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‘दंगल’ की बबीता बनने से पहले क्या करती थीं सान्या मल्होत्रा? जानें दिल्ली से मुंबई तक का सफर

‘दंगल’ में बबीता फोगाट का किरदार निभाकर पहचान बनाने वाली सान्या मल्होत्रा आज इंडस्ट्री का जाना-पहचाना चेहरा हैं। 25 फरवरी 1992 को दिल्ली में जन्मीं सान्या ने अपनी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई राजधानी में ही पूरी की। लेकिन फिल्मों में आने से पहले उनका सपना कुछ और था।


🎬 एक्टिंग नहीं, डांस था पहला प्यार

सान्या मल्होत्रा एक ट्रेंड बैले और कंटेम्पररी डांसर हैं। उन्होंने एक्टिंग से पहले डांस में करियर बनाने की कोशिश की। वह पॉपुलर रियलिटी शो डांस इंडिया डांस में भी नजर आई थीं। हालांकि वह टॉप 100 तक ही पहुंच सकीं।

इसके बाद उन्होंने मुंबई का रुख किया। यहां उन्होंने ऑडिशन देना शुरू किया और साथ ही कैमरा पर्सन्स को असिस्ट भी किया।


🌟 मुकेश छाबड़ा ने दिया बड़ा मौका

मुंबई में कुछ विज्ञापनों में काम करने के दौरान मशहूर कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा की नजर उन पर पड़ी। यहीं से सान्या के करियर को नई दिशा मिली।

फिर निर्देशक नितेश तिवारी ने उन्हें फिल्म दंगल के लिए चुन लिया। यह उनकी डेब्यू फिल्म थी, जिसमें उन्होंने बबीता फोगाट का किरदार निभाया। फिल्म में आमिर खान भी मुख्य भूमिका में थे।

दिलचस्प बात यह है कि ‘दंगल’ के बाद भी सान्या ने फिल्म सीक्रेट सुपरस्टार के गाने ‘सेक्सी बलिये’ को कोरियोग्राफ किया था।


🎥 सान्या का फिल्मी सफर

‘दंगल’ के बाद सान्या ने लगातार अलग-अलग किरदारों से दर्शकों का दिल जीता। उनकी प्रमुख फिल्में हैं:

  • पटाखा
  • बधाई हो
  • शकुंतला देवी
  • लूडो
  • पगलैट
  • मीनाक्षी सुंदरेशंवर
  • लव होस्टल
  • मिसेज

आने वाले समय में वह फिल्म बंदर में नजर आएंगी, जिसका निर्देशन अनुराग कश्यप कर रहे हैं। फिल्म में बॉबी देओल भी अहम भूमिका में होंगे।


दिल्ली की एक ट्रेंड डांसर से बॉलीवुड की दमदार एक्ट्रेस बनने तक का सान्या मल्होत्रा का सफर मेहनत, लगन और लगातार सीखते रहने की मिसाल है।

सर्वाइकल कैंसर रोकथाम की दिशा में बड़ा फैसला: 14 साल की बेटियों को मुफ्त HPV टीका

महिलाओं की सेहत को सुरक्षित बनाने की दिशा में भारत सरकार ने एक अहम पहल की है। देशभर में 14 साल की लड़कियों को मुफ्त HPV वैक्सीन लगाने का अभियान शुरू किया जा रहा है। यह कदम सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए उठाया गया है, जो भारत में महिलाओं के बीच तेजी से बढ़ता स्वास्थ्य खतरा बना हुआ है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, हर साल करीब 1.15 करोड़ लड़कियां 14 वर्ष की आयु में पहुंचती हैं, जिन्हें इस राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत कवर करने की योजना है।


भारत में सर्वाइकल कैंसर की स्थिति

भारत में सर्वाइकल कैंसर के मामलों की वैश्विक हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत है। अनुमान है कि हर साल करीब 80 हजार नए मामले सामने आते हैं और 42 हजार से ज्यादा महिलाओं की मौत इस बीमारी से हो जाती है।

इस कैंसर के लगभग सभी मामलों के पीछे ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) का लगातार बना रहने वाला संक्रमण जिम्मेदार होता है। खासकर HPV के टाइप 16 और 18 को उच्च जोखिम वाला माना जाता है, जो अधिकांश मामलों से जुड़े हैं।


क्वाड्रिवेलेंट वैक्सीन कैसे करती है काम?

राष्ट्रीय कार्यक्रम में इस्तेमाल की जा रही क्वाड्रिवेलेंट वैक्सीन:

  • HPV टाइप 16 और 18 से सुरक्षा देती है (जो सर्वाइकल कैंसर के प्रमुख कारण हैं)
  • HPV टाइप 6 और 11 से भी बचाव करती है (जो जननांग मस्सों का कारण बनते हैं)

डॉक्टरों के अनुसार, वायरस के संपर्क में आने से पहले वैक्सीन लगाने पर लगभग 90–97 प्रतिशत तक सुरक्षा मिल सकती है। रिसर्च बताती है कि टीकाकरण के बाद 12 से 15 साल तक मजबूत इम्यूनिटी बनी रहती है।


किन आयु वर्ग के लिए है वैक्सीन?

  • 9–14 वर्ष की लड़कियां: प्राथमिक लक्ष्य समूह
  • 15–26 वर्ष की महिलाएं: कैच-अप वैक्सीनेशन की सलाह
  • 27–45 वर्ष के पुरुष और महिलाएं: डॉक्टर की सलाह के बाद
  • 9–14 वर्ष के लड़के: संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए शामिल करने पर जोर

कमजोर इम्यून सिस्टम (जैसे HIV संक्रमित व्यक्ति) वाले लोगों को टीका लगवाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।


कितनी प्रभावी है HPV वैक्सीन?

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, HPV वैक्सीन दुनिया में सबसे ज्यादा अध्ययन की गई वैक्सीन में से एक है। जिन HPV प्रकारों को यह कवर करती है, उनके खिलाफ यह 90 प्रतिशत से अधिक प्रभावी पाई गई है।

सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में 24 घंटे निगरानी और आवश्यक चिकित्सा सहायता की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि सुरक्षा मानकों को मजबूत रखा जा सके और अभिभावकों का भरोसा बढ़े।


Disclaimer: यह जानकारी शोध अध्ययनों और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। टीकाकरण या किसी भी स्वास्थ्य निर्णय से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।

Health Tips:सिंथेटिक रंगों से स्किन, आंखों और फेफड़ों को कैसे होता है नुकसान? होली से पहले जान लें जरूरी सावधानियां

होली के मौके पर बाजार में मिलने वाले कई चमकीले रंग दिखने में आकर्षक जरूर होते हैं, लेकिन इनमें मौजूद सिंथेटिक केमिकल्स शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, इन रंगों में भारी धातुएं और इंडस्ट्रियल डाई मिलाए जाते हैं, जो त्वचा, आंखों और श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं।


🔴 स्किन पर असर

सिंथेटिक रंगों में सीसा (Lead), पारा (Mercury), क्रोमियम (Chromium) और सिलिका (Silica) जैसे तत्व पाए जा सकते हैं। इनके संपर्क में आने से:

  • त्वचा में जलन और खुजली
  • लाल चकत्ते
  • कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस
  • एक्जिमा का बढ़ना
  • त्वचा का रूखापन और संवेदनशीलता

बार-बार संपर्क से त्वचा पर लंबे समय तक निशान भी रह सकते हैं। जिन लोगों की स्किन पहले से संवेदनशील है, उनके लिए खतरा ज्यादा होता है।


👁️ आंखों के लिए खतरा

होली खेलते समय रंग आंखों में चले जाने से:

  • जलन और सूजन
  • लालपन
  • कंजंक्टिवाइटिस
  • कॉर्नियल एब्रेशन (कॉर्निया पर खरोंच)

रंगों में मौजूद एसिडिक या क्षारीय तत्व आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वालों में जोखिम ज्यादा होता है, क्योंकि पाउडर लेंस के पीछे फंस सकता है और संक्रमण का खतरा बढ़ा सकता है।


🌫️ फेफड़ों और सांस पर प्रभाव

सूखे रंग हवा में उड़कर सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। इनमें कीटनाशक, एस्बेस्टस या भारी धातुएं हो सकती हैं, जिससे:

  • अस्थमा अटैक
  • ब्रोंकाइटिस
  • घरघराहट
  • सीने में जकड़न
  • राइनाइटिस

अस्थमा या एलर्जी से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। अधिक मात्रा में रसायन शरीर में जाने से किडनी और लीवर पर भी असर पड़ सकता है।


🌿 सुरक्षित तरीके से कैसे मनाएं होली?

✔️ नेचुरल या हर्बल गुलाल का इस्तेमाल करें।
✔️ होली खेलने से पहले त्वचा और बालों पर तेल या मॉइश्चराइजर लगाएं।
✔️ फुल स्लीव कपड़े पहनें।
✔️ आंखों की सुरक्षा रखें और कॉन्टैक्ट लेंस न पहनें।
✔️ रंग लगने के तुरंत बाद साफ पानी से धो लें।
✔️ ज्यादा धूल और भीड़भाड़ वाली जगहों से बचें।


Disclaimer: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।

टी20 वर्ल्ड कप के दौरान बड़ा विवाद: इटली क्रिकेट के वरिष्ठ अधिकारी पर यौन उत्पीड़न के आरोप

टी20 वर्ल्ड कप 2026 के दौरान एक गंभीर विवाद सामने आया है। इटली क्रिकेट संघ के एक वरिष्ठ अधिकारी पर महिला खिलाड़ी के साथ कथित यौन उत्पीड़न के आरोप लगे हैं। मामले के सामने आते ही संबंधित अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है।

क्या हैं आरोप?

रिपोर्ट्स के अनुसार, इटली की महिला क्रिकेट टीम की एक सदस्य ने आरोप लगाया है कि अधिकारी ने उन्हें अनुचित तरीके से छुआ। इस मामले में पुलिस में पिछले वर्ष शिकायत दर्ज की गई थी।

इटली क्रिकेट संघ ने बयान जारी कर कहा है कि वह जांच में पूरा सहयोग करेगा और कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करेगा।

ऐतिहासिक उपलब्धि के बीच विवाद

इटली की टीम हाल ही में भारत में आयोजित टी20 वर्ल्ड कप 2026 में हिस्सा लेकर लौटी थी। टीम ने पहली बार इस टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई किया था, जो देश के क्रिकेट इतिहास में एक बड़ा मुकाम माना गया।

ग्रुप C में इटली का मुकाबला वेस्टइंडीज, इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और नेपाल से हुआ।

  • स्कॉटलैंड से 73 रन से हार
  • इंग्लैंड के खिलाफ कड़ी टक्कर, लेकिन 24 रन से हार
  • वेस्टइंडीज से 42 रन से हार
  • नेपाल को 10 विकेट से हराकर ऐतिहासिक जीत

इटली ने नेपाल के खिलाफ 124 रन का लक्ष्य बिना विकेट खोए हासिल किया, जो वर्ल्ड कप में उसकी पहली और यादगार जीत रही।

आगे क्या?

जहां एक ओर टीम के प्रदर्शन को सराहा जा रहा था, वहीं दूसरी ओर यह विवाद इटली क्रिकेट के लिए बड़ा झटका बनकर सामने आया है। अब सबकी नजर जांच और कानूनी कार्रवाई पर टिकी है।

‘ईरान पर हमला भारी पड़ेगा’, तेहरान की ट्रंप को चेतावनी; अब क्या करेगा अमेरिका?

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच तेहरान ने कड़ी चेतावनी दी है। ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने कहा कि अगर अमेरिका हमला करता है तो यह “जुआ खेलने जैसा” होगा और ईरान अपनी रक्षा योजनाओं के तहत जवाब देगा।

जिनेवा में वार्ता, डील को तैयार ईरान

26 फरवरी 2026 को जिनेवा में दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की वार्ता प्रस्तावित है। तख्त-रवांची ने कहा कि ईरान “जल्द से जल्द समझौता” करने को तैयार है और ईमानदारी से बातचीत में हिस्सा लेगा। साथ ही चेतावनी दी कि हमले की स्थिति में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकाने निशाने पर हो सकते हैं।

ट्रंप का रुख: पहले कूटनीति, पर सैन्य विकल्प खुला

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पहला विकल्प कूटनीति है, लेकिन जरूरत पड़ने पर सैन्य शक्ति का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

ईरान के भीतर विरोध और सरकार की चेतावनी

ईरान में छात्रों के विरोध प्रदर्शन की खबरों के बीच सरकार की प्रवक्ता फतेमेह मोहजेरानी ने कहा कि विरोध का अधिकार है, पर “रेड लाइंस” का सम्मान जरूरी है—जैसे राष्ट्रीय प्रतीक और पवित्र चीजें।

क्षेत्रीय समीकरण और मिसाइल चर्चा

रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन, ईरान को CM-302 सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल बेचने के करीब है, जिसकी मारक क्षमता लगभग 290 किमी बताई जाती है। इससे खाड़ी क्षेत्र में सामरिक संतुलन पर असर पड़ सकता है।

आगे क्या?

संकेत साफ हैं—दोनों पक्ष वार्ता का रास्ता खुला रखना चाहते हैं, लेकिन सैन्य विकल्प भी मेज पर है। जिनेवा वार्ता का नतीजा तय करेगा कि हालात टकराव की ओर बढ़ेंगे या किसी समझौते की दिशा में।