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“हांगकांग में भयावह अग्निकांड: 4600 घर जलकर खाक, 83 की मौत—70 साल की सबसे बड़ी त्रासदी का दोषी कौन?”

हांगकांग में 26 नवंबर को अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में भीषण आग पर अभी भी पूरी तरह से काबू नहीं पाया गया है. इस बहुमंजिला आवासीय परिसर में लगी आग पर काबू पाने के लिए बचाव दल गुरुवार (28 नवंबर 2025) को दूसरे दिन भी जूझते रहे. हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 83 हो गई है, जबकि 280 से अधिक लोग लापता हैं. अधिकारियों ने इसे पिछले 70 वर्षों में शहर की सबसे बड़ी त्रासदी बताया.

इमारतों की ऊपरी मंजिलों पर धधकती रही आग

रिपोर्ट के मुताबिक अधिकार ने बताया कि लगभग 76 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 43 की हालत गंभीर है. मृतकों में एक दमकलकर्मी भी शामिल है. कई लोग अभी भी इमारतों में फंसे हुए हैं. सात में से चार ब्लॉक में लगी भीषण आग पर काबू पा लिया गया है, जबकि शाम को शेष 31 मंजिला इमारतों की ऊपरी मंजिलों पर आग धधकती रही. अभी भी बड़े पैमाने पर बचाव कार्य जारी है और फंसे लोगों को इमारतों से निकाला जा रहा है.

आग से प्रभावित लोगों के लिए राहत पैकेज

आग लगने का सही कारण क्या था ये अभी तक पता नहीं चल पाया है. सरकार ने इस मामले में आपराधिक जांच शुरू करने के आदेश दिए हैं. अधिकारी ने बताया कि सात इमारतें पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी हैं, जिनमें से प्रत्येक 32 मंजिला है. हांगकांग सरकार ने प्रभावितों के लिए 30 करोड़ हांगकांग डॉलर (करीब 4.3 करोड़ अमेरिकी डॉलर) की राहत का ऐलान किया है. सैकड़ों विस्थापित निवासियों को अस्थायी आश्रय स्थलों में स्थानांतरित कर दिया गया है.

4,600 लोगों का घर हुआ स्वाहा

ताई पो जिले में 1983 में बने वांग फुक कोर्ट परिसर में आठ बहुमंजिला इमारतें हैं जिनमें 1,984 फ्लैट हैं. 2021 की जनगणना के अनुसार, इन इमारतों में लगभग 4,600 लोग रहते हैं. चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआके अनुसार हांगकांग पुलिस 27 नवंबर को बताया कि इस अग्निकांड के सिलसिले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस की ओर से गिरफ्तार किए गए तीनों व्यक्ति उस निर्माण कंपनी के अधिकारी हैं जो इन सामग्रियों को इमारतों के रिन्यूअल के दौरान लगाने के लिए जिम्मेदार थे.

कैसे अचानक फैली आग?

पुलिस का कहना है कि रखरखाव कार्य के दौरान इस्तेमाल किए गए ज्वलनशील मचान और फोम सामग्री के कारण ये आग इतनी तेजी से फैला हो सकता है. द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक हांगकांग पुलिस अधीक्षक एलीन चुंग ने कहा, “हमारे पास यह मानने का कारण है कि कंपनी के जिम्मेदार पक्षों की घोर लापरवाही थी, जिसके कारण यह दुर्घटना हुई और आग अनियंत्रित रूप से फैल गई. इसी का परिणाम है कि बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए.”

व्हाइट हाउस के करीब हुई गोलीबारी! नेशनल गार्ड के दो सैनिक घायल, एक संदिग्ध गिरफ्तार

अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में तैनात वेस्ट वर्जीनिया नेशनल गार्ड के दो सदस्यों को बुधवार (26 नवंबर 2025) को व्हाइट हाउस से कुछ ही दूरी पर गोली मार दी गई. मामले पर एफबीआई निदेशक काश पटेल और वाशिंगटन की मेयर म्यूरियल बोसर ने कहा कि गार्ड के सदस्यों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है. मेयर म्यूरियल बोसर ने इसे टारगेटेड अटैक बताया है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है

घटना के तुरंत बाद FBI और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से जांच शुरू कर दी. FBI निदेशक काश पटेल ने बताया कि घायल सैनिकों का समय पर इलाज किया गया है. एक संदिग्ध को भी गोली लगने के बाद पकड़ा गया है और उसकी जान को फिलहाल कोई खतरा नहीं है. NBC की रिपोर्ट के मुताबिक वाशिंगटन DC में दो नेशनल गार्ड सदस्यों पर गोली चलाने वाले संदिग्ध की पहचान 29 वर्षीय अफगान नागरिक रहमानुल्लाह के रूप में की गई है. एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या यह हमला जानबूझकर सैनिकों को निशाना बनाकर किया गया था. इसके अलावा मामले की जांच आतंकवादी हमले के एंगल से भी की जा रही  है.

घटनास्थल पर मचा हड़कंप

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में EMT टीम घायल सैनिकों को CPR देते हुए दिखाई दे रही थी. फुटपाथ पर खून के निशान और टूटा हुआ कांच साफ दिख रहा था. घटना के कुछ ही मिनटों में बड़ी संख्या में पुलिस, फायर डिपार्टमेंट और हेलीकॉप्टर मौके पर पहुंच गई. मामले पर एक चश्मदीद ने बताया कि गोलीबारी की वजह से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था.

डीसी में नेशनल गार्ड की तैनाती विवादों में

वॉशिंगटन डीसी में नेशनल गार्ड की तैनाती पिछले महीनों से राजनीति का बड़ा मुद्दा बनी हुई है. अगस्त में 300 से ज्यादा सैनिकों को शहर में तैनात किया गया था, जिनमें से कई वापस लौट चुके हैं. हाल ही में 160 सैनिकों की तैनाती बढ़ाने का फैसला किया गया था. इसी दौरान ट्रंप प्रशासन ने डीसी पुलिस को संघीय नियंत्रण में लेने का आदेश भी दिया था, जिसे अदालत में चुनौती दी गई थी. वहीं घटना पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि जो भी सैनिकों पर वार करेगा, उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. इसके अलावा उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी चिंता जताते हुए कहा कि हम सभी को प्रार्थना करना चाहिए. हमारे सैनिक इस देश की ढाल हैं. यह हमला गंभीर चेतावनी है.

बराक ओबामा की प्रतिक्रिया

वॉशिंगटन डीसी में हुए हमले पर पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबाम ने अफसोस जताया है. उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि अमेरिका में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है. मिशेल और मैं आज घायल सैनिकों के लिए प्रार्थना कर रहे हैं.  उनके परिवारों के प्रति अपना प्यार व्यक्त करते हैं क्योंकि वे इस बेहद दुखद परिस्थितियों में हैं.

Sports News:क्यों 27 नवंबर को क्रिकेट इतिहास का ‘ब्लैक डे’ माना जाता है? इसी दिन हुई थी यह दुखद घटना

क्रिकेट इतिहास में ’27 नवंबर’ को ‘ब्लैक डे’ के तौर पर याद रखा जाता है. इस दिन क्रिकेट जगत ने एक उभरते खिलाड़ी को हमेशा के लिए खो दिया था. 11 साल पहले ठीक इसी दिन ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर फिल ह्यूज दुनिया छोड़ गए थे. दो दिन पहले जो खिलाड़ी मैदान पर बल्लेबाजी कर रहा था, वह मैच के दौरान गंभीर रूप से घायल हुआ. बल्लेबाजी करते हुए ह्यूज की गर्दन पर एक गेंद लगी और वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े. इसके बाद उनकी आंखें ऐसी बंद हुईं कि फिर कभी खुल नहीं सकीं. इस घटना ने पूरे खेल जगत को स्तब्ध कर दिया था.

सिडनी के मैदान पर 25 नवंबर 2014 को शेफील्ड शील्ड में साउथ ऑस्ट्रेलिया और न्यू साउथ वेल्स के बीच मुकाबले की शुरुआत हुई थी.

साउथ ऑस्ट्रेलियाई कप्तान जोहान बोथा ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया. 30 नवंबर को फिल ह्यूज का जन्मदिन था. ह्यूज चाहते थे कि जीत के साथ वह इसे सेलिब्रेट करें, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था.

फिल ह्यूज इस मुकाबले में मार्क कॉसग्रोव के साथ बतौर सलामी बल्लेबाजी मैदान पर उतरे. दोनों खिलाड़ियों ने 23.4 ओवरों में 61 रन की साझेदारी की.

मार्क कॉसग्रोव 68 गेंदों में 32 रन बनाकर आउट हुए. उन्हें नाथन लियोन ने कैच आउट कराया. कॉसग्रोव की इस पारी में 9 चौके शामिल थे. यहां से फिल ह्यूज ने कैलम फर्ग्यूसन के साथ दूसरे विकेट के लिए 61 रन जुटाए. फर्ग्यूसन 41 गेंदों में 4 चौकों की मदद से 28 रन बनाकर पवेलियन लौटे.

टॉम कूपर चौथे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए उतरे. दोनों खिलाड़ियों का मकसद यहां से साउथ ऑस्ट्रेलिया को मजबूत स्थिति में पहुंचाना था, लेकिन 49वां ओवर ही मैच का ‘अंतिम ओवर’ साबित हुआ.

सीन एबॉट अपना 10वां ओवर डाल रहे थे. उन्हें अपने पहले विकेट की तलाश थी। ह्यूज 63 रन बनाकर नाबाद थे. उनकी इस पारी में 9 चौके शामिल थे। 48.3 ओवर में एबॉट की गेंद फिल ह्यूज की गर्दन पर लगी.

ह्यूज उसी पल मैदान पर बैठ गए। एबॉट तुरंत उनके पास आए. इस बीच ह्यूज ने अपना संतुलन खो दिया। विपक्षी टीम के साथियों ने उन्हें सहारा दिया, लेकिन तब तक ह्यूज बेहोश हो गए थे. तुरंत ह्यूज को हॉस्पिटल पहुंचाया गया, जहां उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन 27 नवंबर को इस उभरते सितारे ने दुनिया को अलविदा कह दिया.

फिल ह्यूज के साथ हुई इस घटना के बाद क्रिकेट जगत में कई सुरक्षा संबंधी बदलाव हुए. हेलमेट को अधिक मजबूत बनाया गया. बल्लेबाजों की सुरक्षा पर अधिक ध्यान दिया गया और ‘कन्कशन सब्स्टीट्यूट’ जैसे नए नियम लागू किए गए.

फिल ह्यूज ने ऑस्ट्रेलिया की ओर से 26 टेस्ट मैच खेले, जिसमें 3 शतक और 7 अर्धशतक के साथ 1,535 रन बनाए. वहीं, 25 वनडे मुकाबलों में उन्होंने 2 शतक और 4 अर्धशतक के साथ 826 रन जोड़े थे. फिल ह्यूज की मृत्यु के बाद क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उनके सम्मान में ‘जर्सी नंबर 64’ को रिटायर कर दिया.

Health News:सफदरजंग अस्पताल ने इतिहास रचा—पहली बार 11 साल के बच्चे का किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया

दिल्ली के वीएमएमसी और सफदरजंग अस्पताल ने 19 नवंबर 2025 को किडनी प्रत्यारोपण सेवाओं में नया अध्याय जोड़ते हुए पहली बार किसी बच्चे का सफल किडनी ट्रांसप्लांट कर दिखाया. यह उपलब्धि न सिर्फ अस्पताल के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि देश के किसी भी केंद्रीय सरकारी अस्पताल में किया गया पहला पेडियाट्रिक किडनी ट्रांसप्लांट भी है

11 साल के बच्चे को मिला नया जीवन

यूपी के सुल्तानपुर का 11 वर्षीय बच्चा करीब डेढ़ साल से ‘बाइलेटरल हाइपोडिसप्लास्टिक किडनी’ जैसी दुर्लभ स्थिति से जूझ रहा था. गंभीर हालात में सफदरजंग अस्पताल लाए गए बच्चे को इलाज के दौरान कार्डियक अरेस्ट तक हुआ और जांच में पता चला कि उसकी दोनों किडनियां पूरी तरह फेल हो चुकी हैं. तब से वह नियमित डायलिसिस पर निर्भर था.

मां बनीं जीवनदायिनी, जटिल सर्जरी रही सफल

विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में किडनी ट्रांसप्लांट हमेशा मुश्किल माना जाता है. छोटे शरीर में वयस्क किडनी फिट करना और नाजुक रक्तवाहिनियों से जोड़ना बेहद जटिल प्रक्रिया होती है. बच्चे की मां ने किडनी दान की और सर्जरी के बाद किडनी ने तुरंत काम करना शुरू कर दिया. डॉक्टरों का कहना है कि बच्चा अब डायलिसिस की जरूरत से पूरी तरह मुक्त हो चुका है और तेजी से स्वस्थ हो रहा है.

आर्थिक संकट के बीच अस्पताल बना सहारा

बच्चे के पिता मजदूरी से परिवार चलाते हैं और निजी अस्पताल में होने वाला लाखों रुपये का खर्च उनके लिए नामुमकिन था. अस्पताल प्रशासन ने न केवल प्रत्यारोपण की प्रक्रिया संभाली, बल्कि उसके बाद लगने वाली महंगी दवाओं का खर्च भी खुद वहन करने की घोषणा की.

विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने मिलकर रचा इतिहास

अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. संदीप बंसल ने कहा कि यह उपलब्धि मेडिकल टीम की वर्षों की मेहनत और समर्पण का नतीजा है. उन्होंने इसे देश में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता और भरोसे को मजबूत करने वाला कदम बताया. इस सर्जरी का नेतृत्व यूरोलॉजी और रीनल ट्रांसप्लांट विभाग के प्रमुख डायरेक्टर प्रो. डॉ. पवन वासुदेवा ने किया. उनके साथ प्रो. डॉ. नीरज कुमार भी सर्जिकल टीम में शामिल थे. पेडियाट्रिक टीम का नेतृत्व डॉ. शोभा शर्मा ने किया, जिनके साथ डॉ. श्रीनिवासवरदन और विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप के. देबता जुड़े रहे. एनेस्थीसिया टीम का संचालन डॉ. सुशील ने किया, जिनकी टीम में डॉ. ममता और डॉ. सोनाली शामिल थीं.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Health News:देश की फार्मा इंडस्ट्री किन दवाओं का सबसे ज्यादा उत्पादन करती है, और आपकी सेहत को बेहतर बनाने के लिए उसकी भविष्य की क्या तैयारियां हैं?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ बम के बाद अगर देश की किसी इंडस्ट्री पर सबसे ज्यादा खतरा मंडरा रहा था तो वह फार्मा सेक्टर है. कभी सोचा है कि अमेरिका में दवाओं की खपत को करीब 80 पर्सेंट पूरा करने वाली भारत की फार्मा इंडस्ट्री कौन-सी दवाएं सबसे ज्यादा बनाती है? इसके अलावा आपकी सेहत के लिए इस सेक्टर में क्या प्लानिंग चल रही है? आइए जानते हैं.

सरकार की यह है प्लानिंग

सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन के जॉइन मेडिसिन कंट्रोलर डॉ. आर चंद्रशेखर के मुताबिक, भारतीय फार्मा इंडस्ट्री में इस वक्त रिसर्च एवं डेवलपमेंट (R&D) पर खास जोर दिया जा रहा है. इसका मकसद जेनेरिक दवाओं को बनाने के साथ-साथ नई दवाओं और तकनीक को डिवेलप करना है. इसके तहत भारत सरकार ने प्रमोशन ऑफ रिसर्च एंड इनोवेशन इन फार्मा-मेडटेक सेक्टर (पीआरआईपी) नामक बड़ी योजना शुरू की है, जिस पर करीब 5,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इस स्कीम के तहत प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों, स्टार्टअप्स और एमएसएमई को रिसर्च के लिए फाइनेंशियल हेल्प दी जा रही है.

उन्होंने ग्रेटर नोएडा के एक्सपो सेंटर में आयोजित 18वें सीपीएचआई और पिमेक इंडिया एक्सपो में बताया कि एक लाख करोड़ रुपये की नई हॉस्पिटल फाइनेंस योजना से देश के फार्मा सेक्टर में रिसर्च एंड डिवेलपमेंट को मजबूत करेगी. उन्होंने कहा कि इस वक्त भारत को दुनिया की फार्मेसी कहा जाता है, लेकिन हॉस्पिटल फाइनेंस योजना से देश अगले पांच साल में दुनिया की फार्मेसी से एक इनोवेशन-नेतृत्व वाले फार्मा राष्ट्र के रूप में डिवेलप होने की तरफ कदम बढ़ा देगा.

कौन-सी दवाएं बनाती है फार्मा इंडस्ट्री?

फार्मास्युटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष नामित जोशी ने बताया कि भारत का फार्मा उद्योग इस वक्त पूरी दुनिया में ‘जेनेरिक्स हब’ के नाम से जाना जाता है. अब ग्लोबल फार्मास्युटिकल  की फील्ड में तेजी से बदलाव हो रहा है. ऐसे में दुनिया की फार्मेसी बने रहने के लिए भारत को अपनी पारंपरिक जेनेरिक्स मानसिकता से आगे बढ़ना होगा और वैल्यू बेस्ड इनोवेशन पर फोकस करना होगा. साथ ही, पेप्टाइड्स, जटिल जेनेरिक्स, बायोसिमिलर्स, बायोलॉजिक्स और सेल व जीन थैरेपी में अपनी क्षमताएं बढ़ानी होंगी.

फार्मा सेक्टर में भी आत्मनिर्भर हो रहा भारत

इन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया के एमडी योगेश मुद्रास के मुताबिक, भारत के फार्मास्युटिकल सेक्टर ने काफी तेजी दिखाई है. इसकी वजह से निर्यात दोगुना होकर 30 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया है. इसमें काफी तेजी से बदलाव हो रहा है, क्योंकि भारत पारंपरिक जेनेरिक्स, जटिल फॉर्मूलेशन, बायोलॉजिक्स और एडवांस्ड ट्रीटमेंट में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.