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“‘IFFI ने रीजनल सिनेमा को नई दिशा दी है’—जानें, इस बारे में नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी और अमित साध ने क्या कहा।”

गोवा में आयोजित 56वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) में विभिन्न भाषाओं और शैलियों को प्रस्तुत किया जा रहा है, जिनमें रीजनल सिनेमा को भी प्रमुख स्थान दिया गया है. इस अवसर पर अमित साध और नवाजुद्दीन सिद्दीकी जैसे कलाकार भी उपस्थित रहे. इस दौरान आईएएनएस से बात करते हुए उन्होंने अपने विचार साझा किए.

आईएएनएस से बातचीत में अमित साध ने फेस्टिवल के महत्व और इसके उद्देश्य पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि आईएफएफआई का उद्देश्य पूरी दुनिया को जोड़ना है. उन्होंने बताया कि पिछले साल भी वह इस फेस्टिवल में शामिल हुए थे, जब उनकी फिल्म ‘पुणे हाइवे’ का प्रीमियर हुआ था.

रचनाओं को बेझिझक पेश करने का मौका देता है फेस्टिवल

साध ने कहा कि फेस्टिवल के माध्यम से कलाकार अपनी रचनाओं को स्वतंत्र और बेझिझक तरीके से पेश कर सकते हैं. यही वजह है कि यह फेस्टिवल आने वाले कई सालों तक चलेगा और भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाता रहेगा.

उन्होंने रीजनल सिनेमा की विशेष सराहना करते हुए कहा कि विभिन्न राज्यों की फिल्में और कहानियां अब बड़े पर्दे पर आने लगी हैं. फेस्टिवल ने ऐसे कलाकारों और निर्माताओं को सही मंच दिया है, जिससे उनकी कहानियों को एक व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचने का मौका मिल रहा है.

नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने भी रखे अपने विचार

वहीं, नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने भी फेस्टिवल की सराहना की और इसके योगदान पर अपने विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि इस फेस्टिवल के जरिए फिल्मों को रिलीज में मदद मिलती है और इससे दर्शकों तक पहुंचने की प्रक्रिया और आसान हो जाती है.

उन्होंने रिजनल फिल्मों के महत्व पर जोर देते हुए बताया कि ऐसे फिल्म निर्माता और कलाकार जो छोटे बजट या अलग भाषाई फिल्मों में काम कर रहे हैं, उन्हें आईएफएफआई जैसी प्लेटफॉर्म से भरपूर सहयोग मिलता है.

अमित साध और नवाज दोनों है प्रभावशाली एक्टर्स

गौरतलब है कि अमित साध और नवाजुद्दीन सिद्दीकी, दोनों ही कलाकार भारतीय सिनेमा के सक्रिय और प्रभावशाली अभिनेता हैं. अमित साध ने अपने करियर की शुरुआत छोटे नाटकों और टीवी सीरियल्स से की थी, जिसमें उन्होंने ‘क्यों होता है प्यार’, ‘दुर्गेश नंदिनी’ और ‘नच बलिए’ जैसे शो में काम किया.

फिल्मी दुनिया में उनकी पहचान ‘काई पो चे!’, ‘सुल्तान’ और ‘गोल्ड’ जैसी फिल्मों से बनी. उन्होंने वेब सीरीज जैसे ‘ब्रीद’ में इंस्पेक्टर कबीर सावंत की भूमिका निभाकर दर्शकों से वाहवाही लूटी. इसके अलावा, वह ‘अवरोध: द सीज विदिन’ और ‘जीत की जिद’ जैसे प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रहे.

वहीं, नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने भी अपने अभिनय करियर में एक अलग पहचान बनाई. उन्होंने ‘सरफरोश’, ‘शूल’ और ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ जैसी फिल्मों से शुरुआत की, लेकिन उन्हें व्यापक मान्यता अनुराग कश्यप की ‘ब्लैक फ्राइडे’ और ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ से मिली.

इसके बाद उन्होंने ‘द लंचबॉक्स’, ‘बजरंगी भाईजान’, ‘रमन राघव 2.0’ और ‘मंटो’ जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया. वह लगातार चुनौतीपूर्ण और विविध भूमिकाओं को निभाकर भारतीय सिनेमा में अपनी मजबूत पहचान को बरकरार रख रहे हैं.

“छह साल पहले शुरू हुआ वही विवाद—जिसने इमरान को जेल की सलाखों के पीछे पहुँचा दिया, जबकि मुनीर सत्ता के शिखर पर पहुँच गए।”

साल था 2019. इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के चीफ थे लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मुनीर. पाकिस्तान आर्मी के चीफ कमर जावेद बाजवा ने उन्हें आईएसआई का मुखिया बनाया था. इमरान खान को मुनीर से ऐसी चिढ़ हुई कि महज आठ महीने के भीतर उन्हें आईएसआई चीफ के पद से हटा दिया.

अब आते हैं साल 2025 में. करीब छह साल बाद आसिम मुनीर पाकिस्तान के पहले CDF हैं यानी तीनों सुरक्षा बलों के प्रमुख. यह पद उनके लिए पाकिस्तान का संविधान संशोधन कर तैयार किया गया है. अब न सिर्फ थल सेना, बल्कि वायु सेना और नौसेना तीनों ही बलों में उनकी मर्जी चलती है. इतना ही नहीं, मुनीर इस पर 2030 तक बने रहेंगे. दूसरी ओर पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ के संस्थापक इमरान खान जेल में हैं.

इमरान ने मुनीर पर क्यों लिया था एक्शन?

2019 में आसिम मुनीर जब आईएसआई के मुखिया थे तो उन्होंने कथित तौर पर इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी और उनके साथियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच में रुचि दिखाई थी. कहा जाता है कि इमरान को मुनीर का ये उतावलापन रास नहीं आया और उन्होंने मुनीर आईएसआई चीफ के पद से हटा दिया. हालांकि इस फेरबदल के लिए पाकिस्तान आर्मी की ओर से कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया, जिसकी वजह से आसिम मुनीर को आठ महीने में ही ये पद छोड़ना पड़ा, जबकि उनका कार्यकाल तीन साल का था.

हालांकि चार साल बाद साल 2023 में पीटीआई चीफ इमरान खान ने ऐसे सभी आरोपों का खंडन किया था. उन्होंने कहा, ‘यह पूरी तरह से झूठ है. न तो जनरल आसिम मुनीर ने मुझे मेरी पत्नी के भ्रष्टाचार का कोई सबूत दिखाया और न ही मैंने उन्हें इस वजह से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया.’

जब इमरान खान को लगा झटका 

अप्रैल 2022 में इमरान खान के खिलाफ पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव लाया गया. 342 सदस्यीय सदन में विपक्षी दलों को अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में 174 वोट मिले और देखते ही देखते इमरान खान से सत्ता खींच ली गई. इमरान खान पाकिस्तान के इतिहास में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटाए जाने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री बन गए. कहने की जरूरत नहीं, इस पूरी कवायद के पीछे पाकिस्तान की सेना का हाथ था क्योंकि पाक आर्मी नहीं चाहती कि उसके देश में कोई भी प्रधानमंत्री बिना उसकी मर्जी के सरकार चलाए, जबकि इमरान सेना के एकदम विपरीत चल रहे थे.

PM पद से हटाए जाने के बाद जेल भेजे गए इमरान 

सत्ता से हटाए जाने के बाद इमरान खान के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए गए, जिनमें से कई मामलों में उन्हें दोषी भी ठहरा दिया गया. वह साल 2023 से ही जेल में बंद हैं. उन्हें रावलपिंडी की अडियाला जेल में रखा गया है. इमरान खान के परिवार ने आरोप लगाया है कि उन्हें एक महीने से ज़्यादा समय से उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा है और उन्होंने उनके जीवित होने का सबूत मांगा है. जब देश और दुनिया में ये अफवाह फैली कि जेल में इमरान की मौत हो चुकी है तो अडियाला जेल के अधिकारियों की ओर से इन अफवाहों को खारिज कर दिया गया और कहा कि वह पूरी तरह स्वस्थ हैं.

इमरान ने आसिम मुनीर पर लगाए थे आरोप 

पिछले साल मई महीने में पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर इमरान ने एक लेख लिखा था, जिसमें उन्होंने आसिम मुनीर पर लगाया था कि वह पाकिस्तान की राजनीति से उनकी पार्टी की उपस्थिति को खत्म करना चाहते हैं. खान ने ऐलान किया कि अगर उन्हें कुछ भी हुआ तो मुनीर को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा.

खान ने लिखा, ‘सैन्य प्रतिष्ठान मेरे खिलाफ जो कुछ भी कर सकता था, कर चुका है. अब उनके पास बस मेरी हत्या करने के अलावा और कुछ नहीं बचा है. मैंने सार्वजनिक रूप से कहा है कि अगर मुझे या मेरी पत्नी को कुछ हुआ तो जनरल आसिम मुनीर जिम्मेदार होंगे, लेकिन मुझे डर नहीं है क्योंकि मेरा विश्वास मज़बूत है. मैं गुलामी की बजाय मौत को प्राथमिकता दूंगा.’

पाक सेना पर अकसर हिंसा का आरोप लगाते रहे हैं पश्तून   

देश के दूसरे सबसे बड़े समूह से जुड़े खान की पश्तून पहचान देश में सैन्य प्रतिष्ठान को चुनौती देती है. पहले भी पश्तूनों ने सेना पर मानवाधिकारों के उल्लंघन और हिंसा का आरोप लगाया है. इसी के चलते 2020 में पश्तून तहफ़ुज़ (संरक्षण) आंदोलन शुरू हुआ था.  मानवाधिकार संगठन, माइनॉरिटी राइट्स ग्रुप के अनुसार, पश्तूनों को भी सुरक्षा बलों द्वारा छापे और अपहरण के जरिए अकसर निशाना बनाया जाता रहा है.

इमरान खान की तीसरी पत्नी बुशरा बीबी को उनका मार्गदर्शक माना जाता है. सालों पहले, उन्होंने कथित तौर पर इमरान के सत्ता में आने की भविष्यवाणी की थी, जिससे समर्थकों के बीच उन्हें लगभग संत का दर्जा प्राप्त हो गया था. अब अवैध विवाह और भ्रष्टाचार के आरोप में बीबी को सात साल की जेल हुई है और उनके पति के साथ उन्हें भी चुप करा दिया गया है. इमरान के बेटे के अनुसार, खान को पूरी तरह से अलग-थलग माहौल में एक मौत की कोठरी में अकेले रखा गया है. उनके स्वास्थ्य और ठिकाने के बारे में अफ़वाहें जारी हैं.

Causes Of Antibiotic Resistance: “सुपरबग्स क्या होते हैं, और वे बीमारियों के उपचार को इतना चुनौतीपूर्ण क्यों बना देते हैं?”

भारत में कई आम इंफेक्शन जैसे UTI, निमोनिया, सेप्सिस और डायरिया का इलाज अब पहले जैसा आसान नहीं रहा है. अस्पतालों में मिलने वाले बैक्टीरिया पर असर करने वाली दवाएं तेजी से कमजोर पड़ रही हैं. यह तस्वीर ICMR की 2024 की AMR Surveillance Report ने साफ-साफ दिखा दी है. रिपोर्ट में देश के बड़े अस्पतालों से जुटाए लगभग एक लाख मरीजों के सैंपल का एनालिसिस शामिल है. इसमें सामने आया कि सबसे ज्यादा खतरा ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरिया से है, जो अब कई मजबूत एंटीबायोटिक तक को मात दे रहे हैं.

सबसे आम इंफेक्शन देने वाला E. coli पहले ही कई दवाओं पर रेसिस्टेंस दिखा चुका है. वहीं क्लेबसिएला न्यूमोनिया, जो निमोनिया और सेप्सिस का बड़ा कारण है, तीन-चौथाई मामलों में पाइपेरासिलिन-टैजोबैक्टम जैसी दवा को भी बेअसर कर देता है. कार्बापेनेम जैसी ‘लास्ट-लाइन’ एंटीबायोटिक पर भी इसका असर लगातार घट रहा है, जिससे मरीजों के इलाज के विकल्प बहुत कम रह जाते हैं. सबसे चिंताजनक हालात ICU में दिखे. यहां मिलने वाला एसिनेटोबैक्टर बाउमन्नी मेरोपेनम जैसी मजबूत दवा के प्रति 91 प्रतिशत तक रेसिस्टेंट पाया गया. ऐसे मामलों में डॉक्टरों को मजबूरी में ज्यादा टॉक्सिक और मुश्किल दवा-कॉम्बिनेशन का सहारा लेना पड़ रहा है. स्यूडोमोनास एरुगिनोसा की रेसिस्टेंस भी लगातार बढ़ रही है, जिससे वेंटिलेटर-असोसिएटेड निमोनिया का इलाज और मुश्किल हो रहा है.

रिपोर्ट के मुताबिक

    •  72 प्रतिशत ब्लडस्ट्रीम इंफेक्शन ऐसे बैक्टीरिया से हुए जो आम दवाओं पर असर नहीं दिखाते.
    • वेंटिलेटर से जुड़े ज्यादातर निमोनिया मामलों में एसिनेटोबैक्टर, क्लेबसिएला और स्यूडोमोनास जिम्मेदार रहे.
    • डायरिया पैदा करने वाले कई रोगाणु फ्लुओरोक्विनोलोन और सेफालोस्पोरिन जैसी लोकप्रिय दवाओं पर भी रेसिस्टेंट मिले.

कुछ जगह हल्की सुधार की उम्मीद जरूर दिखी है, जैसे E. coli में अमिकासिन और कुछ सेफलोस्पोरिन के प्रति बेहतर प्रतिक्रिया मिली है, लेकिन कुल मिलाकर तस्वीर और भी गंभीर होती जा रही है. फंगल इंफेक्शन में भी खतरा बढ़ रहा है. कैंडिडा औरिस लगभग 10 प्रतिशत मामलों में दवाओं के सामने टिका रहा, जबकि एस्परगिलस के करीब एक-तिहाई सैंपल Amphotericin B जैसी महत्वपूर्ण दवा के प्रति रेसिस्टेंट पाए गए. ICMR ने कहा कि यह डेटा अस्पतालों के इंफेक्शन का है, आम समुदाय की तस्वीर इससे अलग हो सकती है. फिर भी एक्सपर्ट्स के मुताबिक संकेत बेहद साफ हैं कि भारत में रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली एंटीबायोटिक दवाएं अपनी क्षमता खो रही हैं, और गंभीर मरीज इसका सीधा असर झेल रहे हैं.

सुपरबग्स क्या होते हैं?

सुपरबग्स ऐसे बैक्टीरिया हैं जो कई तरह की एंटीबायोटिक दवाओं के सामने टिक जाते हैं. जब किसी मरीज में इनकी वजह से इंफेक्शन होता है तो सामान्य दवाएं असर नहीं करतीं. इसी कारण इलाज लंबा खिंच जाता है और बीमारी को नियंत्रित करना भी मुश्किल हो जाता है.

भारत में दिखने वाले प्रमुख सुपरबग्स

    • मेथिसिलिन-रेसिस्टेंट स्टैफिलोकोकस ऑरियस
    • ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी
    • कार्बापेनेम-रेसिस्टेंट एंटरोबैक्टीरिएसी
    • वैनकोमाइसिन-रेसिस्टेंट एंटरोकॉकस

ये बैक्टीरिया कई दवाओं पर प्रतिक्रिया नहीं देते, इसलिए डॉक्टरों के लिए सही इलाज चुनना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Sports News:“शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर की टीम में वापसी कितनी जल्दी संभव है? गेंदबाज़ी कोच मोर्ने मोर्केल ने इस पर बड़ा अपडेट दिया।”

भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका वनडे सीरीज 30 नवंबर से शुरू होने वाली है. पहला मैच रांची में खेला जाएगा, लेकिन टीम इंडिया को कप्तान शुभमन गिल और उपकप्तान श्रेयस अय्यर की कमी खल रही होगी. ये दोनों ही चोटिल होने के कारण दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ODI सीरीज के लिए स्क्वाड में नहीं चुने गए थे. अब भारतीय टीम के गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्केल ने दोनों की चोट पर अपडेट दिया है.

श्रेयस और गिल पर अपडेट

पहले वनडे मैच से पूर्व मोर्ने मोर्केल ने कहा, “मेरी 2 दिन पहले शुभमन गिल से बात हुई थी, वो जल्दी रिकवर कर रहे हैं, यह सुनने के लिए अच्छी खबर है.”

मोर्केल ने श्रेयस अय्यर की चोट पर अपडेट देकर करहा, “श्रेयस अय्यर ने रिहैब शुरू कर दिया है. हमें इंतजार है कि दोनों जल्द स्क्वाड में वापसी करेंगे. अच्छी बात है कि दोनों स्वस्थ हैं और टीम में वापसी की तैयारी में जुटे हैं.”

एक तरफ शुभमन गिल के दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी20 सीरीज में खेलने की उम्मीद बनी हुई है, जो 9 दिसंबर से शुरू होनी है. दूसरी ओर श्रेयस अय्यर ने चाहे रिहैब शुरू कर दिया हो, लेकिन उनकी वापसी अभी दूर नजर आ रही है.

गिल और अय्यर को कैसे चोट आई

शुभमन गिल को भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका पहले टेस्ट मैच में गर्दन में चोट आई थी. कोलकाता में खेले गए उस टेस्ट मैच की पहली पारी में साइमन हार्मर के खिलाफ स्वीप शॉट खेलते समय गिल को गर्दन में खिंचाव आ गया था. इसी कारण वो दूसरे टेस्ट और अब वनडे सीरीज में भी नहीं खेल पाएंगे.

दूसरी ओर अय्यर की चोट अधिक गंभीर रही, जिन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे मैच में कैच पकड़ते समय पेट के ऊपरी हिस्से पर चोट आई थी. दरअसल कैच पकड़ते समय वो पेट के बल जमीन पर गिर गए थे. इस कारण उन्हें आंतरिक रक्तस्त्राव होने लगा था, इसके लिए उन्हें सिडनी में सर्जरी भी करवानी पड़ी.

“डोनाल्ड ट्रंप ने इस देश के लिए बड़ा धक्का तय कर दिया—G-20 समिट का न्योता नहीं भेजेंगे और सब्सिडी पर भी सख्त पाबंदियाँ लगा दी हैं।”

साउथ अफ्रीका की मेजबानी में हुए जी-20 शिखर सम्मेलन में संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल नहीं हुआ था. ट्रंप प्रशासन की ओर से कहा गया था कि साउथ अफ्रीका की सरकार ने ईसाईयों की हत्याओं पर चुप्पी साध रखी है और दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं की है. इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा फैसला किया है. ट्रंप ने कहा कि वह अगले साल फ्लोरिडा में होने वाले जी-20 समिट में साउथ अफ्रीका को न्योता नहीं देंगे और साथ ही उसे मिलने वाली सभी सब्सिडी को भी बंद कर रहे हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने पोस्ट शेयर कर दी जानकारी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संबंध में शुक्रवार (28 नवंबर, 2025) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया. पोस्ट में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “अमेरिका ने दक्षिण अफ्रीका में हुई जी20 शिखर सम्मेलन में इसलिए हिस्सा नहीं लिया क्योंकि दक्षिण अफ्रीकी सरकार अफ्रीकानर्स और डच, फ्रेंच और जर्मन मूल के अन्य लोगों के साथ हो रहे भीषण मानवाधिकार उल्लंघनों को न तो स्वीकार कर रही है और न ही उनसे निपट रही है. स्पष्ट शब्दों में कहें तो वहां श्वेत लोगों की हत्याएं की जा रही है और उनकी जमीनें और खेतों को भी उनसे छीना जा रहा है.”

उन्होंने कहा, “सबसे बुरा यह है कि जल्दी ही बंद होने वाला न्यूयॉर्क टाइम्स और तथाकथित फेक न्यूज मीडिया इस कथित नरसंहार के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोल पा रहा. यही वजह है कि कट्टर वामपंथी मीडिया के झूठे और ढोंगी लोग बंद होते जा रहे हैं.”

The United States did not attend the G20 in South Africa, because the South African Government refuses to acknowledge or address the horrific Human Right Abuses endured by Afrikaners, and other descendants of Dutch, French, and German settlers. To put it more bluntly, they are…

— Donald J. Trump (@realDonaldTrump) November 28, 2025

दक्षिण अफ्रीका को ट्रंप नहीं देंगे G20 का आमंत्रण

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “जी20 शिखर सम्मेलन के समापन के दिन दक्षिण अफ्रीका ने समारोह में मौजूद हमारे अमेरिकी दूतावास के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि को G20 की अध्यक्षता सौंपने से इनकार कर दिया. इसलिए मेरे निर्देश पर अब दक्षिण अफ्रीका को 2026 के होने वाले G20 में आमंत्रण नहीं दिया जाएगा, जिसका आयोजन अगले साल अमेरिका के फ्लोरिडा के मियामी शहर में की जाएगी.”

उन्होंने कहा, “दक्षिण अफ्रीका ने दुनिया को दिखा दिया है कि वे कहीं भी सदस्यता के योग्य देश नहीं हैं और हम उन्हें दिए जा रहे सभी भुगतानों और सब्सिडी को तत्काल प्रभाव से रोक रहे हैं.”

साउथ अफ्रीका में हुए जी-20 सम्मेलन में शामिल नहीं हुआ था अमेरिका

उल्लेखनीय है कि इस साल जी20 शिखर सम्मेलन 2025 की मेजबानी दक्षिण अफ्रीका ने जोहान्सबर्ग में की, जहां भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी, ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर समेत कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जापान, साउथ कोरिया, नीदरलैंड, जमैका के अलावा कई अन्य देशों के शीर्ष नेताओं ने भाग लिया. हालांकि, इस साल जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन का अमेरिका ने बहिष्कार किया था और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसमें भाग नहीं लिया.