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Health Tips:“वर्कआउट के दौरान केला कब खाएं—पहले या बाद में? जानें क्या है सबसे सही समय”

कोई भी व्यक्ति अगर वर्कआउट या व्यायाम करता है और अपनी फिटनेस को बनाए रखने के लिए जिम, रनिंग या किसी भी फिजिकल एक्सरसाइज करता है तो उसे अपनी एनर्जी को बनाए रखने के लिए कई प्रकार के फूड या नेचुरल सप्लिमेंट्स का सहारा लेना पड़ता है. इनमें सबसे ज्यादा खाया जाने वाला फल है केला. क्योंकि यह तुरंत एनर्जी देता है, भारी नहीं लगता और शरीर को जरूरी पोषक तत्व पहुंचाता है

केले के अंदर एनर्जी बढ़ाने वाले सभी तत्व शामिल होते हैं, जिनमें कार्बोहाइड्रेट, पोटेशियम और नेचुरल शुगर मौजूद होती है. यह वर्कआउट से पहले और बाद दोनों समय एक बेहतरीन फूड माना जाता है. इसे खाने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है. कुछ लोगों के लिए केला वर्कआउट से पहले फ्यूल का काम करता है जबकि कई लोगों के लिए वर्कआउट के बाद रिकवरी फूड की तरह काम आता है.

वर्कआउट से पहले केले का सेवन क्यों फायदेमंद है

जब कोई व्यक्ति नियमित रूप से वर्कआउट या एक्सरसाइज करता है तो उसे अपनी ताकत बढ़ाने और शरीर में एनर्जी की प्रचुरता बनाए रखने के लिए केले का सेवन करना चाहिए. वर्कआउट शुरू होने से 30–50 मिनट पहले केला खाना सबसे बेहतर माना जाता है. इससे आपकी एक्सरसाइज की तीव्रता और कैपेसिटी बढ़ती है और व्यक्ति पूरी स्फूर्ति के साथ व्यायाम कर पाता है. केले में मौजूद ग्लूकोज, फ्रुक्टोज, पोटैशियम और फाइबर जैसे पोषक तत्व शरीर की तंदुरुस्ती के लिए जरूरी है. यह मांसपेशियों में होने वाले क्रैम्प्स से छुटकारा दिलाता है और स्टैमिना बढ़ाता है.

वर्कआउट के बाद केला क्यों जरूरी है

अगर आपने हेवी ट्रेनिंग या वर्कआउट किया है तो केला आपकी मांसपेशियों की रिकवरी के लिए सबसे असरदार पोस्ट वर्कआउट फूड है. केले में भरपूर फाइबर होता है जो वर्कआउट के बाद तुरंत ऊर्जा देता है. यह शरीर को जरूरी कार्ब्स देकर मसल रिकवरी में मदद करता है. अगर वर्कआउट के बाद हड्डियों में दर्द महसूस होता है तो केले में मौजूद मैग्नीशियम और पोटैशियम की वजह से वह दर्द कम होता है. और अगर वर्कआउट के दौरान शरीर में सूजन आ जाती है तो यह उसे भी जल्दी कम करता है.

वर्कआउट के बाद केला और प्रोटीन का कॉम्बिनेशन

केला कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है. अगर आप वर्कआउट के बाद केला और पिने का सेवन करते है तो यह शरीर को प्रोटीन बेहतर तरीके से अवशोषित करने में मदद करता है. प्रोटीन तेजी से मसल रिकवरी करता है और शरीर को मजबूत बनाता है.

Healthy Snacks For Weight Loss: “वजन घटाना चाहते हैं? मूंगफली या मखाना- कौन है बेहतर स्नैक्स चुनाव? यहां जानें पूरी तुलना”

आजकल लोग वजन कम करने के लिए तरह-तरह के कदम उठा रहे हैं, हालांकि आपको बता दें कि वजन कम करने की कोशिश में सही स्नैक चुनना बहुत मायने रखता है. ज्यादातर लोग ऐसा कुछ चाहते हैं जो पेट भरे, स्वाद भी अच्छा हो और काम के बीच या शाम की भूख में आसानी से खाया जा सके. मूंगफली (पीनट्स) और मखाना (फॉक्स नट्स) दो ऐसे विकल्प हैं जिन्हें अक्सर हेल्दी माना जाता है. पीनट्स प्रोटीन और अच्छे फैट से भरपूर होते हैं, जबकि मखाना कम कैलोरी वाला और जल्दी पचने वाला हल्का स्नैक माना जाता है.

लेकिन वजन घटाने के मामले में दोनों शरीर पर अलग तरीके से असर डालते हैं. चलिए आपको इनके  फायदे, कैलोरी और न्यूट्रिशन को अच्छे से बताते हैं, ताकि आप अपनी लाइफस्टाइल के हिसाब से इनका चूज कर सकें.

 पोषण में क्या फर्क है?

मूंगफली  एनर्जी से भरपूर होते हैं. इनमें प्रोटीन, हेल्दी फैट और फाइबर अच्छी मात्रा में मिलता है, इसलिए थोड़ी-सी मात्रा भी लंबे समय तक ऊर्जा देती है. इसके मुकाबले, मखाना बेहद हल्का और कम कैलोरी वाला होता है, इसलिए इसे बड़ी मात्रा में भी बिना गिल्ट के खाया जा सकता है.

कैलोरी किसमें कम है?

अगर आप कैलोरी पर नजर रखते हैं, तो मखाना सही चुनाव है. एक कटोरी भुना मखाना, थोड़े से भुने मूंगफली  से भी कम कैलोरी देता है.

कौन ज्यादा देर तक पेट भरा रखता है?

मूंगफली ज्यादा देर तक भरा रखते हैं क्योंकि इनमें प्रोटीन और फैट अधिक है. मखाना जल्दी पेट भरता है, लेकिन इसका असर ज्यादा देर नहीं रहता क्योंकि इसमें फैट कम और प्रोटीन मध्यम मात्रा में होता है.  दोनों स्नैक्स वजन घटाने में मदद कर सकते हैं, लेकिन सही सर्विंग बहुत जरूरी है. मूंगफली हेल्दी हैं लेकिन जरूरत से ज्यादा खाने पर कैलोरी बढ़ जाती है. मखाना अधिक सर्विंग में भी हल्का रहता है.

अपनी लाइफस्टाइल के अनुसार किसे चुनें?

अगर आपको ऐसा स्नैक चाहिए जो कई घंटे तक भूख रोककर रखे, तो मूंगफली बेहतर हैं. अगर आप लो-कैलोरी और हल्का स्नैक चाहते हैं जो क्रेविंग शांत कर दे, तो मखाना सही रहेगा. अगर आपको इसको सरल शब्दों में बताएं, तो अगर आपको कम कैलोरी चाहिए तो मखाना चुनें, अगर आप अपना पेट लंबे समय तक भरना चाहते हैं, तो आपके पास मूंगफली  बेहतर लेकिन यहां एक चीज ध्यान रखना चाहिए कि इसकी कम मात्रा हो.  वजन घटाने के लिए दोनों को भी शामिल किया जा सकता है. इसके अलावा  रात की हल्की भूख के लिए मखाना और सुबह या शाम के प्रोटीन स्नैक के लिए मूंगफली आपके लिए अच्छा विकल्प है.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

पिता बनने के बाद विक्की कौशल का बड़ा खर्चा, खरीदी करोड़ों की लग्ज़री कार– कीमत चौंकाएगी

बॉलीवुड एक्टर विक्की कौशल और एक्ट्रेस कैटरीना कैफ हाल ही में पेरेंट्स बने हैं. अब विक्की ने अपनी कार कलेक्शन में एक नई लग्जिरियस गाड़ी शामिल कर ली है. 4 दिसंबर को एक्टर मुंबई में एक इवेंट में शामिल हुए थे. यहां वो अपनी ब्रांड न्यू गाड़ी के साथ स्पॉट हुए. रिपोर्ट्स की मानें तो विक्की कौशल ने एक लेक्सस LM350h 4S कार खरीदी है.

लेक्सस LM350h 4S कार एक 4-सीटर कार है, जिसकी कीमत 3.20 करोड़ रुपए बताई जा रही है. ये कार हाइब्रिड इंजन से चलती है. इसमें ड्राइव असिस्ट फीचर्स जैसे कि ब्रेक असिस्ट, रडार कैमरा वगैरह भी हैं, जिससे ड्राइव करना आसान और सिक्योर हो जाता है. गाड़ी में क्लाइमेट कंट्रोल, पावर डोर, चार्जिंग, बेहतर इंटीरियर और लकड़ी‑लेदर का फिनिश भी है.

हाल ही में पेरेंट्स बने विक्की-कैटरीना
विक्की कौशल और कैटरीना कैफ ने 7 नवंबर, 2025 को अपने पेरेंट्स बनने की गुड न्यूज अनाउंस की थी. उन्होंने बताया था कि वो एक बेटे के पेरेंट्स बन गए हैं. कपल ने इंस्टाग्राम पर लिखा था- ‘हमारे खुशियों का खजाना इस दुनिया में आ गया है. बहुत प्यार और ग्रेटिट्यूड के साथ हमने अपने बेबी बॉय का वेलकम किया है.’ पोस्ट के साथ कैप्शन में विक्की-कैटरीना ने लिखा- ‘ब्लेस्ड.’

विक्की कौशल की अपकमिंग फिल्में
वर्कफ्रंट पर विक्की कौशल आखिरी बार फिल्म ‘छावा’ में दिखाई दिए थे. उनकी ये फिल्म इसी साल फरवरी में रिलीज हुई थी और इसने बॉक्स ऑफिस पर जमकर नोट छापे थे. लक्ष्मण उतेकर के डायरेक्शन में बनी ‘छावा’ बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी. वहीं अब विक्की कौशल ‘लव एंड वॉर’ में नजर आएंगे. संजय लीला भंसाली के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में विक्की के साथ रणवीर कपूर और आलिया भट्ट भी लीड रोल में होंगे.

विक्की कौशल के पास अमर कौशिक की फिल्म ‘महावतार’ भी पाइपलाइन में है. इसके अलावा वो ‘तख्त’ और ‘लाहौर 1947’ में भी दिखाई देंगे.

भारत का 2036 ओलंपिक ड्रीम अब पहुंचा करीब? अमित शाह ने जताया मजबूत दावा

भारत को 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी मिल चुकी है, जो अहमदाबाद में आयोजित होंगे. अब भारत के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावे के साथ कहा है कि भारत 2036 ओलंपिक की मेजबानी भी प्राप्त करने वाला है. उन्होंने यह बात अहमदाबाद में आयोजित सांसद खेल महोत्सव में कही. अमित शाह ने महोत्सव में उपस्थित लोगों से कहा कि वे और भी बड़े खेलों के आयोजन के लिए तैयार हो जाएं

ओलंपिक्स 2036 के लिए हो जाओ तैयार…

सांसद खेल महोत्सव में अमित शाह ने कहा, “आप सबको हाल ही में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी मिली है. मगर अहमदाबाद के लोगों तैयार हो जाओ, क्योंकि इस शहर में 2036 के ओलंपिक्स भी आने वाले हैं.” बता दें कि यह समारोह नारनपुरा में हुआ, जहां अमित शाह नवनिर्मित वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में पहुंचे थे.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार से गुजरात की तीन दिवसीय यात्रा शुरू की थी. उन्होंने कहा कि अहमदाबाद 2036 से पहले कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के इवेंट्स की मेजबानी करने वाला है. उन्होंने अपना उद्देश्य स्पष्ट रखते हुए कहा कि उनका लक्ष्य खेलों का ऐसा माहौल तैयार करना और एक ऐसा बुनियादी ढांचा तैयार करना है, जो ओलंपिक्स जैसे बड़े आयोजनों का समर्थन कर सके.

उन्होंने बताया कि अहमदाबाद में किस स्तर पर खेलों के विकास का प्रयास हो रहा है. 800 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया वीर सावरकर कॉम्प्लेक्स इसी का एक उदाहरण है. इसके अलावा उन्होंने मोटेरा स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल स्पोर्ट्स एंक्लेव का भी जिक्र किया.

भारत को खूब सारे मेडल मिलेंगे

अमित शाह ने आत्मविश्वास के साथ कहा, “मुझे विश्वास है कि जब भारत ओलंपिक्स की मेजबानी करेगा, तब भारत पदक विजेता देशों की टॉप-5 सूची में आ जाएगा.” उन्होंने बताया कि 2014 में खेल बजट 800 करोड़ का था, लेकिन अगले 11 सालों में यह बढ़कर 2025 में 4 हजार करोड़ का हो गया है.

खूबसूरत डिज़ाइन, आकर्षक रंगों और दिलकश बनावट ने लवासा को दिलाया ‘इंडिया का इटली’ का नाम—असल कहानी जानकर रह जाएंगे हैरान

भारत देश में घूमने के लिहाज से एक से बढ़कर एक कई जगहें मौजूद हैं। कहीं पहाड़ तो कहीं समुद्र, इन जगहों पर पर्यटकों की जबरदस्त भीड़ देखने को मिलती हैं। जब भारत के खूबसूरत राज्यों की बात होती है, तो केरल, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान का नाम जरूर लिया जाता है। वहीं महाराष्ट्र भी किसी मामले में पीछे नहीं है। यहां पर कई ऐसे शहर हैं, जोकि जन्नत में होने का एहसास कराते हैं। आमतौर पर लोनावला, पुणे, खंडाला और मुंबई का नाम ही लिया जाता है। लेकिन क्या आप लवासा के बारे में जानते हैं।

यह महाराष्ट्र का एक खूबसूरत शहर है, जिसको इटली ऑफ इंडिया के नाम से भी जाना जाता है। इसकी वजह सिर्फ खूबसूरती नहीं बल्कि पूरा डिजाइन, रंग और बनावट है। यह पुणे शहर से करीब 60 किमी दूर वेस्टर्न घाट में बसा है। अधिकतर हिल स्टेशन समय के साथ डेवलप हुए हैं। लेकिन लवासा सोच-समझकर प्लान किया गया हिल सिटी प्रोजेक्ट है। इसको शुरूआत से ही खास जगह की तरह बनाया गया था। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको यहां की खूबसूरती के बारे में बताने जा रहे हैं।

Portofino जैसा बनाने का आइडिया

लवासा का प्लान 2000 के शुरूआती सालों में बना था। उस दौरान डेवलपर्स ने फैसला लिया कि इस जगह को इटली के Portofino जैसा लुक दिया जाएगा। इस जगह की अपनी कुछ खासियतें भी थीं।

हल्के पेस्टल रंग वाली इमारतें

पहाड़ियों के बीच बसा शांत वातावरण

साफ-सुथरी गलियां

झील और समुद्र के किनारे खूबसूरत कैफे

लवासा के प्लानर्स चाहते थे कि इटली का एहसास एक इंडियन हिल सिटी में लाया जाए। इसलिए यहां डिजाइन में यूरोपियन टच साफ देखने को मिलेगा।

यहां की इमारतें इटली जैसी

बता दें कि लवासा का जो हिस्सा सबसे अधिक Portofino जैसा लगता है, वह Dasve Lake का वॉटरफ्रंट है। यहां की इमारतें ठीक वैसे ही कलर की गई हैं, जैसे इटली के गांवों में होती हैं। मस्टर्ड, टेराकोटा, पीच, ब्रिक रेड और ऑलिव ग्रीन जैसे कलर्स को Portofino की ही तरह चुना गया है। आप इसको पहली बार देखेंगी, तो आपको लगेगा कि आप सच में इटली आ गई हैं।

इटली वाला लुक

छोटी-छोटी बालकनियां

टाइल्स वाली छत

पेस्टल प्लास्टर

आर्च वाले दरवाजें

कैफे-स्टाइल बैठने की जगह

बनाई गई हैं चौड़ी गलियां

इस जगह की एक खासियत यह भी है कि लवासा में पैदल घूमने के लिए चौड़ी गलियां बनाई गई हैं। जिससे कि लोग झील के किनारे आराम से चल सकें। यह कॉन्सेप्ट भी यूरोप के शहरों से लिया गया है। लवासा को अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है। लेकिन Dasve Town वो जगह है, जो सबसे अधिक Portofino जैसी दिखती है। यहां की बिल्डिंग की ऊंचाई, रंग और पूरा का पूरा स्ट्रक्चर एक खास गाइडलाइन के हिसाब से बनाया गया था, जिससे पूरा लुक इटली जैसा लगे।

लगता है यूरोपि‍यन र‍िजॉर्ट टाउन

इस जगह की खूबसूरती सिर्फ इमारतों के कारण नहीं बल्कि यहां का माहौल भी यूरोपियन रिजॉर्ट टाउन जैसा एहसास देता है। झील के किनारे कैफे, छोटे बुटीक होटल, वॉटरफ्रंट पर बैठने की जगह, साफ-सुथरी रंगील गलियां और यहां का शांत माहौल आपको इटली जैसा एहसास कराता है।

क्यों कहा जाता है इटली ऑफ इंडिया

यूरोपियन स्टाइल वॉटरफ्रंट और गलियां

Portofino जैसा रंग और डिजाइन

झील, पहाड़ और कैफे वाला पूरा माहौल

ऐसे पहुंचें लवासा

अगर आप दिल्ली से लवासा जाने की सोच रही हैं, तो दिल्ली से लवासा की दूरी 1,200 किमी से अधिक है। यहां पहुंचने के लिए फ्लाइट से पुणे आएं और फिर कैब से लवासा पहुंचे। यहां तक पहुंचने में आपको करीब 6 घंटे का समय लग सकता है। वहीं अगर आप सस्ते ऑप्शन की तलाश में हैं, तो दिल्ली से ट्रेन के माध्यम से मुंबई पहुंच सकती हैं। वहां से कैब लेकर लवासा जा सकती हैं। लेकिन इसमें आपको 23 घंटे का समय लगेगा।