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Health News:इम्युनिटी से लेकर वेट लॉस तक: कच्चा टमाटर खाने के 10 जबरदस्त फायदे

कच्चा टमाटर सिर्फ सलाद की शोभा नहीं बढ़ाता, बल्कि यह सेहत के लिए किसी सुपरफूड से कम नहीं है। इसमें विटामिन C, विटामिन A, फाइबर, पोटैशियम और लाइकोपीन जैसे तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। आइए जानते हैं कच्चा टमाटर खाने के 10 ऐसे फायदे, जिन्हें जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे।


1. इम्युनिटी मजबूत करता है

कच्चे टमाटर में मौजूद विटामिन C शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे सर्दी-खांसी और वायरल संक्रमण से बचाव होता है।

2. वेट लॉस में सहायक

कम कैलोरी और ज्यादा फाइबर होने के कारण कच्चा टमाटर वजन घटाने में मदद करता है। यह पेट को लंबे समय तक भरा रखता है।

3. दिल की सेहत के लिए फायदेमंद

टमाटर में लाइकोपीन और पोटैशियम दिल को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं और खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं।

4. स्किन को बनाए ग्लोइंग

कच्चा टमाटर त्वचा को साफ और चमकदार बनाता है। यह पिंपल्स और दाग-धब्बों को कम करने में भी सहायक है।

5. पाचन तंत्र मजबूत करता है

फाइबर से भरपूर कच्चा टमाटर कब्ज की समस्या को दूर करता है और पाचन को बेहतर बनाता है।

6. ब्लड शुगर कंट्रोल में मददगार

डायबिटीज के मरीजों के लिए कच्चा टमाटर फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि यह ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखने में मदद करता है।

7. आंखों की रोशनी बढ़ाए

विटामिन A से भरपूर कच्चा टमाटर आंखों की सेहत के लिए अच्छा है और नजर कमजोर होने से बचाता है।

8. शरीर को डिटॉक्स करता है

कच्चा टमाटर शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है और लिवर को स्वस्थ रखता है।

9. हड्डियों को मजबूत बनाता है

टमाटर में मौजूद कैल्शियम और विटामिन K हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक होते हैं।

10. कैंसर से बचाव में मदद

लाइकोपीन जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं और कुछ प्रकार के कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं।


कच्चा टमाटर कैसे खाएं?

  • सलाद के रूप में
  • चटनी बनाकर
  • नमक और काली मिर्च के साथ
  • सब्जियों के साथ मिलाकर

ध्यान रखने वाली बातें

  • अधिक मात्रा में कच्चा टमाटर खाने से एसिडिटी हो सकती है।
  • जिन लोगों को पेट की समस्या है, वे सीमित मात्रा में ही सेवन करें।

निष्कर्ष

कच्चा टमाटर स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी खजाना है। अगर आप रोजाना सीमित मात्रा में इसका सेवन करते हैं, तो कई स्वास्थ्य लाभ पा सकते हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

‘हत्यारा, सूदखोर और…’ पहली जनसभा में यूनुस पर शेख हसीना का तीखा हमला।

भारत में पहली सार्वजनिक सभा (2024 में बांग्लादेश छोड़ने के बाद) को संबोधित करते हुए बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस पर तीखा हमला बोला. उन्होंने यूनुस पर अवैध, हिंसक शासन चलाने और देश को आतंक के युग में धकेलने का आरोप लगाया.

दिल्ली के फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब में ऑडियो संदेश के माध्यम से संबोधित करते हुए शेख हसीना ने बांग्लादेश में चल रहे राजनीतिक संकट को बांग्लादेश की संप्रभुता और संविधान के लिए अस्तित्व की लड़ाई बताया और अपने समर्थकों से विदेशी हितैषी कठपुतली शासन को उखाड़ फेंकने के लिए उठ खड़े होने का आह्वान किया.

‘बांग्लादेश में लोकतंत्र बचाओ’ 
‘बांग्लादेश में लोकतंत्र बचाओ’ शीर्षक के इस कार्यक्रम में हसीना की अवामी लीग सरकार के कई पूर्व मंत्रियों और बांग्लादेशी प्रवासी समुदाय के सदस्यों ने भाग लिया. हालांकि हसीना स्वयं उपस्थित नहीं हुईं लेकिन उनका भाषण खचाखच भरे हॉल में प्रसारित किया गया. इस दौरान शेख हसीना ने यूनुस को बार-बार हत्यारा फासीवादी, सूदखोर, मनी लॉन्डरर और सत्ता-लोभी गद्दार करार दिया.

‘बांग्लादेश आज जेल, फांसीगाह और मौत की घाटी में तब्दील’
शेख हसीना ने मुक्ति युद्ध की विरासत और अपने पिता शेख मुजीबुर रहमान का जिक्र करते हुए अपने भाषण की शुरुआत की. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश आज एक खाई के कगार पर खड़ा है. उन्होंने कहा कि उनका देश आज एक जेल, फांसीगाह और मौत की घाटी में तब्दील हो गया है. उन्होंने चरमपंथी ताकतों और विदेशी हितों पर देश को तबाह करने का आरोप लगाया.

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि उन्हें 5 अगस्त 2024 को एक सोची-समझी साजिश के तहत जबरन पद से हटा दिया गया. उन्होंने आगे कहा कि उनके हटने के बाद से बांग्लादेश आतंक के युग में डूब गया है. लोकतंत्र अब निर्वासन में है. उन्होंने आगे कहा कि मानवाधिकारों को कुचल दिया गया है. प्रेस की स्वतंत्रता समाप्त कर दी गई है. यूनूस सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए हसीना ने कहा कि और महिलाओं और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा को बेरोकटोक फलने-फूलने दिया जा रहा है।

बांग्लादेश चुनाव में महिलाओं की भागीदारी बेहद कम, सिर्फ 4.24% उम्मीदवार मैदान में।

बांग्लादेश में राजनीति से महिलाओं की भागीदारी लगातार गायब होती जा रही है. बांग्लादेश के सियासी इतिहास के पन्नों पर दो ऐसे नाम दर्ज हैं, जिन्होंने देश को एक नई दिशा दी है. बांग्लादेश की सियासत का इतिहास खालिदा जिया और शेख हसीना के नाम के बिना अधूरा है. बावजूद इसके, आज यहां पर महिलाओं की भागीदारी गिरती जा रही है. बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले चुनाव में महिला उम्मीदवारों की संख्या नहीं के बराबर है.

जो आंकड़े सामने आएं हैं, बेहद ही चिंताजनक
महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें सशक्त करने के वादे दशकों से किए जा रहे हैं, लेकिन फिर भी आगामी चुनाव में उनकी भूमिका की बिल्कुल अलग तस्वीर दिख रही है. बांग्लादेशी मीडिया यूएनबी ने बताया कि जमात-ए-इस्लामी समेत 30 से ज्यादा पंजीकृत राजनीतिक दलों ने कोई भी महिला उम्मीदवार चुनावी मैदान में नहीं उतारा है. 13वें संसदीय चुनाव में सभी उम्मीदवारों में महिलाओं की संख्या 4.5% से भी कम रह गई. यह आंकड़ा बेहद चिंताजनक है.

ढाई हजार नामांकन में सिर्फ 109 महिलाओं ने भरा चुनावी पर्चा

चुनाव के लिए जमा किए गए 2,568 नामांकन में सिर्फ 109 महिलाओं ने अपना नॉमिनेशन दाखिल किया है. बांग्लादेशी मीडिया के रिव्यू किए गए डेटा के मुताबिक, 2,568 नामांकन में महिलाओं की संख्या सिर्फ 4.24 प्रतिशत है. हाल ही में इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) ने बताया कि आने वाले आम चुनाव में हिस्सा ले रही 51 राजनीतिक दलों में से 30 ने एक भी महिला उम्मीदवार को प्रतिनिधि नहीं बनाया है.

बांग्लादेश जमात ए इस्लामी ने एक भी महिला को नहीं दिया टिकट

रिपोर्ट में बताया गया है कि बांग्लादेश की एक बड़ी पार्टी, बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी ने जिन सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है, उन सीटों पर कोई महिला उम्मीदवार नहीं उतारा. स्क्रूटनी के दौरान, कई महिला उम्मीदवारों ने अपनी उम्मीदवारी खो दी। 37 निर्दलीय महिला उम्मीदवारों में से, सिर्फ छह के नॉमिनेशन वैद्य घोषित किए गए. जिन सीटों पर महिला उम्मीदवारों का नॉमिनेशन वैद्य बताया गया है, उनमें सबीना यास्मीन (नटोरे-2), डॉ. तस्नीम जारा (ढाका-9), मेहरजान आरा तालुकदार (जमालपुर-4), अख्तर सुल्ताना (मैमनसिंह-6), तहमीना जमान (नेत्रकोना-4), और रूमीन फरहाना (ब्राह्मणबरिया-2) शामिल हैं.

जमात-ए-इस्लामी से 276 उम्मीदवार, इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश से 268, जातीय पार्टी से 224, गण अधिकार परिषद से 104, बांग्लादेश खिलाफत मजलिस से 94, और दूसरी छोटी पार्टियों में, जिनमें से हर एक में 40 से कम उम्मीदवार हैं, लेकिन इनमें कोई महिला उम्मीदवार नहीं है. फोरम लीडर समीना यास्मीन ने इस संबंध में कहा, ‘अगर महिलाएं 51 फीसदी वोटर हैं, तो हमारा अगला जरूरी काम महिलाओं के अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाना, उन्हें ऑर्गनाइज करना और उनकी सक्रिय राजनीतिक हिस्सेदारी पक्का करना है. क्या 51 फीसदी आबादी को बाहर करके और बाकी 49 फीसदी पर भरोसा करके सत्ता में आना सही है? यह एक जरूरी सवाल है.’

महिलाओं, मानवाधिकार और विकास से जुड़े संगठनों ने जताई हैरानी

महिलाओं, मानवाधिकार और विकास के मुद्दों पर काम करने वाले 71 संगठनों के एक प्लेटफॉर्म, सोशल रेजिस्टेंस कमेटी, ने आने वाले चुनाव में महिला उम्मीदवारों की कम संख्या पर चिंता जताते हुए कहा कि समाज में मौजूद औरतों से नफरत करने वाली संस्कृति को देखते हुए, महिलाएं निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने में हिचकिचा रही हैं. महिलाओं की सियासत में भागीदारी कम होने की वजह वहां पर पुरुष-प्रधान राजनीतिक कल्चर की झलक और पुरुषों के दबदबे वाली राजनीति, पुरुष-प्रधान समाज वाली विचारधारा को बनाए रखने की नीति है.

Sports News:भारत के सामने न्यूजीलैंड का पहाड़ जैसा स्कोर भी बौना साबित हुआ, टीम इंडिया ने 15.2 ओवर में 209 रन आसानी से चेज कर लिए।

भारत ने न्यूजीलैंड को 7 विकेट से हराकर दूसरा टी20 मैच जीत लिया है. इसी के साथ टीम इंडिया ने पांच मैचों की सीरीज में 2-0 की बढ़त बना ली है. रायपुर में खेले गए इस मैच में न्यूजीलैंड ने पहले खेलते हुए 208 रन बनाए थे. जवाब में भारतीय टीम ने 15.2 ओवरों में ही यह पहाड़ सा लक्ष्य हासिल कर लिया. भारत ने टी20 क्रिकेट इतिहास में 200 या उससे ज्यादा टारगेट को सबसे तेज हासिल करने का रिकॉर्ड भी बना लिया है.

कप्तान सूर्यकुमार ने 24 पारियों के बाद लगाई फिफ्टी

भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव के लिए यह मैच यादगार रहा, क्योंकि 24 पारियों के बाद उनके बल्ले से अर्धशतक निकला है. उन्होंने 37 गेंद में नाबाद 82 रनों की पारी खेली. इस पारी में उन्होंने 9 चौके और 4 छक्के लगाए. इससे पहले सूर्यकुमार यादव के बल्ले से आखिरी अर्धशतक अक्टूबर 2024 में बांग्लादेश के खिलाफ लगाया था. उस मैच में उन्होंने 75 रनों की पारी खेली थी.

टीम इंडिया ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

भारतीय टीम ने 28 गेंद शेष रहते दूसरा टी20 मैच जीता है. भारत ने अंतर्राष्ट्रीय टी20 क्रिकेट इतिहास में 200 से ज्यादा रनों के टारगेट को सबसे तेज चेज करने का रिकॉर्ड बनाया है. इससे पहले 200+ रनों के लक्ष्य को सबसे तेज चेज करने का रिकॉर्ड पाकिस्तान के नाम था, जिसने 24 गेंद शेष रहते कीवी टीम को हरा दिया था.

ईशान किशन की आंधी

इस मैच में भारत के दोनों ओपनिंग बल्लेबाज नहीं चल पाए. संजू सैमसन केवल 6 रन बना पाए, वहीं अभिषेक शर्मा तो खाता तक नहीं खोल पाए. मगर ईशान किशन ने बल्ले से खूब रंग जमाया. उन्होंने 32 गेंदों में 237.50 के तूफानी स्ट्राइक रेट से 76 रन बनाए. ये किशन के अंतर्राष्ट्रीय टी20 करियर की सातवीं और न्यूजीलैंड के खिलाफ पहली फिफ्टी रही.

ईशान किशन और सूर्यकुमार यादव के अलावा शिवम दुबे ने 18 गेंद में 36 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेल टीम इंडिया की जीत में बड़ा योगदान दिया. न्यूजीलैंड के गेंदबाज जकारी फाउल्क्स की बात करें तो उन्होंने 3 ओवरों में ही 67 रन लुटा दिए.

ताइवान को लेकर चीन बड़े और खतरनाक ऑपरेशन की योजना बना सकता है, नई रिपोर्ट ने अमेरिका की टेंशन बढ़ा दी।

जिस तरीके से अमेरिका ने वेनेजुएला और ग्रीनलैंड पर अपनी नजर बना रखी है, उसी तरह से चीन की नजर ताइवान पर है. चीन ताइवान पर जबरन अपना अधिकार जमाता है. हालांकि, ताइवान खुद को एक अलग स्वतंत्र देश मानता है. अमेरिका ने जिस तरह से वेनेजुएला के खिलाफ कार्रवाई की, तब से आकलन लगाए जा रहे थे कि चीन भी ताइवान के साथ ऐसा कर सकता है. इसे लेकर ग्लोबल ताइवान इंस्टीट्यूट (जीटीआई) के डायरेक्टर जॉन डॉटसन ने चेतावनी दी है कि पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ताइवान के आसपास ज्यादा आक्रामक और बड़े ऑपरेशन कर सकती है.

रिपोर्ट ने बढ़ाई ताइवान की टेंशन

स्थानीय मीडिया के अनुसार, पीएलए 2027 तक ताइवान पर कब्जा करने की क्षमता हासिल कर लेगी. ताइवान के डेली अखबार ताइपे टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जीटीआई की एक सीनियर नॉन-रेसिडेंट फेलो, एन कोवालेवस्की ने कहा कि 2026 चीन की पीएलए के लिए इस क्षमता तक पहुंचने का आखिरी साल है. जीटीआई ने वॉशिंगटन में ‘2026 में ताइवान पॉलिसी के लिए आगे की सोच’ शीर्षक वाले एक पैनल डिस्कशन का आयोजन किया था. जीटीआई ने 2025 में ताइवान के खिलाफ चीन के बढ़ते दबाव को रेखांकित किया है, जिसमें पीएलए की ‘जस्टिस मिशन 2025’ सैन्य अभ्यास भी शामिल है. विश्लेषकों ने जोर देकर कहा कि 2027 क्रॉस-स्ट्रेट संबंधों में एक निर्णायक मोड़ ला सकता है.

उन्होंने याद दिलाया कि 2021 में तत्कालीन अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड प्रमुख एडमिरल फिलिप डेविडसन ने चेतावनी दी थी कि शी जिनपिंग ने पीएलए को 2027 तक ताइवान पर संभावित हमले के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया था. कोवालेवस्की ने कहा कि काफी पॉलिटिकल एनालिसिस से पता चलता है कि वे अभी पूरी तरह से वहां नहीं पहुंचे हैं.

‘PRC की सैन्य क्षमता में दिख सकती है बढ़ोतरी’

उन्होंने कहा, ‘इस साल हम पीआरसी की सैन्य क्षमता में भारी बढ़ोतरी देख सकते हैं. यह साफ नहीं है कि ताइवान और अमेरिका अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ा सकते हैं या यह पक्का करने के लिए अनोखे तरीके सोच सकते हैं कि वे एक स्थिर इलाके में पावर बैलेंस को बिना किसी भेदभाव के बनाए रख सकें.’

डॉटसन ने कहा कि अप्रैल और दिसंबर में पीएलए का सैन्य अभ्यास ताइवान के दक्षिण और दक्षिण-पूर्व में मुख्य द्वीप के पास हुई थीं और इसमें चीनी कोस्ट गार्ड का ज्यादा आक्रामक इस्तेमाल किया गया था. उन्होंने कहा कि कोस्ट गार्ड को तैनात करना चीन के नैरेटिव को पूरा करता है. चीन को सैन्य घुसपैठ के बजाय कानून लागू करने वाली गश्त के तौर पर सही ठहराया जा सकता है.

जीटीआई के डायरेक्टर ने कहा कि चीन अक्सर अपनी सैन्य अभ्यासों के लिए एक तरह का नैरेटिव जस्टिफिकेशन पेश करता है. उदाहरण के तौर पर, मार्च में हुई चीनी घुसपैठ को लेकर अपनाई गई नीति के लिए ताइवान के राष्ट्रपति विलियम लाई को जिम्मेदार ठहराया गया, जबकि पिछले साल दिसंबर में अमेरिका द्वारा ताइवान को हथियारों की बिक्री के पैकेज को भी ऐसे ही अभ्यासों का कारण बताया गया. यह जानकारी ताइपे टाइम्स की रिपोर्ट में सामने आई है.

‘बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यासों की योजना पहले तैयार की जाती है’

जीटीआई डायरेक्टर ने इन दावों पर संदेह जताते हुए कहा कि इतने बड़े पैमाने पर होने वाले सैन्य अभ्यासों की योजना काफी पहले से तैयार की जाती है, न कि किसी तात्कालिक घटना के जवाब में. वहीं, इसी महीने की शुरुआत में ताइवान के नेशनल सिक्योरिटी ब्यूरो ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) पर आरोप लगाया कि उसने ताइवान के आसपास सैन्य ड्रिल की, साइबर हमले किए, 19,000 से ज्यादा विवादित संदेश फैलाए और लाखों हैकिंग प्रयास किए.

ताइवान के डेली अखबार ताइपे टाइम्स ने बताया कि ये गतिविधियां ताइवान पर दबाव बढ़ाने की चीन की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं. लेजिस्लेटिव युआन को दी गई एक रिपोर्ट में, एजेंसी ने कहा कि ऑनलाइन एक्टिविटी में 799 अजीब अकाउंट शामिल थे और यह अमेरिका, ताइवान के प्रेसिडेंट विलियम लाई और मिलिट्री के बारे में बढ़ते संदेह पर केंद्रित था। इसमें ताइवान की खुद को बचाने की काबिलियत को लेकर चिंता का जिक्र था.