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“गोविंदा के अफेयर की खबरें पढ़ने को बेताब हूं”, जब Sunita Ahuja ने हंसते हुए कही थी ये मजेदार बात

बॉलीवुड स्टार Govinda और उनकी पत्नी Sunita Ahuja अक्सर अपनी निजी जिंदगी को लेकर सुर्खियों में रहते हैं। कुछ समय पहले गोविंदा के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की खबरें चर्चा में थीं, जिन पर दोनों ने अलग-अलग अंदाज में प्रतिक्रिया दी थी।

अफेयर की खबरों पर क्या बोली थीं सुनीता?

दरअसल, एक पुराना इंटरव्यू फिर से वायरल हो रहा है, जिसमें सुनीता ने बेहद मजाकिया अंदाज में अफेयर की खबरों पर प्रतिक्रिया दी थी। यह इंटरव्यू Simi Garewal के शो में हुआ था।

जब उनसे पूछा गया कि क्या गोविंदा के को-एक्ट्रेस के साथ लिंकअप की खबरों से वह परेशान होती हैं, तो सुनीता ने हंसते हुए कहा—
“मैं तो मैग्जीन खरीदती हूं ताकि पढ़ सकूं कि गोविंदा का लेटेस्ट अफेयर किसके साथ है। मुझे तो दुख होता है कि उनके बारे में कोई खबर ही नहीं आती। मैं उनके अफेयर की खबरें पढ़ने के लिए मरी जा रही हूं।”

गोविंदा ने भी दिया मजेदार जवाब

सुनीता की बात पर गोविंदा ने भी मजाक में कहा था, “मैं अच्छा एक्टर बन रहा हूं, क्योंकि मैं अपने अफेयर अच्छे से छुपा पा रहा हूं।”

जब सिमी गरेवाल ने पूछा कि क्या इसका मतलब है कि आप पकड़े नहीं जाएंगे? तो इस पर गोविंदा ने हंसते हुए कहा था, “कह नहीं सकता।”

‘वो फैमिली मैन हैं’

इसी इंटरव्यू में सुनीता ने साफ कहा था कि उन्हें इन बातों से टेंशन नहीं होती, क्योंकि वह जानती हैं कि गोविंदा एक फैमिली मैन हैं और अपने बच्चों, पत्नी और मां से बेहद प्यार करते हैं।

हालांकि हाल के दिनों में अफेयर की खबरों को लेकर गोविंदा ने एक इंटरव्यू में आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि उन पर आरोप लगना कोई नई बात नहीं है।

कुल मिलाकर, यह पुराना इंटरव्यू दिखाता है कि सुनीता आहूजा ने अफवाहों को हमेशा हल्के-फुल्के अंदाज में लिया और अपने रिश्ते में भरोसे को प्राथमिकता दी।

मास्क, बीमारी और खौफ: Delhi NCR की जहरीली हवा से बच्चों की मुस्कान पर संकट

राजधानी Delhi और आसपास के एनसीआर क्षेत्रों में बढ़ता वायु प्रदूषण अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य और स्वास्थ्य का संकट बन चुका है।

पर्यावरण संस्था Chintan Environmental Research and Action Group की हालिया रिपोर्ट “A Generation Under Siege” में सामने आया है कि जहरीली हवा बच्चों की सेहत, मानसिक स्थिति, पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी पर गहरा असर डाल रही है।

रिपोर्ट में क्या सामने आया?

दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच 6 से 15 वर्ष के 1,257 बच्चों से बातचीत के आधार पर तैयार इस अध्ययन में:

  • 86% बच्चों ने माना कि प्रदूषित हवा सीधे उनकी सेहत को नुकसान पहुंचा रही है।
  • अक्टूबर 2025 के बाद 44% बच्चों को डॉक्टर के पास जाना पड़ा।
  • कई बच्चों को सांस लेने में तकलीफ, खांसी, सिरदर्द और थकान जैसी समस्याएं हुईं।
  • 77% बच्चों ने कहा कि जहरीली हवा उन्हें बेचैन, चिड़चिड़ा या डरा हुआ महसूस कराती है।
  • लगभग 46.6% बच्चे मौका मिलने पर दिल्ली-NCR छोड़ना चाहते हैं।
  • 55% बच्चों को स्वास्थ्य कारणों से स्कूल से छुट्टी लेनी पड़ी।

यह आंकड़े बताते हैं कि प्रदूषण सिर्फ फेफड़ों को ही नहीं, बल्कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा को भी प्रभावित कर रहा है।

बचाव की कोशिश, फिर भी असुरक्षा

जब AQI खतरनाक स्तर पर पहुंचता है, तो बच्चे और उनके परिवार खुद को बचाने की कोशिश करते हैं:

  • 39% बच्चों ने N95 मास्क या एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल किया।
  • 37% बच्चों ने घर के अंदर रहना या बाहरी गतिविधियां कम कर दीं।

इसके बावजूद 85% बच्चों ने आंखों में जलन, खांसी, सिरदर्द और थकावट जैसे लक्षण महसूस किए। इससे साफ है कि एहतियात के बावजूद वे पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं।

मानसिक और सामाजिक असर

रिपोर्ट बताती है कि कई बच्चे गंभीर प्रदूषण के बावजूद स्कूल जाने या बाहर खेलने को मजबूर होते हैं। इससे:

  • खेलकूद कम हो रहा है
  • सामाजिक मेलजोल घट रहा है
  • तनाव और चिंता बढ़ रही है

नीतियों को सिर्फ शहर के औसत AQI आंकड़ों तक सीमित रखने के बजाय यह समझना जरूरी है कि बच्चे घर, स्कूल और रोजाना के सफर में कैसी हवा में सांस ले रहे हैं।

एक पीढ़ी पर संकट

दिल्ली-NCR की जहरीली हवा बच्चों की सेहत, पढ़ाई और मानसिक विकास पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के अनुभवों को नीति निर्माण के केंद्र में रखना समय की मांग है।


Disclaimer:
यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे चिकित्सीय सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।

Israel की संसद में वॉकआउट क्यों हुआ? विपक्ष ने कहा- “PM मोदी की वजह से नहीं”

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 25 फरवरी को इजरायल की संसद Knesset को संबोधित किया। हालांकि उनके भाषण से पहले सदन में एक राजनीतिक विवाद देखने को मिला, जब विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के संबोधन से ठीक पहले वॉकआउट कर दिया।

क्या था विवाद?

मामला क्नेसेट के स्पीकर Amir Ohana द्वारा इजरायल के सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस इसाक अमित को पीएम मोदी के विशेष संबोधन के लिए आमंत्रित न किए जाने से जुड़ा था। विपक्षी दलों ने इसे संवैधानिक परंपराओं के खिलाफ बताया और नेतन्याहू के भाषण का बहिष्कार किया।

हालांकि, जैसे ही पीएम मोदी ने बोलना शुरू किया, विपक्षी सांसद सदन में वापस लौट आए।

“आपकी वजह से नहीं” – यायर लैपिड

इजरायल के विपक्षी नेता Yair Lapid ने सदन में लौटकर प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की और हाथ मिलाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वॉकआउट उनका विरोध मोदी के खिलाफ नहीं था, बल्कि आंतरिक राजनीतिक मुद्दों को लेकर था।

लैपिड ने कहा कि संकट के समय भारत का नेतृत्व इजरायल के साथ खड़ा रहा है और दोनों देशों की दोस्ती शाश्वत है।

बेनी गैंट्स की पार्टी भी रही मौजूद

विपक्ष के प्रमुख नेता Benny Gantz की पार्टी ने भी पीएम मोदी के सम्मान में सदन में मौजूद रहकर भाषण सुना।

भारत–इजरायल रिश्तों का सम्मान

विपक्षी दलों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वे नेतन्याहू के भाषण का बहिष्कार करेंगे, लेकिन भारत–इजरायल के मजबूत संबंधों के सम्मान में प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन के दौरान सदन में लौटेंगे।

पीएम मोदी के संबोधन से पहले और बाद में सदन तालियों और ‘मोदी-मोदी’ के नारों से गूंजता रहा। इस दौरान उन्हें क्नेसेट के सर्वोच्च सम्मान से भी नवाजा गया।

Health News:हल्की-सी चोट लगते ही तेज दर्द क्यों? और टेस्टिकल्स शरीर के बाहर ही क्यों होते हैं?

अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि टेस्टिकल्स (अंडकोष) शरीर के बाहर क्यों होते हैं और हल्की-सी चोट पर भी इतना तेज दर्द क्यों होता है। दरअसल, यह मेल रिप्रोडक्टिव सिस्टम का बेहद संवेदनशील और खास हिस्सा है।

टेस्टिकल्स को घेरने वाली थैली को स्क्रोटम (Scrotum) कहा जाता है। यह त्वचा और मांसपेशियों से बनी एक लचीली लेकिन मजबूत संरचना होती है, जो पेनिस के नीचे स्थित रहती है। इसके अंदर दो अंडाकार ग्रंथियां होती हैं, जो स्पर्म बनाने और टेस्टोस्टेरोन जैसे हार्मोन का स्राव करने का काम करती हैं।

शरीर के बाहर क्यों होते हैं टेस्टिकल्स?

विशेषज्ञों के अनुसार, टेस्टिकल्स को सामान्य शरीर के तापमान (लगभग 37°C) से थोड़ा कम तापमान की जरूरत होती है। स्पर्म का निर्माण सही तरीके से तभी संभव है, जब तापमान शरीर से 2–3 डिग्री कम रहे।

स्क्रोटम एक “नेचुरल क्लाइमेट कंट्रोल सिस्टम” की तरह काम करता है। इसमें मौजूद क्रीमास्टर मसल (Cremaster muscle) जरूरत के मुताबिक टेस्टिकल्स को शरीर के करीब या दूर ले जाती है, जिससे तापमान संतुलित बना रहे।

अगर टेस्टिकल्स पेट के अंदर होते, तो अधिक तापमान के कारण स्पर्म प्रोडक्शन प्रभावित हो सकता था। इसलिए प्रकृति ने इन्हें शरीर के बाहर रखा है।


हल्की चोट पर भी इतना तेज दर्द क्यों?

टेस्टिकल्स में बहुत ज्यादा और अत्यंत संवेदनशील नर्व एंडिंग्स (तंत्रिकाएं) होती हैं। शरीर के छोटे से हिस्से में इतनी घनी नसों की मौजूदगी के कारण हल्का झटका भी तेज दर्द में बदल जाता है।

इसके अलावा:

  • यह हिस्सा हड्डियों या मोटी मांसपेशियों से सुरक्षित नहीं होता।
  • बाहरी स्थिति के कारण सीधा प्रभाव पड़ता है।
  • नसों का सीधा संबंध पेट के हिस्से से भी होता है।

पेट में दर्द या मितली क्यों होती है? (Referred Pain)

कई बार टेस्टिकल्स पर चोट लगने के बाद पेट या निचले हिस्से में भी दर्द महसूस होता है। इसे रेफर्ड पेन (Referred Pain) कहा जाता है।

भ्रूण विकास के दौरान टेस्टिकल्स पहले पेट के अंदर बनते हैं और बाद में नीचे की ओर उतरते हैं। इसी वजह से इनकी कुछ नसें पेट से जुड़ी रहती हैं। चोट लगने पर दिमाग को दर्द का संकेत मिलता है, लेकिन वह हमेशा सही स्थान पहचान नहीं पाता, जिससे पेट में दर्द या मितली हो सकती है।


क्या कोई प्राकृतिक सुरक्षा होती है?

प्रकृति ने कुछ सुरक्षा उपाय भी दिए हैं:

  • स्क्रोटम की त्वचा लचीली होती है
  • अंदर मजबूत रेशेदार परत (ट्यूनिका अल्बुजिनिया) होती है
  • टेस्टिकल्स हल्की मूवमेंट कर सकते हैं, जिससे झटका थोड़ा कम हो

फिर भी, यह हिस्सा बेहद संवेदनशील है, इसलिए चोट से पूरी तरह बचाव संभव नहीं होता।


Disclaimer:
यह जानकारी शोध अध्ययनों और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे चिकित्सीय सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या दर्द की स्थिति में डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।

Israel से Pakistan को कड़ा संदेश, आतंकवाद पर बोले Narendra Modi

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 25 फरवरी 2026 को इजरायल दौरे के दौरान वहां की संसद Knesset को संबोधित किया। उनके संसद में प्रवेश करते ही सांसदों ने खड़े होकर अभिवादन किया और सदन ‘मोदी-मोदी’ के नारों से गूंज उठा। इस मौके पर उन्हें “स्पीकर ऑफ कनेसट मेडल” से सम्मानित किया गया, जो कनेसट का सर्वोच्च सम्मान है।

आतंकवाद पर दो टूक

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में आतंकवाद और उसे पनाह देने वाले देशों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “इजरायल की तरह भारत भी आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करता। नागरिकों की हत्या और आतंकवाद को किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराया जा सकता।”

उन्होंने 2008 Mumbai attacks (26/11) का जिक्र करते हुए कहा कि भारत उस हमले को नहीं भूला है, जिसमें इजरायली नागरिकों की भी जान गई थी। साथ ही उन्होंने 7 अक्टूबर 2023 को Hamas द्वारा इजरायल पर किए गए हमले की निंदा करते हुए कहा, “न हम 26/11 भूलेंगे और न 7/10।”

गाजा पीस प्लान पर भारत का रुख

पीएम मोदी ने गाजा शांति पहल का समर्थन दोहराया और कहा कि इसे United Nations Security Council का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा कि भारत संवाद, शांति और स्थिरता के पक्ष में है तथा फिलिस्तीन मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता है।

व्यापार और तकनीकी सहयोग पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने बताया कि भारत और इजरायल के बीच द्विपक्षीय व्यापार में कई गुना वृद्धि हुई है, लेकिन अभी भी संभावनाएं शेष हैं।

उन्होंने एक महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर चल रही बातचीत का जिक्र किया और क्वांटम तकनीक, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात कही।

साझा सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने भारत में यहूदी समुदाय की शांतिपूर्ण उपस्थिति का जिक्र किया और कहा कि भारत में वे बिना भेदभाव के रहते आए हैं। उन्होंने हनुक्का और दिवाली, होली और पुरिम जैसे त्योहारों का उल्लेख कर दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित किया।

पीएम मोदी का यह संबोधन भारत–इजरायल संबंधों को और मजबूती देने वाला माना जा रहा है, जिसमें सुरक्षा, शांति और आर्थिक साझेदारी तीनों पर स्पष्ट संदेश दिया गया।