कालपी (जालौन): जनपद के कालपी नगर में क्रय–विक्रय सहकारी समिति,कालपी के सचिव प्रदीप दुबे के सेवा-निवृत्ति अवसर पर एक गरिमामय विदाई एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। यह समारोह कालपी के आलमपुर स्थित नवीन सरस्वती विद्या मंदिर परिसर में सम्पन्न हुआ, जिसमें सहकारिता, सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने सहभागिता की।
समारोह के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण सहकारी संघ के निदेशक डॉ. प्रवीण सिंह जादौन रहे। कार्यक्रम के दौरान डॉ. जादौन ने श्री प्रदीप दुबे को शॉल, श्रीफल एवं प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि दुबे ने अपने सेवाकाल में ईमानदारी, निष्ठा और कर्तव्यपरायणता के साथ कार्य करते हुए सहकारिता विभाग को मजबूत आधार प्रदान किया। ऐसे कर्मठ और समर्पित अधिकारी विभाग की वास्तविक पूंजी होते हैं।
डॉ. जादौन ने कहा कि सहकारिता व्यवस्था किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आम जनमानस से सीधे जुड़ी हुई है और श्री प्रदीप दुबे जैसे अधिकारी इस व्यवस्था की रीढ़ रहे हैं। उन्होंने उनके स्वस्थ, सक्रिय और सम्मानपूर्ण सेवानिवृत्त जीवन की कामना की।
विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला केंद्रीय सहकारी उपभोक्ता भंडार जालौन के अध्यक्ष उपेन्द्र सिंह राजावत उपस्थित रहे। उन्होंने दुबे के साथ अपने कार्यानुभव साझा करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में सहकारिता से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता और अनुशासन बना रहा। उन्होंने कहा कि श्री दुबे का सरल स्वभाव और समस्याओं के समाधान के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण हमेशा स्मरणीय रहेगा।
कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी कालपी के अध्यक्ष सुबोध द्विवेदी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्रदीप दुबे ने अपने कार्यकाल में न केवल विभागीय दायित्वों का निर्वहन किया, बल्कि सामाजिक समरसता और सहयोग की भावना को भी बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे अधिकारी समाज के लिए प्रेरणास्रोत होते हैं।
इस अवसर पर उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी दुबे के सेवाकाल की सराहना करते हुए उन्हें एक कर्मठ, अनुशासित एवं जनहित के प्रति संवेदनशील अधिकारी बताया। समारोह में सहकारिता विभाग के कर्मचारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन सभी अतिथियों द्वारा प्रदीप दुबे के उज्ज्वल भविष्य की कामना एवं सामूहिक स्मृति-चिह्न प्रदान किए जाने के साथ हुआ। समारोह सौहार्दपूर्ण एवं भावनात्मक वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर प्रदेशीय कोऑपरेटिव यूनियन के प्रतिनिधि राहुल समाधिया, क्रय-विक्रय कलपी के उपसभापति उदय प्रताप सिंह, ओंकार सिंह सेंगर तथा मिनोरा सहकारी संघ के अध्यक्ष श्याम करण प्रजापति मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
लखनऊ: सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने शनिवार को सुल्तानपुर रोड, गोसाईगंज स्थित स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज (एसएमएस) में आयोजित प्रिंसिपल्स कॉनक्लेव – 2026 में मुख्य वक्ता के रूप में भाग लेकर शिक्षा जगत को एक नई दिशा देने वाला संदेश दिया। सम्मेलन का विषय था- “Mental Health and Well-Being of Students and Educators: Creating a Supportive Ecosystem” (छात्रों एवं शिक्षकों का मानसिक स्वास्थ्य एवं सुख-समृद्धि: एक सहायक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण)।
कार्यक्रम में देश-प्रदेश से आए प्रिंसिपल, शिक्षाविद, नीति-निर्माता और शिक्षा विशेषज्ञ शामिल हुए। डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने ओजस्वी और तथ्यपरक संबोधन में स्पष्ट कहा कि मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा का कोई अतिरिक्त या वैकल्पिक हिस्सा नहीं है, बल्कि यह सतत, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बुनियाद है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर छात्रों और शिक्षकों का मन स्वस्थ नहीं है, तो कोई भी पाठ्यक्रम, तकनीक या संसाधन शिक्षा को सफल नहीं बना सकता।
डॉ. राजेश्वर सिंह: शिक्षा और समाज को जोड़ने वाली मजबूत कड़ी
डॉ. राजेश्वर सिंह ने एक जनप्रतिनिधि होने के साथ-साथ समाज, शिक्षा और युवाओं से जुड़े विषयों पर अपनी गहरी समझ का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि एक विधायक की जिम्मेदारी केवल सड़क, बिजली और पानी तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि समाज के मानसिक, बौद्धिक और नैतिक विकास में भी उसकी भूमिका होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि सरोजनीनगर क्षेत्र में वे लगातार शिक्षा, युवाओं और महिलाओं के मानसिक सशक्तिकरण से जुड़े कार्यक्रमों को बढ़ावा दे रहे हैं और भविष्य में इसे और व्यापक रूप देने का संकल्प लिया है।
उन्होंने कहा कि आज का बच्चा तकनीक से जुड़ा जरूर है, लेकिन भावनात्मक रूप से कई बार अकेला और दबाव में होता है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों और अभिभावकों—तीनों की संयुक्त जिम्मेदारी बनती है कि वे बच्चों को सिर्फ अंक नहीं, बल्कि आत्मबल भी दें।
भारत की विशाल शिक्षा व्यवस्था और बदलती चुनौतियां
डॉ. राजेश्वर सिंह ने भारत की शिक्षा व्यवस्था का व्यापक चित्र प्रस्तुत करते हुए बताया कि-
स्कूली शिक्षा में 24.8 करोड़ छात्र
14.72 लाख स्कूल
लगभग 98 लाख शिक्षक
उच्च शिक्षा में 4.33 करोड़ छात्र
40,000 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थान
उन्होंने कहा कि आजादी के समय मात्र 10% साक्षरता से बढ़कर आज लगभग 80% तक पहुंचना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह शिक्षकों, प्रिंसिपलों और शैक्षणिक संस्थानों की वर्षों की मेहनत का परिणाम है।
उन्होंने यह भी बताया कि आज 82% संस्थान हाइब्रिड लर्निंग अपना चुके हैं, एडटेक सेक्टर 10.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है, शिक्षा पर जीडीपी का लगभग 6.5% खर्च हो रहा है और एआई व डिजिटल टूल्स तेजी से शिक्षा में शामिल हो रहे हैं। लेकिन इन सभी प्रगतियों के बीच मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर चुनौती बनकर उभरा है।
डराने वाले आंकड़े, गंभीर चेतावनी
डॉ. राजेश्वर सिंह ने WHO इंडिया, NCERT, द लैंसेट साइकेट्री और UNICEF इंडिया के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि—
5 में से 3 छात्र किसी न किसी स्तर पर चिंता से ग्रस्त हैं
करीब 70% छात्र अकादमिक दबाव में हैं
50% से अधिक में अवसाद के शुरुआती लक्षण हैं
55% शिक्षक कार्य-संबंधित तनाव से पीड़ित हैं
1 में से 4 शिक्षक नियमित रूप से आत्म-देखभाल नहीं कर पाते
उन्होंने कहा कि ये आंकड़े सिर्फ नंबर नहीं हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य की चेतावनी हैं। अगर आज हमने इस पर ध्यान नहीं दिया, तो कल हमें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
प्रिंसिपलों को दिया नेतृत्व का मंत्र
डॉ. राजेश्वर सिंह ने प्रिंसिपलों को संस्थान का “मानवीय वास्तुकार” बताते हुए कहा कि शिक्षक कक्षा बनाते हैं, लेकिन प्रिंसिपल पूरे माहौल को गढ़ते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि हर प्रिंसिपल अपने संस्थान को केवल परीक्षा केंद्र नहीं, बल्कि जीवन निर्माण केंद्र बनाए।
उन्होंने सुझाव दिया कि-
हर स्कूल और कॉलेज में वार्षिक वेलनेस कैलेंडर बने
प्रशिक्षित काउंसलर की नियुक्ति हो
छात्रों और शिक्षकों के लिए सुरक्षित संवाद मंच तैयार किए जाएं
योग, ध्यान, खेल और कला को नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाए
उनका स्पष्ट संदेश था कि मानसिक स्वास्थ्य अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है।
जनप्रतिनिधि के रूप में सक्रिय भूमिका
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि वे इस विषय को केवल मंच से बोलकर नहीं छोड़ेंगे, बल्कि इसे नीतिगत और सामाजिक स्तर पर आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे शासन, प्रशासन और शिक्षा विभाग से मिलकर ऐसे मॉडल विकसित करने का प्रयास करेंगे, जिससे स्कूलों और कॉलेजों में मानसिक स्वास्थ्य को व्यवस्थित रूप से शामिल किया जा सके।
उन्होंने कहा कि सरोजनीनगर क्षेत्र में वे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में स्कूलों में काउंसलिंग, लाइफ-स्किल ट्रेनिंग और पैरेंट-टीचर वर्कशॉप जैसे कार्यक्रम शुरू कराने की दिशा में काम करेंगे, ताकि इसका मॉडल पूरे प्रदेश में अपनाया जा सके।
विशिष्ट अतिथियों का सम्मान
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व आईएएस अधिकारी एवं सुशांत यूनिवर्सिटी, गुड़गांव के कुलपति जय शंकर मिश्रा की उपस्थिति को डॉ. राजेश्वर सिंह ने प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि जय शंकर मिश्रा का प्रशासनिक अनुभव और शैक्षणिक दृष्टि सभी के लिए मार्गदर्शक है।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज, लखनऊ की पूरी टीम को इस सफल आयोजन के लिए बधाई दी और श्री आनंद के. सिन्हा (सचिव, AKWL), ए.के. माथुर, डॉ. धर्मेंद्र सिंह, डॉ. आशीष भटनागर, डॉ. बी.आर. सिंह, डॉ. जगदीश सिंह, डॉ. वी.बी. सिंह, श्री सुरेंद्र श्रीवास्तव, डॉ. पी.के. सिंह, राहुल अवस्थी और आदित्य प्रताप सिंह सहित सभी विशिष्ट अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
शिक्षा का भविष्य: स्वस्थ मन, मजबूत राष्ट्र
अपने संबोधन के अंत में डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि मजबूत भारत की नींव तभी पड़ेगी, जब हमारे बच्चे न केवल पढ़े-लिखे, बल्कि मानसिक रूप से स्वस्थ, आत्मविश्वासी और संवेदनशील होंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षा का असली उद्देश्य केवल नौकरी दिलाना नहीं, बल्कि संतुलित इंसान बनाना है।
उन्होंने विश्वास जताया कि प्रिंसिपल्स कॉनक्लेव-2026 जैसे मंच शिक्षा को केवल अकादमिक नहीं, बल्कि मानवीय और संवेदनशील बनाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाएंगे, और इसमें जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों और समाज- तीनों की साझी जिम्मेदारी होगी।
लखनऊ: नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) – NUJ (I) की लखनऊ इकाई की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संगठनात्मक दृष्टि से निर्णायक बैठक आज पॉलिटेक्निक चौराहे स्थित कॉफी अड्डा में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता लखनऊ इकाई की कार्यवाहक अध्यक्षा मीनाक्षी मनु वर्मा ने की। इस बैठक में प्रदेश स्तर के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ-साथ लखनऊ इकाई के सभी पदाधिकारी और सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
बैठक का मुख्य उद्देश्य संगठन को मजबूत, पारदर्शी और सक्रिय बनाना तथा पत्रकारों के हितों से जुड़े मुद्दों पर ठोस और व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करना रहा। बैठक के दौरान संगठन की वर्तमान स्थिति, भविष्य की रणनीति, सदस्यता विस्तार, पत्रकारों की सामाजिक, आर्थिक और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं तथा उनके समाधान पर विस्तार से चर्चा की गई। सभी वक्ताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि NUJ (I) को जमीनी स्तर पर और अधिक सक्रिय करते हुए हर पत्रकार तक इसकी पहुंच बनाई जाएगी।
नए कार्यवाहक पदाधिकारियों का सर्वसम्मति से चयन
बैठक के दौरान सर्वसम्मति से NUJ (I) लखनऊ इकाई के लिए नए कार्यवाहक पदाधिकारियों का चयन किया गया। संगठन को सुचारू रूप से संचालित करने और पत्रकारों के हितों के लिए प्रभावी कार्य करने के उद्देश्य से निम्न पदों पर नियुक्ति की गई-
कार्यवाहक महामंत्री – श्यामल त्रिपाठी
कार्यवाहक कोषाध्यक्ष – अभिनव श्रीवास्तव
कार्यवाहक संगठन मंत्री – अनिल सिंह
सभी सदस्यों ने तालियों के साथ इन नियुक्तियों का स्वागत किया और नवचयनित पदाधिकारियों को बधाई दी।
प्रदेश और लखनऊ इकाई के पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
बैठक में NUJ (I) की प्रदेश इकाई से वरिष्ठ पदाधिकारी के. बख्श सिंह, अजय जायसवाल, अनुपम सिंह चौहान, अतुल मोहन सिंह, एस. वी. सिंह और अरुण कुमार (टीटू) विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने संगठन की मजबूती, अनुशासन और पत्रकार हितों के लिए निरंतर संघर्ष पर अपने विचार रखे और लखनऊ इकाई को हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
लखनऊ इकाई की ओर से कार्यवाहक अध्यक्षा मीनाक्षी मनु वर्मा के नेतृत्व में कार्यवाहक महामंत्री श्यामल त्रिपाठी, कार्यवाहक कोषाध्यक्ष अभिनव श्रीवास्तव, आलोक श्रीवास्तव, मनीषा सिंह चौहान, गरिमा सिंह, रंजना सिंह, किरण सिंह, धीरेन्द्र मिश्रा, सचिन, नागेन्द्र सिंह, संतोष पटवा और शिवसागर सिंह बैठक में मौजूद रहे। सभी पदाधिकारियों और सदस्यों ने संगठन को मजबूत करने के लिए अपने-अपने सुझाव रखे। इसके साथ ही शारीरिक अस्वस्थता के चलते बैठक में प्रत्यक्ष रूप से न पहुंच पाई संगीता जी और नेहा जी के अलावा पंकज सिंह ने भी सर्वसम्मति से लिए गए सभी फैसलों का स्वागत किया है।
पत्रकार हितों पर केंद्रित रही चर्चा
बैठक में पत्रकारों की सुरक्षा, मानदेय, कार्यस्थल पर सम्मान, उत्पीड़न के मामलों में संगठन की भूमिका, प्रशासन से संवाद, तथा पत्रकारों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं जैसे विषयों पर गहन चर्चा की गई। यह तय किया गया कि आने वाले दिनों में NUJ (I) लखनऊ इकाई पत्रकारों की समस्याओं को लेकर संबंधित विभागों और अधिकारियों से संवाद करेगी और आवश्यक होने पर आंदोलनात्मक कदम भी उठाएगी।
संगठन को नई दिशा देने का संकल्प
कार्यवाहक अध्यक्षा मीनाक्षी मनु वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि NUJ (I) सिर्फ एक संगठन नहीं बल्कि पत्रकारों की आवाज है। उन्होंने कहा कि लखनऊ इकाई आने वाले समय में और अधिक सक्रिय होकर पत्रकार हितों के लिए संघर्ष करेगी। उन्होंने सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर काम करने, संगठन के नियमों का पालन करने और पत्रकारों के हितों को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया।
प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों ने भी अपने संबोधन में कहा कि लखनऊ इकाई का गठन और उसका सक्रिय होना पूरे प्रदेश के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इससे पत्रकारों को एक मजबूत मंच मिलेगा, जहां उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना और सुलझाया जाएगा।
सर्वसम्मति से चुने गए पदाधिकारियों को दी गई बधाई
बैठक के अंत में सर्वसम्मति से चुने गए सभी कार्यवाहक पदाधिकारियों- श्यामल त्रिपाठी, अभिनव श्रीवास्तव और अनिल सिंह को उपस्थित सभी सदस्यों ने बधाई दी।
साथ ही NUJ प्रदेश टीम से आए के. बख्श सिंह, अजय जायसवाल, अनुपम सिंह चौहान, अतुल मोहन सिंह, एस. वी. सिंह, अरुण कुमार (टीटू) तथा लखनऊ इकाई की कार्यवाहक अध्यक्षा मीनाक्षी मनु वर्मा, आलोक श्रीवास्तव, मनीषा सिंह चौहान, गरिमा सिंह, रंजना सिंह, किरण सिंह, नागेन्द्र सिंह, शिवसागर सिंह, धीरेन्द्र और सचिन को भी संगठन के लिए उनके योगदान और सक्रियता के लिए साधुवाद दिया गया।
सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि NUJ (I) लखनऊ इकाई आने वाले समय में पत्रकार हितों के लिए पूरी मजबूती, ईमानदारी और सक्रियता के साथ कार्य करेगी और यह संगठन पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा का एक सशक्त मंच बनकर उभरेगा।
प्रकृति पूजन भारतीय संस्कृति का मूल, पर्यावरण संरक्षण हमारी समष्टिगत जिम्मेदारी – डॉ. राजेश्वर सिंह
भारत विकास परिषद् द्वारा पंचसूत्रीय कथा महोत्सव का शुभारम्भ, पर्यावरण और राष्ट्रकर्तव्यों पर शुरू हुआ मंथन
सरोजनीनगर को पर्यावरण-सशक्त मॉडल बनाने की दिशा में डॉ. सिंह ने गिनाईं ठोस उपलब्धियाँ और आगे की दिशा
जल का संयम और वृक्षारोपण भविष्य की पीढ़ियों के लिए अनिवार्य – आरएसएस प्रचार प्रमुख सुभाष
लखनऊ भारत विकास परिषद्, अवध प्रान्त द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष की प्रेरणा से आयोजित 5 दिवसीय पंच सूत्रीय कथा महोत्सव का शुभारम्भ शुक्रवार को कृष्णा नगर स्थित सुमितनाथ सेवा भवन में धार्मिक एवं सांस्कृतिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने परिषद् की पंचसूत्रीय अवधारणा – संपर्क, सहयोग, संस्कार, सेवा और समर्पण को समाज-निर्माण के पाँच आधारस्तंभ बताते हुए इसे राष्ट्रीय चेतना को सुदृढ़ करने वाला महत्वपूर्ण आयोजन बताया।
पर्यावरण संरक्षण पर डॉ. सिंह का गहन विश्लेषण
अपने संबोधन में डॉ. सिंह ने भारतीय संस्कृति के प्रकृति–समन्वित दर्शन को रेखांकित करते हुए कहा कि तेजी से बढ़ता संसाधन-दोहन आज गंभीर पर्यावरण संकट का रूप ले चुका है। उन्होंने बताया कि – 2013–2023 के बीच लखनऊ के कई इलाकों में भूजल स्तर 20 मीटर तक गिरा है। विश्वभर में Air Pollution के कारण 67 लाख लोगों की समयपूर्व मृत्यु हो रही है। भारत में ही यह संख्या 17–20 लाख के बीच है, जो अत्यंत चिंताजनक है।
डॉ. सिंह ने वैश्विक पर्यावरण स्थिति को समझाते हुए World Overshoot Day का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा,“1970 में World Overshoot Day 25 दिसम्बर को आता था, यानी मानवता लगभग पूरे वर्ष पृथ्वी की वहन क्षमता के भीतर रहती थी। पर आज यह तिथि घटते-घटते 24 जुलाई तक पहुँच गई है, जो बताती है कि हम केवल आधे वर्ष में ही पृथ्वी के पूरे वर्ष के संसाधन समाप्त कर देते हैं।”
सरोजनीनगर : पर्यावरण संरक्षण में अग्रणी डॉ. सिंह ने बताया कि सरोजनीनगर क्षेत्र पर्यावरणीय पहल के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, लखनऊ में स्थापित कुल Solar Capacity का 50% से अधिक सरोजनीनगर में स्थापित है। ताराशक्ति केंद्रों द्वारा तैयार किए गए 30,000 से अधिक Eco-Friendly Bags बच्चों में वितरित कर पर्यावरण जागरूकता बढ़ाई गई है। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर ऐसे प्रयास ही पृथ्वी के संसाधनों को बचाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
पर्यावरण रक्षकों का सम्मान कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान के लिए चंद्र भूषण तिवारी (पेड़ वाले बाबा), राजेंद्र प्रताप सिंह और विजय सक्सेना को डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा सम्मानित किया गया। साथ ही पर्यावरणविद गरिमा मिश्रा द्वारा लिखित विशेष पत्रक का भी विमोचन किया गया।
आरएसएस के प्रचार प्रमुख का संबोधन मुख्य वक्ता के रूप में आरएसएस के क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख सुभाष जी ने जल संरक्षण, वृक्षारोपण और पर्यावरणीय जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि, “वृक्षारोपण को आन्दोलन के रूप में बदलना और दैनिक उपयोग में जल का संयमित दोहन आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।”
आयोजकों एवं अतिथियों के प्रति आभार डॉ. सिंह ने कार्यक्रम के सुचारु आयोजन के लिए संगठन मंत्री विक्रांत खंडेलवाल एवं महासचिव एस.के. सक्सेना का विशेष धन्यवाद किया। उन्होंने कथावाचक अशोक जी महाराज, सुभाष जी, यशोदानंदन जी, बीरेन्द्र सिंह चौधरी, आर.के. भदौरिया, राम औतार, शंकरी सिंह, पार्षद गीता देवी, संजीव अवस्थी, के.एन. सिंह, रंजना मिश्रा तथा अन्य सभी गणमान्यों की सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा इस बार कई मायनों में अलग दिखाई दिया. गुरुवार की रात जब उनका विमान दिल्ली पहुंचा तो तय प्रोटोकॉल को दरकिनार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद पालम एयरपोर्ट पर पहुंच गए और गर्मजोशी से स्वागत किया. यह पल भारत-रूस रिश्तों की मजबूती का प्रतीक बन गया.
एयरपोर्ट से निकलने के बाद दोनों नेता जिस कार में बैठे, उसने दुनियाभर का ध्यान अपनी तरफ खींचा. आमतौर पर विदेशी मेहमानों के लिए बख्तरबंद काफिले का उपयोग होता है, लेकिन इस बार दोनों नेता साधारण दिखने वाली सफेद टोयोटा फॉर्च्यूनर में साथ बैठे हुए दिखाई दिए. यह नजारा न सिर्फ अनोखा था बल्कि उनके व्यक्तिगत विश्वास की झलक भी इसमें दिखाई दी.
कौन-सी थी वह फॉर्च्यूनर और क्यों हुई वायरल
सोशल मीडिया पर जिस गाड़ी की चर्चा हो रही है, उसका नंबर MH01 EN 5795 है. यह मॉडल टोयोटा फॉर्च्यूनर सिग्मा 4 एमटी था, जिसे अप्रैल 2024 में पंजीकृत किया गया था. कार देखो वेबसाइट के मुताबिक इस गाड़ी की कीमत 45 लाख है. ये नई सुरक्षा गाड़ियों के बेड़े में शामिल इस कार की फिटनेस अप्रैल 2039 तक वैध है, जिस तरह यह कार अचानक VVIP मूवमेंट का हिस्सा बनी, वह आमतौर पर देखने को नहीं मिलती, क्योंकि फॉर्च्यूनर सामान्यतः उच्च स्तरीय राजनयिक काफिलों में शामिल नहीं की जाती.
पुतिन की खास बख्तरबंद कार इस बार क्यों नहीं आई
रूस के राष्ट्रपति ज्यादातर विदेशी दौरों पर अपनी सुपर-सिक्योर Aurus Senat कार साथ लेकर चलते हैं. यह कार चलती-फिरती सुरक्षा दीवार की तरह मानी जाती है. इसके बावजूद पुतिन ने भारत में इसका इस्तेमाल नहीं किया. विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन के बीच आपसी भरोसे को दर्शाता है. कई विश्लेषकों ने इसे दोनों नेताओं के निजी संबंधों की गहराई और उनकी सहजता का उदाहरण बताया.
दोनों नेताओं का एक साथ एक ही कार में सफर करना
विश्वस्तर पर कूटनीतिक प्रोटोकॉल बेहद कड़े होते हैं. राष्ट्राध्यक्ष अलग-अलग गाड़ियों और भारी सुरक्षा घेरे में चलते हैं, लेकिन मोदी और पुतिन का एक साथ एक ही कार में सफर करना पारंपरिक सुरक्षा व्यवस्था से हटकर एक संदेश देता है कि दोनों नेता सिर्फ साझेदार ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी गहरी समझ बनाए हुए हैं. अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इसे इस यात्रा का सबसे प्रतीकात्मक क्षण बताया.
पीएम आवास पर विशेष तैयारियां
लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास तक पहुंचने पर पूरे परिसर में भारत और रूस के झंडों की सजावट की गई थी. सड़कों पर सुरक्षा को कई गुना बढ़ा दिया गया था और कई क्षेत्रों में यातायात रूट बदले गए थे. पुतिन के स्वागत में की गई यह तैयारी बताती हैं कि भारत इस यात्रा को कितना महत्व देता है.
रक्षा और व्यापार पर गहरी बातचीत
पुतिन के इस दौरे का केंद्रबिंदु रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है. दोनों देशों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठकों के साथ रक्षा सहयोग, ऊर्जा समझौते और व्यापार विस्तार पर विस्तृत चर्चा प्रस्तावित है. वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में यह यात्रा भारत के संतुलित कूटनीतिक रुख को और स्पष्ट करती है, जहां वह अमेरिका और रूस दोनों के साथ संबंधों में संतुलन कायम रख रहा है.