आज के दौर में इंटरनेट पर हार्ट की बीमारी और उसके इलाज को लेकर इतनी जानकारी मौजूद है कि मरीज और उनके परिवार अक्सर भ्रम में पड़ जाते हैं. खासतौर पर कार्डियक स्टेंट को लेकर लोगों के मन में यह सवाल बार-बार उठता है कि अगर स्टेंट लग चुका है तो क्या फिर भी हार्ट अटैक आ सकता है. डॉक्टरों का साफ कहना है कि स्टेंट लगने के बाद भी दिल का दौरा पड़ने की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं होती.
कब लगाया जाता है स्टेंट?
स्टेंट तब लगाया जाता है जब दिल तक खून पहुंचाने वाली आर्टरीज में कोलेस्ट्रॉल जमा होकर रास्ता संकरा कर देता है. यह एक धातु की जाली होती है, जिसे ब्लॉकेज वाली नस में डालकर खून के बहाव को सामान्य किया जाता है. आमतौर पर हार्ट अटैक के बाद या गंभीर ब्लॉकेज की स्थिति में स्टेंट डाला जाता है ताकि नस खुली रहे और दिल तक पर्याप्त खून पहुंचता रहे.
हालांकि स्टेंट उस खास नस को खोल देता है, लेकिन यह दिल की सभी धमनियों को सुरक्षित नहीं करता. अगर मरीज स्टेंट लगने के बाद भी अस्वस्थ लाइफस्टाइल अपनाता है, तला-भुना और ज्यादा फैट वाला खाना खाता है, धूम्रपान करता है या शारीरिक गतिविधि से दूर रहता है, तो दिल की दूसरी नसों में ब्लॉकेज बन सकता है. यही वजह है कि स्टेंट लगने के बावजूद दोबारा हार्ट अटैक हो सकता है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
डॉ. संतोष कुमार, हृदय रोग एक्सपर्ट, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल, नई दिल्ली बताते हैं कि “स्टेंट किसी प्राकृतिक नस का विकल्प नहीं है. यह सिर्फ एक अस्थायी सहारा है, जो उस समय जान बचाने में मदद करता है. शरीर में बार-बार स्टेंट डालना न तो सुरक्षित माना जाता है और न ही यह स्थायी समाधान है. अगर दोबारा हार्ट अटैक होता है, तो मरीज की हालत पहले से ज्यादा गंभीर हो सकती है और इलाज भी मुश्किल हो जाता है.”
स्टेंट लगाने के बाद क्या होता है?
स्टेंट लगने के बाद मरीज पहले से ज्यादा संवेदनशील हो जाता है दोबारा दिल का दौरा पड़ने पर जान का खतरा भी बढ़ जाता है और कई मामलों में फिर से एंजियोप्लास्टी या स्टेंट डालने की जरूरत पड़ सकती है. कुछ मामलों में अगर शरीर स्टेंट को स्वीकार नहीं करता या प्रक्रिया में दिक्कत आती है, तो स्थिति जानलेवा भी हो सकती है. इसीलिए डॉक्टर बार-बार सलाह देते हैं कि स्टेंट लगने के बाद लापरवाह नहीं होना चाहिए. संतुलित डाइट, नियमित एक्सरसाइज, डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं का सही समय पर सेवन, धूम्रपान से दूरी और तनाव नियंत्रण ही स्टेंट के बाद दिल को सुरक्षित रखने का सबसे कारगर तरीका है. स्टेंट इलाज का एक हिस्सा है, पूरा इलाज नहीं, असल इलाज लाइफस्टाइल में सुधार से ही होता है.
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
लखनऊ: सार्वजनिक जीवन में सच्चा नेतृत्व केवल वक्तव्यों से नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में त्वरित निर्णय, समन्वित कार्यवाही और मानवीय संवेदनशीलता से परिलक्षित होता है। ऐसा ही उत्तरदायी और संवेदनशील नेतृत्व हाल ही में सरोजिनी नगर क्षेत्र में घटित एक दुखद घटना के बाद देखने को मिला।
दिनांक 11 जनवरी 2026 को सैनिक विहार कॉलोनी, बिजनौर में खुले एवं असुरक्षित विद्युत ट्रांसफार्मर के संपर्क में आने से अर्पित पाल (उम्र 8 वर्ष), पुत्र राकेश पाल, गंभीर रूप से झुलस गया। घटना के बाद बच्चे के उपचार को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए के.जी.एम.यू., लखनऊ में चिकित्सा की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। अब तक लगभग ₹75,000 की चिकित्सा सहायता विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के मार्गदर्शन में उपलब्ध कराई जा चुकी है। इसके साथ ही उनकी टीम के सदस्यों द्वारा रक्तदान कर पीड़ित परिवार को चिकित्सकीय एवं नैतिक सहयोग प्रदान किया गया।
चूंकि पीड़ित परिवार मूल रूप से मोहनलालगंज विधानसभा क्षेत्र का निवासी है, अतः संवैधानिक मर्यादाओं का ध्यान रखते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा मोहनलालगंज के माननीय विधायक से विधायक निधि से आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का औपचारिक अनुरोध किया गया, जिससे बच्चे का उपचार निर्बाध रूप से जारी रह सके।
घटना को केवल एक दुर्घटना मानकर सीमित न रखते हुए, इसे प्रशासनिक जवाबदेही से जोड़ते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर पीड़ित परिवार को शासन स्तर से समुचित सहायता एवं मुआवज़ा प्रदान किए जाने का अनुरोध किया गया है।
इसके अतिरिक्त ऊर्जा मंत्री को भेजे गए पत्र में एफआईआर दर्ज कराने, निष्पक्ष जाँच, दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई, पीड़ित परिवार को तत्काल मुआवज़ा देने तथा क्षेत्र में अन्य असुरक्षित ट्रांसफार्मरों की पहचान कर फेंसिंग एवं सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग की गई है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
इस अवसर पर डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ी लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इस दिशा में कड़े मानकों का पालन तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई अनिवार्य है।
यह घटनाक्रम एक बार फिर यह दर्शाता है कि संवेदनशीलता, संवैधानिक दायित्व और प्रशासनिक दृढ़ता के समन्वय से ही पीड़ितों को न्याय, राहत और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
मिशन शक्ति केंद्र के लिए Minimum Service Standards तय किए जाएंगे
मिशन शक्ति केंद्र एक भरोसेमंद “ब्रांड” के रूप में स्थापित होगा
भविष्य में मानकीकरण, प्रशिक्षण एवं संसाधनों के माध्यम से मिशन शक्ति केंद्रों को और प्रभावी बनाया जाएगा
संवेदनशीलता व प्री-एफआईआर काउंसलिंग से सामाजिक अपराधों में उल्लेखनीय कमी आई है
मिशन शक्ति फेज-5 के अंतर्गत प्रत्येक थाने पर मिशन शक्ति केंद्र स्थापित कर महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन को सुदृढ़ किया गया है
मिशन शक्ति केंद्र शिकायत के साथ-साथ संवाद, परामर्श, विधिक व चिकित्सीय सहायता का एकीकृत मंच है: पुलिस महानिदेशक, उ0प्र0
लखनऊ: मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश योगी आदित्यनाथ जी के निर्देशन में प्रदेश में मिशन शक्ति अभियान फेज-5 के अंतर्गत राजीव कृष्ण, पुलिस महानिदेशक, उ0प्र0 के मार्गदर्शन में आज दिनांकः 16.01.2026 को बरेली परिक्षेत्र के समस्त जनपदों (बरेली, बदायूँ, पीलीभीत, शाहजहाँपुर) में स्थापित किये गये मिशन शक्ति केन्द्रों के प्रभावी संचालन हेतु जीआईसी ऑडिटोरियम बरेली में आयोजित मिशन शक्ति कौशल कार्यशाला का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शुभारम्भ किया गया।
उक्त कार्यशाला में पुलिस एवं प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के अतिरिक्त, चिकित्सकों, मनोवैज्ञानिकों, काउंसलरों, परिवार परामर्श केन्द्र के प्रभारियों ने भी प्रतिभाग किया गया। पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश द्वारा मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा गया कि-
आगामी समय में प्रत्येक मिशन शक्ति केंद्र के लिए Minimum Service Standards तय किए जाएंगे, ताकि प्रदेश के किसी भी थाने में नागरिकों को समान गुणवत्ता की सेवा मिले।
मिशन शक्ति केंद्र एक भरोसेमंद “ब्रांड” के रूप में स्थापित हो। प्रशिक्षण, एसओपी के सरलीकरण और संसाधनों की उपलब्धता पर निरंतर कार्य किया जाएगा।
मिशन शक्ति केंद्रों का मूल आधार संवेदनशीलता, धैर्य और सुनने की क्षमता है। पीड़िता से संवाद के प्रारंभिक 10 मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। बिना जजमेंट के सुनना, सम्मानजनक व्यवहार और सहानुभूति अपने आप में समस्या समाधान का सशक्त माध्यम है, जागरूकता और संवाद के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं-
इलोपमेंट/सामाजिक अपराधों में उल्लेखनीय कमी, बलात्कार के मामलों में लगभग 33ः की गिरावट, दहेज हत्या जैसे सामाजिक अपराधों में लगभग 13ः की कमी।
यह स्पष्ट करता है कि संवाद, संवेदनशीलता और कम्युनिटी आउटरीच पुलिस के अत्यंत प्रभावी उपकरण हैं। अपराधियों के प्रति कठोर दृष्टिकोण आवश्यक है, किंतु पीड़ितों और नागरिकों के लिए मानवीय एवं सहयोगात्मक दृष्टिकोण अनिवार्य है।
मिशन शक्ति केंद्र महिलाओं एवं पीड़ितों के लिए केवल शिकायत दर्ज करने का माध्यम नहीं, बल्कि संवेदनशील संवाद, परामर्श एवं समन्वित समाधान का प्रभावी मंच बनकर उभरा है।
मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के मार्गदर्शन में वर्ष 2020 में प्रारंभ मिशन शक्ति अभियान को Whole of Government Approach के तहत संचालित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य नागरिकों तक शासन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी एवं सेवाएं एकीकृत रूप से पहुँचाना है।
मिशन शक्ति के पाँचवें संस्करण में प्रत्येक थाने पर मिशन शक्ति केंद्र की स्थापना की गई है, जिससे महिला संबंधी समस्याओं का समाधान एफआईआर तक सीमित न रहकर प्री-एफआईआर काउंसलिंग, संवाद, जागरूकता, कानूनी सहायता, मेडिकल रेफरल और पोस्ट-ट्रॉमा केयर तक विस्तारित हो सका है। महिला थानों और जिला स्तर के परामर्श केंद्रों की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए इन सभी सेवाओं को एक छत के नीचे समाहित किया गया है।
इन केंद्रों के माध्यम से डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी (DLSA) से समन्वय कर निःशुल्क विधिक सहायता, तथा सरकारी एवं निजी अस्पतालों के साथ तालमेल कर आवश्यक चिकित्सीय सहयोग सुनिश्चित किया गया है। कई गंभीर मामलों में इससे पीड़ितों को नया और सुरक्षित जीवन मिला है।
मिशन शक्ति केंद्रों के लिए वाहनों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक थाने पर चार-चार स्कूटी उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
अंत में पुलिस महानिदेशक ने मिशन शक्ति से जुड़े सभी अधिकारियों, कर्मियों, चिकित्सकों, विधिक विशेषज्ञों एवं सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संवाद, संवेदनशीलता और समन्वय के माध्यम से मिशन शक्ति केंद्र प्रदेश में महिला सुरक्षा एवं सामाजिक विश्वास का सशक्त माध्यम बनकर उभरे हैं।
कार्यशाला में प्रतिभाग करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों एवं विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट वक्ताओं द्वारा भी अपने संबोधन में अनुभव, सुझाव साझा किये गये तथा प्रस्तुतिकरण दिये गयेः-
रमित शर्मा, अपर पुलिस महानिदेशक बरेली जोन, भूपेन्द्र एस. चौधरी, मंडलायुक्त बरेली द्वारा कार्यशाला को सम्बोधित कर मार्गदर्शन दिया गया।
अजय कुमार साहनी, पुलिस उपमहानिरीक्षक, बरेली परिक्षेत्र द्वारा बरेली परिक्षेत्र के मिशन शक्ति से सम्बंधित महत्वपूर्ण केस स्टडीज का उल्लेख किया गया।
पद्मजा चौहान , अपर पुलिस महानिदेशक, महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन के द्वारा भी हाइब्रिड मोड में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रतिभाग कर मार्गदर्शन दिया गया।
अविनाश सिंह, जिलाधिकारी बरेली द्वारा भी कार्यशाला को सम्बोधित कर मार्गदर्शन दिया गया।
अनुराग आर्या, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बरेली द्वारा कार्यशाला में प्रतिभाग करने वाले समस्त अधिकारी/कर्मचारीगणों व वक्ताओं को धन्यवाद दिया गया तथा उत्साहवर्द्धन हेतु उत्कृष्ट कार्य करने वाली मिशन शक्ति केन्द्र टीम, आंवला परिवार परामर्श केन्द्र के परामर्शदाताओं तथा अतिथि वक्तागणों को कार्यशाला में सम्मानित किया गया।
देवयानी , मुख्य विकास अधिकारी बरेली द्वारा शासन द्वारा चलायी जा रही महिला सशक्तिकरण संबंधी योजनाओं के संबंध में प्रस्तुतिकरण दिया गया।
जय गोविंद सिंह, (आंवला परिवार परामर्श केन्द्र) के द्वारा टूटते 100 परिवारों के सफल मध्यस्थता के अनुभव साझा किये गये। आंवला सर्किल के लगभग 100 पारिवारिक विवादों को परिवार परामर्श केंद्र और मिशन शक्ति टीम द्वारा दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित कर सुलझाया गया है। ऐसे परिवार इस बात का प्रतीक है जिन्होने अहंकार को छोड़कर संवाद को अपनाया।
डॉ0 जसविंदर के नेतृत्व में एसआरएमएस के चिकित्सकों द्वारा मेडिकल ज्यूरिसप्रुडेंस और साइकोलॉजी के बारे में जानकारी साझा की गयी।
क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. मनाली ने मिशन शक्ति केन्द्रों पर आने वाली पीड़िताओं के सम्बन्ध में तैयार एसओपी पर वार्ता करते हुए कहा कि यौन हिंसा पीड़ितों से संवाद में पुलिस के पहले 10 मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं, उन्होंने कहा कि पुलिस को संवेदनशील व्यवहार करते हुए गंभीर स्थिति में पीड़ित की सहमति से गोपनीय रूप से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं हेतु रेफर करना चाहिए, क्योंकि पुलिस का व्यवहार किसी की ज़िंदगी बदल सकता है।
डॉ0 शांतनु (वरिष्ठ अधिवक्ता सर्वोच्च न्यायालय) के द्वारा महिला संबंधी अपराध में विवेचनात्मक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) से संबंधित व्याख्यान किया गया। परिक्षेत्र के जनपदों के मिशन शक्ति केन्द्र के नोडल अधिकारी (अपर पुलिस अधीक्षक) द्वारा जनपदों में किये गये उत्कृष्ट कार्यों का उल्लेख करते हुये मिशन शक्ति केन्द्रों द्वारा कृत कार्यवाही/प्रगति का समीक्षात्मक रुप से प्रस्तुतिकरण दिया गया।
कार्यशाला में परिक्षेत्र के जनपदों के थानों पर स्थापित मिशन शक्ति केन्द्र के प्रभारी व महिला बीट आरक्षी द्वारा फील्ड में कार्यरत रहते हुये उनके द्वारा किये गये कार्यों के सम्बन्ध में अनुभव तथा सुझाव साझा किये गये।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने ही लगाए गए टैरिफ (आयात शुल्क) को लेकर अब असमंजस और चिंता में नजर आ रहे हैं। ट्रंप सरकार द्वारा एकतरफा तरीके से लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ को अमेरिकी अदालत में चुनौती दी गई है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट में अभी सुनवाई चल रही है। अगर यह फैसला सरकार के खिलाफ जाता है, तो अमेरिका को सैकड़ों अरब से लेकर खरबों डॉलर तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सोमवार, 12 जनवरी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा, “अगर सुप्रीम कोर्ट यह फैसला सुनाता है कि अमेरिका को इतना ज्यादा टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है, तो हमारे देश की हालत बहुत खराब हो जाएगी।”
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में आगे कहा कि अगर अदालत का फैसला सरकार के खिलाफ आता है, तो पहले से वसूले गए टैरिफ को लौटाना एक बड़ी चुनौती बन जाएगा। उन्होंने लिखा, “सरकार को पहले से वसूले गए पैसे वापस करने में काफी मशक्कत करनी पड़ेगी। टैरिफ चुकाते-चुकाते एक बहुत बड़ी गड़बड़ हो जाएगी और व्यापक आर्थिक प्रभावों को देखते हुए इसकी लागत सैकड़ों अरब डॉलर या यहां तक कि खरबों डॉलर तक पहुंच सकती है।”
अदालत पर दबाव बनाने की कोशिश ?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप अपने बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से अदालत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके एकतरफा टैरिफ अधिकारों को अदालत में चुनौती दी गई है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट में विचार चल रहा है।
ट्रंप ने फैसले से पहले ही आशंका जताते हुए लिखा, “हो सकता है हमारे पक्ष में फैसला नहीं आए। लेकिन अगर ऐसा हुआ तो यह इतनी बड़ी रकम होगी कि यह पता लगाने में कई साल लग जाएंगे कि हमें कब, कहां और किसे कितना भुगतान करना पड़ेगा।”
अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर संभव
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर सुप्रीम कोर्ट ट्रंप सरकार के टैरिफ को अवैध करार देता है, तो न सिर्फ अमेरिकी सरकार को भारी रकम लौटानी पड़ेगी, बल्कि इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था, व्यापार नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी पड़ेगा।
अब पूरी दुनिया की नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि ट्रंप के टैरिफ कानूनी थे या नहीं- और क्या अमेरिका को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
रवींद्र जडेजा भारतीय क्रिकेट के उन खिलाड़ियों में रहे हैं, जिन्होंने आलोचना को अपनी ताकत बनाया है. 2019 में जब उन्हें “बिट्स एंड पीसेज़” खिलाड़ी कहा गया, तब जडेजा ने तीनों फॉर्मेट में प्रदर्शन कर अपनी अहमियत साबित की. टेस्ट क्रिकेट में आज भी उनका रुतबा कायम है और दिसंबर 2024 में रविचंद्रन अश्विन के संन्यास के बाद वे भारत के सबसे भरोसेमंद स्पिन ऑलराउंडर बने हुए हैं. हालांकि सीमित ओवरों के क्रिकेट में तस्वीर अब बदलती दिख रही है.
टी20 इंटरनेशनल से जडेजा पहले ही 2024 में विश्व कप जीत के बाद संन्यास ले चुके हैं. वनडे क्रिकेट में भी उनका बेहतरीन प्रदर्शन 2023 तक ही नजर आया. उसी साल उन्होंने 26 वनडे मैच खेले, जिनमें करीब 31 की औसत से रन बनाए और नियमित विकेट भी लिए. हालांकि इसके बाद उनका ग्राफ नीचे जाता दिखा. 2019 विश्व कप के बाद के कुछ सालों में उनके प्रदर्शन में निरंतरता नहीं रही और 2024 में उन्हें एक भी वनडे खेलने का मौका नहीं मिला.
2025 और 2026 को मिलाकर जडेजा ने सिर्फ 13 वनडे मैच खेले. इन मुकाबलों में उनके बल्ले से सिर्फ 139रन ही निकले. न तो उनकी बल्लेबाजी में वह असर दिखा और न ही गेंद से वही धार नजर आई, जिसके लिए वे जाने जाते थे. भले ही उनके करियर आंकड़े मजबूत हों- 200 से ज्यादा वनडे, 2866 रन और 200 से अधिक विकेट—लेकिन हालिया दो सालों के प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं और फैंस दोनों को सोचने पर मजबूर कर दिया है.
बल्लेबाजी क्रम बनी बड़ी समस्या
जडेजा को नंबर 5 और 6 पर बल्लेबाजी कराने का प्रयोग टीम इंडिया और आईपीएल दोनों में ज्यादा सफल नहीं रहा. इन स्थानों पर उन्हें सीमित मौके मिले और रन भी कम बने. इसके उलट, नंबर 7 पर उन्होंने अपने करियर में सबसे ज्यादा प्रभाव डाला है. हालिया वनडे में उनका जल्दी आउट होना भी आलोचना की वजह बना, क्योंकि टीम को उस वक्त उनके अनुभव की सबसे ज्यादा जरूरत थी.
अक्षर पटेल और सुंदर की चुनौती
जडेजा के लिए मुश्किल इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर जैसे ऑलराउंडर तेजी से उभर रहे हैं. अक्षर ने हाल के वनडे मैचों में बल्ले और गेंद दोनों से दमदार प्रदर्शन किया है और चयनकर्ताओं का भरोसा जीता है. सुंदर फिलहाल चोटिल हैं, लेकिन फिट होते ही वे भी मजबूत दावेदार होंगे. इसके अलावा रियान पराग और आयुष बदोनी जैसे युवा खिलाड़ी भविष्य की योजनाओं में शामिल हैं
आखिरी मौके की लड़ाई
सुंदर की चोट ने जडेजा को मौजूदा सीरीज में एक मौका जरूर दिया है. वे टीम में एकमात्र अनुभवी स्पिन ऑलराउंडर हैं और अगर इन मैचों में उन्होंने दमदार प्रदर्शन किया, तो उनका वनडे करियर कुछ और आगे बढ़ सकता है. हालांकि अगर असर नहीं दिखा, तो 50 ओवर के क्रिकेट में उनका सफर जल्द थम सकता है.