क्रम में 21 फरवरी 2026 को ‘युवा पर्यटन’ के अंतर्गत ईज माय ट्रिप के सहयोग से पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, एसजीपीजीआई, लखनऊ के लगभग 60 विद्यार्थियों को शहीद चंद्रशेखर आजाद पक्षी विहार (उन्नाव) का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया।

उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘इस तरह के भ्रमण कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों को जैव विविधता, आर्द्रभूमि संरक्षण और ईको-टूरिज्म के महत्व से अवगत कराना है। साथ ही, छात्रों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है, ताकि वे कक्षा की पढ़ाई के साथ-साथ वास्तविक प्राकृतिक परिवेश में सीखने का अनुभव प्राप्त कर सकें।’

प्रवासी पक्षियों का प्रमुख आश्रय स्थल
मंत्री ने बताया कि ‘शहीद चंद्रशेखर आजाद पक्षी विहार अंतरराष्ट्रीय महत्व का वेटलैंड है। यह राज्य के 11 रामसर स्थलों में से एक है। शांत एवं हरे-भरे वातावरण में स्थित यह पक्षी विहार पक्षी प्रेमियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षक स्थल है। सर्दियों के मौसम में यह विभिन्न प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों का प्रमुख आश्रय स्थल बन जाता है।’

नेचर ट्रेल्स भ्रमण..वॉच टॉवर और व्यू-शेड्स से अवलोकन 
शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने झील के किनारे विकसित नेचर ट्रेल्स पर भ्रमण किया तथा वॉच टॉवर और व्यू-शेड्स से पक्षियों एवं वन्यजीवों का अवलोकन किया। यह अनुभव न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता भी विकसित हुई।

प्रकृति से जुड़ने का अनूठा अनुभव
पक्षी विहार परिसर में प्रकृति, ज्ञान और मनोरंजन का अद्भुत संगम देखने को मिला, जहां इंटरप्रिटेशन सेंटर ने विद्यार्थियों को जैव-विविधता की रोचक जानकारी से अवगत कराया। वहीं, कैफेटेरिया ने भ्रमण को नया आयाम दिया। इस दौरान बच्चों के उत्साह और खिलखिलाहट से पार्क गूंज उठा। शैक्षणिक भ्रमण के दौरान छात्र-छात्राओं ने प्रकृति से जुड़ने का अनूठा अनुभव प्राप्त किया।

भावी पीढ़ी को प्रकृति से जोड़ने का प्रयास- मंत्री 
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘उत्तर प्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड का प्रयास है कि आने वाली पीढ़ी को प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा जाए। इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों में जागरूकता, जिम्मेदारी एवं सतत पर्यटन की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह भ्रमण विद्यार्थियों के लिए न केवल एक यादगार अनुभव रहा, बल्कि प्रकृति से सीखने और उससे जुड़ने का एक सशक्त माध्यम भी बना।’

यूपी बजट सत्र खत्म : “लखनऊ दर्शन” बस में पुनः शामिल हुई विधानसभा की सैर

लखनऊ, 21 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश का बजट सत्र समाप्त होते ही राजधानी के पर्यटन प्रेमियों के लिए राहत भरी खबर आई है। अब ‘लखनऊ दर्शन’ बस सेवा में एक बार फिर से का भ्रमण शामिल कर दिया गया है। बजट सत्र के दौरान सुरक्षा कारणों से विधानसभा की सैर अस्थायी रूप से रोक दी गई थी।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने जानकारी देते हुए कहा कि विधानसभा भवन का पुनः शामिल होना ‘लखनऊ दर्शन’ टूर को और भी आकर्षक बनाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार पर्यटन विस्तार और सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

रिंग थियेटर (जीपीओ): जहां गूंजता है काकोरी कांड का इतिहास

‘लखनऊ दर्शन’ के प्रमुख स्थलों में भी शामिल है, जिसे ब्रिटिश काल में रिंग थियेटर के नाम से जाना जाता था।

9 अगस्त 1925 को हुए काकोरी कांड के बाद अंग्रेजी हुकूमत ने करीब 40 क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर यहीं विशेष अदालत में मुकदमा चलाया। लगभग 10 महीने तक चली सुनवाई के बाद राम प्रसाद बिस्मिल, राजेंद्र नाथ लाहिड़ी, ठाकुर रोशन सिंह और अशफाक उल्ला खान को फांसी की सजा सुनाई गई, जबकि अन्य क्रांतिकारियों को आजीवन कारावास दिया गया।

आज भी यहां मौजूद म्यूजियम और ऐतिहासिक निशानियां पर्यटकों को उस दौर की याद दिलाती हैं।

इलेक्ट्रिक डबल डेकर से राजधानी की सैर

(UPSTDC) की ‘लखनऊ दर्शन’ इलेक्ट्रिक डबल डेकर बस सेवा प्रतिदिन दो पालियों – सुबह और शाम – में से संचालित होती है।

यह बस राजधानी के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक स्थलों का भ्रमण कराती है।

  • वयस्कों के लिए किराया: ₹500
  • बच्चों के लिए किराया: ₹400
  • टिकट: आधिकारिक वेबसाइट या प्रस्थान स्थल से उपलब्ध
  • प्रशिक्षित टूर गाइड द्वारा जानकारी
  • पर्यावरण अनुकूल और आरामदायक सफर

इतिहास और लोकतंत्र से रूबरू होने का मौका

विधानसभा भवन के पुनः शामिल होने से पर्यटक अब न केवल नवाबी इतिहास, बल्कि प्रदेश की लोकतांत्रिक परंपरा को भी करीब से समझ सकेंगे।

पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, “विधानसभा भवन प्रदेश की पहचान है। इसके दोबारा टूर में शामिल होने से पर्यटक इतिहास के साथ लोकतंत्र की कार्यप्रणाली को भी समझ पाएंगे।”

लखनऊ दर्शन बस सेवा राजधानी को जानने-समझने का एक सशक्त माध्यम बनती जा रही है, जहां इतिहास, संस्कृति और लोकतंत्र एक साथ सफर करते नजर आते हैं।

लखनऊ में शादी बनी मातम : गोमतीनगर में हर्ष फायरिंग से 50 वर्षीय व्यक्ति की मौत, आरोपी फरार

लखनऊ के गोमतीनगर थाना क्षेत्र में एक शादी समारोह के दौरान हुई हर्ष फायरिंग ने एक परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। विराटखण्ड-1 स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में आयोजित विवाह समारोह में चली गोली से 50 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिरकार प्रतिबंध और सख्त निर्देशों के बावजूद हर्ष फायरिंग पर लगाम क्यों नहीं लग पा रही है?

क्या है पूरा मामला?

दिनांक 20/21 फरवरी 2026 की मध्य रात्रि लगभग 01:30 बजे डायल-112 के माध्यम से गोमतीनगर पुलिस को सूचना मिली कि एक शादी समारोह में हर्ष फायरिंग के दौरान एक व्यक्ति को गोली लग गई है। घायल को तत्काल मैक्स हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।

मृतक की पहचान सुनील यादव (50 वर्ष) पुत्र स्वर्गीय ठाकुर प्रसाद यादव, निवासी चांदंज, थाना अलीगंज (नियर कपूरथला चौराहा), लखनऊ के रूप में हुई है। वह अपने रिश्तेदार के विवाह समारोह में शामिल होने आए थे।

किसने की फायरिंग?

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि समारोह में मौजूद शाश्वत सिंह नामक व्यक्ति द्वारा कथित रूप से हर्ष फायरिंग की गई थी। इसी दौरान गोली सुनील यादव को जा लगी। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया।

पुलिस उपायुक्त (पूर्वी) के निर्देश पर आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दो विशेष टीमों का गठन किया गया है, जो संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। हालांकि, अब तक आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर है।

बड़ा सवाल: प्रतिबंध के बावजूद कैसे हो रही है हर्ष फायरिंग?

प्रदेश में हर्ष फायरिंग पर पहले से प्रतिबंध है। सुप्रीम कोर्ट और प्रशासनिक स्तर पर कई बार स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं कि शादी समारोहों में हथियारों का प्रदर्शन और फायरिंग दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद राजधानी लखनऊ में खुलेआम हथियार लहराना और फायरिंग करना कई गंभीर सवाल खड़े करता है-

  • क्या समारोह आयोजकों ने हथियारों की जांच की?
  • क्या स्थानीय पुलिस को समारोह की पूर्व सूचना थी?
  • क्या देर रात तक चल रहे समारोहों की निगरानी की जा रही थी?
  • लाइसेंसी हथियार का दुरुपयोग हुआ या अवैध हथियार इस्तेमाल हुआ?

स्थानीय पुलिस की अनदेखी या व्यवस्था की ढिलाई?

गोमतीनगर जैसे पॉश इलाके में इस तरह की घटना होना प्रशासनिक सतर्कता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। अक्सर देखा गया है कि शादी समारोहों में हथियारों का प्रदर्शन ‘भौकाल’ दिखाने के लिए किया जाता है, लेकिन इसकी रोकथाम के लिए न तो आयोजकों पर सख्ती दिखाई देती है और न ही पुलिस द्वारा पूर्व निगरानी की ठोस व्यवस्था।

यदि पुलिस की गश्त और खुफिया निगरानी प्रभावी होती तो क्या यह घटना टाली जा सकती थी? क्या लाइसेंसी हथियारों की मॉनिटरिंग व्यवस्था कागजों तक सीमित है?

कानूनी स्थिति

फिलहाल मृतक के परिजनों द्वारा थाना गोमतीनगर में प्रार्थनापत्र नहीं दिया गया है। पुलिस के अनुसार, प्रार्थनापत्र प्राप्त होने पर सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जाएगी। शव का पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।

हालांकि, सवाल यह भी है कि जब घटना स्पष्ट रूप से सामने है, तो क्या पुलिस को स्वतः संज्ञान लेकर मुकदमा दर्ज नहीं करना चाहिए?

हर्ष फायरिंग: ‘जश्न’ से ‘जनलेवा’ तक

हर्ष फायरिंग की घटनाएं पहले भी प्रदेश में कई जिंदगियां निगल चुकी हैं। हर बार घटना के बाद सख्ती की बात होती है, लेकिन कुछ समय बाद फिर वही ढर्रा शुरू हो जाता है। यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि कानून के खुलेआम उल्लंघन का परिणाम है।

जब तक-

  • समारोह आयोजकों की जवाबदेही तय नहीं होगी
  • लाइसेंसी हथियारों के दुरुपयोग पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी

तब तक ‘भौकाल’ दिखाने की यह प्रवृत्ति मासूम जिंदगियों को लीलती रहेगी।

गोमतीनगर की यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि व्यवस्था की कमियों का आईना है। एक परिवार ने अपने सदस्य को खो दिया, और आरोपी अभी भी फरार है। अब देखने वाली बात यह होगी कि पुलिस कितनी शीघ्र आरोपी को गिरफ्तार कर सख्त कार्रवाई करती है और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।

लखनऊ में हर्ष फायरिंग का यह मामला एक बार फिर चेतावनी है-
जश्न में चली एक गोली, हमेशा के लिए एक जिंदगी छीन लेती है।

डिजिटल युग की युवा पीढ़ी ने परंपरा से जोड़ा संवाद, भारत-नेपाल मैत्री महोत्सव 2026 में सांस्कृतिक एकता और पर्यटन संवर्धन का सशक्त माध्यम बना- जयवीर सिंह

  • लोक नृत्यों की अनुगूंज से प्रगाढ़ हुए भारत-नेपाल संबंध, पूर्वांचल और तराई में उमड़ा जनसैलाब
  • झगड़, कुमारी, फरुवाही और बधावा नृत्य ने बांधा समां, साझा विरासत का सजीव मंचन
  • 28 फरवरी तक चलेगा सांस्कृतिक सेतु का यह महापर्व
  • पूर्वांचल के आठ जिलों में सजा मित्रता का मंच, भारत-नेपाल महोत्सव बना जन-जन का उत्सव

लखनऊ : भारत और नेपाल के ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सामाजिक रिश्तों को नई ऊर्जा प्रदान करता ‘भारत-नेपाल मैत्री महोत्सव 2026’ इन दिनों पूर्वांचल और तराई की धरती पर सांस्कृतिक सौहार्द का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। 16 फरवरी से प्रारंभ हुआ यह महोत्सव अब अपने मध्य चरण में पहुंच चुका है और जनभागीदारी के उत्साह से सराबोर है। दोनों देशों के कलाकारों की लोक प्रस्तुतियों ने न केवल दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि साझा सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत रूप से सामने रखा।

महोत्सव में प्रस्तुत झगड़ जनजातीय लोक नृत्य, कुमारी नृत्य, फरुवाही लोक नृत्य तथा बधावा लोक नृत्य ने पारंपरिक कला और आधुनिक सोच के सुंदर संगम को प्रदर्शित किया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट हुआ कि भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक संबंध केवल परंपरा तक सीमित नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों को भी जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं।

उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि ‘भारत-नेपाल मैत्री महोत्सव 2026’ दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल के संबंध केवल कूटनीतिक दायरे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक निकटता और भावनात्मक जुड़ाव की गहरी नींव पर आधारित हैं। यह महोत्सव पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी नई दिशा दे रहा है। पूर्वांचल और तराई के आठ जिलों में आयोजित इस आयोजन में ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ (ओडीओपी) प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है, जिससे स्थानीय उत्पादों और शिल्प को नया मंच मिल रहा है।

रचनात्मक गतिविधियों से सशक्त संदेश

28 फरवरी तक चलने वाले इस महोत्सव में स्काउट एंड गाइड के बच्चों द्वारा प्रस्तुत योग कार्यक्रम, भारत-नेपाल मैत्री विषय पर चित्रकला और रंगोली प्रतियोगिताएं विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने और मित्रता के संदेश को आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिल रही है। नेपाल से आए कलाकारों की मनोहारी प्रस्तुतियों ने मंच को जीवंत बना दिया, जिससे भारत-नेपाल मैत्री केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि आत्मीयता का वास्तविक उत्सव बन गई।

मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि डिजिटल युग में पली-बढ़ी नई पीढ़ी जब अपनी अभिव्यक्ति को परंपरा और संस्कृति के रंगों से सजाती है, तब यह आयोजन और भी सार्थक हो जाता है। पूर्वांचल और तराई की धरती पर युवा शक्ति की भागीदारी ने इस महोत्सव को नई पहचान दी है।

‘रोटी-बेटी’ रिश्ते की सजीव अभिव्यक्ति

कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत में आयोजित कार्यक्रमों में धोबिया लोकनृत्य और प्रभावशाली नुक्कड़ नाटकों ने भारत-नेपाल के ‘रोटी-बेटी’ संबंधों को भावनात्मक गहराई से प्रस्तुत किया। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया और यह संदेश दिया कि दोनों देशों के बीच का यह आत्मीय संबंध सदियों पुराना और अटूट है।

महोत्सव के माध्यम से यह भी स्पष्ट हुआ कि भारत और नेपाल की पारंपरिक मित्रता केवल सीमाओं तक सीमित नहीं, बल्कि साझा संस्कृति, परंपराओं और पारिवारिक रिश्तों से जुड़ी है। हर वर्ष इसी उत्साह, उल्लास और पारस्परिक सम्मान के साथ इस महोत्सव को मनाने का संकल्प भी दोहराया गया।

भारत-नेपाल मैत्री महोत्सव 2026 ने यह सिद्ध कर दिया है कि सांस्कृतिक संवाद और जनभागीदारी के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय संबंधों को और अधिक मजबूत तथा सार्थक बनाया जा सकता है।