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Disadvantages Of Eating Jaggery: सर्दियों में गुड़ खूब खाया जाता है, लेकिन क्या यह हमेशा फायदेमंद है? ज्यादा गुड़ खाने से सामने आ सकती हैं ऐसी परेशानियां।

भारत में मीठा खाना सिर्फ आदत नहीं, बल्कि एक तरह की परंपरा है. कई लोग इसे स्वाद के लिए खाते हैं, तो कई अपनी फिटनेस या डायबिटीज जैसी स्थितियों के कारण मीठे से दूरी बनाए रखते हैं. फिर भी थोड़ा-सा मीठा मन को अच्छा महसूस कराता है, और ज्यादातर लोग रिफाइंड शुगर की जगह ‘नेचुरल स्वीट’ चुनना ज्यादा हेल्दी मानते हैं. इन्हीं में से सबसे पसंद किया जाने वाला विकल्प है गुड़. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर दिन गुड़ खाना कितना सुरक्षित है? अगर आप बिना सोचे-समझे गुड़ खा रहे हैं, तो एक बार इसके नुकसान जानना जरूरी है.

क्यों गुड़ हमेशा सुरक्षित विकल्प नहीं होता?

गुड़ में आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम और कई पोषक तत्व होते हैं, इसलिए इसे हेल्दी माना जाता है. लेकिन जैसा कि कहा जाता है कि किसी भी चीज की अधिकता नुकसान करती है, गुड़ पर भी यही नियम लागू होता है. अगर आपको डायबिटीज जैसी लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्याएं हैं, तो गुड़ आपकी ब्लड शुगर और ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ा सकता है. इसलिए इसे हेल्दी समझकर ज़रूरत से ज्यादा खाना कई दिक्कतें पैदा कर सकता है.

गुड़ में भी है शुगर और काफी मात्रा में

कई लोग गुड़ को चीनी का सुरक्षित विकल्प मानकर रोजाना खाते हैं, लेकिन उन्हें शायद पता नहीं कि 100 ग्राम गुड़ में करीब 10 से 15 ग्राम फ्रक्टोज होता है. रोजाना गुड़ खाने से ब्लड शुगर बढ़ना बिल्कुल संभव है. यानी जरूरत से ज्यादा सेवन करने पर गुड़ भी चीनी की तरह ही काम करता है कि इसलिए खाने से पहले जरूर सोचें.

इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ सकता है

गुड़ गन्ने के रस से तैयार किया जाता है और इसे बनाने की प्रक्रिया हमेशा साफ-सुथरी नहीं होती. कई बार कच्चे रस की ठीक से सफाई न होने पर इसमें कीटाणु या अशुद्धियां रह जाती हैं. अगर गुड़ की गुणवत्ता खराब है या यह गंदे माहौल में बना है, तो इससे पेट के इंफेक्शन होने की संभावना रहती है. इसलिए हमेशा भरोसेमंद ब्रांड का गुड़ ही चुनें और एक बार में ज़रूरत से ज्यादा न खाएं.

खाने से एलर्जी भी हो सकती है

आमतौर पर गुड़ को सुरक्षित माना जाता है, लेकिन कुछ लोगों में इसकी अधिक मात्रा एलर्जिक रिएक्शन पैदा कर सकती है, जैसे पेट दर्द, सर्दी, खांसी, मतली, सिरदर्द या उल्टी.
इसलिए अगर गुड़ खाने के बाद शरीर में कोई असामान्य प्रतिक्रिया दिखे, तो इसे नियंत्रित मात्रा में ही लें.

वजन बढ़ने का भी खतरा

हेल्थ-कॉन्शियस लोग अक्सर सोचते हैं कि गुड़ खाने से उनकी डाइट पर असर नहीं पड़ेगा. लेकिन सच यह है कि गुड़ में फ्रक्टोज, ग्लूकोज और कुछ मात्रा में फैट भी मौजूद रहता है. सिर्फ 100 ग्राम गुड़ में लगभग 383 कैलोरी होती हैं, इसलिए इसका ज्यादा सेवन वजन बढ़ाने में योगदान दे सकता है.

ज्यादा गुड़ पाचन गड़बड़ कर सकता है

थोड़ी मात्रा में गुड़ इम्यूनिटी और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है, लेकिन अधिक मात्रा में यह पाचन को बिगाड़ देता है. गुड़ शरीर में गर्मी पैदा करता है कि इससे पेट में जलन, कब्ज या असहजता हो सकती है. इसलिए गुड़ खाने का सही तरीका है, कम मात्रा, सही समय और गुणवत्ता पर ध्यान.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Health Tips:क्या एग योक वाकई हार्ट अटैक का कारण बनता है? विशेषज्ञों ने खोला इस मिथक का असली सच।

पिछले कुछ सालों में हेल्थ और फिटनेस को लेकर लोगों में जागरूकता बड़ी है, लेकिन इसके साथ ही कई मिथक भी तेजी से फैलने लगे हैं. इनमें से एक बड़ा दावा यह है कि अंडे की जर्दी यानी एक योक दिल के लिए खतरनाक होती है और इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है. कई लोग वजन और कोलेस्ट्रॉल के डर से केवल एग व्हाइट खाना पसंद करते हैं और योक को हटा देते हैं. लेकिन क्या यह डर वाकई सही है. इसे लेकर कुछ एक्सपर्ट्स इस मिथक के पीछे का सच बताते हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि क्या सच में एग योक से हार्ट अटैक होता है और इसे लेकर एक्सपर्ट्स क्या बड़ा सच बताते हैं.

एग योक से नहीं बढ़ता हार्ट अटैक का खतरा, एक्सपर्ट्स

एक्सपर्ट्स के अनुसार हमारे शरीर में 80 प्रतिशत कोलेस्ट्रॉल लिवर खुद बनाता है. यानी खाने से मिलने वाला कोलेस्ट्रॉल खून में कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं. एक्सपर्ट बताते हैं कि एग योक खाने से हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा नहीं बढ़ता, बल्कि यह शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व देता है. एक्सपर्ट्स यह भी बताते हैं कि 1.5 लाख लोगों पर हुई एक स्टडी में सामने आया कि रोज एक अंडा खाने से दिल की बीमारियों का खतरा नहीं बढ़ता है.

एग योक के फायदे भी ज्यादा

एक्सपर्ट्स के अनुसार अंडे की जर्दी में मौजूद पोषक तत्व शरीर के लिए बहुत जरूरी होते हैं. एग योक हमारे शरीर में एचडीएल यानी गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है. ल्यूटिन, काॅलीन और कई आवश्यक विटामिन दिल, लिवर और दिमाग को हेल्दी रखता है. एक्सपर्ट्स इसे लेकर वजन बढ़ाने या कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने की गलतफहमी को भी पूरी तरह मिथक बताते हैं. वह बताते हैं कि एक हेल्दी नॉन- डायबेटिक और नॉन हाइपरटेंसिव व्यक्ति रोजाना तीन पूरे अंडे खा सकता है.

समस्या एग योक में नहीं कुकिंग स्टाइल में

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ज्यादातर परेशानी एक योक में नहीं बल्कि उसे पकाने के तरीके में होती है. बटर, क्रीम या ज्यादा तेल में बनी एग डिशेज पाचन में दिक्कत और फैट बढ़ा सकती है. ऐसे में एग को हेल्दी तरीके से पकाना जरूरी है. वहीं एक्सपर्ट्स बताते हैं कि एक उबले अंडे में 77 कैलोरीज, 3.5 ग्राम टोटल फैट, 1.6 ग्राम सैचुरेटेड फैट, 186 एमजी कोलेस्ट्रॉल, 62 एमजी सोडियम, 0.56 ग्राम कार्ब्स, 0.56 ग्राम शुगर और 6.3 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है. इसके अलावा एग में विटामिन ए, डी, ई, के और कई तरह के विटामिन बी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

सर्दियों में घूमने का प्लान? दक्षिण भारत के ये 5 खूबसूरत हिल स्टेशन महिलाओं के लिए हैं खास आकर्षक स्थान!

सर्दियों का मौसम शुरू हो गया है। इस मौसम में ज्यादातर महिलाएं घूमने का प्लान करती हैं। खासकर सर्दियों की छुट्टियों में अपनी फैमिली के साथ किसी ट्रिप पर निकल जाती हैं। तो वहीं कुछ महिलाएं दोस्तों के साथ ट्रिप प्लान करती हैं। अगर आप भी इस सर्दियों में किसी खास ट्रिप पर जाने का प्लान कर रही हैं और बेस्ट डेस्टिनेशन की तलाश कर रही हैं। तो यह आर्टिकल आपके लिए है। क्योंकि आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको दक्षिण भारत की 5 ऐसे हिल स्टेशन के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पर जाकर आप अपनी ट्रिप को यादगार बना सकती हैं। तो आइए जानते हैं इन हिल स्टेशन के बारे में…

थेक्कडी

सर्दियों की छुट्टियों में आप बेस्ट डेस्टिनेशन की तलाश कर रही हैं, तो अपने दोस्तों, फैमिली या पार्टनर के साथ दक्षिण भारत के खूबसूरत हिल स्टेशन थेक्कडी भी जा सकते हैं। यह केरल के इडुक्की जिले में है। आप पेरियार झील पर बोटिंग कर सकती हैं और मसालों के बागान भी देख सकती हैं। इसके अलावा यहां पर क्ललादीपारा हिल व्यू पॉइंट भी एक्सप्लोर कर सकती हैं।

मुन्नार

दक्षिण भारत का मुन्नार हिल स्टेशन बेहद खूबसूरत है। यह पूरे दक्षिण भारत में सबसे अधिक पसंद किए जाने वाला हिल स्टेशन है। यहां पर बिताया हर एक पल यादगार बन जाएगा। आप चाहें तो यहां पर फोटोग्राफी भी कर सकती हैं। सर्दियों में यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं लगती है। यहां पर आप एराविकुलम नेशनल पार्क, इको पॉइंट और मुट्टुपेट्टी जैसी जगहों को एक्सप्लोर कर सकती हैं। इसके अलावा आप यहां के हरे-भरे चाय का बागानों को भी देख सकते हैं।

येलागिरी

अगर आप दक्षिण भारत की ओर जाने का मन बना रही हैं, तो आप यहां के फेमस और बेहद खूबसूरत येलागिरी हिल स्टेशन भी विजिट कर सकती हैं। यह जगह उन लोगों के लिए बेहद खास है, जिनको भीड़भाड़ से दूर एकांत रहना पसंद है। येलागिरी, तमिलनाडु के तिरुपत्तूर जिले में स्थित है। यहां पर आप पुंगनूर झील में बोटिंग के साथ स्वामी मलाई हिल्स में ट्रेकिंग और जलगमपराई फॉल्स का नजारा देख सकते हैं।

कूर्ग

कुर्ग, दक्षिण भारत का एक खूबसूरत हिल स्टेशन है। यहां पर आप अपने दोस्तों, फैमिली या पार्टनर के साथ जा सकती हैं। सर्दियों की छुट्टियां यागदार बनाने के लिए कुर्ग एक शानदार हिल स्टेशन है। यह कर्नाटक में स्थित है और इसको भारत का स्कॉटलैंड भी कहा जाता है। यहां पर आपको कॉफी के बागानों के साथ खूबसूरत घाटियां भी देखने को मिलेंगी। यहां आने के लिए आप मैसूर, मैंगलोर जा सकती हैं।

वायनाड

सर्दियों की छुट्टियों को यादगार बनाने के लिए दक्षिण भारत के खूबसूरत हिल स्टेशन वायनाड को एक्सप्लोर कर सकते हैं। यह केरल की बेहद खूबसूरत जगह है। यहां की हरियाली और ऐतिहासिक गुफाओं ने पर्यटकों का दिल जीत लिया है। यहां पर आपको चाय और कॉफी के खेत और मसालों के बागान देखने को मिलेंगे। यहां पर आप सोचीपुरा फॉल्स, मीनमुट्ठी फॉल्स और एडक्कल गुफाएं आदि को एक्सप्लोर कर सकती हैं।

Health Tips:सफदरजंग अस्पताल में एडवांस्ड न्यूरोमॉड्यूलेशन उपचार की शुरुआत, डिप्रेशन और OCD से पीड़ित मरीजों को मिलेगा मुफ्त इलाज।

राजधानी दिल्ली स्थित वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (VMMC) और सफदरजंग अस्पताल ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में एक बड़ी पहल करते हुए मुफ्त न्यूरोमॉड्यूलेशन उपचार की शुरुआत कर दी है. यह कदम ऐसे मरीजों के लिए उम्मीद लेकर आया है, जिन्हें पारंपरिक दवाओं या काउंसलिंग से पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाता.

कई गंभीर मानसिक रोगों में मिलेगा लाभ

सफदरजंग अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग ने 6 दिसंबर 2025 को रैपिटिटिव ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिम्युलेशन (rTMS), मॉडिफाइड इलेक्ट्रोकन्वल्सिव थेरेपी (mECT) और ट्रांसक्रेनियल डायरेक्ट करंट स्टिम्युलेशन (tDCS) जैसी आधुनिक तकनीकों से लैस मुफ्त सेवाएं शुरू कीं. ये उपचार उन मरीजों के लिए खास तौर पर प्रभावी माने जाते हैं, जिन्हें दवाओं के बावजूद सुधार नहीं दिखता.

इन रोगियों के लिए नई उम्मीद

विशेषज्ञों के अनुसार, नई सेवाएं गंभीर अवसाद, ऑब्सेसिव–कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD), स्किज़ोफ्रेनिया सहित कई मानसिक बीमारियों में अत्यंत प्रभावी हो सकती हैं. अक्सर ऐसे मरीजों को दवा और काउंसलिंग के साथ वैकल्पिक तकनीकों की जरूरत होती है, जिसे अब सफदरजंग अस्पताल मुफ्त उपलब्ध कराएगा.

सरकार के मानसिक स्वास्थ्य मिशन को भी मिलेगी मजबूती

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि यह पहल न सिर्फ सेवा विस्तार है, बल्कि संवेदनशील और समान अवसर आधारित स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक ठोस कदम है. यह पहल केंद्र सरकार के उन प्रयासों को भी मजबूती देती है, जिनका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को देशभर में सुलभ बनाना है.

आर्थिक स्थिति अब उपचार में बाधा नहीं बनेगी

VMMC और सफदरजंग अस्पताल लंबे समय से इस मिशन पर काम कर रहे हैं कि कोई भी मरीज आर्थिक कारणों से इलाज से वंचित न रह जाए. न्यूरोमॉड्यूलेशन सेवाओं की शुरुआत इसी प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है, खासकर उन मरीजों के लिए जो महंगे उपचार वहन नहीं कर पाते.

ये अधिकारी रहे मौजूद

उद्घाटन समारोह में निदेशक डॉ. संदीप बंसल, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. चारु बाम्बा और मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ. पंकज वर्मा मौजूद रहे. अधिकारियों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे मरीजों के लिए बड़ा राहत कदम बताया. उनका कहना था कि आधुनिक, साक्ष्य-आधारित थेरेपी को जनता तक बिना किसी शुल्क के पहुंचाना मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र में अहम बदलाव है.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Health Tips:“सर्दियों में बच्चों की इम्यूनिटी बढ़ाने के आसान तरीके- रहेंगे बीमारियों से सुरक्षित”

सर्दियों का मौसम बच्चों के लिए काफी तकलीफ लेकर आता है, जिससे बच्चे तो परेशान होते ही है साथ ही उनके माता-पिता भी परेशान रहते है. ठंडी हवाएं, तापमान में गिरावट और बदलता मौसम मिलकर बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता या इम्युनिटी को कमजोर कर देते है. इसकी वजह से वे जल्दी-जल्दी सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार और वायरल इंफेक्शन का शिकार हो जाते है, जो उनके स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है.

अगर आपके घर में छोटे बच्चे है तो सर्दियों में उनका विशेष ध्यान रखना जरूरी है. खाने से लेकर कपड़े पहनाने तक हर चीज का ख्याल रखना पड़ता है ताकि वे मौसमी बीमारियों से बच सकें.

सर्दियों में बच्चों को होने वाली आम समस्याएं

    • जुकाम
    • खांसी और गले से संबंधित दिक्कत
    • त्वचा का बेजान और सूखापन
    • वायरल बीमारियां जैसे बुखार
    • सिर दर्द
    • पेट से जुड़ी समस्याएँ
    • फ्लू वायरस (इन्फ्लुएंज़ा) का खतरा
    • फेफड़ों से जुड़ी बीमारियाँ

विटामिन C और D क्यों जरूरी है?

    • सर्दियों का मौसम आते ही माता-पिता को बच्चों की डायट में विटामिन C की मात्रा बढ़ानी चाहिए. जिन खाद्य पदार्थों में विटामिन C ज्यादा होता है, उनका सेवन बच्चों को जरूर कराना चाहिए. विटामिन C बच्चों की इम्यून कोशिकाओं को एक्टिव रखता है.
    • विटामिन C सबसे ज्यादा इन फलों और सब्जियों में होता है: संतरा, मौसम्बी, आंवला, कीवी, नींबू, टमाटर, शिमला मिर्च.
    • इसी तरह विटामिन D भी बच्चों के लिए जरूरी है. उन्हें रोज थोड़ी देर धूप में खेलने दें ताकि हड्डियाँ मजबूत रहे.

बच्चों को गर्म और पौष्टिक खाना दें

सर्दियों में बच्चों के शरीर को अतिरिक्त एनर्जी और गर्माहट की जरूरत होती है. इसलिए इन चीजों का सेवन करवाएं:

    • आयुर्वेदिक काढ़ा बनाकर दे
    • सूखे मेवे: बादाम, अखरोट, किशमिश
    • घी और गुड़ (इम्युनिटी बढ़ाते है लेकिन ज्यादा मात्रा में न दें)
    • बाजरा, ज्वार, रागी जैसे गर्म अनाज
    • आयुर्वेदिक मसाले: हल्दी, अदरक
    • सूप, दलिया, मूंग दाल, सब्जियाँ

बच्चों को हाइड्रेटेड रखें

सर्दियों में प्यास कम लगती है जिसकी वजह से गले में सूखापन और चेहरा खुरदुरा हो सकता है. बच्चों को थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पिलाते रहें.

    • गर्म पानी
    • हर्बल पानी (अदरक, तुलसी, दालचीनी) पर्याप्त पानी इम्यून कोशिकाओं को सक्रिय रखता है और संक्रमण से बचाता है.

सर्दियों में बच्चों की शारीरिक गतिविधि क्यों जरूरी है?

ठंड के कारण माता-पिता अक्सर बच्चों को बाहर खेलने नहीं देते, जो कि गलत है. इससे उनका ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ता है, एनर्जी कम होती है और इम्युनिटी कमजोर हो जाती है. इसलिए बच्चों को हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधि करवाना जरूरी है, जैसे:

    • दौड़ना
    • स्किपिंग
    • योग
    • इनडोर एक्सरसाइज
    • कोई भी मजेदार गेम जिसमें बॉडी मूवमेंट हो