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Health News:अचानक नहीं होतीं दिल की बीमारियां! रोज़ की छोटी आदतों से रखें अपने हार्ट का ख्याल

दिल की बीमारियां अक्सर अचानक नहीं होतीं, बल्कि लंबे समय तक चली आ रही खराब जीवनशैली, तनाव और गलत खानपान का नतीजा होती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते छोटी-छोटी आदतों में सुधार कर लिया जाए तो हृदय रोगों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

1. रोज़ाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज

दिन में कम से कम 30 मिनट तेज़ चाल से चलना, योग या साइकिलिंग करना दिल को मजबूत बनाता है। नियमित शारीरिक गतिविधि से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहता है।

2. संतुलित और कम नमक वाला आहार

डाइट में हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और प्रोटीन शामिल करें। ज्यादा तला-भुना, प्रोसेस्ड फूड और अधिक नमक से बचें। ज्यादा नमक हाई ब्लड प्रेशर का कारण बन सकता है, जो हार्ट डिजीज का बड़ा जोखिम है।

3. धूम्रपान और शराब से दूरी

स्मोकिंग धमनियों को नुकसान पहुंचाती है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाती है। इसी तरह अत्यधिक शराब का सेवन भी दिल के लिए हानिकारक है।

4. तनाव को करें मैनेज

लगातार तनाव हार्मोनल असंतुलन पैदा कर सकता है, जिससे ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट बढ़ती है। मेडिटेशन, प्राणायाम और पर्याप्त नींद तनाव कम करने में मददगार हैं।

5. नियमित हेल्थ चेकअप

ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की समय-समय पर जांच कराते रहें। शुरुआती स्तर पर गड़बड़ी पकड़ में आ जाए तो बड़ी समस्या से बचा जा सकता है।

6. वजन को रखें नियंत्रित

मोटापा दिल की बीमारियों का प्रमुख कारण है। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से स्वस्थ वजन बनाए रखना जरूरी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि दिल की सेहत के लिए महंगी दवाओं से ज्यादा जरूरी है अनुशासित जीवनशैली। छोटी लेकिन नियमित अच्छी आदतें लंबे समय तक आपके हार्ट को स्वस्थ रख सकती हैं।

ईरान को लेकर अमेरिका सख्त, विदेश मंत्री मार्को रुबियो बोले—आगे और कड़े कदम उठाए जाएंगे

Marco Rubio ने कहा है कि Iran के खिलाफ जारी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य वहां की सरकार को बदलना नहीं, बल्कि उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को कमजोर करना है। उनके अनुसार ऑपरेशन का फोकस खासतौर पर छोटी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और ईरानी नौसेना से उत्पन्न खतरे को समाप्त करना है, जिससे अमेरिकी नौसैनिक जहाजों और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

रुबियो ने बताया कि अब तक की कार्रवाई “काफी सफल” रही है, लेकिन अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में और भी कड़े हमले किए जा सकते हैं।

पहले हमला क्यों किया?

रुबियो के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को पहले से संकेत मिल चुके थे कि यदि ईरान पर हमला होता है तो वह तुरंत जवाबी कार्रवाई करेगा। कथित तौर पर ईरानी कमांडरों को पहले ही जवाबी हमले के आदेश दिए जा चुके थे। ऐसे में अगर अमेरिका पहले कदम न उठाता, तो अमेरिकी सैनिकों और ठिकानों को भारी नुकसान हो सकता था।

उन्होंने कहा कि यदि खतरे की जानकारी होने के बावजूद अमेरिका इंतजार करता और बाद में हमला झेलता, तो प्रशासन पर सवाल उठते कि पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

मिसाइल ताकत खत्म करना मुख्य लक्ष्य

रुबियो ने स्पष्ट किया कि इस मिशन का उद्देश्य ईरान की मिसाइल क्षमता को इस हद तक नुकसान पहुंचाना है कि वह उसे दोबारा खड़ा न कर सके। साथ ही यह सुनिश्चित करना भी लक्ष्य है कि मिसाइल कार्यक्रम की आड़ में परमाणु गतिविधियों को आगे न बढ़ाया जाए।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान में अलग नेतृत्व देखना चाहता है, लेकिन मौजूदा सैन्य अभियान का घोषित उद्देश्य शासन परिवर्तन नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि “सबसे कड़े प्रहार अभी बाकी हैं” और अगला चरण ईरान के लिए ज्यादा नुकसानदेह हो सकता है।

अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, कांग्रेस में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ नेताओं को अभियान की नियमित जानकारी दी जा रही है।

इंटरसेप्टर मिसाइल उत्पादन पर बयान

रुबियो ने अमेरिकी रक्षा उत्पादन क्षमता को लेकर भी बयान दिया। उनके अनुसार, अमेरिका हर महीने लगभग 6 से 7 इंटरसेप्टर मिसाइलें तैयार कर पाता है। ये मिसाइलें दुश्मन की मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं।

इसके विपरीत, उन्होंने दावा किया कि ईरान हर महीने 100 से अधिक मिसाइलें और हजारों ड्रोन बनाने की क्षमता रखता है। इस उत्पादन अंतर को उन्होंने रणनीतिक चुनौती बताया, क्योंकि हमलावर हथियारों की तुलना में रक्षा प्रणाली का निर्माण अपेक्षाकृत धीमा है।

अमेरिका का कहना है कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक तय किए गए सभी सैन्य लक्ष्य हासिल नहीं हो जाते और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत नहीं कर लिया जाता।

T20 वर्ल्ड कप 2026: सेमीफाइनल की तस्वीर साफ, अंतिम चार टीमों का ऐलान

2026 के T20 वर्ल्ड कप में सेमीफाइनल की तस्वीर साफ हो गई है। भारत राष्ट्रीय क्रिकेट टीम ने कोलकाता के ईडन गार्डन्स में वेस्टइंडीज को 5 विकेट से हराकर अंतिम-4 में जगह बनाई। इस मैच में संजू सैमसन की 97 रन की शानदार पारी ने टीम को जीत दिलाई।


🔥 सेमीफाइनल में पहुंचने वाली टीमें

  1. भारत राष्ट्रीय क्रिकेट टीम
  2. दक्षिण अफ्रीका राष्ट्रीय क्रिकेट टीम
  3. इंग्लैंड क्रिकेट टीम
  4. न्यूजीलैंड राष्ट्रीय क्रिकेट टीम
  • सुपर-8 के पहले ग्रुप से: भारत और दक्षिण अफ्रीका
  • दूसरे ग्रुप से: इंग्लैंड और न्यूजीलैंड

📅 सेमीफाइनल मुकाबलों का शेड्यूल

1️⃣ पहला सेमीफाइनल

दक्षिण अफ्रीका  न्यूजीलैंड
📍 4 मार्च – ईडन गार्डन्स (कोलकाता)

2️⃣ दूसरा सेमीफाइनल

भारत  इंग्लैंड
📍 5 मार्च – वानखेड़े स्टेडियम (मुंबई)


🏆 फाइनल मुकाबला

📅 8 मार्च
📍 नरेंद्र मोदी स्टेडियम (अहमदाबाद)

सेमीफाइनल जीतने वाली दो टीमें 8 मार्च को फाइनल में भिड़ेंगी।


🌟 इतिहास रचने का मौका

अगर भारत खिताब जीतता है, तो वह लगातार दो बार T20 वर्ल्ड कप जीतने वाली पहली टीम बन सकता है — जो अब तक किसी भी देश ने नहीं किया है।

मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा, अमेरिका ने जारी की ट्रैवल एडवाइजरी; नागरिकों से तुरंत देश छोड़ने को कहा

United States और Israel द्वारा Iran पर की गई सैन्य कार्रवाई के बाद मिडिल ईस्ट में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। बढ़ते खतरे को देखते हुए United States Department of State ने क्षेत्र के 14 देशों में रह रहे अपने नागरिकों को तत्काल वहां से निकलने की सलाह जारी की है।

असिस्टेंट सेक्रेटरी फॉर कांसुलर अफेयर्स मोरा नामदार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि “गंभीर सुरक्षा जोखिमों” को देखते हुए अमेरिकी नागरिक उपलब्ध कमर्शियल फ्लाइट्स या किसी भी सुरक्षित माध्यम से तुरंत प्रस्थान करें। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब ईरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और दूतावासों पर ड्रोन व मिसाइल हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं।

रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमला

ताजा घटनाक्रम में Riyadh स्थित अमेरिकी दूतावास पर दो ड्रोन से हमला हुआ। Saudi Arabia के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि हमले से इमारत में मामूली आग लगी और कुछ सामग्री को नुकसान पहुंचा, हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

दूतावास प्रशासन ने रियाद, जेद्दा और धहरान में मौजूद अमेरिकी नागरिकों को ‘शेल्टर इन प्लेस’ यानी घरों के भीतर ही सुरक्षित रहने की सलाह दी है। उन्हें दूतावास परिसर में आने से भी मना किया गया है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में धुआं और आग की लपटें दिखाई दीं, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल बन गया।

इन 14 देशों से तुरंत निकलने की अपील

अमेरिकी प्रशासन ने जिन देशों से तत्काल प्रस्थान की सलाह दी है, उनमें बहरीन, मिस्र, ईरान, इराक, इजरायल, वेस्ट बैंक और गाजा, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, ओमान, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, संयुक्त अरब अमीरात और यमन शामिल हैं।

स्टेट डिपार्टमेंट ने कहा है कि स्थिति तेजी से बदल रही है, कई एयरपोर्ट अस्थायी रूप से बंद हैं और फ्लाइट्स रद्द की जा रही हैं, फिर भी जो भी कमर्शियल साधन उपलब्ध हों उनका उपयोग कर देश छोड़ने की कोशिश की जाए।

हेल्पलाइन और आपात व्यवस्था

अमेरिका ने अपने नागरिकों की सहायता के लिए इमरजेंसी टास्क फोर्स सक्रिय कर दी है। विदेश में मौजूद अमेरिकी नागरिक +1-202-501-4444 और अमेरिका के भीतर से +1-888-407-4747 पर संपर्क कर सकते हैं। साथ ही उन्हें आधिकारिक पोर्टल पर पंजीकरण कराने की भी सलाह दी गई है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सुरक्षित निकाला जा सके।

मौजूदा हालात को देखते हुए क्षेत्र में तनाव अभी कम होता नजर नहीं आ रहा है। अमेरिकी प्रशासन ने साफ किया है कि नागरिक अपनी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और आधिकारिक निर्देशों का पालन करें।

नौशेरा में सैन्य ठिकाने पर ड्रोन अटैक से मचा हड़कंप, अफगान मूल के परिवारों पर पुलिस एक्शन

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत के नौशेरा क्षेत्र में स्थित सेना के आर्टिलरी ट्रेनिंग स्कूल के आसपास दोपहर के समय दो बड़े ड्रोन हमले किए गए। पहला ड्रोन सीधे ट्रेनिंग स्कूल के परिसर में बने परीक्षा हॉल पर गिरा, जिससे इमारत को भारी नुकसान पहुंचा। दूसरा ड्रोन स्कूल के नजदीक आकर गिरा। इन हमलों के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और सैन्य प्रतिष्ठानों के आसपास अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

घटना के बाद स्थानीय पुलिस ने नौशेरा कैंट क्षेत्र में रह रहे अफगान मूल के लोगों के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि आर्टिलरी स्कूल के पास 100 से अधिक अफगान मूल के परिवार रहते हैं, जो 1990 के दशक में अफगानिस्तान की अस्थिर परिस्थितियों के दौरान पाकिस्तान आकर बस गए थे। समय के साथ इनके बच्चों और अगली पीढ़ी का जन्म भी पाकिस्तान में हुआ और उन्हें राष्ट्रीय पहचान पत्र (CNIC) भी जारी किए गए।

हालांकि, पिछले वर्ष दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के बाद पाकिस्तान सरकार ने अफगान मूल के कई लोगों को देश छोड़ने का निर्देश दिया था। इस फैसले के खिलाफ कई परिवारों ने पेशावर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की, जो अब भी विचाराधीन है।

ड्रोन हमलों के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने सख्ती बढ़ाते हुए कार्रवाई तेज कर दी। बताया गया कि जब कुछ लोग रमजान के दौरान नमाज अदा कर रहे थे, तभी पुलिस वहां पहुंची और पूछताछ के लिए उन्हें हिरासत में लेना शुरू कर दिया। इस दौरान कुछ लोग मौके से निकल गए, जबकि 15 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया।

हिरासत में लिए गए लोगों को आगे की पूछताछ के लिए सैन्य खुफिया एजेंसियों को सौंपा गया है। उन पर आरोप है कि वे हमलावरों को संवेदनशील सूचनाएं उपलब्ध कराने में शामिल हो सकते हैं। पूरे मामले के बाद नौशेरा और आसपास के सैन्य क्षेत्रों में सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी गई है।