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Russia Sanctions Bill: भारत पर 500 फीसदी टैरिफ की आशंका नहीं? अमेरिकी ट्रेजरी सचिव का बड़ा बयान, असली निशाने का किया खुलासा

अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने के लिए सीनेट की अनुमति की जरूरत नहीं है. हालांकि उन्होंने साफ किया कि इस बार टैरिफ की धमकी का मुख्य निशाना चीन है, न कि भारत.

स्कॉट बेसेंट ने दावा किया कि ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद कर दी है. उनका कहना था कि यूएस की सख्त व्यापार नीति के चलते भारत ने अपने आयात में बदलाव किया है.

500% टैरिफ वाला विधेयक क्या है?

बेसेंट जिस विधेयक का ज़िक्र कर रहे थे, वह Russia Sanctions Bill है, जिसके तहत अमेरिका उन देशों पर कम से कम 500% टैरिफ लगा सकता है जो रूस से तेल खरीदते हैं. इस बिल को इस महीने की शुरुआत में राष्ट्रपति ट्रंप की मंजूरी मिल चुकी है.

स्कॉट बेसेंट ने कही ये बात

एक इंटरव्यू में बेसेंट ने कहा, ‘रूसी तेल खरीदने वालों पर 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सीनेट के सामने रखा है. हम देखेंगे कि यह पास होता है या नहीं. हालांकि हमारा मानना है कि राष्ट्रपति ट्रंप को इसकी जरूरत नहीं है, वे इसे IEPA (International Emergency Powers Act) के तहत लागू कर सकते हैं, लेकिन सीनेट उन्हें यह अधिकार औपचारिक रूप से देना चाहती है.’

यूरोप पर भी अमेरिका का हमला

व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारी ने यूरोप को भी आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि चार साल बाद भी यूरोप रूसी तेल खरीद रहा है और इस तरह खुद के खिलाफ चल रहे युद्ध को ही फंड कर रहा है. बेसेंट ने इस दौरान दावा किया कि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूसी तेल खरीदना शुरू किया था, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा 25% टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत ने खरीद कम कर दी और अब पूरी तरह रोक दी है.

चीन पर साधा निशाना

स्कॉट बेसेंट ने चीन को रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बताया और कहा कि अमेरिका लंबे समय से चीन पर 500% तक टैरिफ लगाने की योजना बना रहा है क्योंकि वह रूस से सस्ता तेल खरीदकर युद्ध को आर्थिक मदद दे रहा है.

500% टैरिफ बिल पर भारत का आधिकारिक रुख

अमेरिका के इस रूस प्रतिबंध विधेयक पर भारत ने भी प्रतिक्रिया दी है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘हम प्रस्तावित विधेयक से पूरी तरह अवगत हैं और इससे जुड़े सभी घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं.’

US-NATO Relations:“ग्रीनलैंड मुद्दे पर अमेरिका का यू-टर्न, टैरिफ की धमकी से पीछे हटे ट्रंप—आखिर क्यों बदला बड़ा फैसला?”

 ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी और सैन्य कार्रवाई की अटकलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने रुख में नरमी के संकेत दिए हैं.

विश्व आर्थिक मंच (WEF) के दौरान नाटो महासचिव मार्क रुट्टे के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर प्रस्तावित टैरिफ को फिलहाल वापस लेने का फैसला किया है. इसे ट्रंप की रणनीति में एक नरम लेकिन अधिक व्यावहारिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है.

टैरिफ लगाने का फैसला टला

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर जानकारी देते हुए कहा कि 1 फरवरी से लागू होने वाले टैरिफ अब आगे नहीं बढ़ाए जाएंगे. उन्होंने बताया कि नाटो महासचिव मार्क रुट्टे के साथ हुई बेहद सकारात्मक बैठक के बाद यह फैसला लिया गया है.

ट्रंप ने लिखा, “नाटो के महासचिव मार्क रुट्टे के साथ हुई उपयोगी बैठक के आधार पर हमने ग्रीनलैंड और वास्तव में पूरे आर्कटिक क्षेत्र को लेकर भविष्य के एक समझौते की रूपरेखा तैयार की है.”

अमेरिका-नाटो सहयोग पर जोर

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि प्रस्तावित ढांचा अमेरिका और उसके नाटो सहयोगियों दोनों के हित में होगा. इसी कारण उन्होंने टैरिफ लगाने का फैसला वापस लिया है. उन्होंने यह भी बताया कि ग्रीनलैंड से जुड़े ‘गोल्डन डोम’ पर बातचीत अभी जारी है. ट्रंप के अनुसार, इस बातचीत का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ करेंगे. जरूरत पड़ने पर अन्य अधिकारी भी इसमें शामिल होंगे और सभी सीधे उन्हें रिपोर्ट करेंगे.

डेनमार्क की प्रतिक्रिया आई सामने

डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन ने ट्रंप के इस फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि यह कदम ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की महत्वाकांक्षाओं के बीच एक सकारात्मक संकेत है. रासमुसेन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “दिन की शुरुआत जैसी थी, उसका अंत उससे कहीं बेहतर हुआ है.”

नाटो प्रमुख ने जताया भरोसा

नाटो महासचिव मार्क रुट्टे ने बैठक के दौरान ट्रंप को भरोसा दिलाया कि संकट की स्थिति में अमेरिकी सहयोगी देश वाशिंगटन के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे. उन्होंने 9/11 के बाद नाटो की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय सहयोगी देशों ने अमेरिकी सेनाओं के साथ अफगानिस्तान में लड़ाई लड़ी थी, जहां कुछ सैनिक कभी वापस नहीं लौटे. ट्रंप ने इस आश्वासन की सराहना की और रुट्टे को भरोसेमंद बताया, हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ग्रीनलैंड को लेकर तनाव ने सहयोगियों की प्रतिबद्धता पर कुछ संदेह जरूर पैदा किया है.

ग्रीनलैंड पर सैन्य रुख से पीछे हटे ट्रंप

दावोस में अपने भाषण के दौरान ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर सैन्य नियंत्रण की पहले की बयानबाजी से भी दूरी बनाई. उन्होंने एक बार फिर ग्रीनलैंड को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम बताया और कहा कि आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के कारण इसका रणनीतिक महत्व काफी बढ़ गया है.

ग्रीनलैंड को बर्फ का एक टुकड़ा बताते हुए ट्रंप ने कहा कि उस पर नियंत्रण की मांग बहुत बड़ी नहीं है. उन्होंने कहा, “मैं जिस चीज की मांग कर रहा हूं, वह एक ठंडी और दूरस्थ जगह है, जो विश्व शांति और सुरक्षा में अहम भूमिका निभा सकती है. दशकों से हमने जो दिया है, उसकी तुलना में यह बहुत छोटी मांग है.”

Health News:हेल्थ एक्सपर्ट्स की चेतावनी: सुबह की कॉफी बन सकती है सेहत के लिए नुकसानदेह, अगर आप कर रहे हैं ये बड़ी भूल

आज के समय में हर किसी को कॉफी पीना बेहद पसंद है। सुबह कॉफी के बिना नहीं होती है लेकिन आप जिस तरह से कॉफी पी रहे हैं, क्या वो सही तरीका है। एक हालिए स्टडी में पता चला है कि ज्यादातर लोग कॉफी पीने के सही तरीके को नहीं जानते हैं और इसे गलत तरीक से पीते हैं, तभी उनकी सेहत पर नुकसान पड़ता है। आइए जानते हेल्थ एक्सपर्ट से किस तरह से कॉफी पीना सही होता है?

कॉफी पीना का सही तरीका

दरअसल, Nutrition, Metabolism & Cardiovascular Diseases में प्रकाशित इस स्टडी के मुताबिक सबसे बड़ा स्वास्थ्य कारक कॉफी नहीं, बल्कि उसमें मिलाई जाने वाली चीजें हैं, जो कि शरीर पर होने वाले इसके असर को प्रभावित कर सकती है। शोधकर्ताओं का यह कहना है कि  कॉफी में ऐसे यौगिक होते हैं जो एंटीऑक्सीडेंट और सूजन-रोधी गुणों सहित कई संभावित लाभों से जुड़े हैं। हालांकि, समस्या तब उत्पन्न होती है जब कॉफी को डिजर्ट यानी मिठाई में बदल दिया जाता है जैसे कि-

  – चीनी वाली कॉफी

  – फ्लेवर्ड सिरप वाली कॉफी

  – व्हीप्ड क्रीम वाली कॉफी

  – हैवी क्रीम वाली कॉफी

 इस तरह की सभी कॉफी में कैलोरी अधिक हो जाता है और ये हाई शुगर वाले ड्रिंक में बदल जाते हैं,  जिससे इसके अधिकांश लाभ खत्म हो जाते हैं।

सही समय पर पिएं कॉफी

इस शोध में बताया गया है कि कॉफी पीने का सही समय सेहत के लिए बेहद अहम होता है। बहुत सुबह या दिन के आखिरी हिस्से में कॉफी पीने से शरीर के प्राकृतिक हार्मोन चक्र और नींद की गुणवत्ता पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसका परिणाम खराब नींद, मेटाबॉलिज्म में गड़बड़ी और शरीर में सूजन के रूप में सामने आ सकता है। शोध के अनुसार, ब्लैक कॉफी हल्की या दूध वाली कॉफी की तुलना में अधिक लाभकारी होती है। साथ ही, कॉफी का तापमान और उसे बनाने की विधि भी इसके स्वास्थ्य लाभों को प्रभावित करती है।

 क्या है डॉक्टर की राय?

वैज्ञानिक रिसर्च से पता चला है कि कॉफी कितनी पी जा रही है, इसके साथ-साथ यह भी उतना ही जरुरी है कि उसे किस तरह और किस समय पिया जा रहा है। खासतौर पर कॉफी में एंटीऑक्सीडेंट और सूजन-रोधी गुण पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। लेकिन फायदे तब तक ही सीमित रहते हैं, जब तक कॉफी को उसके सिंपल फॉर्म में लिया जाए। जब आप ज्यादा चीनी, फ्लवर्ड सिरप, व्हीप्ड क्रीम या हैवी क्रीम मिलाई जाती है, यह एक साधारण कप कॉफी कब हाई-कौलोरी और हाई-शुगर ड्रिंक बन जाती है, फिर कॉफी पीने के सारे फायदे खत्म हो जाते हैं। 

कम मात्रा में कॉफी पीना सही

रोजाना सिर्फ 2 से 3 कप ब्लैक या हल्की दूध वाली कॉफी पीना सेफ नहीं है। अक्सर होता है कि ज्यादा कॉफी पीने से बेचैनी, एसिडिटी, नींद की कमी और हार्ट से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं। वैसे कॉफी पीने का समय भी बेहद अहम है। चाहे कॉफी खुद कितनी ही हेल्दी क्यों न मानी जाए। इसलिए नियमित रुप से सिंपल और संतुलित कॉफी पीना और कभी-कभार फ्लेवर वाली कॉफी का आनंद लेना। तभी सेहत और स्वाद के बीच सबसे अच्छा संतुलन है। अगर आप कॉफी को सीमित मात्रा में पीते तो यह हेल्दी बन जाती है। कम मिलावट के साथ ही इसे समय पर पिया जाए।

Airport Transit Visa क्या होता है? भारतीय पासपोर्ट धारकों को विदेश यात्रा में कब पड़ती है इसकी ज़रूरत?

अगर आप इंटरनेशनल यात्रा का प्लान कर रहे हैं, तो भारतीय नागरिकों को ट्रांजिट वीजा को समझना जरुरी है। अक्सर होता है कि कई लंबी दूरी के रुट पर दूसरे देश में प्लेन बदलना पड़ता है और ऐसे में ट्रांजिट वीजा की जरुरत होगी या नहीं, यह उन बातों पर निर्भर करता है जिन्हें टिकट बुक करते समय अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इनमें ट्रांजिट देश के भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए नियम, लेओवर की अवधि और प्रकृति और क्या यात्री को रास्ते में इमिग्रेशन क्लियर करने की जरूरत है, ये सब शामिल हैं। ट्रांजिट वीजा की जरूरतें हमेशा साफ नहीं होतीं। थोड़े समय के स्टॉप का मतलब यह नहीं है कि वीजा के बिना ट्रांजिट हो जाएगा और कुछ देशों में एयरपोर्ट के अंदर रहने के लिए भी पहले से अनुमति की जरूरत पड़ सकती है। अब आपको यह जानना बेहद जरुरी है कि ये नियम पहले से कैसे काम करते हैं, यात्रियों को सही रास्ते चुनने, समय पर वीजा के लिए अप्लाई करने और एयरपोर्ट पर आखिरी समय की परेशानियों से बचने में मदद करता है।

क्या होता है ट्रांजिट वीजा?

दरअसल, ट्रांजिट वीजा एक शॉर्ट-टर्म वीजा होता है जो यात्री को किसी दूसरे डेस्टिनेशन पर जाते समय किसी देश से गुजरने की इजाजत देता है। इस बात का ध्यान रखें कि यह टूरिज़्म, बिजनेस एक्टिविटी या लंबे समय तक रुकने की इजाज़त नहीं देता है। इसका एकमात्र मकसद आपको अपनी यात्रा कानूनी तौर पर पूरी करने देना है।

भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए, कुछ देशों को ट्रांजिट वीजा की जरूरत होती है भले ही यात्री कभी एयरपोर्ट टर्मिनल से बाहर न निकले। दूसरे देश वीजा-फ्री ट्रांज़िट की इजाजत देते हैं, लेकिन सिर्फ तभी जब बहुत खास शर्तें पूरी होती हैं।

ट्रांजिट वीजा के दो मुख्य प्रकार

हवाई अड्डा ट्रांजिट वीजा (एयरसाइड ट्रांजिट)

एयरपोर्ट ट्रांजिट वीजा तब लागू होता है जब कोई यात्री पूरी तरह से इंटरनेशनल ट्रांजिट एरिया में रहता है और इमिग्रेशन क्लियर नहीं करता है। इस यात्रा में प्लेन बदलना शामिल होता है, लेकिन आधिकारिक तौर पर देश में एंट्री नहीं होती है।

यूरोप में, ये नियम अक्सर शेंगेन एरिया के तहत बनाए जाते हैं, हालांकि जरूरतें अभी भी देश और राष्ट्रीयता के हिसाब से अलग-अलग होती हैं। भारतीय यात्रियों के लिए, इसका मतलब है कि ट्रांज़ट नियम पड़ोसी यूरोपीय एयरपोर्ट के बीच भी अलग-अलग हो सकते हैं।

इस तरह के ट्रांजिट वीजा का इस्तेमाल कब किया जाता है

  – लेओवर छोटा है और उसी दिन का है।

  – सामान की जांच हो चुकी है।

  – किसी इमिग्रेशन क्लीयरेंस की आवश्यकता नहीं है।

एंट्री के साथ ट्रांजिट वीजा (लैंडसाइड ट्रांजिट) 

यदि किसी यात्रों को ट्रांजिट के दौरान इमिग्रेशन से गुजरना होता है, तो एंट्री वाला ट्रांजिट वीजा जरूरी होता है। आमतौर पर यह तब होता है कि जब यात्रा में रात भर रुकना हो, एयरपोर्ट बदलना हो, या सामान लेना हो।

 नाम के बावजूद, यह वीजा घूमने-फिरने या टूरिज्म की इजाजत नहीं देता है। बता दें कि, यह सिर्फ यात्रा जारी रखने के मकसद से सीमित एंट्री की इजाजत देता है।

इस तरह के ट्रांजिट वीजा का इस्तेमाल कब किया जाता है

 – रात भर का लेओवर

 – एक ही शहर में एयरपोर्ट बदलना

 – अलग-अलग टिकटों पर बैगेज को दोबारा चेक करना

भारतीय यात्रियों को ट्रांजिट वीजा की जरूरत कब पड़ती है?

वैसे तो कोई यूनिवर्सल नियम नहीं है। किसी भारतीय यात्री को ट्रांजिट वीजा चाहिए या नहीं, यह कई बातों पर निर्भर करता है, जिसमें ट्रांजिट देश की पॉलिसी, लेओवर का तरीका और यात्री के पास पहले से मौजूद वीजा शामिल हैं।

असल में सबसे ज्यादा जरूरी यह है कि यात्री को ट्रांजिट के दौरान क्या करना है, न कि स्टॉप कितना लंबा है। भारतीय यात्रियों को इन स्थितियों में ट्रांजिट वीजा की ज्यादा जरूरत पड़ सकती है।

  – लेओवर रात भर का है और इसके लिए एयरपोर्ट से बाहर निकलना होगा।

  – एयरपोर्ट या टर्मिनल बदलने होंगे।

  – टिकट अलग से बुक किए गए हैं।

  – सामान लेना होगा और दोबारा चेक करवाना होगा।

  – ट्रांजिट देश में छोटे एयरसाइड कनेक्शन के लिए भी वीजा जरूरी है।

भारतीय यात्रियों के लिए ट्रांजिट वीजा में छूट

भारतीय नागरिकों के लिए कुछ जरूरी छूटें भी हैं जिनका फायदा भारतीय यात्री उठा सकते हैं, बशर्ते सभी शर्तें पूरी हों। कुछ मामलों में बिना वीजा के एयरसाइड ट्रांजिट की अनुमति है। जिनके पास वैलिड US, UK, कैनेडियन या शेंगेन वीजा है, उन्हें कभी-कभी ट्रांजिट की जरूरतों से छूट मिल सकती है। इसके अलावा, कुछ देशों ने भारतीयों के लिए ट्रांजिट नियमों में ढील दी है। हालांकि, ये छूटें बहुत सटीक हैं। अगर एक भी शर्त पूरी नहीं होती है (जैसे गलत वीजा कैटेगरी या रात भर का लेओवर), तो छूट लागू नहीं होगी। 

ट्रांजिट वीजा के लिए कब और कैसे अप्लाई करें

कब अप्लाई करना है

इसके लिए आपको यात्रा से चार से आठ हफ्ते पहले सबमिट कर देनी चाहिए। हालांकि प्रोसेसिंग टाइम आमतौर पर टूरिस्ट वीजा से कम होता है, लेकिन पीक ट्रैवल सीजन में देरी आम बात है। देर से अप्लाई करने से यात्रा की तारीखें छूटने का खतरा काफी बढ़ जाता है।

कहां अप्लाई करना है

ट्रांजिट वीजा हमेशा उस देश द्वारा जारी किया जाता है जहां ट्रांजिट होता है, न कि फाइनल डेस्टिनेशन द्वारा। देश के आधार पर आवेदन दूतावास या वाणिज्य दूतावास, एक अधिकृत वीजा आवेदन केंद्र या एक आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जमा किए जा सकते हैं।

जरुरी दस्तावेज

  – वैध पासपोर्ट

  – कन्फर्म आगे की फ्लाइट टिकट

  – आखिरी डेस्टिनेशन के लिए एंट्री परमिशन का सबूत

  – भरे हुए एप्लीकेशन फॉर्म और तस्वीरें

ट्रांजिट वीजा से बचने वाली आम गलतियां

 – मान लें कि छोटे लेओवर के लिए कभी वीजा की जरूरत नहीं होती।

 – बैगेज रीचेक और टर्मिनल बदलने के नियमों को नजरअंदाज करें।

 -ट्रांजिट के असर की जांच किए बिना अलग-अलग टिकट बुक करें।

  – ट्रांजिट छूट को किसी देश में प्रवेश करने की अनुमति समझने की गलती करें।

“Travel Tips: एडवेंचर लवर्स के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन है तमिलनाडु का कोटागिरी हिल स्टेशन”

घूमने के शौकीन लोग समय और छुट्टियां मिलते ही घूमने की प्लानिंग कर लेते हैं। अधिकतर लोग घूमने के लिए हिल स्टेशन जाना पसंद करते हैं। जिससे वह बिजी शेड्यूल के बीच सुकून के कुछ पल बिता सकें। यहां की ठंडी-ठंडी हवाएं और शांत वातावरण दिल और दिमाग को शांति पहुंचाते हैं। आमतौर पर जब भी घूमने की प्लानिंग की जाती है, तो अधिकतर लोग शिमला-मनाली और नैनीताल जाना पसंद करते हैं।

बता दें कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के अलावा अन्य कई राज्य हैं, जहां आपको एक से बढ़कर एक खूबसूरत हिल स्टेशन मिल जाएंगे। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको तमिलनाडु के एक ऐसे हिल स्टेशन के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पर जाने के बाद आपका वापस आने का मन नहीं करेगा

तम‍िलनाडु के हिल स्टेशंस

वैसे तो तमिलनाडु में 25 से ज्यादा हिल स्टेशन हैं, जोकि राज्य की खूबसूरती को बढ़ाने का काम करते हैं। यहां पर कुन्नूर, येलागिरी, यरकौड, ऊटी, कोडाइकनाल, वेल्लियांगिरी हिल्स और कोल्ली हिल्स जैसी कई शानदार जगहें हैं। लेकिन अगर आपको प्रकृति की खूबसूरती और झीलों के सुंदर नजारे देखना चाहते हैं, तो आपको कोटागिरी हिल स्टेशन एक बेस्ट ऑप्शन हो सकता है।

कोटाग‍िरी है बेस्‍ट ऑप्‍शन

यह एक बेहद शानदार जगह है और यहां के नजारे पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। बारिश के मौसम में इस जगह की खूबसूरती अधिक बढ़ जाती है। आज हम आपको कोटागिरी हिल्स में घूमने वाली कुछ बेहतरीन जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं।

कैथरीन फॉल्‍स

कैथरीन फॉल्स 20 फीट की ऊंचाई से गिरता है। यह झरना हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां के सुंदर नजारे देखने के बाद आपका वापस जाने का दिल नहीं करेगा।

कोटाग‍िरी ट्रैक रूट

अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं, जिनको ट्रैकिंग पसंद है। तो आपको एक बार कोडनाड से कोटागिरी की ट्रैकिंग जरूर करना चाहिए। आपको इस रूट में चाय के सुंदर बागान और घने जंगल भी देखने को मिलेंगे।

चाय के बागान

बता दें कि नीलगिरी की पहाड़ियों पर बसे चाय बागानों को देखकर आप सुकून महसूस करेंगे। यहां पर आप चाय की चुस्की भी ले सकते हैं। इसकी खूबसूरती देखकर आप भी बार-बार कैमरा निकालने पर मजबूर होंगे।

कोडनाड व्यू पॉइंट

यह जगह सनराइज और सनसेट के सुंदर नजारों को देखने के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है। इसके साथ ही आपको यहां पर टीपू सुल्तान के किले का बेहद खूबसूरत नजारा देखने को मिलेगा।

रंगास्वामी पीक

अगर आप हाइकिंग ट्रेल का मजा लेना चाहते हैं, तो आपको रंगास्वामी पीक जरूर एक्सप्लोर करना चाहिए। यहां का रंगास्वामी मंदिर और बड़े-बड़े चट्टान लोगों को पसंदीदा लिस्ट में शामिल होते हैं।

ऐसे पहुंचें कोटाग‍िरी हि‍ल स्‍टेशन

आप चाहें तो यहां पर ट्रेन से भी जा सकते हैं। यहां का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन मेट्टुपालयम है। कोटागिरी से इसकी दूरी करीब 33 किमी दूर है। यहां का सबसे पास एयरपोर्ट कोयंबटूर है। जोकि करीब 70 किमी की दूरी पर है। आप चाहें तो यहां पर बस और प्राइवेट गाड़ी से भी आ सकते हैं।