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“सोमवार को भी ‘तेरे इश्क में’ की धमाकेदार कमाई जारी, 2025 की 5वीं सबसे बड़ी रोमांटिक फिल्म बन गई.”

कृति सेनन और धनुष स्टारिंग रोमांटिक ड्रामा ‘तेरे इश्क में’ 28 नवंबर को बड़े पर्दे पर रिलीज हुई थी. इस मूवी को आनंद एल. राय ने डायरेक्ट किया है और इसे दर्शकों और क्रिटिक्स दोनों से पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिला है. इस फिल्म को मिल रहे पॉजिटिव वर्ड ऑफ़ माउथ का असर बॉक्स ऑफिस पर भी देखने को मिला. इसी के साथ इसकी शुरुआत तो शानदार रही वहीं इसका ओपनिंग वीकेंड भी कमाल का रहा. चलिए यहां जान लेते हैं इस फिल्म ने रिलीज के चौथे दिन यानी मंडे को कितना कलेक्शन किया है?

तेरे इश्क में’ ने रिलीज के चौथे दिन कितना किया कलेक्शन?
आनंद एल राय की ‘तेरे इश्क में’ घरेलू बॉक्स ऑफिस पर सुपरस्ट्रॉन्ग बनी हुई है. एक ब्लॉकबस्टर वीकेंड के बाद,  इस फिल्म ने पहले सोमवार को भी बॉक्स ऑफिस पर अपनी पकड़ बनाए रखी है. बता दें कि ‘तेरे इश्क में’ ने 16 करोड़ की शानदार ओपनिंग की थी. तब से ये फिल्म टिकट काउंटर पर तेज़ी से दौड़ रही है और इसने दूसरे दिन 6.25 फीसदी की बढ़त दिखाते हुए 17 करोड़ का कलेक्शन किया है. वहीं तीसरे दिन इस फिल्म ने 11.76 फीसदी की ग्रोथ दिखाते हुए 19 करोड़ की कमाई की है.

    • वहीं सैकनिल्क की अर्ली ट्रेंड रिपोर्ट के मुताबिक ‘तेरे इश्क में’ ने रिलीज के चौथे दिन यानी मंडे को 7.16 करोड़ की कमाई की है.
    • इसी के साथ ‘तेरे इश्क में’ की चार दिनों की कुल कमाई अब 59.16 करोड़ रुपये हो गई है.

तेरे इश्क में बनी साल की पांचवी सबसे बड़ी रोमांटिक फिल्म
‘तेरे इश्क में’ ने रिलीज के चौथे दिन यानी मंडे को भी शानदार कमाई की है. हालांकि इसके कलेक्शन में गिरावट भी दर्ज की गई है बावजूद इसके ये फिल्म परम सुंदरी (54.85 करोड़), मेट्रो इन डिनो (56.3 करोड़), और सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी (57.48 करोड़) को भी मात देकर साल 2025 की 5वीं सबसे बड़ी रोमांटिक फिल्म बन गई है.

ये हैं 2025 की टॉप 10 बॉलीवुड रोमांटिक फिल्में (इंडिया नेट कलेक्शन)

    • सैयारा: 337.69 करोड़
    • दे दे प्यार दे 2: 86.80 करोड़
    • एक दीवाने की दीवानियत: 85.78 करोड़
    • भूल चूक माफ़: 74.81 करोड़
    • ‘तेरे इश्क में’: 59.16 करोड़
    • सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी: 57.48 करोड़
    • मेट्रो इन डिनो: 56.3 करोड़
    • परम सुंदरी: 54.85 करोड़
    • धड़क 2: 24.24 करोड़
    • मेरे हस्बैंड की बीवी: 12.25 करोड़

तेरे इश्क में’ के बारे में
यह फ़िल्म मुक्ति (कृति सनोन) और शंकर (धनुष) की उथल-पुथल भरी लव स्टोरी पर आधारित है. उनका रिश्ता एक यंग, ​​पैशनेट रोमांस से शुरू होता है, लेकिन किस्मत एक बुरा मोड़ लेती है, जिससे ये लवर अलग हो जाते हैं. शंकर का दिल टूटना उसे गुस्से और तबाही के रास्ते पर ले जाता है, जिससे कहानी जुनून, दर्द और नतीजों की एक गहरी कहानी बन जाती है. आनंद एल राय की सिग्नेचर स्टोरीटेलिंग, जो इमोशन और रियलिज़्म पर आधारित है, ए आर रहमान के म्यूज़िक और लीड एक्टर्स की शानदार परफॉर्मेंस के साथ मिलकर, ‘तेरे इश्क़ में’ को दर्शकों के लिए एक खास सिनेमैटिक एक्सपीरियंस बनाती है.

Sports News:विराट कोहली के पैर छूने वाला फैन क्या जेल में है? जानें सिक्योरिटी ब्रीच पर मिलती है कैसी सज़ा।

विराट कोहली ने रांची में खेले गए भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका पहले वनडे में 135 रनों की शानदार पारी खेली. उन्होंने जब अपना शतक पूरा किया, तब स्टेडियम में बैठा एक फैन बॉउंड्री कूदकर स्टेडियम में घुस आया. वह दौड़ते हुए क्रीज तक पहुंचा, जैसे ही फैन कोहली के पैरों में गिरा तो कोहली भी डर गए. दरअसल उन्हें अंदाजा नहीं था कि कोई दौड़ते हुए उनके पास आ रहा है. फिर सिक्योरिटी वाले आए और फैन को स्टेडियम के बाहर ले गए, इस दौरान पुलिस भी नजर आई. लेकिन अभी वो फैन कहां है? जानिए क्रिकेट मैच में सिक्योरिटी ब्रीच पर क्या कुछ सजा हो सकती है.

विराट कोहली के साथ पहले भी ऐसा कई बार हो चुका है कि उनका फैन सुरक्षा घेरे को चकमा देकर उनके पास पहुंचा, हालांकि उनका इरादा कोहली को नुकसान पहुंचाने का नहीं होता लेकिन फिर भी सुरक्षा के लिहाज से ये गंभीर खतरा पैदा करता है. अब सवाल ये आता है कि क्रिकेट मैच में सिक्योरिटी ब्रीच पर क्या कुछ सजा हो सकती है?

क्या मिलती है सजा?

ऐसे मामलों में आईसीसी (ICC) और बीसीसीआई (BCCI) का कोई स्पष्ट नियम नहीं है, लेकिन ज्यादातर कार्यवाई कठोर होती है.

भारी जुर्माना: कई बार सुरक्षा टीम सिक्योरिटी ब्रीच करने वाले शख्स समझाकर छोड़ देती है, लेकिन कार्यवाई कठोर हो सकती है. जैसे टी20 वर्ल्ड कप 2022 में ऑस्ट्रेलिया में एक भारतीय फैन पर 6.5 लाख का भारी जुर्माना लगा था.

पुलिस और जेल: सिक्योरिटी शख्स को पुलिस के हवाले कर सकती है. पुलिस शख्स को गिरफ्तार भी कर सकती है. जैसा रांची में फैन के साथ हुआ.

कहां है कोहली के पैर छूने वाला फैन

एक रिपोर्ट में बताया गया कि रांची में कोहली के पास पहुंचे फैन का नाम सौविक है. मैदान में घुसने के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था. रिपोर्ट में उनके पिता के हवाले से बताया गया कि सौविक ने पैसे बचाकर टिकट खरीदी थी. वह इससे पहले आईपीएल का मैच देखने चेन्नई साईकिल से गए थे. हालांकि अभी ऐसी कोई खबर सामने नहीं आई कि फैन को छोड़ दिया गया है.

“सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की गला दबाकर हत्या; एक्स-बॉयफ्रेंड ने शव को सूटकेस में बंद कर जंगल में दफनाया।”

ऑस्ट्रियाई इंफ्लुएंसर स्टेफनी पीपर (31 साल) की हत्या करने के बाद उनकी लाश को सूटकेस में भरकर स्लोवेनिया के जंगल में जमीन के अंदर दफना दिया गया. उनके एक्स बॉयफ्रेंड पैट्रिक एम ने पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल करते हुए, वारदात को अंजाम देने की पूरी कहानी बयां की है.

ऑस्ट्रिया की ग्राज शहर में रहने वाली स्टेफनी की 23 नवंबर को मौत हुई थी. उसी दिन वह एक जरूरी काम से बाहर जाने वाली थी. जब वह तय समय पर नहीं पहुंची तो उनके दोस्त ने पुलिस में इसकी खबर कर दी. इसके अलावा 24 सितंबर को उनकी मां ने सोशल मीडिया पर लिखा था, “मेरी बेटी स्टेफनी पी. कल (23 नवंबर) सुबह से गायब हैं. उसके बाएं हाथ पर अपनी मां के नाम पर टैटू बना हुआ है.

एक हफ्ते की जांच में हुआ खुलासा

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, जब 23 नवंबर की शाम को पुलिस जांच के लिए स्टेफनी के अपार्टमेंट में पहुंची तो वहां सिर्फ उनके एक्स बॉयफ्रेंड पैट्रिक और उनका कुत्ता ही मौजूद था. उस दौरान पैट्रिक ने पुलिस को बताया कि वह पीपर के कुत्ते की देखभाल के लिए यहां रुका हुआ था. पुलिस को घर के दरवाजे की फ्रेम पर खून के निशान भी मिले थे. हालांकि, पैट्रिक पर किसी तरह का शक पुलिस को नहीं हुआ था.

सुबह Ex बॉयफ्रेंड से हुई थी बहस

गवाहों ने जांच में सहयोग किया, जिससे पुलिस को कई अहम जानकारी मिली. पुलिस को पता लगा कि सुबह करीब 8 बजे, अपार्टमेंट से बहस की आवाज आई. उस आदमी को अपार्टमेंट से किसी तरह का कालीन लेकर बाहर निकलते देखा गया था. यह जानकारी NYT ने ऑस्ट्रिया की मीडिया एजेंसी क्रोनन जितुंग की रिपोर्ट के हवाले से जुटाई है.

सबूत मिटाने की कोशिश में था हत्यारा

इस पूरे मामले में गिरफ्तारी तब हुई, जब एक दिन बाद आरोपी को स्लोवेनियाई स्पीलफेल्ड बॉर्डर के पास एक कार कसीनो के पास जलती हुई मिली. पुलिस का दावा है कि वह सबूत छिपाने की कोशिश में लगा हुआ था. अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर कार को अपने कब्जे में लिया और उसे ऑस्ट्रेयिन अधिकारियों को सौंप दिया गया.

कई राउंड की पूछताछ और कबूल लिया जुर्म

ऑस्ट्रियिन पुलिस ने इस मामले में कई राउंड पूछताछ की. इसके बाद आरोपी ने जुर्म कबूल कर लिया. 31 साल के पैट्रिक ने बताया, उसने पीपर का गला घोंट दिया. उसकी बॉडी को एक सूटकेस में रखा और स्लोवेनियाई जंगल में एक जंगली इलाके में दफना दिया. इस मामले में आरोपी के भाई और सौतेले पिता को भी गिरफ्तार किया गया है. हालांकि, वह निर्दोष थे, उनका इस हत्या में कोई हाथ नहीं पाया गया, जिसके बाद छोड़ दिया गया. पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर इंफ्लुएंसर की बॉडी को बरामद किया. अब माना जा रहा है कि आरोपी को इस केस में 20 साल की सजा या उम्रकैद हो सकती है.

‘120 बहादुर’ बनाम ‘मस्ती 4’: किस फिल्म को देखना है बेहतर? यहां जानिए पूरी तुलना

21 नवंबर को सिनेमाघरों पर कई फिल्में रिलीज हुई हैं. मगर दो फिल्मों का सबसे ज्यादा बज है. उसमें से एक फरहान अख्तर की 120 बहादुर है और दूसरी विवेक ओबेरॉय, रितेश देशमुख और आफताब शिवदासानी की मस्ती 4 है. इन दोनों ही फिल्मों का फैंस लंबे समय से इंतजार कर रहे थे. ये दोनों ही फिल्में एकदम अलग जॉनर की है. अगर आप थिएटर जाकर फिल्म देखने का प्लान बना रहे हैं तो आइए आपको बताते हैं दोनों में से कौन-सी फिल्म देखने लायक है.

120 बहादुर में क्या है खास

फरहान अख्तर इस फिल्म से लंबे समय के बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रहे हैं. इस फिल्म में उन 120 जवानों की कहानी दिखाई गई है जिनके बारे में शायद ही किसी को पता होगा. 1962 में जब भारत और चीन के बीच जंग हुई थी तो रेजांग ला में हमारे 120 बहादुर 3000 चीनी सैनिकों से भिड़ गए थे. उनकी कहानी है ये फिल्म. आपके अंदर एक बार देशभक्ति जगा देगी.

क्यों देखें मस्ती 4

मस्ती फ्रेंचाइजी की ये चौथी फिल्म है. इस सीरीज की हर फिल्म हिट साबित हुई है. एक बार फिर विवेक ओबेरॉय, रितेश देशमुख और आफताब शिवदासानी लोगों को हंसाने के लिए आ रहे हैं. एडल्ट कॉमेडी की बेस्ट फिल्मों में से एक है ये. इस बार कास्ट में नए लोग भी शामिल हैं. अगर आप कुछ लाइट हंसने वाली फिल्म देखना चाहते हैं तो ये आपके लिए परफेक्ट है.

अगर आपको वॉर और ऐतिहासिक ड्रामा पसंद है, तो ‘120 बहादुर’ आपके लिए बेहतर ऑप्शन है. फिल्म को अच्छे रिव्यू और रेटिंग अच्छी मिली है. वहीं, ‘मस्ती 4’ अपनी कॉमेडी फ्रेंचाइजी को आगे बढ़ाती है. फिल्म पूरी तरह से एडल्ट ह्यूमर और लाइट-हार्टेड एंटरटेनमेंट पसंद करने वाले दर्शकों के लिए है. अगर इस फ्रेंचाइजी की पिछली फिल्में आपको पसंद आई हैं तो इसे आप देख सकते हैं.

दोनों फिल्में बिल्कुल अलग जॉनर की हैं और दोनों की रिव्यू और रेटिंग अच्छी मिली है. ऐसे में ये आपकी पसंद पर निर्भर करता है कि किस तरह की फिल्में देखना आपको पसंद है.

“फिल्म इतिहास के खतरनाक विलेन ‘डार्थ वेडर’ के मास्क के पीछे कौन था? जानें पर्दे के पीछे की असली पहचान।”

मनोरंजन जगत के इतिहास में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जिनका चेहरा दुनिया कम पहचानती है, लेकिन उनका काम दुनिया की सबसे गहरी यादों में दर्ज रहता है. डेविड प्राउज ऐसा ही नाम है. एक ऐसे ब्रिटिश अभिनेता जिन्होंने कई फिल्मों में काम किया लेकिन एक किरदार ने उन्हें शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचा दिया. कहानी में ट्विस्ट ये था कि उनका हिट किरदार कभी पर्दे पर नजर ही नहीं आया.

न पर्दे पर दिखा और न ही उसकी आवाज सुनी गई, लेकिन उसकी मौजूदगी ने सिनेमा के सबसे आइकॉनिक खलनायक डार्थ वेडर को जीवंत बना दिया. 1 दिसंबर 2020 को उनका निधन हुआ, और उनके साथ फिल्म इतिहास का एक अनोखा अध्याय भी शांत हो गया.

डेविड प्राउज की कहानी है बेहद दिलचस्प

डेविड प्राउज की कहानी उतनी ही दिलचस्प है जितनी रहस्यमयी. उनका जन्म 1935 में इंग्लैंड में हुआ था, और बचपन से ही उनकी ऊंचाई, कद-काठी और शारीरिक शक्ति उन्हें भीड़ से अलग करती थी. उन्होंने बॉडीबिल्डिंग में नाम कमाया और “मिस्टर यूनिवर्स” जैसी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया. यही कद-काठी उन्हें आगे फिल्मों तक पहुंचा पाई.

1977 में जब जॉर्ज लुकास स्टार वार्स बना रहे थे, उन्हें एक ऐसे कलाकार की जरूरत थी जो पर्दे पर लंबा, प्रभावशाली और डर पैदा करने वाला लगे और यही वह क्षण था जिसने डेविड प्राउज की किस्मत बदल दी.

उन्हें डार्थ वेडर का शरीर निभाने के लिए चुना गया. दिलचस्प बात यह है कि आवाज उनके पास नहीं थी; वह काम जेम्स अर्ल जोन्स को दिया गया. चेहरा भी नहीं दिखाया गया; नकाब के पीछे छिपा हुआ हर भाव सिर्फ शरीर की हलचल, चाल, मुद्रा और हथियार पकड़ने के अंदाज से ही प्रकट होना था.

डेविड प्राउज ने निभाया इतिहास के सबसे यादगार खलनायाक का रोल

लेकिन दिक्कतों के बावजूद, डेविड प्राउज ने एक ऐसा व्यक्तित्व बनाया जो स्क्रीन पर आते ही दर्शकों को आतंकित कर देता था. उनके चलने के अंदाज में सैनिकों जैसी कठोरता, उनके कंधों की चौड़ाई में ताकत और उनकी तलवार पकड़ने के तरीके में गजब का नियंत्रण झलकता था. वे स्क्रीन पर चेहरा न दिखाते हुए भी इतिहास के सबसे यादगार खलनायक बन गए.

डेविड प्राउज की कहानी को अनोखा बनाने वाला दूसरा पहलू है उनकी भावनात्मक दूरी. कई साल तक वे स्टार वार्स के निर्माण से अलग-थलग महसूस करते रहे. अक्सर कहा जाता है कि कुछ गलतफहमियां हुईं जिनसे वे मुख्य टीम से कट गए.

फिर भी फैंस के बीच वे हमेशा एक सम्मानित हस्ती रहे. लाखों लोग उनसे सिर्फ एक हस्ताक्षर या उनकी भारी-भरकम मौजूदगी के लिए मिलते थे. हॉलीवुड के अलावा उन्होंने कई ब्रिटिश और अमेरिकी टीवी सीरीज में अभिनय किया, लेकिन वेडर ने जो दिया वो उनकी मौत के बाद भी जुड़ा रहा.

उनकी मृत्यु के बाद सोशल मीडिया पर “आरआईपी, रियल वेडर” जैसे संदेशों ने यह दिखा दिया कि असली यादें उन किरदारों की भी होती हैं जो न दिखते हुए भी इतिहास बदल देते हैं. डेविड प्राउज ने बिना चेहरे दिखाए, बिना एक शब्द बोले, सिर्फ शरीर और चाल से एक ऐसा किरदार गढ़ा, एक ऐसी पहचान बना दी, जिसे दुनिया कभी नहीं भूल सकती.